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राजभाषा हिन्दी — संवैधानिक स्थिति

हिंदी भारत की राजभाषा है — राष्ट्रभाषा नहीं। संविधान में ‘राष्ट्रभाषा’ शब्द आता ही नहीं। यही एक वाक्य इस अध्याय के सबसे अधिक प्रश्नों का उत्तर है। यहाँ भाग 17 के सारे अनुच्छेद, राजभाषा अधिनियम 1963, और आठवीं अनुसूची की पूरी कहानी एक जगह है।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

सबसे पहले वह अंतर जिस पर सबसे अधिक प्रश्न बनते हैं

हिंदी भारत की राजभाषा है — राष्ट्रभाषा नहीं। यह वाक्य पूरे अध्याय का केंद्र है, और यहीं सबसे अधिक उत्तर ग़लत होते हैं।

अंतर यह है कि राजभाषा वह भाषा है जिसमें सरकार अपना कामकाज करती है — दफ़्तर, अधिसूचना, पत्राचार। यह संविधान द्वारा तय की जाती है। राष्ट्रभाषा वह भाषा होती जो पूरे राष्ट्र की पहचान के रूप में घोषित हो। भारत का संविधान किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित नहीं करता — यह दर्जा किसी को नहीं दिया गया। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2010 में भी यही कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है।

इसीलिए ‘भारत की राष्ट्रभाषा कौन-सी है?’ जैसे प्रश्न का उत्तर ‘हिंदी’ नहीं है। यदि विकल्पों में ‘कोई नहीं’ या ‘संविधान में उल्लेख नहीं’ जैसा विकल्प हो, वही सही है। और ध्यान रहे कि अनुच्छेद 343 भी ‘संघ की राजभाषा’ कहता है, ‘भारत की राजभाषा’ नहीं — यह भी एक बारीकी है जिस पर प्रश्न बनता है।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘राजभाषा हिन्दी — संवैधानिक स्थिति’ नाम से — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं

संविधान में राजभाषा कहाँ है

राजभाषा से संबंधित सारे उपबंध संविधान के भाग 17 में हैं, जो अनुच्छेद 343 से 351 तक फैला है। यह भाग चार अध्यायों में बँटा है — संघ की भाषा, प्रादेशिक भाषाएँ, न्यायालयों की भाषा, और विशेष निदेश। परीक्षा में प्रायः अनुच्छेद-संख्या और विषय का मिलान पूछा जाता है, इसलिए नीचे की तालिका उसी रूप में दी गई है।

संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। ध्यान रहे कि यह संविधान लागू होने की तिथि नहीं है — संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, और अनुच्छेद 343 में जो पंद्रह वर्ष की अवधि दी गई है, वह इसी तिथि से गिनी जाती है।

भाग 17 — अनुच्छेद 343 से 351 तक, एक तालिका में

अनुच्छेदविषयक्या कहता है
343संघ की राजभाषासंघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप रहेगा। संविधान लागू होने से पंद्रह वर्ष तक अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रहेगा, और संसद चाहे तो उसके बाद भी विधि द्वारा जारी रख सकती है।
344राजभाषा आयोग और संसदीय समितिराष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पाँच वर्ष की समाप्ति पर और उसके बाद ऐसे प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति पर राजभाषा आयोग गठित करेंगे। ध्यान दीजिए — दोनों अवधियाँ संविधान के प्रारंभ से गिनी जाती हैं, अर्थात् 1955 और 1960; दूसरी अवधि पहले आयोग से दस वर्ष बाद नहीं है। यही इस अनुच्छेद का सबसे आम जाल है। खंड (4) के अंतर्गत तीस सदस्यों की संसदीय समिति बनती है — बीस लोकसभा से, दस राज्यसभा से।
345राज्य की राजभाषाराज्य का विधानमंडल उस राज्य में प्रयुक्त किसी एक या अधिक भाषाओं को, अथवा हिंदी को, राज्य की राजभाषा के रूप में अपना सकता है।
346राज्यों के बीच पत्राचार की भाषाएक राज्य और दूसरे राज्य के बीच तथा राज्य और संघ के बीच पत्राचार की भाषा वही होगी जो संघ के प्रयोजनों के लिए अधिकृत है। परंतु यदि दो या अधिक राज्य आपस में सहमत हो जाएँ तो वे अपने बीच पत्राचार के लिए हिंदी का प्रयोग कर सकते हैं।
347जनसंख्या के किसी वर्ग की भाषायदि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त भाग यह माँग करे कि उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राज्य द्वारा अभिज्ञात किया जाए, तो राष्ट्रपति — यदि उनका समाधान हो जाए — निदेश दे सकते हैं कि वह भाषा उस राज्य में सर्वत्र या उसके किसी भाग में, ऐसे प्रयोजन के लिए जो वे विनिर्दिष्ट करें, अभिज्ञात की जाए। ‘माँग’ और ‘किसी भाग में’ — दोनों शब्द परीक्षा में पूछे जाते हैं।
348न्यायालयों तथा विधानों की भाषाजब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की कार्यवाही तथा विधेयकों, अधिनियमों और आदेशों का प्राधिकृत पाठ अंग्रेज़ी में रहेगा। खंड (2) के अंतर्गत राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी का प्रयोग प्राधिकृत कर सकते हैं — किंतु यह खंड उस उच्च न्यायालय के निर्णय, डिक्री या आदेश पर लागू नहीं होता। उनके लिए अलग व्यवस्था राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 में है।
349भाषा संबंधी कुछ विधियाँ बनाने के लिए विशेष प्रक्रियापंद्रह वर्ष तक अनुच्छेद 348 से संबंधित कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व मंज़ूरी के बिना संसद में नहीं लाया जा सकता था; और राष्ट्रपति यह मंज़ूरी अनुच्छेद 344(1) के आयोग की सिफ़ारिशों तथा 344(4) की समिति के प्रतिवेदन पर विचार किए बिना नहीं दे सकते थे।
350व्यथा-निवारण के लिए अभ्यावेदन की भाषाहर व्यक्ति संघ या राज्य के किसी अधिकारी को अपनी शिकायत संघ या राज्य में प्रयुक्त किसी भी भाषा में दे सकता है।
350कप्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षाभाषाई अल्पसंख्यक वर्ग के बालकों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा देने का प्रयास। सातवें संविधान संशोधन, 1956 द्वारा जोड़ा गया।
350खभाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारीराष्ट्रपति द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी, जो भाषाई अल्पसंख्यकों के संरक्षणों की जाँच करेगा। यह भी सातवें संशोधन, 1956 द्वारा जोड़ा गया।
351हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेशसंघ का कर्तव्य होगा कि वह हिंदी का प्रसार और विकास करे; वह हिन्दुस्तानी के तथा आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं के रूप, शैली और पदों को आत्मसात् करके हिंदी को समृद्ध करे; और उसके शब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से तथा गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करे। ‘हिन्दुस्तानी’ शब्द इसी अनुच्छेद में आता है — यह अपने आप में एक पूछा जाने वाला बिंदु है।

पंद्रह वर्ष की समय-सीमा और राजभाषा अधिनियम, 1963

अनुच्छेद 343(2) ने अंग्रेज़ी के प्रयोग के लिए पंद्रह वर्ष की अवधि रखी थी, जो 26 जनवरी 1965 को पूरी हो रही थी। उसी अनुच्छेद के खंड (3) ने संसद को यह अधिकार भी दे रखा था कि वह विधि बनाकर उस अवधि के बाद भी अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रख सके।

संसद ने वही किया। राजभाषा अधिनियम, 1963 इसी अधिकार के अंतर्गत बना और उसने 1965 के बाद भी अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रखने की व्यवस्था की। 1967 में इस अधिनियम में संशोधन हुआ, जिसके बाद संघ के प्रयोजनों के लिए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग तब तक चलता रहेगा जब तक वे सभी राज्य ऐसा न चाहें जिन्होंने हिंदी को अपनी राजभाषा नहीं बनाया है।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह हुआ कि अंग्रेज़ी की भूमिका किसी तिथि पर स्वतः समाप्त नहीं होती। परीक्षा में यह प्रश्न प्रायः इसी रूप में आता है — ‘पंद्रह वर्ष बाद अंग्रेज़ी का प्रयोग किस आधार पर जारी रहा?’ उत्तर अनुच्छेद 343(3) और राजभाषा अधिनियम, 1963 है, न कि कोई संविधान संशोधन।

आठवीं अनुसूची — 14 से 22 भाषाओं तक

कबकुल भाषाएँक्या जुड़ा
मूल संविधान (1950)14असमिया, बंगला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू। ‘उड़िया’ का नाम बदलकर ‘ओड़िया’ 96वें संविधान संशोधन, 2011 द्वारा हुआ।
21वाँ संशोधन, 196715सिंधी जोड़ी गई
71वाँ संशोधन, 199218कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली जोड़ी गईं
92वाँ संशोधन, 2003 (प्रवृत्त 7 जनवरी 2004)22बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं। कुछ उत्तर-कुंजियाँ इसे 2004 लिखती हैं — अधिनियम 2003 का है, लागू 2004 में हुआ। विकल्पों में जो दिया हो, उसी आधार पर चुनिए।

राजस्थान की राजभाषा

अनुच्छेद 345 राज्य के विधानमंडल को यह अधिकार देता है कि वह अपने राज्य की राजभाषा तय करे। राजस्थान ने इसी अधिकार के अंतर्गत हिंदी को राज्य की राजभाषा के रूप में अपनाया है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि राजस्थानी आठवीं अनुसूची में सम्मिलित नहीं है। राज्य की अपनी बोलियाँ — मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बागड़ी और अन्य — साहित्य और लोक-व्यवहार में समृद्ध हैं, पर संवैधानिक दृष्टि से राज्य की राजभाषा हिंदी ही है। परीक्षा में यह अंतर पूछा जाता है, इसलिए बोली और राजभाषा को अलग-अलग रखिए।

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है?+

नहीं। संविधान किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित नहीं करता। अनुच्छेद 343 हिंदी को ‘संघ की राजभाषा’ कहता है। राजभाषा का अर्थ है सरकारी कामकाज की भाषा, राष्ट्र की पहचान की भाषा नहीं।

हिंदी दिवस 14 सितंबर को ही क्यों?+

क्योंकि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया था। यह संविधान लागू होने की तिथि नहीं है — वह 26 जनवरी 1950 है, और अनुच्छेद 343 की पंद्रह वर्ष की अवधि उसी से गिनी जाती है।

अनुच्छेद 350क और 350ख मूल संविधान में थे?+

नहीं। दोनों सातवें संविधान संशोधन, 1956 द्वारा जोड़े गए। 350क प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा से संबंधित है और 350ख भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति से। प्रश्न प्रायः यही पूछता है कि ये मूल थे या जोड़े गए।

उच्च न्यायालय में हिंदी का प्रयोग हो सकता है?+

हाँ, दो अलग रास्तों से। अनुच्छेद 348(2) के अंतर्गत राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति लेकर, उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी का प्रयोग प्राधिकृत कर सकते हैं — पर यह खंड निर्णय, डिक्री और आदेश पर लागू नहीं होता। उनके लिए राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 अलग व्यवस्था देती है: राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, निर्णय-डिक्री-आदेश में अंग्रेज़ी के अतिरिक्त हिंदी के प्रयोग को भी प्राधिकृत कर सकते हैं, और तब उच्च न्यायालय के प्राधिकार से अंग्रेज़ी अनुवाद निकाला जाता है। राजस्थान के लिए यह विशेष रूप से जानने योग्य है — उच्च न्यायालय में हिंदी के प्रयोग की अनुमति पाने वाला पहला राज्य राजस्थान ही था, 1950 में; उसके बाद उत्तर प्रदेश (1969), मध्य प्रदेश (1971) और बिहार (1972)। ये चार राज्य ही हैं।

अनुच्छेद 351 किस बारे में है?+

हिंदी के विकास के लिए संघ को दिए गए निदेश के बारे में। इसमें कहा गया है कि हिंदी अपने शब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करे। ‘मुख्यतः संस्कृत’ वाला अंश प्रायः सीधे पूछा जाता है।

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