प्रत्यय
‘लिख’ एक क्रिया है। उसके पीछे ‘अक’ जोड़िए तो ‘लेखक’ बन जाता है — यानी लिखने वाला व्यक्ति। ‘आई’ जोड़िए तो ‘लिखाई’ बनता है — यानी लिखने का काम या उसकी मजदूरी। ‘आवट’ जोड़िए तो ‘लिखावट’ बनता है — यानी लिखने का ढंग। एक ही धातु से तीन बिलकुल अलग शब्द, और तीनों का फ़र्क़ सिर्फ़ पीछे जुड़े हुए छोटे-से टुकड़े ने पैदा किया। इन्हीं टुकड़ों को प्रत्यय कहते हैं। प्रत्यय उपसर्ग से एक बड़े मामले में अलग है — उपसर्ग सिर्फ़ अर्थ बदलता है, पर प्रत्यय अक्सर शब्द की जाति ही बदल देता है। क्रिया से संज्ञा बन जाती है, संज्ञा से विशेषण, विशेषण से भाववाचक संज्ञा। यही कारण है कि हिंदी के लाखों शब्द गिने-चुने धातुओं और प्रत्ययों के मेल से बने हैं। राजस्थान की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में प्रत्यय से लगभग हर बार प्रश्न आता है, और सबसे ज़्यादा प्रश्न एक ही बात पर घूमता है — यह कृत् प्रत्यय है या तद्धित? इस पृष्ठ पर हम पहले प्रत्यय की बुनियाद समझेंगे, फिर कृत् और तद्धित दोनों को उनके सारे उपभेदों के साथ देखेंगे, फिर वह एक पक्का तरीक़ा सीखेंगे जिससे दोनों में फ़र्क़ करना कभी नहीं चूकेगा, और अंत में पच्चीस अभ्यास प्रश्न हल करेंगे।
प्रत्यय किसे कहते हैं?
प्रत्यय वह शब्दांश है जो किसी धातु या शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है। ‘प्रत्यय’ शब्द स्वयं ‘प्रति’ और ‘अय’ से बना है, जिसका भाव है — पीछे की ओर चलने वाला। नाम में ही इसकी पहचान छिपी है: जो पीछे लगे, वह प्रत्यय। जो आगे लगे, वह उपसर्ग।
प्रत्यय की तीन पक्की पहचानें हैं। पहली, यह हमेशा शब्द के अंत में आता है। दूसरी, यह अकेले प्रयोग नहीं होता — ‘आवट’ या ‘इक’ अकेले बोलिए तो कोई अर्थ नहीं निकलता। तीसरी, और सबसे ज़रूरी, यह जुड़ने के बाद शब्द की व्याकरणिक जाति बदल देता है। ‘सुंदर’ विशेषण है, पर उसके पीछे ‘ता’ लगते ही ‘सुंदरता’ भाववाचक संज्ञा बन जाती है। ‘धन’ संज्ञा है, पर ‘वान’ लगते ही ‘धनवान’ विशेषण बन जाता है। यही प्रत्यय की असली ताकत है।
एक बात और ध्यान दीजिए। प्रत्यय जुड़ते समय मूल शब्द में भी थोड़ा-बहुत बदलाव आ जाता है। ‘लिख’ से ‘लेखक’ बना तो ‘इ’ का ‘ए’ हो गया। ‘बड़ा’ से ‘बड़प्पन’ बना तो ‘प’ दोहरा हो गया। ‘गुरु’ से ‘गरिमा’ बना तो ‘उ’ का ‘अ’ हो गया। ये बदलाव संस्कृत के गुण-वृद्धि नियमों और हिंदी के उच्चारण की सुविधा से आते हैं। परीक्षा में इनकी अलग से चर्चा नहीं होती, पर विग्रह लिखते समय ये सामने आ जाते हैं, इसलिए इन्हें देखकर घबराना नहीं चाहिए।
एक ही मूल से प्रत्यय बदलकर बने अलग-अलग शब्द
- लेखकलिख + अककृत् प्रत्ययलिखने वाला — काम करने वाले का बोध
- लिखाईलिख + आईकृत् प्रत्ययलिखने का काम या उसकी मजदूरी
- लिखावटलिख + आवटकृत् प्रत्ययलिखने का ढंग
- लेखनीलिख + अनीकृत् प्रत्ययजिससे लिखा जाए — साधन का बोध
- लिखनालिख + नाकृत् प्रत्ययक्रिया का नाम
- सुंदरतासुंदर + तातद्धित प्रत्यय‘सुंदर’ विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनी
- धनवानधन + वानतद्धित प्रत्यय‘धन’ संज्ञा से विशेषण बना
- भारतीयभारत + ईयतद्धित प्रत्यय‘भारत’ संज्ञा से संबंधवाचक विशेषण बना
उपसर्ग और प्रत्यय — एक पंक्ति में फ़र्क़
जो शब्द के आगे लगकर अर्थ बदले वह उपसर्ग, और जो शब्द के पीछे लगकर अर्थ के साथ-साथ शब्द की जाति भी बदल दे वह प्रत्यय। ‘अपमान’ में ‘अप’ उपसर्ग है और ‘माननीय’ में ‘अनीय’ प्रत्यय।
प्रत्यय के भेद — कृत् और तद्धित
प्रत्यय का पूरा वर्गीकरण एक ही सवाल पर टिका है — यह प्रत्यय किसके पीछे लगा है? अगर धातु यानी क्रिया के मूल रूप के पीछे लगा है तो वह कृत् प्रत्यय है। अगर संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के पीछे लगा है तो वह तद्धित प्रत्यय है। बस इतनी-सी बात है, और यही बात परीक्षा में सबसे ज़्यादा अंक दिलाती है।
कृत् प्रत्यय से बने शब्द को कृदंत कहते हैं और तद्धित प्रत्यय से बने शब्द को तद्धितांत। ‘लेखक’ कृदंत है क्योंकि वह ‘लिख’ धातु से बना। ‘मनुष्यता’ तद्धितांत है क्योंकि वह ‘मनुष्य’ संज्ञा से बनी। एक ही प्रत्यय दोनों जगह लग सकता है, इसलिए प्रत्यय देखकर फ़ैसला मत कीजिए — मूल शब्द देखकर कीजिए। ‘आई’ प्रत्यय ‘लिखाई’ में कृत् है क्योंकि ‘लिख’ धातु है, पर ‘भलाई’ में तद्धित है क्योंकि ‘भला’ विशेषण है।
प्रत्यय के दो मुख्य भेद
| आधार | कृत् प्रत्यय | तद्धित प्रत्यय |
|---|---|---|
| किसके पीछे लगता है | धातु यानी क्रिया के मूल रूप के | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के |
| बने शब्द का नाम | कृदंत | तद्धितांत |
| नमूना | लिख + आई = लिखाई | भला + आई = भलाई |
| उपभेद | कर्तृवाचक, कर्मवाचक, करणवाचक, भाववाचक, क्रियार्थक | कर्तृवाचक, भाववाचक, संबंधवाचक, ऊनवाचक, स्त्रीबोधक, अपत्यवाचक, गुणवाचक, स्थानवाचक |
| पहचान की कसौटी | हिंदी/तद्भव धातु हो तो बचे भाग + ‘ना’ से क्रिया बन जाती है; तत्सम धातु (दृश्, पठ्, पूज्) में धातु का रूप देखकर पहचानिए | बचे हुए भाग के आगे ‘ना’ लगाकर क्रिया न बने |
यही वह जगह है जहाँ अंक कटते हैं
परीक्षा में सबसे ज़्यादा गलती प्रत्यय पहचानने में नहीं, बल्कि उसे कृत् या तद्धित बताने में होती है। इसलिए हर उदाहरण पढ़ते समय यह ज़रूर देखिए कि प्रत्यय हटाने पर जो बचा, वह क्रिया है या नाम। आगे इसी के लिए एक पूरा भाग दिया गया है।
प्रत्यय के भेद — विस्तार से पढ़ें
जहाँ अंक सबसे ज़्यादा कटते हैं
आम गलतियाँ — इन्हें दोहरा लीजिए
पहली और सबसे बड़ी, प्रत्यय देखकर वर्ग तय कर देना। ‘आई’ हमेशा कृत् नहीं होता और ‘ई’ हमेशा तद्धित नहीं होता — मूल शब्द देखिए, प्रत्यय नहीं। दूसरी, उपसर्ग और प्रत्यय की जगह उलट देना — ‘माननीय’ में ‘अनीय’ प्रत्यय है, उपसर्ग नहीं। तीसरी, ‘बुढ़ापा’ जैसे शब्दों में मूल रूप भूल जाना — मूल ‘बूढ़ा’ है, ‘बुढ़’ नहीं, और जुड़ते समय स्वर छोटा हो गया है। चौथी, स्त्रीबोधक प्रत्यय में गड़बड़ी — ‘लेखक’ का स्त्रीलिंग ‘लेखिका’ है, ‘लेखकी’ नहीं। पाँचवीं, अपत्यवाचक शब्दों को संबंधवाचक मान लेना — ‘पांडव’ पांडु की संतान है, इसलिए अपत्यवाचक है, जबकि ‘भारतीय’ भारत से संबंध बताता है, इसलिए संबंधवाचक।
प्रत्यय से शब्द-भंडार कैसे बढ़ता है
प्रत्यय हिंदी का सबसे बड़ा शब्द-कारखाना है। एक धातु लीजिए और उसके पीछे बारी-बारी से प्रत्यय लगाते जाइए — दस-बारह नए शब्द अपने आप निकल आएँगे, और हर शब्द का अर्थ भी आपको पहले से पता होगा। ‘सज’ धातु से सजावट, सजाव, सजीला, सजना बने। ‘चल’ से चलन, चालक, चलना, चलनी बने। ‘पढ़’ से पाठक, पढ़ाई, पढ़ाकू, पढ़ना बने। यानी शब्द रटने की ज़रूरत ही नहीं, बनाना सीख लीजिए।
अभ्यास का एक अच्छा तरीक़ा यह है कि एक कॉपी में तीन खाने बनाइए — मूल शब्द, प्रत्यय, और बना हुआ शब्द। रोज़ दस शब्द भरिए। पंद्रह दिन में डेढ़ सौ शब्द तैयार हो जाएँगे और साथ में यह समझ भी पक्की हो जाएगी कि कौन-सा प्रत्यय किस तरह के शब्दों से जुड़ता है। इसी कॉपी में हर शब्द के आगे छोटा-सा ‘कृ’ या ‘त’ लिख दीजिए — कृत् या तद्धित के लिए। यही एक अक्षर परीक्षा में सबसे ज़्यादा काम आएगा।
एक आखिरी बात। प्रत्यय जुड़ते समय मूल शब्द में स्वर छोटा या बड़ा हो जाना बिलकुल सामान्य है — ‘बूढ़ा’ से ‘बुढ़ापा’, ‘लोटा’ से ‘लुटिया’, ‘हाथी’ से ‘हथिनी’, ‘गुरु’ से ‘गरिमा’। इन बदलावों से घबराइए मत। विग्रह लिखते समय हमेशा मूल शब्द का पूरा और सही रूप लिखिए, घिसा हुआ रूप नहीं। ‘बुढ़ापा’ का विग्रह ‘बूढ़ा + पा’ है, ‘बुढ़ + आपा’ नहीं।
रोज़ का पाँच मिनट का अभ्यास
एक धातु चुनिए — जैसे ‘बुन’। अब मन ही मन प्रत्यय लगाते जाइए — बुनना, बुनाई, बुनकर, बुनावट। हर बार अर्थ भी बोलिए और साथ में यह भी कि प्रत्यय कृत् है या तद्धित। यह अभ्यास दोहराव से ज़्यादा असरदार है, क्योंकि इसमें आप शब्द याद नहीं करते, बनाते हैं।
प्रत्यय — एक पन्ने का दोहराव
| याद रखने की बात | सार |
|---|---|
| परिभाषा | शब्द या धातु के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाला शब्दांश |
| कहाँ लगता है | हमेशा शब्द के अंत में |
| खास काम | अर्थ के साथ-साथ शब्द की जाति भी बदल देता है |
| दो मुख्य भेद | कृत् प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय |
| कृत् किसके पीछे | धातु यानी क्रिया के मूल रूप के |
| तद्धित किसके पीछे | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के |
| बने शब्द के नाम | कृत् से कृदंत, तद्धित से तद्धितांत |
| पहचान की कसौटी | हिंदी/तद्भव धातु हो तो बचे भाग + ‘ना’ से क्रिया बन जाती है और वह कृत् है; तत्सम धातु (दृश्, पठ्, पूज्) में धातु का रूप देखकर पहचानिए; नाम या विशेषण से बना हो तो तद्धित |
| कृत् के पाँच उपभेद | कर्तृवाचक, कर्मवाचक, करणवाचक, भाववाचक, क्रियार्थक |
| तद्धित के आठ उपभेद | कर्तृवाचक, भाववाचक, संबंधवाचक, ऊनवाचक, स्त्रीबोधक, अपत्यवाचक, गुणवाचक, स्थानवाचक |
| कृत् के प्रमुख प्रत्यय | अक, ता, आई, आवट, आहट, अन, आव, आवा, नी, औना, अनीय, य, ना |
| तद्धित के प्रमुख प्रत्यय | ता, त्व, पन, पा, इमा, इक, ईय, एरा, इया, इका, आनी, इन, वान, मान, ईला, आलु, हीन |
| विदेशी प्रत्यय | दार, वाला, गर, ची, बाज, खोर, आना, गी, इंदा |
| उलझाने वाले जोड़े | लिखाई–भलाई, घबराहट–कड़वाहट, हँसी–गरीबी, झूला–छात्रा |
| उपसर्ग से फ़र्क़ | उपसर्ग आगे लगता है, प्रत्यय पीछे |
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB पटवारी | संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड का भाग |
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB VDO | भाषा खंड · 50 प्रश्न / 50 अंक वाले भाषा खंड का भाग |
| RSSB LDC | प्रश्न-पत्र II सामान्य हिंदी · सामान्य हिंदी (75 प्रश्न) का भाग |
| RPSC RAS मुख्य परीक्षा | प्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग अ · ‘उपसर्ग एवं प्रत्यय — शब्दों में से उपसर्ग एवं प्रत्यय पृथक् करना’ · 30 अंक वाले भाग का एक बिंदु — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026 |
| RPSC पुलिस उप-निरीक्षक | प्रश्न-पत्र I सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक वाले प्रश्न-पत्र का भाग |
| RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · खंड I का भाग |
| RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · खंड प्रथम का भाग |
| REET | हिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक |
| राजस्थान उच्च न्यायालय LDC | हिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक वाले हिंदी खंड का भाग |
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'लेखक' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
- Aक
- Bआक
- Cइक
- Dअक
व्याख्या
‘लिख’ धातु के पीछे ‘अक’ प्रत्यय लगकर काम करने वाले का बोध हुआ, इसलिए यह कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय है। जुड़ते समय ‘इ’ का ‘ए’ हो गया, जिससे ‘लेखक’ रूप बना।
प्रश्न 2
'भलाई' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय किस वर्ग का है?
- Aकृत्
- Bतद्धित
- Cउपसर्ग
- Dविदेशी
व्याख्या
प्रत्यय ‘आई’ हटाने पर ‘भला’ बचता है जो विशेषण है, धातु नहीं। ‘भलाना’ कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए यह तद्धित प्रत्यय है। यही ‘आई’ ‘लिखाई’ में कृत् होता है क्योंकि वहाँ ‘लिख’ धातु है।
प्रश्न 3
'मिठास' शब्द का सही विग्रह क्या है?
- Aमीठा + आस
- Bमिठ + आस
- Cमीठ + आस
- Dमिठा + स
व्याख्या
विग्रह में मूल शब्द का पूरा रूप लिखा जाता है, घिसा हुआ रूप नहीं। ‘मीठा’ विशेषण के पीछे भाववाचक तद्धित प्रत्यय ‘आस’ लगा है और जुड़ते समय ‘ई’ छोटी होकर ‘इ’ हो गई।
प्रश्न 4
कृत् प्रत्यय किसके पीछे लगता है?
- Aधातु के
- Bसंज्ञा के
- Cविशेषण के
- Dसर्वनाम के
व्याख्या
कृत् प्रत्यय की परिभाषा ही यही है कि वह क्रिया के मूल रूप यानी धातु के पीछे लगता है और उससे बने शब्द को कृदंत कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के पीछे लगने वाला प्रत्यय तद्धित कहलाता है।
प्रश्न 5
'बुढ़ापा' में कौन सा प्रत्यय है और वह किस वर्ग का है?
- Aआपा — कृत्
- Bपा — कृत्
- Cपा — तद्धित
- Dड़ा — तद्धित
व्याख्या
मूल शब्द ‘बूढ़ा’ विशेषण है और उसके पीछे भाववाचक तद्धित प्रत्यय ‘पा’ लगा है। ‘बूढ़ाना’ कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए यह कृत् नहीं हो सकता।
प्रश्न 6
'खिलौना' शब्द में प्रयुक्त कृत् प्रत्यय का उपभेद कौन सा है?
- Aकर्तृवाचक कृत्
- Bकर्मवाचक कृत्
- Cकरणवाचक कृत्
- Dभाववाचक कृत्
व्याख्या
‘खेल’ धातु से बना यह शब्द उस वस्तु को बताता है जिसे खेला जाता है, यानी जो काम का कर्म बने। जो प्रत्यय कर्म का बोध कराए वह कर्मवाचक कृत् कहलाता है।
प्रश्न 7
'कतरनी' शब्द किस उपभेद का उदाहरण है?
- Aकर्मवाचक कृत्
- Bभाववाचक कृत्
- Cकर्तृवाचक तद्धित
- Dकरणवाचक कृत्
व्याख्या
यह शब्द उस साधन को बताता है जिससे कतरने का काम किया जाता है। करण का अर्थ साधन है, इसलिए साधन बताने वाला प्रत्यय करणवाचक कृत् कहलाता है।
प्रश्न 8
'लालिमा' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
- Aइमा
- Bमा
- Cलिमा
- Dइम
व्याख्या
‘लाल’ विशेषण के पीछे ‘इमा’ प्रत्यय लगकर भाववाचक संज्ञा बनी है। यही प्रत्यय नीलिमा, कालिमा और अरुणिमा में भी उसी तरह लगा है।
प्रश्न 9
'चचेरा' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?
- Aअपत्यवाचक तद्धित
- Bसंबंधवाचक तद्धित
- Cगुणवाचक तद्धित
- Dऊनवाचक तद्धित
व्याख्या
‘चाचा’ संज्ञा के पीछे ‘एरा’ लगकर यह बताया गया है कि रिश्ता चाचा से है। जो प्रत्यय संबंध का बोध कराए वह संबंधवाचक तद्धित होता है। अपत्यवाचक प्रत्यय संतान बताता है, संबंध नहीं।
प्रश्न 10
'पांडव' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?
- Aसंबंधवाचक तद्धित
- Bगुणवाचक तद्धित
- Cअपत्यवाचक तद्धित
- Dभाववाचक तद्धित
व्याख्या
यह शब्द बताता है कि व्यक्ति पांडु की संतान है। संतान या वंशज का बोध कराने वाला प्रत्यय अपत्यवाचक तद्धित कहलाता है, और जुड़ते समय मूल स्वर वृद्धि पा जाता है।
प्रश्न 11
'डिबिया' शब्द में 'इया' प्रत्यय किसका बोध कराता है?
- Aलघुता या छोटेपन का
- Bस्त्रीलिंग का
- Cस्थान का
- Dभाव का
व्याख्या
ऊन का अर्थ है कम या छोटा। ‘डिब्बा’ से ‘डिबिया’ यानी छोटा डिब्बा बना, इसलिए यह ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय है। खटिया और लुटिया भी इसी तरह बने हैं।
प्रश्न 12
'लेखक' का स्त्रीलिंग रूप बनाने में कौन सा प्रत्यय लगता है?
- Aई
- Bइन
- Cआनी
- Dइका
व्याख्या
‘अक’ में समाप्त होने वाले तत्सम शब्दों का स्त्रीलिंग ‘इका’ प्रत्यय से बनता है। इसी नियम से नायक से नायिका, सेवक से सेविका और बालक से बालिका बनते हैं।
प्रश्न 13
'घबराहट' और 'कड़वाहट' के बारे में कौन सा कथन सही है?
- Aदोनों कृत् हैं
- Bदोनों तद्धित हैं
- Cपहला कृत् है, दूसरा तद्धित
- Dपहला तद्धित है, दूसरा कृत्
व्याख्या
‘घबरा’ के आगे ‘ना’ लगाने पर ‘घबराना’ सही क्रिया बनती है, इसलिए वह धातु है और प्रत्यय कृत् है। ‘कड़वा’ के आगे ‘ना’ लगाने पर कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए वह विशेषण है और प्रत्यय तद्धित है।
प्रश्न 14
'धनवान' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?
- Aभाववाचक तद्धित
- Bगुणवाचक तद्धित
- Cकर्तृवाचक तद्धित
- Dस्थानवाचक तद्धित
व्याख्या
‘धन’ संज्ञा के पीछे ‘वान’ लगकर विशेषण बना है जो बताता है कि उसमें धन का गुण मौजूद है। गुण का बोध कराने वाला प्रत्यय गुणवाचक तद्धित कहलाता है।
प्रश्न 15
'दुकानदार' में लगा 'दार' किस प्रकार का प्रत्यय है?
- Aविदेशी प्रत्यय
- Bकृत् प्रत्यय
- Cअपत्यवाचक प्रत्यय
- Dऊनवाचक प्रत्यय
व्याख्या
‘दार’ फ़ारसी से आया प्रत्यय है जिसका अर्थ रखने वाला होता है। ईमानदार, समझदार और हिस्सेदार में भी यही प्रत्यय उसी अर्थ में लगा है।
प्रश्न 16
'सजावट' शब्द किस वर्ग का उदाहरण है?
- Aभाववाचक तद्धित
- Bकरणवाचक कृत्
- Cकर्तृवाचक कृत्
- Dभाववाचक कृत्
व्याख्या
‘सज’ के आगे ‘ना’ लगाने पर ‘सजना’ क्रिया बनती है, इसलिए यह धातु है और प्रत्यय कृत् है। शब्द काम करने वाले को नहीं बल्कि काम के भाव को बता रहा है, इसलिए भाववाचक कृत्।
प्रश्न 17
'सामाजिक' शब्द का सही विग्रह क्या है?
- Aसामाज + इक
- Bसमाजि + क
- Cसमाज + इक
- Dसामा + जिक
व्याख्या
विग्रह में मूल संज्ञा ‘समाज’ लिखी जाती है। ‘इक’ प्रत्यय जुड़ते समय पहला स्वर वृद्धि पाकर ‘आ’ हो जाता है, जिससे ‘सामाजिक’ रूप बनता है। यह संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय है।
प्रश्न 18
तद्धित प्रत्यय से बने शब्द को क्या कहते हैं?
- Aकृदंत
- Bतद्धितांत
- Cसमस्त पद
- Dसन्धियुक्त पद
व्याख्या
कृत् प्रत्यय से बने शब्द को कृदंत और तद्धित प्रत्यय से बने शब्द को तद्धितांत कहा जाता है। यह केवल नाम का भेद है, नियम वही रहता है।
प्रश्न 19
'हँसी' और 'गरीबी' में क्रमशः कौन-कौन से वर्ग के प्रत्यय हैं?
- Aकृत् और तद्धित
- Bतद्धित और कृत्
- Cदोनों कृत्
- Dदोनों तद्धित
व्याख्या
‘हँस’ से ‘हँसना’ क्रिया बनती है, इसलिए वहाँ ‘ई’ कृत् प्रत्यय है। ‘गरीब’ से कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए वहाँ वही ‘ई’ तद्धित प्रत्यय है।
प्रश्न 20
'ग्रामीण' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?
- Aगुणवाचक तद्धित
- Bभाववाचक तद्धित
- Cअपत्यवाचक तद्धित
- Dस्थानवाचक तद्धित
व्याख्या
‘ग्राम’ संज्ञा के पीछे ‘ईण’ लगकर यह बताया गया है कि व्यक्ति या वस्तु गाँव की है। स्थान से संबंध बताने वाला प्रत्यय स्थानवाचक तद्धित कहलाता है।
प्रश्न 21
'पढ़ना' शब्द किस उपभेद का उदाहरण है?
- Aभाववाचक कृत्
- Bक्रियार्थक कृत्
- Cकर्मवाचक कृत्
- Dकर्तृवाचक कृत्
व्याख्या
‘पढ़’ धातु के पीछे ‘ना’ लगकर क्रिया का नाम बना है, जो वाक्य में संज्ञा की तरह काम करता है। ऐसे रूप को क्रियार्थक संज्ञा और उसके प्रत्यय को क्रियार्थक कृत् कहते हैं।
प्रश्न 22
'शेरनी' शब्द में लगा प्रत्यय किस प्रकार का है?
- Aऊनवाचक तद्धित
- Bकरणवाचक कृत्
- Cस्त्रीबोधक तद्धित
- Dगुणवाचक तद्धित
व्याख्या
‘शेर’ पुल्लिंग संज्ञा के पीछे ‘नी’ लगकर उसका स्त्रीलिंग रूप बना है। जानवरों के नामों में स्त्रीलिंग प्रायः इसी प्रत्यय से बनता है, जैसे मोरनी और ऊँटनी।
प्रश्न 23
'जिंदगी' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
- Aगी
- Bई
- Cदगी
- Dइगी
व्याख्या
‘जिंदा’ के पीछे फ़ारसी प्रत्यय ‘गी’ लगकर भाववाचक संज्ञा बनी है। यही प्रत्यय ताजगी, सादगी और बंदगी में भी लगा है।
प्रश्न 24
'माननीय' शब्द के बारे में कौन सा कथन सही है?
- Aइसमें 'मान' प्रत्यय लगा है
- Bइसमें 'नीय' उपसर्ग लगा है
- Cइसमें 'अनीय' प्रत्यय लगा है
- Dइसमें कोई प्रत्यय नहीं है
व्याख्या
‘मान’ धातु के पीछे ‘अनीय’ प्रत्यय लगा है, जो बताता है कि वह मान के योग्य है। शब्द के अंत में लगने के कारण यह प्रत्यय है, उपसर्ग नहीं — उपसर्ग हमेशा आगे लगता है।
प्रश्न 25
निम्न में से किस शब्द में तद्धित प्रत्यय लगा है?
- Aलेखक
- Bपढ़ाई
- Cखिलौना
- Dचित्रकार
व्याख्या
‘चित्र’ संज्ञा है, इसलिए उसके पीछे लगा ‘कार’ तद्धित प्रत्यय है। बाकी तीनों में मूल रूप लिख, पढ़ और खेल धातुएँ हैं, इसलिए वहाँ कृत् प्रत्यय लगे हैं।