विलोम के जाल
सूची याद हो जाने के बाद भी अंक यहीं कटते हैं। कुछ विकल्प विलोम जैसे लगते हैं पर होते नहीं, और कुछ शब्दों के एक से अधिक सही विलोम होते हैं — तब सबसे सटीक वाला चुनना होता है।
जहाँ विद्यार्थी फिसलते हैं
अब उस भाग पर आइए जो अंक बनाता भी है और बिगाड़ता भी। कुछ शब्दों के सामने ऐसे विकल्प रख दिए जाते हैं जो देखने में बिलकुल ठीक लगते हैं, पर होते नहीं। इनकी पहचान का एक ही तरीक़ा है — विकल्प चुनने से पहले दोनों शब्दों को एक-एक वाक्य में रखकर देख लेना। यदि दोनों वाक्य एक ही पैमाने पर उलटी बात कह रहे हैं, तो जोड़ी सही है।
मिलते-जुलते विकल्प और असली विलोम
| शब्द | जो विकल्प गलत तरीक़े से आकर्षित करता है | सही विलोम | भेद क्या है |
|---|---|---|---|
| उत्कर्ष | निकर्ष | अपकर्ष | ‘निकर्ष’ का अर्थ कसौटी या नीचे खींचना है; उन्नति के ठीक उलटे अवनति-भाव के लिए ‘अपकर्ष’ ही चलता है। |
| ऋणात्मक | शून्य | धनात्मक | शून्य बीच की स्थिति है, उलटी नहीं। विलोम में बीच की स्थिति कभी उत्तर नहीं होती। |
| सापेक्ष | प्रत्यक्ष | निरपेक्ष | ‘प्रत्यक्ष’ का जोड़ा ‘परोक्ष’ है; ‘सापेक्ष’ का जोड़ा अपेक्षा-रहित होने से ‘निरपेक्ष’ बनता है। |
| आविर्भाव | अभाव | तिरोभाव | ‘अभाव’ का अर्थ न होना है, जबकि ‘तिरोभाव’ का अर्थ प्रकट होकर छिप जाना — यही प्रकट होने का उलटा है। |
| मूक | बहरा | वाचाल | मूक बोल नहीं सकता; उसका उलटा वह है जो अत्यधिक बोले, यानी वाचाल। बहरापन सुनने से जुड़ा है, बोलने से नहीं। |
| कृतज्ञ | अज्ञ | कृतघ्न | ‘अज्ञ’ का अर्थ अनजान है। किए हुए उपकार को मानने वाले का उलटा वह है जो उपकार भुला दे — कृतघ्न। |
| ज्येष्ठ | लघु | कनिष्ठ | ‘लघु’ आकार बताता है, आयु या क्रम नहीं। बड़े-छोटे भाई के क्रम के लिए ज्येष्ठ–कनिष्ठ जोड़ी बनती है। |
| स्थावर | चंचल | जंगम | ‘चंचल’ स्वभाव बताता है; एक जगह टिकी वस्तु का उलटा चलने-फिरने वाली वस्तु, यानी जंगम है। |
| निरपेक्ष | निष्पक्ष | सापेक्ष | ‘निष्पक्ष’ का अर्थ किसी पक्ष में न होना है, जो तटस्थ का भाव है। ‘निरपेक्ष’ का उलटा वह है जो किसी अपेक्षा पर टिका हो, यानी सापेक्ष। |
| आगामी | वर्तमान | विगत | वर्तमान अभी की स्थिति है। आने वाले का उलटा बीत चुका, यानी विगत या गत। |
अब दूसरी तरह के जाल पर आइए — वे शब्द जिनके एक से अधिक विलोम सही माने जा सकते हैं, क्योंकि शब्द के एक से अधिक अर्थ हैं। ऐसे प्रश्नों में घबराने की ज़रूरत नहीं; बस वाक्य या विकल्पों को देखकर तय कीजिए कि प्रश्न किस अर्थ की बात कर रहा है।
एक शब्द, एक से अधिक सही विलोम
| शब्द | अर्थ जिस ओर जाइए | उस अर्थ का विलोम |
|---|---|---|
| आदि | आरंभ के अर्थ में | अंत |
| आदि | प्रथम या मूल के अर्थ में | अंतिम |
| गुरु | शिक्षक के अर्थ में | शिष्य |
| गुरु | भारी या दीर्घ के अर्थ में | लघु |
| राग | संगीत की धुन से हटकर मन के लगाव के अर्थ में | विराग |
| राग | द्वेष के सामने प्रेम-भाव के अर्थ में | द्वेष |
| उत्तर | दिशा के अर्थ में | दक्षिण |
| उत्तर | जवाब के अर्थ में | प्रश्न |
| सम | बराबर के अर्थ में | विषम |
| सम | शांत या संतुलित के अर्थ में | विषम या क्षुब्ध |
| वर्ण | रंग के अर्थ में | कोई निश्चित विलोम नहीं — इस अर्थ में विलोम मत बनाइए |
| अनुज | आयु-क्रम के अर्थ में | अग्रज |
| अर्थ | मतलब के अर्थ में | अनर्थ |
| वर | वरदान के अर्थ में | शाप |
| वर | दूल्हा के अर्थ में | वधू |
तीन भूलें जो हर साल दोहराई जाती हैं
पहली — ‘न’ या ‘नहीं’ जोड़कर विलोम बना लेना, जैसे ‘आना’ का ‘न आना’; सही उत्तर ‘जाना’ है। दूसरी — शब्द-भेद बदल देना, जैसे ‘शत्रुता’ के सामने ‘मित्र’ चुन लेना, जबकि उत्तर ‘मित्रता’ है। तीसरी — मात्रा या हलंत की चूक, जैसे ‘दुर्लभ’ की जगह ‘दुलर्भ’ या ‘ह्रस्व’ की जगह ‘हृस्व’ लिख देना। लिखित परीक्षा में यह तीसरी भूल अकेले कई अंक ले जाती है, इसलिए हर शब्द बोलकर और लिखकर दोनों तरह से दोहराइए।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aज्येष्ठ — कनिष्ठ
- Bस्थावर — जंगम
- Cमूक — बहरा
- Dकृतज्ञ — कृतघ्न
व्याख्या
मूक का संबंध बोलने से है, इसलिए उसका उलटा वह होगा जो बहुत बोले — वाचाल। बहरापन सुनने की क्षमता से जुड़ा है, इसलिए वह मूक का विलोम नहीं बनता। विलोम में हमेशा एक ही पैमाना रखना पड़ता है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा सही नहीं है?
- Aसुगम — दुर्गम
- Bसुबोध — असुबोध
- Cसुपात्र — कुपात्र
- Dसुकाल — अकाल
व्याख्या
जिन शब्दों के आगे ‘सु’ लगा हो, उनका विलोम प्रायः ‘दुर्’ या ‘कु’ से बनता है, ‘अ’ से नहीं। इसलिए सुबोध का विलोम दुर्बोध है। ‘असुबोध’ नियम की नकल करके बनाया गया रूप है, प्रचलित शब्द नहीं।
प्रश्न 3
‘गुरु’ शब्द का विलोम ‘लघु’ किस अर्थ में होगा?
- Aशिक्षक के अर्थ में
- Bभारी या दीर्घ के अर्थ में
- Cपूज्य के अर्थ में
- Dबड़े भाई के अर्थ में
व्याख्या
‘गुरु’ के दो अर्थ हैं। शिक्षक के अर्थ में उसका विलोम ‘शिष्य’ है, और भारी या दीर्घ के अर्थ में ‘लघु’। जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ हों, उनमें पहले अर्थ तय कीजिए, फिर विकल्प देखिए।
प्रश्न 4
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aआदान — प्रदान
- Bआरोह — अवरोह
- Cआगामी — वर्तमान
- Dआसक्ति — विरक्ति
व्याख्या
आगामी यानी आने वाला; उसका उलटा वह है जो बीत चुका, यानी विगत या गत। वर्तमान अभी की स्थिति है, जो न आने वाली है और न बीती हुई — इसलिए वह बीच की स्थिति है, विलोम नहीं।
प्रश्न 5
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aशुक्ल — कृष्ण
- Bश्वेत — श्याम
- Cशांत — मौन
- Dशीत — उष्ण
व्याख्या
शांत और मौन दोनों एक ही दिशा के भाव हैं — एक मन की स्थिरता बताता है, दूसरा न बोलना; ये पर्याय जैसे हैं, विलोम नहीं। शांत का विलोम अशांत या क्षुब्ध होगा।
प्रश्न 6
‘शत्रुता’ का विलोम है —
- Aमित्र
- Bस्नेह
- Cसहयोग
- Dमित्रता
व्याख्या
प्रश्न का शब्द भाववाचक संज्ञा है, इसलिए उत्तर भी भाववाचक संज्ञा ही होगा — मित्रता। ‘मित्र’ व्यक्ति बताता है, भाव नहीं। विलोम में शब्द-भेद बदलना सबसे आम और सबसे महँगी भूल है।