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यण् संधि

यण् संधि में इ, उ और ऋ अपनी स्वर वाली जगह छोड़कर क्रमशः य्, व् और र् बन जाते हैं। तीन बदलाव याद रह जाएँ तो इस भेद के प्रश्न देखते ही पहचान में आ जाते हैं।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

4. यण् संधि — इ, उ और ऋ अपनी जगह छोड़कर व्यंजन बन जाते हैं

अब एक अलग तरह का मेल देखिए। पहले शब्द के अंत में इ, ई, उ, ऊ या ऋ है, और आगे कोई ऐसा स्वर आ गया जो इनके परिवार का नहीं है। ऐसी हालत में पहला स्वर अपना स्वर-रूप छोड़ देता है और व्यंजन बन जाता है — इ/ई मिलकर य् बनते हैं, उ/ऊ मिलकर व् बनते हैं और ऋ मिलकर र् बनता है। इन तीन व्यंजनों को व्याकरण में 'यण्' कहा जाता है, इसी से संधि का नाम पड़ा।

इसे आसानी से समझने का तरीक़ा यह है — जीभ को इ से सीधे आ पर जाना पड़े तो बीच में हल्का य् जैसा घर्षण अपने आप पैदा होता है। 'अति' और 'आवश्यक' जल्दी-जल्दी बोलिए, 'अत्यावश्यक' खुद बन जाएगा। भाषा ने उसी स्वाभाविक बात को नियम बना दिया।

यण् संधि — तीन बदलाव

पहला स्वरशर्तबदलकर बनेगानमूना
इ या ईआगे इ-परिवार से भिन्न कोई स्वरय्अति + अंत = अत्यंत
उ या ऊआगे उ-परिवार से भिन्न कोई स्वरव्सु + आगत = स्वागत
ऋआगे ऋ से भिन्न कोई स्वरर्पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

यण् संधि — इ/ई से य् बनने वाले शब्द

  • अत्यंतअति + अंत
  • अत्यधिकअति + अधिक
  • अत्याचारअति + आचार
  • अत्यावश्यकअति + आवश्यक
  • इत्यादिइति + आदि
  • यद्यपियदि + अपि
  • प्रत्येकप्रति + एक
  • प्रत्युत्तरप्रति + उत्तर
  • प्रत्यक्षप्रति + अक्ष
  • प्रत्यारोपप्रति + आरोप
  • अभ्यागतअभि + आगत
  • अभ्यासअभि + आस
  • अध्यापकअधि + आपक
  • अध्यक्षअधि + अक्ष
  • देव्यागमनदेवी + आगमनई के बाद असमान स्वर आने पर भी य् ही बनता है
  • सुध्युपासनासुधी + उपासना

यण् संधि — उ/ऊ से व् तथा ऋ से र् बनने वाले शब्द

  • स्वागतसु + आगत
  • स्वल्पसु + अल्प
  • अन्वेषणअनु + एषण
  • अन्वयअनु + अय
  • अन्वितअनु + इत
  • मन्वंतरमनु + अंतर
  • गुर्वादेशगुरु + आदेश
  • वध्वागमनवधू + आगमन
  • पित्राज्ञापितृ + आज्ञा
  • मात्राज्ञामातृ + आज्ञा
  • पित्रुपदेशपितृ + उपदेश
  • मात्रुपदेशमातृ + उपदेश
  • पित्रनुमतिपितृ + अनुमति
  • मात्रानंदमातृ + आनंद

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'स्वागत' में प्रयुक्त संधि है —

  1. Aअयादि संधि
  2. Bदीर्घ संधि
  3. Cयण् संधि
  4. Dगुण संधि

व्याख्या

'सु + आगत' में उ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए उ बदलकर व् हो गया। इ/उ/ऋ का य्/व्/र् बनना यण् संधि है।

प्रश्न 2

'अत्यंत' में कौन-सी संधि है?

  1. Aअयादि संधि
  2. Bयण् संधि
  3. Cगुण संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'अति + अंत' में इ के आगे असमान स्वर अ आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि का नियम।

प्रश्न 3

'प्रत्येक' का संधि विच्छेद है —

  1. Aप्रत् + येक
  2. Bप्र + त्येक
  3. Cप्रति + एक
  4. Dप्रत्य + एक

व्याख्या

'प्रति' के इ के आगे असमान स्वर ए आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि।

प्रश्न 4

'पित्राज्ञा' में ऋ का क्या हुआ?

  1. Aऋ बदलकर र् हुआ
  2. Bऋ का लोप हुआ
  3. Cऋ बदलकर अर् हुआ
  4. Dऋ बदलकर ई हुआ

व्याख्या

'पितृ + आज्ञा' में ऋ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए ऋ बदलकर र् हुआ — यण् संधि का तीसरा नियम। ऋ का अर् बनना गुण संधि में होता है, यण् में नहीं।