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अयादि संधि

अयादि संधि स्वर संधि का पाँचवाँ और आखिरी भेद है। यहाँ ए, ऐ, ओ और औ टूटकर दो हिस्सों में बँट जाते हैं। चार बदलाव और 19 उदाहरण इस पेज पर हैं।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

5. अयादि संधि — ए, ऐ, ओ, औ के टूटकर दो हिस्से बनना

यह स्वर संधि का सबसे कम समझा जाने वाला भेद है, और इसीलिए परीक्षा में इससे पूछे गए प्रश्न आधे से ज़्यादा विद्यार्थियों के गलत होते हैं। बात दरअसल सरल है। ए, ऐ, ओ, औ — ये चारों स्वर अपने आप में जुड़े हुए स्वर हैं। जब इनके बाद कोई और स्वर आ जाता है तो ये टिक नहीं पाते, टूट जाते हैं और उनका पिछला हिस्सा स्वर बना रहता है जबकि अगला हिस्सा य् या व् में बदल जाता है।

चार बदलाव होते हैं: ए टूटकर अय् बनता है, ऐ टूटकर आय् बनता है, ओ टूटकर अव् बनता है और औ टूटकर आव् बनता है। इन चार रूपों — अय्, आय्, अव्, आव् — के पहले अक्षर जोड़कर ही इस संधि का नाम 'अयादि' पड़ा, यानी 'अय् आदि'। नाम ही नियम है, इसलिए नाम याद रहते ही नियम याद रहेगा।

अयादि संधि को पहचानने की सबसे भरोसेमंद निशानी यह है कि जुड़े शब्द में जोड़ की जगह पर 'य' या 'व' अक्षर पूरा दिखाई देता है और उससे पहले अ या आ की ध्वनि रहती है — नयन, गायक, पवन, पावक। यदि आप 'नयन' का विच्छेद पूछे जाने पर चौंक जाते हैं, तो इतना याद रखिए — 'न' के बाद 'यन' है, और 'य' से पहले 'अ' है, यानी मूल में 'ए' था। इसलिए ने + अन = नयन।

अयादि संधि — चार बदलाव और उनकी पहचान

मूल स्वरआगे कोई स्वर आने पर बनेगाजुड़े शब्द में दिखेगानमूना
एअय्अ + यने + अन = नयन
ऐआय्आ + यनै + अक = नायक
ओअव्अ + वपो + अन = पवन
औआव्आ + वपौ + अक = पावक

अयादि संधि — ए और ऐ से बने शब्द

  • नयनने + अनए टूटकर अय् बना
  • शयनशे + अन
  • चयनचे + अन
  • गायकगै + अकऐ टूटकर आय् बना
  • गायनगै + अन
  • नायकनै + अक
  • विनायकविनै + अक
  • दायकदै + अक
  • सहायकसहै + अक
  • नायिकानै + इका

अयादि संधि — ओ और औ से बने शब्द

  • पवनपो + अनओ टूटकर अव् बना
  • भवनभो + अन
  • पवित्रपो + इत्र
  • भविष्यभो + इष्य
  • पावकपौ + अकऔ टूटकर आव् बना
  • पावनपौ + अन
  • नाविकनौ + इक
  • भावुकभौ + उक
  • गवीशगो + ईशगो का ओ टूटकर अव् बना, इसलिए ग् + अव् + ईश = गवीश

अयादि संधि में यह भूल आम है

'नायक' का विच्छेद 'ना + यक' नहीं होता और 'पावक' का 'पा + वक' नहीं। ये दोनों गलत हैं क्योंकि 'यक' और 'वक' कोई सार्थक शब्द नहीं हैं। सही रूप नै + अक तथा पौ + अक है। जब भी किसी शब्द के बीच में 'य' या 'व' दिखे और विकल्पों में 'ने', 'नै', 'पो', 'पौ', 'भो', 'भौ', 'गै' जैसे अधूरे लगने वाले टुकड़े दिए हों, तो घबराइए नहीं — वही उत्तर होगा। अयादि संधि के टुकड़े देखने में अजीब लगते हैं, यही उनकी पहचान है।

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'पावक' का सही संधि विच्छेद कौन-सा है?

  1. Aपा + वक
  2. Bपो + अक
  3. Cपाव + क
  4. Dपौ + अक

व्याख्या

औ के आगे स्वर आने पर औ टूटकर आव् बनता है, इसलिए पौ + अक = पावक। यह अयादि संधि है। 'पो + अक' से पवक बनता, पावक नहीं।

प्रश्न 2

'नयन' शब्द में प्रयुक्त संधि है —

  1. Aगुण संधि
  2. Bयण् संधि
  3. Cअयादि संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'ने + अन' में ए के आगे स्वर आने पर ए टूटकर अय् बना। ए/ऐ/ओ/औ का टूटना अयादि संधि है।

प्रश्न 3

'गायक' का संधि विच्छेद है —

  1. Aगे + अक
  2. Bगाय + क
  3. Cगा + यक
  4. Dगै + अक

व्याख्या

ऐ के आगे स्वर आने पर ऐ टूटकर आय् बनता है, इसलिए गै + अक = गायक। यह अयादि संधि है।