यण् संधि
यण् संधि में इ, उ और ऋ अपनी स्वर वाली जगह छोड़कर क्रमशः य्, व् और र् बन जाते हैं। तीन बदलाव याद रह जाएँ तो इस भेद के प्रश्न देखते ही पहचान में आ जाते हैं।
4. यण् संधि — इ, उ और ऋ अपनी जगह छोड़कर व्यंजन बन जाते हैं
अब एक अलग तरह का मेल देखिए। पहले शब्द के अंत में इ, ई, उ, ऊ या ऋ है, और आगे कोई ऐसा स्वर आ गया जो इनके परिवार का नहीं है। ऐसी हालत में पहला स्वर अपना स्वर-रूप छोड़ देता है और व्यंजन बन जाता है — इ/ई मिलकर य् बनते हैं, उ/ऊ मिलकर व् बनते हैं और ऋ मिलकर र् बनता है। इन तीन व्यंजनों को व्याकरण में 'यण्' कहा जाता है, इसी से संधि का नाम पड़ा।
इसे आसानी से समझने का तरीक़ा यह है — जीभ को इ से सीधे आ पर जाना पड़े तो बीच में हल्का य् जैसा घर्षण अपने आप पैदा होता है। 'अति' और 'आवश्यक' जल्दी-जल्दी बोलिए, 'अत्यावश्यक' खुद बन जाएगा। भाषा ने उसी स्वाभाविक बात को नियम बना दिया।
यण् संधि — तीन बदलाव
| पहला स्वर | शर्त | बदलकर बनेगा | नमूना |
|---|---|---|---|
| इ या ई | आगे इ-परिवार से भिन्न कोई स्वर | य् | अति + अंत = अत्यंत |
| उ या ऊ | आगे उ-परिवार से भिन्न कोई स्वर | व् | सु + आगत = स्वागत |
| ऋ | आगे ऋ से भिन्न कोई स्वर | र् | पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा |
यण् संधि — इ/ई से य् बनने वाले शब्द
- अत्यंतअति + अंत
- अत्यधिकअति + अधिक
- अत्याचारअति + आचार
- अत्यावश्यकअति + आवश्यक
- इत्यादिइति + आदि
- यद्यपियदि + अपि
- प्रत्येकप्रति + एक
- प्रत्युत्तरप्रति + उत्तर
- प्रत्यक्षप्रति + अक्ष
- प्रत्यारोपप्रति + आरोप
- अभ्यागतअभि + आगत
- अभ्यासअभि + आस
- अध्यापकअधि + आपक
- अध्यक्षअधि + अक्ष
- देव्यागमनदेवी + आगमनई के बाद असमान स्वर आने पर भी य् ही बनता है
- सुध्युपासनासुधी + उपासना
यण् संधि — उ/ऊ से व् तथा ऋ से र् बनने वाले शब्द
- स्वागतसु + आगत
- स्वल्पसु + अल्प
- अन्वेषणअनु + एषण
- अन्वयअनु + अय
- अन्वितअनु + इत
- मन्वंतरमनु + अंतर
- गुर्वादेशगुरु + आदेश
- वध्वागमनवधू + आगमन
- पित्राज्ञापितृ + आज्ञा
- मात्राज्ञामातृ + आज्ञा
- पित्रुपदेशपितृ + उपदेश
- मात्रुपदेशमातृ + उपदेश
- पित्रनुमतिपितृ + अनुमति
- मात्रानंदमातृ + आनंद
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'स्वागत' में प्रयुक्त संधि है —
- Aअयादि संधि
- Bदीर्घ संधि
- Cयण् संधि
- Dगुण संधि
व्याख्या
'सु + आगत' में उ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए उ बदलकर व् हो गया। इ/उ/ऋ का य्/व्/र् बनना यण् संधि है।
प्रश्न 2
'अत्यंत' में कौन-सी संधि है?
- Aअयादि संधि
- Bयण् संधि
- Cगुण संधि
- Dदीर्घ संधि
व्याख्या
'अति + अंत' में इ के आगे असमान स्वर अ आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि का नियम।
प्रश्न 3
'प्रत्येक' का संधि विच्छेद है —
- Aप्रत् + येक
- Bप्र + त्येक
- Cप्रति + एक
- Dप्रत्य + एक
व्याख्या
'प्रति' के इ के आगे असमान स्वर ए आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि।
प्रश्न 4
'पित्राज्ञा' में ऋ का क्या हुआ?
- Aऋ बदलकर र् हुआ
- Bऋ का लोप हुआ
- Cऋ बदलकर अर् हुआ
- Dऋ बदलकर ई हुआ
व्याख्या
'पितृ + आज्ञा' में ऋ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए ऋ बदलकर र् हुआ — यण् संधि का तीसरा नियम। ऋ का अर् बनना गुण संधि में होता है, यण् में नहीं।