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गुण संधि

गुण संधि में अ या आ के आगे दूसरे परिवार का स्वर आने पर एक नया स्वर बनता है — ए, ओ या अर्। यही तीन नियम गुण संधि की पूरी पहचान हैं। यहाँ नियम तालिका के साथ 40 शब्द संधि विच्छेद सहित दिए गए हैं।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

2. गुण संधि — अ या आ के आगे दूसरा परिवार आए तो नया स्वर बनता है

अब सोचिए, पहले शब्द के अंत में अ या आ है और आगे उसी परिवार का स्वर नहीं, बल्कि इ-परिवार, उ-परिवार या ऋ आ गया। ऐसी हालत में दोनों मिलकर पूरी तरह नया स्वर बना देते हैं — और वह नया स्वर ही 'गुण' कहलाता है। ए, ओ और अर् — ये तीन ही गुण संधि के परिणाम हैं, इनसे बाहर गुण संधि कभी नहीं जाती।

सूत्र रूप में याद रखिए: अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्। इन तीन पंक्तियों को कंठस्थ कर लीजिए, क्योंकि परीक्षा में गुण संधि के प्रश्न सबसे अधिक आते हैं। जुड़े शब्द में जहाँ 'े' की मात्रा या 'ो' की मात्रा जोड़ की जगह पर दिखे, वहाँ नब्बे प्रतिशत मामलों में गुण संधि ही होगी।

गुण संधि — तीन नियम, तीन परिणाम

नियमसूत्रबनने वाला स्वरनमूना
पहलाअ/आ + इ/ईएनर + इंद्र = नरेंद्र
पहलाअ/आ + इ/ईएमहा + ईश = महेश
दूसराअ/आ + उ/ऊओसूर्य + उदय = सूर्योदय
दूसराअ/आ + उ/ऊओमहा + ऊर्मि = महोर्मि
तीसराअ/आ + ऋअर्देव + ऋषि = देवर्षि

गुण संधि — अ/आ के साथ इ/ई मिलकर ए बनाते हैं

  • नरेंद्रनर + इंद्र
  • देवेंद्रदेव + इंद्र
  • सुरेंद्रसुर + इंद्र
  • महेंद्रमहा + इंद्र
  • भारतेंदुभारत + इंदु
  • स्वेच्छास्व + इच्छा
  • यथेष्टयथा + इष्ट
  • महेशमहा + ईश
  • गणेशगण + ईश
  • नरेशनर + ईश
  • रमेशरमा + ईश
  • उमेशउमा + ईश
  • राजेशराज + ईश
  • लंकेशलंका + ईश
  • परमेश्वरपरम + ईश्वर
  • गंगेशगंगा + ईश
  • सुरेशसुर + ईश

गुण संधि — अ/आ के साथ उ/ऊ मिलकर ओ बनाते हैं

  • सूर्योदयसूर्य + उदय
  • चंद्रोदयचंद्र + उदय
  • भाग्योदयभाग्य + उदय
  • हितोपदेशहित + उपदेश
  • परोपकारपर + उपकार
  • नवोदयनव + उदय
  • महोत्सवमहा + उत्सव
  • गंगोदकगंगा + उदक
  • यथोचितयथा + उचित
  • लोकोक्तिलोक + उक्ति
  • जलोर्मिजल + ऊर्मि
  • महोर्मिमहा + ऊर्मि
  • नवोढ़ानव + ऊढ़ा
  • समुद्रोर्मिसमुद्र + ऊर्मि
  • पर्वतोपरिपर्वत + उपरि
  • वीरोचितवीर + उचित

गुण संधि — अ/आ के साथ ऋ मिलकर अर् बनाते हैं

  • देवर्षिदेव + ऋषि
  • महर्षिमहा + ऋषि
  • राजर्षिराज + ऋषि
  • सप्तर्षिसप्त + ऋषि
  • ब्रह्मर्षिब्रह्म + ऋषि
  • शीतर्तुशीत + ऋतु
  • वसंतर्तुवसंत + ऋतु

गुण और दीर्घ को यों अलग कीजिए

दोनों में पहला स्वर अ या आ हो सकता है, फ़र्क़ दूसरे स्वर से पड़ता है। दूसरा स्वर भी अ-परिवार का हुआ तो दीर्घ संधि और परिणाम आ रहेगा — देव + आलय = देवालय। दूसरा स्वर इ, ई, उ, ऊ या ऋ हुआ तो गुण संधि और परिणाम ए, ओ या अर् रहेगा — देव + इंद्र = देवेंद्र। परिणाम देखकर भी उलटा पहचान सकते हैं: आ आया तो दीर्घ, ए/ओ/अर् आया तो गुण।

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'महेश' में कौन-सी संधि है?

  1. Aदीर्घ संधि
  2. Bवृद्धि संधि
  3. Cयण् संधि
  4. Dगुण संधि

व्याख्या

'महा + ईश' में आ और ई मिलकर ए बने हैं। अ/आ के आगे इ/ई आने पर ए बनना गुण संधि का नियम है।

प्रश्न 2

'सूर्योदय' का संधि विच्छेद है —

  1. Aसूर्य + ओदय
  2. Bसूर्यो + दय
  3. Cसूर्य + उदय
  4. Dसूर्या + उदय

व्याख्या

'सूर्य' के अंत का अ और 'उदय' का उ मिलकर ओ बने हैं। अ + उ = ओ गुण संधि का नियम है।

प्रश्न 3

'महर्षि' में कौन-सी संधि है और परिणाम क्या बना?

  1. Aवृद्धि संधि, ऐ बना
  2. Bदीर्घ संधि, आ बना
  3. Cयण् संधि, र् बना
  4. Dगुण संधि, अर् बना

व्याख्या

'महा + ऋषि' में आ के आगे ऋ आया। अ/आ + ऋ = अर् गुण संधि का तीसरा नियम है, इसलिए महर्षि बना।