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संस्कृत उपसर्ग

संस्कृत से आए बाईस उपसर्ग हिंदी में सबसे ज़्यादा काम आते हैं और परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछे भी जाते हैं। पहले बाईस की तालिका अर्थ सहित, फिर उनसे बने 119 शब्द — हर शब्द उपसर्ग और मूल शब्द में अलग करके दिखाया गया है।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

संस्कृत उपसर्ग — बाईस की पूरी सूची

संस्कृत व्याकरण में बाईस उपसर्ग गिनाए जाते हैं, और यही सूची हर प्रतियोगी परीक्षा का आधार है। इन्हें रटने के बजाय अर्थ के साथ समझिए, क्योंकि अर्थ पता हो तो अनजान शब्द में भी उपसर्ग पहचान में आ जाता है। उदाहरण के लिए ‘अप’ का अर्थ है बुरा या दूर — इसीलिए अपमान, अपयश, अपराध, अपहरण सब में कहीं न कहीं बुराई या दूर ले जाने का भाव है। इसी तरह ‘सु’ का अर्थ है अच्छा — सुगंध, सुपुत्र, सुशील, सुलभ सब में अच्छाई है।

नीचे दी गई तालिका में हर उपसर्ग के साथ उसका मुख्य अर्थ और एक पहचान-योग्य उदाहरण दिया गया है। ध्यान दीजिए कि कई उपसर्गों के एक से अधिक अर्थ होते हैं और संदर्भ के अनुसार अर्थ बदल जाता है। जैसे ‘अति’ का अर्थ अधिकता भी है और सीमा के पार जाना भी — ‘अतिशय’ में अधिकता है, ‘अतिक्रमण’ में सीमा लाँघना।

बाईस संस्कृत उपसर्ग — अर्थ और उदाहरण

उपसर्गमुख्य अर्थउदाहरण
प्रआगे, अधिक, ऊपरप्रगति, प्रबल, प्रकाश
पराउल्टा, पीछे की ओरपराजय, पराभव, परावर्तन
अपबुरा, हीन, दूरअपमान, अपयश, अपहरण
सम्अच्छी तरह, पूर्णता, साथसंगम, संतोष, सम्मान
अनुपीछे, समान, क्रम सेअनुकरण, अनुशासन, अनुवाद
अवनीचे, हीनताअवनति, अवगुण, अवरोध
निस्बिना, निषेध, बाहरनिश्चय, निष्फल, निष्कर्ष
निर्बिना, रहितनिर्धन, निर्भय, निराशा
दुस्बुरा, कठिनदुष्कर्म, दुष्कर, दुश्चरित्र
दुर्बुरा, कठिनदुर्गम, दुर्जन, दुर्बल
विविशेष, भिन्नता, अभावविज्ञान, विदेश, वियोग
आङ् (आ)तक, से, ओरआगमन, आहार, आजीवन
निनीचे, भीतर, निषेधनिवास, नियम, निषेध
अधिऊपर, श्रेष्ठ, प्रधानअधिकार, अध्यक्ष, अधिपति
अपिभी, ऊपरअपिधान
अतिअधिक, सीमा के पारअतिशय, अतिक्रमण
सुअच्छा, सरलसुगंध, सुगम, सुशील
उत्ऊपर, उत्कर्षउन्नति, उत्साह, उद्गम
अभिसामने, ओर, चारों तरफ़अभिमान, अभियान, अभ्यास
प्रतिउल्टा, हर एक, बदले मेंप्रतिदिन, प्रतिकार, प्रत्येक
परिचारों ओर, पूर्णतापरिक्रमा, परिचय, परिवार
उपनिकट, गौण, छोटाउपकार, उपवन, उपमंत्री

‘अपि’ को लेकर सावधानी

बाईस की सूची में ‘अपि’ गिना ज़रूर जाता है, पर आज की हिंदी में इससे बने शब्द लगभग नहीं मिलते। ‘अपिधान’ यानी ढक्कन ही इसका चालू उदाहरण है, और वह भी साहित्यिक है। परीक्षा में इससे शब्द बनाने को नहीं कहा जाता, केवल सूची में इसका नाम पूछा जा सकता है — इसलिए नाम याद रखिए, उदाहरण खोजने में समय मत लगाइए।

अब हर उपसर्ग के कुछ-कुछ उदाहरण देखिए। इन्हें पढ़ते समय विग्रह पर ध्यान दीजिए, क्योंकि परीक्षा में अक्सर पूरा शब्द देकर उपसर्ग अलग करने को कहा जाता है। जहाँ जुड़ने पर वर्ण बदल गया है, वहाँ टिप्पणी में कारण भी लिख दिया गया है।

प्र, परा, अप और सम् से बने शब्द

  • प्रगतिप्र + गति
  • प्रबलप्र + बल
  • प्रकाशप्र + काश
  • प्रचारप्र + चार
  • प्रयोगप्र + योग
  • प्रयत्नप्र + यत्न
  • प्रस्थानप्र + स्थान
  • प्रसिद्धप्र + सिद्ध
  • पराजयपरा + जय‘परा’ ने जय को उलटकर हार बना दिया
  • पराक्रमपरा + क्रम
  • परामर्शपरा + मर्श
  • पराभवपरा + भव
  • परावर्तनपरा + वर्तन
  • अपमानअप + मान
  • अपयशअप + यश
  • अपकारअप + कार
  • अपराधअप + राध
  • अपव्ययअप + व्यय
  • अपहरणअप + हरण
  • संगमसम् + गम‘सम्’ का ‘म्’ अनुस्वार बनकर ‘सं’ हो गया
  • संतोषसम् + तोष
  • संचयसम् + चय
  • संयोगसम् + योग
  • संस्कारसम् + कारजोड़ते समय बीच में ‘स्’ का आगम होता है
  • सम्मानसम् + मान‘म्’ के बाद ‘म’ आने से द्वित्व हो गया
  • संहारसम् + हार

अनु, अव, वि और आ से बने शब्द

  • अनुकरणअनु + करण
  • अनुशासनअनु + शासन
  • अनुसरणअनु + सरण
  • अनुवादअनु + वाद
  • अनुभवअनु + भव
  • अनुचरअनु + चर
  • अनुरागअनु + राग
  • अवनतिअव + नति
  • अवगुणअव + गुण
  • अवतारअव + तार
  • अवशेषअव + शेष
  • अवरोधअव + रोध
  • अवसानअव + सान
  • विज्ञानवि + ज्ञान
  • विदेशवि + देश
  • विशेषवि + शेष
  • विभागवि + भाग
  • विनाशवि + नाश
  • विकासवि + कास
  • विचारवि + चार
  • वियोगवि + योग
  • आगमनआ + गमन
  • आजीवनआ + जीवन
  • आहारआ + हार
  • आक्रमणआ + क्रमण
  • आचरणआ + चरण
  • आमरणआ + मरण
  • आजन्मआ + जन्म

नि, अधि, अति, सु और उत् से बने शब्द

  • निवासनि + वास
  • नियमनि + यम
  • निबंधनि + बंध
  • निदाननि + दान
  • नियुक्तिनि + युक्ति
  • निवारणनि + वारण
  • निषेधनि + षेध‘नि’ के बाद ‘स’ का ‘ष’ हो गया
  • निमग्ननि + मग्न
  • अधिकारअधि + कार
  • अध्यक्षअधि + अक्ष‘इ’ के बाद ‘अ’ आने पर ‘य्’ बन गया
  • अध्ययनअधि + अयन
  • अधिपतिअधि + पति
  • अधिनियमअधि + नियम
  • अधिसूचनाअधि + सूचना
  • अतिशयअति + शय
  • अतिरिक्तअति + रिक्त
  • अतिक्रमणअति + क्रमण
  • अतिवृष्टिअति + वृष्टि
  • अत्यंतअति + अंत‘इ’ + ‘अ’ मिलकर ‘य’ हो गया
  • सुगंधसु + गंध
  • सुगमसु + गम
  • सुपुत्रसु + पुत्र
  • सुशीलसु + शील
  • सुलभसु + लभ
  • सुकर्मसु + कर्म
  • स्वागतसु + आगत‘उ’ + ‘आ’ मिलकर ‘वा’ हो गया
  • उन्नतिउत् + नति‘त्’ ‘न’ में बदलकर ‘न्न’ बन गया
  • उत्कर्षउत् + कर्ष
  • उत्साहउत् + साह
  • उत्थानउत् + थान
  • उद्गमउत् + गम‘त्’ का ‘द्’ हो गया
  • उद्धारउत् + हार
  • उल्लेखउत् + लेख‘त्’ ‘ल’ में बदलकर ‘ल्ल’ बन गया

अभि, प्रति, परि और उप से बने शब्द

  • अभिमानअभि + मान
  • अभियानअभि + यान
  • अभिनयअभि + नय
  • अभिलाषाअभि + लाषा
  • अभिशापअभि + शाप
  • अभिभावकअभि + भावक
  • अभिवादनअभि + वादन
  • अभ्यासअभि + आस‘इ’ + ‘आ’ मिलकर ‘या’ हो गया
  • प्रतिदिनप्रति + दिन
  • प्रतिकारप्रति + कार
  • प्रतिध्वनिप्रति + ध्वनि
  • प्रतिरोधप्रति + रोध
  • प्रतिशोधप्रति + शोध
  • प्रतिवादप्रति + वाद
  • प्रत्येकप्रति + एक‘इ’ + ‘ए’ मिलकर ‘ये’ हो गया
  • प्रत्यक्षप्रति + अक्ष
  • परिक्रमापरि + क्रमा
  • परिचयपरि + चय
  • परिणामपरि + नाम
  • परिवारपरि + वार
  • परिश्रमपरि + श्रम
  • परिवर्तनपरि + वर्तन
  • परिभाषापरि + भाषा
  • पर्यटनपरि + अटन‘इ’ + ‘अ’ मिलकर ‘य’ हो गया
  • उपकारउप + कार
  • उपदेशउप + देश
  • उपवनउप + वन
  • उपनामउप + नाम
  • उपमंत्रीउप + मंत्री
  • उपस्थितउप + स्थित
  • उपहारउप + हार
  • उपयोगउप + योग

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'अनुशासन' शब्द में कौन सा उपसर्ग है?

  1. Aअनु
  2. Bअन
  3. Cअ
  4. Dअनि

व्याख्या

‘अनु’ का अर्थ है पीछे चलना या क्रम से चलना, और यहाँ ‘शासन’ पूरा सार्थक शब्द बचता है। इसीलिए अलग किया जाने वाला शब्दांश ‘अनु’ है। ‘अन’ हिंदी उपसर्ग है जो ‘अनपढ़’ जैसे तद्भव शब्दों से जुड़ता है, तत्सम ‘शासन’ से नहीं।

प्रश्न 2

'प्रत्येक' शब्द का सही विग्रह क्या है?

  1. Aप्र + त्येक
  2. Bप्रत् + एक
  3. Cपरा + एक
  4. Dप्रति + एक

व्याख्या

‘प्रति’ का अर्थ यहाँ ‘हर एक’ है। स्वर संधि के अनुसार ‘इ’ के बाद ‘ए’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, इसलिए प्रति + एक मिलकर ‘प्रत्येक’ बना।

प्रश्न 3

'उन्नति' शब्द किन दो हिस्सों से बना है?

  1. Aउत् + नति
  2. Bउन + नति
  3. Cउ + न्नति
  4. Dउप + नति

व्याख्या

‘उत्’ का अर्थ ऊपर की ओर है। व्यंजन संधि के अनुसार ‘त्’ के बाद ‘न’ आने पर ‘त्’ भी ‘न’ में बदल जाता है, जिससे ‘न्न’ बनता है। इसी नियम से उत् + नति = उन्नति।

प्रश्न 4

'स्वागत' शब्द का सही विग्रह है —

  1. Aस्व + आगत
  2. Bस + वागत
  3. Cसु + आगत
  4. Dस्वा + गत

व्याख्या

‘सु’ का अर्थ अच्छा है और ‘आगत’ का अर्थ आया हुआ, यानी अच्छा आगमन। स्वर संधि में ‘उ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘उ’ का ‘व्’ हो जाता है, इसीलिए ‘स्वा’ बना।

प्रश्न 5

'संस्कार' शब्द में कौन सा उपसर्ग है?

  1. Aसन्
  2. Bस
  3. Cसह
  4. Dसम्

व्याख्या

‘सम्’ का अर्थ अच्छी तरह या पूर्णता है। लिखते समय ‘म्’ अनुस्वार के रूप में आ जाता है, इसलिए ‘सं’ दिखता है, पर उपसर्ग ‘सम्’ ही माना जाता है। संगम, संतोष और संचय में भी यही उपसर्ग है।

प्रश्न 6

'पराजय' में 'परा' उपसर्ग का अर्थ क्या है?

  1. Aउल्टा या विपरीत
  2. Bआगे
  3. Cपास
  4. Dनीचे

व्याख्या

‘परा’ अर्थ को उलट देने वाला उपसर्ग है। ‘जय’ का अर्थ जीत है और ‘परा’ लगते ही वह हार बन जाता है। पराभव और परावर्तन में भी यही उलटने का भाव है।

प्रश्न 7

संस्कृत के मान्य उपसर्गों की संख्या कितनी मानी जाती है?

  1. A20
  2. B22
  3. C21
  4. D24

व्याख्या

संस्कृत व्याकरण में प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आङ्, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि और उप — कुल बाईस उपसर्ग गिनाए जाते हैं।

प्रश्न 8

'उपकार' में 'उप' उपसर्ग का अर्थ क्या है?

  1. Aऊपर
  2. Bनिकट या गौण
  3. Cदूर
  4. Dविपरीत

व्याख्या

‘उप’ का अर्थ पास होना, सहायक होना या क्रम में नीचे होना है। उपवन, उपमंत्री और उपनाम में भी यही भाव दिखता है।

प्रश्न 9

'अभ्यास' शब्द का सही विग्रह है —

  1. Aअभी + आस
  2. Bअ + भ्यास
  3. Cअभि + आस
  4. Dअभ + यास

व्याख्या

‘अभि’ का अर्थ ओर या सामने है। स्वर संधि में ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, जिससे अभि + आस मिलकर ‘अभ्यास’ बनता है।

प्रश्न 10

'पर्यटन' शब्द का सही विग्रह क्या है?

  1. Aपर + अटन
  2. Bपरि + अटन
  3. Cपरी + अटन
  4. Dपर्य + टन

व्याख्या

‘परि’ का अर्थ चारों ओर है और ‘अटन’ का अर्थ घूमना। ‘इ’ के बाद ‘अ’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, इसी से ‘पर्यटन’ रूप बना।