हिंदी के अपने उपसर्ग
ये उपसर्ग संस्कृत से नहीं आए — हिंदी ने खुद बनाए हैं, और रोज़ की बोलचाल के शब्दों में मिलते हैं। तालिका में प्रमुख उपसर्ग अर्थ सहित हैं, उसके बाद उनसे बने 71 शब्द।
हिंदी के अपने उपसर्ग
हिंदी ने संस्कृत से उपसर्ग लिए ज़रूर, पर बोलचाल में उन्हें अपने हिसाब से ढाल लिया। ‘अर्ध’ बोलते-बोलते ‘अध’ हो गया, ‘उत्’ से ‘उन’ बना, ‘निः’ से ‘नि’ रह गया और ‘चतुः’ घिसकर ‘चौ’ बन गया। इन बदले हुए रूपों को अब संस्कृत उपसर्ग नहीं माना जाता, क्योंकि ये तत्सम शब्दों से नहीं, बल्कि ठेठ हिंदी के तद्भव और देशज शब्दों से जुड़ते हैं। ‘अध’ को आप ‘अधपका’ में तो लगा सकते हैं पर ‘अधपक्व’ में नहीं — यही इनकी पहचान है।
इन उपसर्गों की एक और खास बात यह है कि इनसे बने शब्द गाँव-घर की बोली में सबसे ज़्यादा मिलते हैं। अनपढ़, अधमरा, बिनबुलाया, निकम्मा, भरपेट, चौराहा — ये सब रोज़ की जबान के शब्द हैं, किताबी नहीं। राजस्थान की परीक्षाओं में इनसे प्रश्न इसलिए भी आता है क्योंकि यहाँ की स्थानीय बोली में ये रूप बहुत चलते हैं और अभ्यर्थी इन्हें व्याकरण की नजर से देखना भूल जाते हैं।
हिंदी के प्रमुख उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | अभाव, नहीं | अथाह, अछूता, अटल |
| अन | नहीं, रहित | अनपढ़, अनमोल, अनजान |
| कु / क | बुरा | कुचाल, कुरूप, कपूत |
| सु | अच्छा | सुडौल, सुघड़, सुजान |
| बिन | बिना | बिनबुलाया, बिनमाँगा |
| अध | आधा | अधपका, अधमरा, अधजला |
| उन | एक कम | उनतीस, उनचास, उन्नीस |
| दु | दो | दुगुना, दुपहर, दुधारी |
| दु | बुरा, कम | दुबला, दुकाल |
| नि | रहित, बिना | निडर, निहत्था, निकम्मा |
| भर | पूरा, भरा हुआ | भरपेट, भरपूर, भरसक |
| चौ | चार | चौराहा, चौकोर, चौमासा |
| पच | पाँच | पचरंगा, पचमेल |
| औ (अव का रूप) | हीन, बुरा | औगुन, औघट, औसर |
| स | सहित, साथ | सपूत, सजग, सजल |
अ, अन, कु और सु से बने हिंदी शब्द
- अथाहअ + थाह
- अछूताअ + छूता
- अटलअ + टल
- अचेतअ + चेत
- अकाजअ + काज
- अनपढ़अन + पढ़
- अनमोलअन + मोल
- अनबनअन + बन
- अनजानअन + जान
- अनहोनीअन + होनी
- अनदेखाअन + देखा
- अनचाहाअन + चाहा
- अनसुनाअन + सुना
- अनगिनतअन + गिनत
- कुचालकु + चाल
- कुरूपकु + रूप
- कुकर्मकु + कर्म
- कुमार्गकु + मार्ग
- कुख्यातकु + ख्यात
- कुसंगतिकु + संगति
- कपूतकु + पूत‘कु’ घिसकर ‘क’ रह गया
- सुडौलसु + डौल
- सुघड़सु + घड़
- सुजानसु + जान
बिन, अध, उन और दु से बने हिंदी शब्द
- बिनबुलायाबिन + बुलाया
- बिनमाँगाबिन + माँगा
- बिनदेखाबिन + देखा
- बिनब्याहाबिन + ब्याहा
- अधपकाअध + पका
- अधमराअध + मरा
- अधजलाअध + जला
- अधखिलाअध + खिला
- अधकचराअध + कचरा
- अधभराअध + भरा
- उनतीसउन + तीसतीस से एक कम
- उनचासउन + चासपचास से एक कम
- उनसठउन + सठसाठ से एक कम
- उन्नीसउन + नीसबीस से एक कम
- उनहत्तरउन + हत्तरसत्तर से एक कम
- उन्यासीउन + यासीअस्सी से एक कम
- दुगुनादु + गुनायहाँ ‘दु’ का अर्थ दो है
- दुपहरदु + पहर
- दुधारीदु + धारी
- दुरंगादु + रंगा
- दुतरफ़ादु + तरफ़ा
- दुकालदु + कालबुरा समय
नि, भर, चौ, पच, औ और स से बने हिंदी शब्द
- निडरनि + डर
- निहत्थानि + हत्था
- निकम्मानि + कम्मा
- निठल्लानि + ठल्ला
- निगोड़ानि + गोड़ा
- निपूतानि + पूता
- भरपेटभर + पेट
- भरपूरभर + पूर
- भरसकभर + सक
- भरमारभर + मार
- चौराहाचौ + राहा
- चौकोरचौ + कोर
- चौपायाचौ + पाया
- चौमासाचौ + मासा
- चौगुनाचौ + गुना
- चौपालचौ + पाल
- पचरंगापच + रंगा
- पचमेलपच + मेल
- औगुनऔ + गुन‘अवगुण’ का बोलचाल रूप
- औघटऔ + घट
- सपूतस + पूत
- सजगस + जग
- सजलस + जल
- सचेतस + चेत
- सबलस + बल
‘सु’ और ‘नि’ दो जगह मिलेंगे
‘सु’ और ‘नि’ दोनों संस्कृत की सूची में भी हैं और हिंदी की सूची में भी। घबराइए मत — फ़ैसला मूल शब्द से कीजिए। ‘सुगंध’ में ‘गंध’ तत्सम है, इसलिए संस्कृत उपसर्ग। ‘सुडौल’ में ‘डौल’ ठेठ हिंदी है, इसलिए हिंदी उपसर्ग। इसी तरह ‘निवास’ संस्कृत है और ‘निडर’ हिंदी।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'अधमरा' शब्द में कौन सा उपसर्ग है और उसका अर्थ क्या है?
- Aअ — अभाव
- Bअधि — ऊपर
- Cअप — बुरा
- Dअध — आधा
व्याख्या
‘अध’ संस्कृत के ‘अर्ध’ का हिंदी रूप है और इसका अर्थ आधा होता है। अधपका, अधजला और अधखिला में भी यही अर्थ मिलता है। ‘अधि’ तत्सम उपसर्ग है जिसका अर्थ ऊपर या श्रेष्ठ है।
प्रश्न 2
'चौराहा' में 'चौ' उपसर्ग का अर्थ क्या है?
- Aचार
- Bचौड़ा
- Cऊँचा
- Dचौथा
व्याख्या
‘चौ’ संस्कृत के ‘चतुः’ का हिंदी रूप है और इसका अर्थ चार होता है। चौकोर, चौपाया और चौमासा में भी यही अर्थ मिलता है।