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Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

उपसर्ग: परिभाषा, भेद, सूची और पहचान — Patwari नोट्स

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इस पेज पर उपसर्ग की परिभाषा, उसके स्रोत-आधारित भेद, संस्कृत-हिंदी-उर्दू उपसर्गों की सूची और संधि से छिपे उपसर्ग पहचानने की विधि दी गई है। यह टॉपिक हिंदी व्याकरण में सबसे अधिक अंक देने वाले टॉपिकों में से एक माना जाता है।

  • कक्षा 1–8 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें

उपसर्ग क्या है?

उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विशेषता या विपरीतता ला देते हैं। 'उपसर्ग' स्वयं उप + सृज् (जोड़ना/रचना) से बना है — अर्थात् जो पास आकर नया शब्द रचे। जैसे — हार में 'प्र' जुड़कर प्रहार (चोट), 'वि' जुड़कर विहार (भ्रमण), 'आ' जुड़कर आहार (भोजन) और 'सम्' जुड़कर संहार (विनाश) बनता है। मूल शब्द एक है, पर उपसर्ग बदलते ही अर्थ बदल गया।

उपसर्ग की तीन विशेषताएँ परीक्षा में काम आती हैं: (1) उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता, वह सदा किसी शब्द से पहले जुड़कर ही अर्थ देता है; (2) वह शब्द के आरंभ में लगता है, जबकि प्रत्यय अंत में; (3) एक शब्द में एक से अधिक उपसर्ग भी हो सकते हैं — जैसे प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।

उपसर्ग लगने से शब्द के अर्थ पर तीन तरह का प्रभाव पड़ता है — अर्थ बिल्कुल बदल जाना (हार → प्रहार), अर्थ में विशेषता आना (बल → प्रबल, ज्ञान → विज्ञान) या अर्थ उलट जाना (मान → अपमान, यश → अपयश)। कुछ शब्दों में अर्थ लगभग वैसा ही रहता है, जैसे — शुद्ध → विशुद्ध।

संस्कृत (तत्सम) उपसर्ग — अर्थ और उदाहरण

उपसर्गअर्थउदाहरण
अतिअधिक, परेअत्यंत, अतिरिक्त, अत्याचार, अतिक्रमण
अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अध्यक्ष, अधिनियम, अध्ययन
अनुपीछे, समानअनुकरण, अनुज, अनुसार, अन्वय
अपबुरा, विपरीतअपमान, अपयश, अपव्यय, अपशब्द
अभिसामने, पासअभिमान, अभिनय, अभ्यास, अभिषेक
अवनीचे, हीनअवगुण, अवनति, अवतार, अवशेष
आतक, समेतआजन्म, आगमन, आरक्षण, आजीवन
उत् / उद्ऊपर, श्रेष्ठउत्थान, उत्कर्ष, उद्गम, उद्धार
उपनिकट, सहायक, गौणउपवन, उपकार, उपनाम, उपमंत्री
दुर् / दुस्बुरा, कठिनदुर्जन, दुर्गम, दुष्कर, दुस्साहस
निनीचे, निषेधनिबंध, नियुक्त, निवास, निपात
निर् / निस्बिना, बाहरनिर्धन, निराकार, निश्चल, निष्फल
पराउलटा, पीछेपराजय, पराभव, पराक्रम
परिचारों ओर, पूर्णपरिश्रम, परिक्रमा, परिवार, पर्याप्त
प्रआगे, अधिकप्रकृति, प्रबल, प्रयोग, प्रस्थान
प्रतिप्रत्येक, विरुद्धप्रत्येक, प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्युत्तर
विविशेष, भिन्नविज्ञान, विदेश, वियोग, व्यर्थ
सम्अच्छी तरह, साथसंगम, संतोष, समाचार, समन्वित
सुअच्छा, सरलसुगम, सुपुत्र, स्वागत, सुलभ

परंपरा में संस्कृत उपसर्ग 22 माने जाते हैं: दुर्/दुस् और निर्/निस् को अलग-अलग गिनने तथा 'अपि' (जिसका 'अ' लुप्त होकर प्रायः 'पि' रूप मिलता है, जैसे पिधान) जोड़ने पर यह संख्या 22 होती है।

हिंदी, उर्दू-फ़ारसी और अंग्रेज़ी के उपसर्ग

स्रोतउपसर्ग (अर्थ)उदाहरण
हिंदी (तद्भव)अ / अन (नहीं)अछूता, अजान, अनबन, अनपढ़
हिंदी (तद्भव)अध (आधा)अधमरा, अधपका, अधखिला
हिंदी (तद्भव)उन (एक कम)उनतीस, उनचास, उन्नीस
हिंदी (तद्भव)क / कु (बुरा)कपूत, कुचाल, कुढंग
हिंदी (तद्भव)दु (बुरा, दो)दुबला, दुकाल, दुलत्ती
हिंदी (तद्भव)नि (रहित)निडर, निकम्मा, निहत्था
हिंदी (तद्भव)बिन (बिना)बिनबोले, बिनब्याहा, बिनखाया
हिंदी (तद्भव)भर (पूरा)भरपेट, भरपूर, भरसक
हिंदी (तद्भव)स / सु (सहित, अच्छा)सपूत, सजग, सुडौल
उर्दू-फ़ारसीकम (थोड़ा)कमज़ोर, कमसिन, कमबख़्त
उर्दू-फ़ारसीग़ैर (भिन्न, नहीं)ग़ैरहाज़िर, ग़ैरक़ानूनी, ग़ैरसरकारी
उर्दू-फ़ारसीना (नहीं)नालायक, नापसंद, नासमझ
उर्दू-फ़ारसीबद (बुरा)बदनाम, बदबू, बदतमीज़
उर्दू-फ़ारसीबे (बिना)बेईमान, बेचारा, बेकार
उर्दू-फ़ारसीला (बिना)लापरवाह, लाजवाब, लावारिस
उर्दू-फ़ारसीहर (प्रत्येक)हरदिन, हरएक, हरसाल
अंग्रेज़ीसब, हेड, वाइस, हाफ़सब-इंस्पेक्टर, हेडमास्टर, वाइस-चांसलर, हाफ़-टिकट

हिंदी में कुछ संस्कृत अव्यय भी उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होते हैं — जैसे अंतर् (अंतर्राष्ट्रीय), पुनर् (पुनर्जन्म), सह (सहपाठी), स्व (स्वतंत्र), चिर (चिरकाल), बहिर् (बहिष्कार)।

संधि में छिपे उपसर्ग कैसे पहचानें

परीक्षाओं में अक्सर इसी जगह उम्मीदवार उलझते हैं। जब उपसर्ग के अंत का वर्ण मूल शब्द के पहले स्वर से मिलता है, तो संधि हो जाती है और उपसर्ग का रूप बदल जाता है। नियम है: पहले पूरे शब्द का संधि-विच्छेद करें, फिर देखें कि पहला खंड मानक उपसर्ग सूची में है या नहीं।

यण् संधि वाले उदाहरण: प्रति + एक = प्रत्येक (उपसर्ग 'प्रति', न कि 'प्रत्'), परि + आप्त = पर्याप्त (उपसर्ग 'परि', न कि 'पर्य'), अति + अंत = अत्यंत, अनु + अय = अन्वय, वि + अर्थ = व्यर्थ, सु + आगत = स्वागत। व्यंजन संधि वाले उदाहरण: सम् + अन्वित = समन्वित, सम् + आचार = समाचार, सम् + गम = संगम, उत् + लास = उल्लास, दुर् + गम = दुर्गम, निस् + फल = निष्फल।

दूसरा जाल है ऐसे शब्द जिनका आरंभ उपसर्ग जैसा दिखता है पर होता नहीं। उदाहरण के लिए 'प्र' उपसर्ग वाले शब्द के विकल्पों में प्राचीन, प्रथा, प्रकृति और प्रत्येक जैसे शब्द दिए जा सकते हैं; इनमें से सही उत्तर 'प्रकृति' (प्र + कृति) होगा। 'प्रथा' में 'प्र' हटाने पर 'था' कोई सार्थक मूल शब्द नहीं बचता, और प्रत्येक में उपसर्ग 'प्रति' है। इसी तरह 'सभ्यता' (सभ्य + ता) और 'रहस्य' में कोई उपसर्ग नहीं है, और 'पूर्वाग्रह' (पूर्व + आग्रह) सामासिक/संधि-युक्त शब्द है; इसमें 'पूर्व' मानक उपसर्ग सूची में नहीं है।

उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

आधारउपसर्गप्रत्यय
स्थानशब्द के आरंभ मेंशब्द के अंत में
प्रभावप्रायः अर्थ बदलता हैप्रायः शब्द-भेद/रूप बदलता है (संज्ञा से विशेषण आदि)
उदाहरणअ + ज्ञान = अज्ञानज्ञान + ई = ज्ञानी
संयुक्त प्रयोगवि + ज्ञान + इक = वैज्ञानिक — एक ही शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैंसु + गंध + इत = सुगंधित

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'विच्छेद पहले, उत्तर बाद में': विकल्पों में 'प्रत्', 'पर्य', 'समन्' जैसे आधे-अधूरे रूप दिखें तो सावधान हो जाएँ — ये संधि के बदले रूप हैं। उपसर्ग सदा पूरा मानक रूप होता है: प्रति, परि, सम्। जैसे 'समन्वित' में उपसर्ग 'समन्' नहीं, 'सम्' है (सम् + अन्वित)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत के कितने उपसर्ग होते हैं?+

परंपरा के अनुसार संस्कृत के 22 उपसर्ग हैं — प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि और उप।

'प्रत्येक' में उपसर्ग कौन-सा है?+

'प्रत्येक' = प्रति + एक। यहाँ उपसर्ग 'प्रति' है; यण् संधि के कारण 'इ' का 'य्' हो जाता है।

क्या एक शब्द में दो उपसर्ग हो सकते हैं?+

हाँ। जैसे — प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।

उपसर्ग और प्रत्यय में मुख्य अंतर क्या है?+

उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगकर अर्थ बदलता है (मान → अपमान), जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है (मान → मानी)।

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आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT पाठ्यपुस्तकें — हिंदी (वसंत, दूर्वा आदि) एवं व्याकरण अभ्यास
  2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय — देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण