निस्–निर् और दुस्–दुर्
यही वह जगह है जहाँ उपसर्ग के प्रश्नों में सबसे ज़्यादा अंक कटते हैं। निस् और निर्, दुस् और दुर् — ये अलग उपसर्ग नहीं, एक ही उपसर्ग के दो रूप हैं, और कौन-सा रूप बनेगा यह आगे आने वाले अक्षर से तय होता है। नियम एक बार साफ़ हो जाए तो ये प्रश्न कभी नहीं छूटते।
निस्–निर् और दुस्–दुर् — यहीं सबसे ज़्यादा गलती होती है
बाईस उपसर्गों में चार ऐसे हैं जो जोड़े में आते हैं और छात्रों को सबसे ज़्यादा उलझाते हैं — निस् और निर्, दुस् और दुर्। असल में ये चार अलग-अलग उपसर्ग नहीं, बल्कि दो ही उपसर्ग हैं जिनके अंत में विसर्ग था — निः और दुः। आगे कौन-सा वर्ण आ रहा है, इसी के हिसाब से विसर्ग कभी ‘स्’ जैसा हो जाता है, कभी ‘र्’ जैसा, और कभी ‘ष्’ बन जाता है। इसी को विसर्ग संधि कहते हैं।
नियम सीधा है। अगर उपसर्ग के बाद क, ख, प, फ आए तो विसर्ग ‘ष्’ हो जाता है — निष्कर्ष, निष्फल, दुष्कर, दुष्परिणाम। अगर बाद में च या छ आए तो विसर्ग ‘श्’ बन जाता है — निश्चय, निश्चल, दुश्चरित्र। अगर बाद में त, थ, स आए तो विसर्ग ‘स्’ ही रहता है — निस्तार, दुस्तर, दुस्साहस। और अगर बाद में कोई स्वर या कोई घोष व्यंजन आए — जैसे ग, ज, द, ब, न, म, य, र, ल, व — तो विसर्ग ‘र्’ हो जाता है, यानी निर् और दुर् रूप बनते हैं — निर्धन, निर्भय, निर्जन, दुर्गम, दुर्जन, दुर्बल।
याद रखने का एक सरल सूत्र यह है — कठोर वर्ण सामने हो तो निस्/दुस् परिवार, कोमल वर्ण या स्वर सामने हो तो निर्/दुर् परिवार। अर्थ दोनों का लगभग एक ही रहता है — निस्/निर् का अर्थ है बिना या रहित, और दुस्/दुर् का अर्थ है बुरा या कठिन। इसलिए परीक्षा में अगर पूछा जाए कि ‘निष्कलंक’ में कौन-सा उपसर्ग है, तो उत्तर ‘निस्’ होगा, ‘निष्’ नहीं — क्योंकि ‘निष्’ तो केवल संधि के बाद बना रूप है।
निस्/निर् और दुस्/दुर् — कब कौन-सा रूप बनता है
| आगे आने वाला वर्ण | निस् का रूप | उदाहरण | दुस् का रूप | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| क, ख, प, फ | निष् | निष्कर्ष, निष्फल | दुष् | दुष्कर, दुष्परिणाम |
| च, छ | निश् | निश्चय, निश्चल | दुश् | दुश्चरित्र, दुश्चक्र |
| त, थ, स | निस् (अपरिवर्तित) | निस्तार, निस्संदेह | दुस् | दुस्तर, दुस्साहस |
| स्वर तथा घोष व्यंजन (ग, ज, द, ब, न, म, य, र, ल, व) | निर् | निर्धन, निराशा | दुर् | दुर्गम, दुराचार |
निस् / निर् से बने शब्द
- निश्चयनिस् + चय‘च’ से पहले विसर्ग ‘श्’ हो गया
- निश्चलनिस् + चल
- निष्कर्षनिस् + कर्ष‘क’ से पहले विसर्ग ‘ष्’ हो गया
- निष्फलनिस् + फल
- निष्पापनिस् + पाप
- निष्कलंकनिस् + कलंक
- निस्तारनिस् + तार‘त’ से पहले ‘स्’ ज्यों का त्यों रहा
- निस्संदेहनिस् + संदेह
- निस्तेजनिस् + तेज
- निर्धननिर् + धन
- निर्भयनिर् + भय
- निर्जननिर् + जन
- निर्मलनिर् + मल
- निर्दोषनिर् + दोष
- निर्वाहनिर् + वाह
- निर्माणनिर् + मान
- निर्यातनिर् + यात
- निराशानिर् + आशास्वर से पहले ‘र्’ जुड़कर ‘रा’ बन गया
- निरादरनिर् + आदर
- निरंतरनिर् + अंतर
- निरोगनिर् + रोग‘र्’ के बाद ‘र’ आने से एक ‘र’ लुप्त हो गया
दुस् / दुर् से बने शब्द
- दुष्करदुस् + कर‘क’ से पहले विसर्ग ‘ष्’ हो गया
- दुष्कर्मदुस् + कर्म
- दुष्परिणामदुस् + परिणाम
- दुश्चरित्रदुस् + चरित्र‘च’ से पहले विसर्ग ‘श्’ हो गया
- दुस्साहसदुस् + साहस
- दुस्तरदुस् + तर
- दुर्गमदुर् + गम
- दुर्जनदुर् + जन
- दुर्बलदुर् + बल
- दुर्दशादुर् + दशा
- दुर्गुणदुर् + गुण
- दुर्लभदुर् + लभ
- दुर्भाग्यदुर् + भाग्य
- दुर्व्यवहारदुर् + व्यवहार
- दुराचारदुर् + आचारस्वर से पहले ‘र्’ जुड़कर ‘रा’ बन गया
- दुरुपयोगदुर् + उपयोग
उत्तर में मूल रूप लिखिए
अगर प्रश्न में ‘निष्कर्ष’ दिया है तो उत्तर ‘निस्’ लिखिए, ‘निष्’ नहीं। इसी तरह ‘दुश्चरित्र’ का उपसर्ग ‘दुस्’ है, ‘दुश्’ नहीं। ‘निष्’, ‘निश्’, ‘दुष्’, ‘दुश्’ — ये चारों संधि के बाद बने रूप हैं, स्वतंत्र उपसर्ग नहीं। विकल्पों में अगर दोनों दिए हों तो मूल रूप ही सही उत्तर होता है।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'निष्पाप' शब्द में प्रयुक्त मूल उपसर्ग कौन सा है?
- Aनिष्
- Bनिस्
- Cनिर्
- Dनि
व्याख्या
विसर्ग संधि का नियम है कि ‘निः’ के बाद क, ख, प या फ आने पर विसर्ग ‘ष्’ में बदल जाता है। ‘पाप’ का ‘प’ सामने होने से ‘निस्’ का रूप ‘निष्’ हो गया। उत्तर में संधि के बाद बना रूप नहीं, मूल उपसर्ग लिखा जाता है।
प्रश्न 2
'दुर्गम' में कौन सा उपसर्ग है?
- Aदुस्
- Bदु
- Cदुर्
- Dदूर
व्याख्या
‘ग’ घोष व्यंजन है, और घोष व्यंजन या स्वर से पहले ‘दुः’ का विसर्ग ‘र्’ में बदलता है। इसी नियम से यहाँ ‘दुर्’ रूप बनता है। ‘दुस्’ रूप तब आता है जब आगे त, थ या स हो।
प्रश्न 3
'निरोग' शब्द का सही विग्रह क्या है?
- Aनिर् + रोग
- Bनि + रोग
- Cनिस् + रोग
- Dनिरो + ग
व्याख्या
‘निर्’ का अर्थ रहित है। ‘र्’ के तुरंत बाद फिर ‘र’ आने पर एक ‘र’ लुप्त हो जाता है, इसी से ‘निरोग’ रूप बनता है।
प्रश्न 4
'दुश्चरित्र' शब्द में मूल उपसर्ग कौन सा है?
- Aदुर्
- Bदुश्
- Cदु
- Dदुस्
व्याख्या
विसर्ग संधि के अनुसार ‘दुः’ के बाद च या छ आने पर विसर्ग ‘श्’ बन जाता है। ‘चरित्र’ का ‘च’ सामने होने से यहाँ ‘दुश्’ रूप बना, पर मूल उपसर्ग ‘दुस्’ ही है।