मुख्य सामग्री पर जाएं

उपसर्ग की पहचान

सूची याद कर लेना आधा काम है। असली प्रश्न यह होता है कि दिए गए शब्द में उपसर्ग है भी या नहीं — क्योंकि कई शब्दों की शुरुआत उपसर्ग जैसी दिखती है पर होती नहीं। यहाँ तीन सवालों का वह तरीक़ा है जिससे फ़ैसला हो जाता है, धोखा देने वाले शब्दों की तालिका, और उपसर्ग तथा प्रत्यय का अंतर।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

उपसर्ग है या शब्द का अपना अक्षर? — पहचानने का तरीक़ा

यह इस अध्याय का सबसे ज़रूरी हिस्सा है, क्योंकि परीक्षा में सबसे ज़्यादा गलती यहीं होती है। ‘अनार’ के शुरू में ‘अन’ दिख रहा है, तो क्या इसमें ‘अन’ उपसर्ग है? नहीं। ‘सुबह’ के शुरू में ‘सु’ है, तो क्या ‘सु’ उपसर्ग है? बिलकुल नहीं। ‘कमल’ में ‘कम’, ‘बेटा’ में ‘बे’, ‘निशान’ में ‘नि’ — ये सब धोखा देने वाले शब्द हैं। इनमें शुरू का अक्षर शब्द का अपना हिस्सा है, अलग से जोड़ा हुआ उपसर्ग नहीं।

पहचान के लिए तीन सवाल पूछिए, और तीनों का जवाब ‘हाँ’ आए तभी उसे उपसर्ग मानिए। पहला सवाल — शुरू का हिस्सा हटाने पर जो बचा, क्या वह अपने आप में कोई सार्थक शब्द या धातु है? ‘अनपढ़’ में से ‘अन’ हटाइए तो ‘पढ़’ बचता है, जो सार्थक है। ‘अनार’ में से ‘अन’ हटाइए तो ‘आर’ बचता है, जिसका इस संदर्भ में कोई अर्थ नहीं। इसलिए ‘अनपढ़’ में उपसर्ग है, ‘अनार’ में नहीं।

दूसरा सवाल — क्या जुड़ने के बाद अर्थ में वैसा ही बदलाव आया है जैसा उस उपसर्ग से अपेक्षित है? ‘अन’ का अर्थ है ‘नहीं’। ‘अनपढ़’ का अर्थ सचमुच ‘जो पढ़ा न हो’ निकलता है — मतलब मेल खा गया। ‘अनार’ का अर्थ ‘जो आर न हो’ नहीं होता — मेल नहीं खाया। तीसरा सवाल — क्या वही हिस्सा उसी अर्थ में दूसरे शब्दों के आगे भी लगता है? ‘अन’ अनमोल, अनजान, अनसुना में भी उसी अर्थ में लगता है, इसलिए वह सचमुच उपसर्ग है।

धोखा देने वाले शब्द — कहाँ उपसर्ग है और कहाँ नहीं

दिखने में जैसाउपसर्ग वाला शब्दविग्रहउपसर्ग रहित शब्दकारण
‘अन’ से शुरूअनपढ़अन + पढ़अनार‘आर’ कोई सार्थक शब्द नहीं
‘अनु’ से शुरूअनुजअनु + जअनाज‘अन’ हटाने पर ‘आज’ बचता है, जो यहाँ निरर्थक है
‘सु’ से शुरूसुगमसु + गमसुबह‘बह’ का यहाँ कोई अर्थ नहीं
‘नि’ से शुरूनिबंधनि + बंधनिशान‘शान’ जोड़ने से अर्थ नहीं बनता
‘कम’ से शुरूकमजोरकम + जोरकमल‘ल’ कोई शब्द नहीं
‘बे’ से शुरूबेकारबे + कारबेटा‘टा’ का कोई अर्थ नहीं
‘उप’ से शुरूउपवनउप + वनउपला‘ला’ से अर्थ नहीं बनता
‘प्र’ से शुरूप्रकाशप्र + काशप्रेम‘एम’ कोई शब्द नहीं
‘आ’ से शुरूआगमनआ + गमनआमहटाने पर ‘म’ बचता है, निरर्थक
‘परि’ से शुरूपरिवारपरि + वारपरिंदा‘इंदा’ स्वतंत्र शब्द नहीं

तीन सवाल, एक फ़ैसला

एक — हटाने पर बचा हिस्सा सार्थक है? दो — अर्थ में उपसर्ग वाला बदलाव आया? तीन — वही हिस्सा दूसरे शब्दों में भी उसी अर्थ में लगता है? तीनों का उत्तर हाँ, तभी उपसर्ग। एक भी ना, तो वह शब्द का अपना अक्षर है।

एक शब्द में दो या तीन उपसर्ग

कई बार एक ही शब्द के आगे एक से ज़्यादा उपसर्ग लग जाते हैं, और तब अर्थ दो बार मुड़ता है। ‘उपकार’ में ‘उप’ लगा है, पर उसके आगे ‘प्रति’ लगा दीजिए तो ‘प्रत्युपकार’ बन जाता है — यानी किए गए उपकार के बदले किया गया उपकार। इसी तरह ‘आचार’ के आगे ‘अति’ लगाकर ‘अत्याचार’ बनता है, और ‘सिद्ध’ के आगे पहले ‘प्र’ और फिर ‘सु’ लगाकर ‘सुप्रसिद्ध’। परीक्षा में ऐसे शब्द इसलिए पूछे जाते हैं क्योंकि यहाँ ध्यान से देखना पड़ता है कि अलग कहाँ-कहाँ करना है।

दो उपसर्ग वाले शब्द

  • प्रत्युपकारप्रति + उप + कार
  • अत्याचारअति + आ + चार
  • समाचारसम् + आ + चार
  • व्याकरणवि + आ + करण
  • समालोचनासम् + आ + लोचना
  • निराकरणनिर् + आ + करण
  • सुप्रसिद्धसु + प्र + सिद्ध
  • अनुपस्थितअन् + उप + स्थित
  • अविश्वासअ + वि + श्वास
  • अनधिकारअन् + अधि + कार
  • सुसंस्कृतसु + सम् + कृत
  • निराहारनिर् + आ + हार
  • अनाचारअन् + आ + चार
  • प्रत्यावर्तनप्रति + आ + वर्तन
  • असंतोषअ + सम् + तोष
  • निर्विवादनिर् + वि + वाद

उपसर्ग और प्रत्यय का अंतर

दोनों शब्दांश हैं, दोनों अकेले निरर्थक हैं, और दोनों नए शब्द बनाते हैं — फिर फ़र्क़ क्या है? सिर्फ़ जगह का। उपसर्ग शब्द के आगे लगता है, प्रत्यय पीछे। ‘मान’ के आगे ‘अप’ लगाइए तो ‘अपमान’, और ‘मान’ के पीछे ‘अनीय’ लगाइए तो ‘माननीय’। कई शब्दों में तो दोनों एक साथ लगे होते हैं — ‘अपमानित’ में आगे ‘अप’ उपसर्ग है और पीछे ‘इत’ प्रत्यय। परीक्षा में ऐसे शब्द देकर पूछा जाता है कि इसमें कितने और कौन-कौन से शब्दांश लगे हैं।

उपसर्ग बनाम प्रत्यय

उपसर्ग

कहाँ लगता हैशब्द के आगे

मुख्य कामअर्थ बदलना

शब्द-भेदप्रायः नहीं बदलता

उदाहरणअप + मान = अपमान

दोनों साथअप + मान + इत = अपमानित

प्रत्यय

कहाँ लगता हैशब्द के पीछे

मुख्य कामअर्थ बदलना तथा शब्द-भेद बदलना

शब्द-भेदअक्सर बदल जाता है — क्रिया से संज्ञा आदि

उदाहरणमान + नीय = माननीय

दोनों साथ—

जिन शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हैं

  • अपमानितअप + मान + इत
  • अनुशासितअनु + शास + इत
  • सुशासनसु + शास + अन
  • प्रचारकप्र + चार + अक
  • विकासशीलवि + कास + शील
  • निरक्षरतानिर् + अक्षर + ता
  • बेईमानीबे + ईमान + ई
  • बदनामीबद + नाम + ई
  • लापरवाहीला + परवाह + ई
  • अनपढ़ताअन + पढ़ + ता

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में से किस शब्द में उपसर्ग नहीं है?

  1. Aअनपढ़
  2. Bअनार
  3. Cअनमोल
  4. Dअनजान

व्याख्या

उपसर्ग तभी माना जाता है जब उसे हटाने पर बचा हुआ भाग अपने आप में सार्थक हो। ‘अनार’ में से ‘अन’ हटाने पर ‘आर’ बचता है जो कोई शब्द नहीं, जबकि बाकी तीनों में पढ़, मोल और जान सार्थक शब्द हैं।

प्रश्न 2

'अत्याचार' शब्द में कितने उपसर्ग लगे हैं?

  1. Aएक
  2. Bतीन
  3. Cदो
  4. Dएक भी नहीं

व्याख्या

इसका विग्रह अति + आ + चार है, यानी ‘अति’ और ‘आ’ दो उपसर्ग मूल शब्द ‘चार’ के आगे लगे हैं। ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘या’ बन जाने से ‘अत्या’ रूप दिखता है।

प्रश्न 3

'अपमानित' शब्द के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. Aइसमें केवल उपसर्ग लगा है
  2. Bइसमें केवल प्रत्यय लगा है
  3. Cइसमें कोई शब्दांश नहीं लगा
  4. Dइसमें उपसर्ग और प्रत्यय दोनों लगे हैं

व्याख्या

इसका विग्रह अप + मान + इत है। ‘अप’ शब्द के आगे लगा है इसलिए उपसर्ग है, और ‘इत’ शब्द के पीछे लगा है इसलिए प्रत्यय है। जो आगे लगे वह उपसर्ग, जो पीछे लगे वह प्रत्यय।

प्रश्न 4

'व्याकरण' शब्द में कौन-कौन से उपसर्ग लगे हैं?

  1. Aवि + आ
  2. Bकेवल वि
  3. Cकेवल आ
  4. Dव्या

व्याख्या

इसका विग्रह वि + आ + करण है, यानी दो उपसर्ग एक साथ लगे हैं। ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘या’ बन जाता है, जिससे ‘व्या’ रूप दिखाई देता है।