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तद्धित प्रत्यय — शेष पाँच उपभेद

तद्धित के आठ उपभेदों में से शेष पाँच — ऊनवाचक (छोटा बताने वाले), स्त्रीबोधक, अपत्यवाचक (संतान बताने वाले), गुणवाचक और स्थानवाचक। कुल 107 शब्द, हर शब्द मूल और प्रत्यय में अलग करके।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय

ऊन का अर्थ है कम या छोटा। जब प्रत्यय लगकर वस्तु के छोटे रूप या लघुता का बोध कराए, तब वह ऊनवाचक तद्धित होता है। ‘डिब्बा’ से ‘डिबिया’ — छोटा डिब्बा। ‘खाट’ से ‘खटिया’ — छोटी खाट। ‘घंटा’ से ‘घंटी’ — छोटा घंटा। कई बार इसमें प्यार या हल्कापन भी घुल जाता है, जैसे ‘बुढ़िया’ या ‘चुहिया’। इस उपभेद के शब्द बोलचाल में इतने आम हैं कि इन्हें व्याकरण की नजर से देखना भर सीखना है।

ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द

  • डिबियाडिब्बा + इया
  • खटियाखाट + इया
  • लुटियालोटा + इया
  • पुड़ियापुड़ा + इया
  • बुढ़ियाबूढ़ी + इया
  • चुहियाचूहा + इया
  • बिंदियाबिंदी + इया
  • घंटीघंटा + ई
  • ढोलकीढोलक + ई
  • टोकरीटोकरा + ई
  • खटोलाखाट + ओला

स्त्रीबोधक तद्धित प्रत्यय

जब पुल्लिंग शब्द के पीछे प्रत्यय लगकर उसका स्त्रीलिंग रूप बने, तब वह स्त्रीबोधक तद्धित कहलाता है। हिंदी में इसके लिए कई प्रत्यय चलते हैं और कौन-सा लगेगा यह मूल शब्द पर निर्भर करता है। ‘अक’ में खत्म होने वाले तत्सम शब्दों में ‘इका’ लगता है — लेखक से लेखिका, नायक से नायिका। रिश्तों में अक्सर ‘आनी’ लगता है — देवर से देवरानी, जेठ से जेठानी। जानवरों में ‘नी’ लगता है — मोर से मोरनी, शेर से शेरनी। और पेशों में ‘इन’ लगता है — माली से मालिन, धोबी से धोबिन।

स्त्रीबोधक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द

  • लेखिकालेखक + इका
  • नायिकानायक + इका
  • सेविकासेवक + इका
  • गायिकागायक + इका
  • बालिकाबालक + इका
  • अध्यापिकाअध्यापक + इका
  • देवीदेव + ई
  • पुत्रीपुत्र + ई
  • गोपीगोप + ई
  • छात्राछात्र + आ
  • शिष्याशिष्य + आ
  • प्रियाप्रिय + आ
  • बालाबाल + आ
  • सुतासुत + आ
  • देवरानीदेवर + आनी
  • जेठानीजेठ + आनी
  • सेठानीसेठ + आनी
  • नौकरानीनौकर + आनी
  • इंद्राणीइंद्र + आनी
  • मालिनमाली + इन
  • धोबिनधोबी + इन
  • कुम्हारिनकुम्हार + इन
  • सुनारिनसुनार + इन
  • पंडिताइनपंडित + आइन
  • ठकुराइनठाकुर + आइन
  • मोरनीमोर + नी
  • शेरनीशेर + नी
  • ऊँटनीऊँट + नी
  • हथिनीहाथी + नी
  • अभिनेत्रीअभिनेता + त्री
  • नेत्रीनेता + त्री

अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय

अपत्य का अर्थ है संतान। जब प्रत्यय लगकर यह बताए कि यह व्यक्ति किसकी संतान या किसके वंश का है, तब वह अपत्यवाचक तद्धित होता है। ‘पांडु’ से ‘पांडव’ — पांडु के पुत्र। ‘कुरु’ से ‘कौरव’ — कुरु के वंशज। ‘रघु’ से ‘राघव’ — रघु के वंश में जन्मे राम। ‘कुंती’ से ‘कौंतेय’ — कुंती का पुत्र। ये शब्द ज़्यादातर पौराणिक और साहित्यिक संदर्भों से आते हैं, और इनकी पहचान यह है कि जुड़ते समय मूल शब्द का पहला स्वर अक्सर वृद्धि पाकर लंबा हो जाता है — कुरु से कौ, रघु से रा, कुंती से कौं।

अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द

  • पांडवपांडु + अ
  • कौरवकुरु + अ
  • राघवरघु + अ
  • मानवमनु + अ
  • वासुदेववसुदेव + अ
  • दैत्यदिति + य
  • आदित्यअदिति + य
  • दाशरथिदशरथ + इ
  • जानकीजनक + ई
  • कौंतेयकुंती + एय
  • राधेयराधा + एय
  • गांगेयगंगा + एय
  • भागिनेयभगिनी + एय

गुणवाचक तद्धित प्रत्यय

जब प्रत्यय लगकर किसी नाम-शब्द को विशेषण बना दे और उसमें कोई गुण जोड़ दे, तब वह गुणवाचक तद्धित होता है। ‘धन’ से ‘धनवान’ — जिसके पास धन है। ‘बुद्धि’ से ‘बुद्धिमान’ — जिसके पास बुद्धि है। ‘रस’ से ‘रसीला’ — जिसमें रस भरा हो। ‘दया’ से ‘दयालु’ — जिसमें दया हो। और इसका उलटा भी होता है — ‘बल’ से ‘बलहीन’, यानी जिसमें बल न हो। इसलिए गुणवाचक प्रत्यय गुण की मौजूदगी भी बताते हैं और उसकी गैरमौजूदगी भी।

गुणवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द

  • धनवानधन + वान
  • गुणवानगुण + वान
  • बलवानबल + वान
  • रूपवानरूप + वान
  • भाग्यवानभाग्य + वान
  • बुद्धिमानबुद्धि + मान
  • शक्तिमानशक्ति + मान
  • श्रीमान्श्री + मान्
  • गतिमानगति + मान
  • क्रोधीक्रोध + ई
  • गुणीगुण + ई
  • रोगीरोग + ई
  • लोभीलोभ + ई
  • ज्ञानीज्ञान + ई
  • धनीधन + ई
  • दानीदान + ई
  • पीड़ितपीड़ा + इत
  • आनंदितआनंद + इत
  • हर्षितहर्ष + इत
  • लज्जितलज्जा + इत
  • फलितफल + इत
  • रसीलारस + ईला
  • चमकीलाचमक + ईला
  • रंगीलारंग + ईला
  • नुकीलानोक + ईला
  • सजीलासज + ईला
  • जहरीलाजहर + ईला
  • विषैलाविष + ऐला
  • कसैलाकस + ऐला
  • दयालुदया + आलु
  • कृपालुकृपा + आलु
  • श्रद्धालुश्रद्धा + आलु
  • शंकालुशंका + आलु
  • मायावीमाया + वी
  • तपस्वीतपस् + वी
  • बलहीनबल + हीन
  • धनहीनधन + हीन
  • गुणहीनगुण + हीन

स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय

जब प्रत्यय लगकर यह बताए कि व्यक्ति या वस्तु किस स्थान की है, तब वह स्थानवाचक तद्धित होता है। ‘जयपुर’ से ‘जयपुरी’, ‘मारवाड़’ से ‘मारवाड़ी’, ‘ग्राम’ से ‘ग्रामीण’, ‘देहात’ से ‘देहाती’। राजस्थान की परीक्षाओं में यह उपभेद इसलिए भी काम का है क्योंकि यहाँ के अंचलों और शहरों के नाम से बने शब्द रोज़ की भाषा में चलते हैं — मेवाड़ी, हाड़ौती, ढूँढाड़ी, बीकानेरी।

स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द

  • जयपुरीजयपुर + ई
  • जोधपुरीजोधपुर + ई
  • बीकानेरीबीकानेर + ई
  • उदयपुरीउदयपुर + ई
  • मारवाड़ीमारवाड़ + ई
  • मेवाड़ीमेवाड़ + ई
  • राजस्थानीराजस्थान + ई
  • पंजाबीपंजाब + ई
  • गुजरातीगुजरात + ई
  • बंगालीबंगाल + ई
  • बनारसीबनारस + ई
  • शहरीशहर + ई
  • देहातीदेहात + ई
  • ग्रामीणग्राम + ईण

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'पांडव' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?

  1. Aसंबंधवाचक तद्धित
  2. Bगुणवाचक तद्धित
  3. Cअपत्यवाचक तद्धित
  4. Dभाववाचक तद्धित

व्याख्या

यह शब्द बताता है कि व्यक्ति पांडु की संतान है। संतान या वंशज का बोध कराने वाला प्रत्यय अपत्यवाचक तद्धित कहलाता है, और जुड़ते समय मूल स्वर वृद्धि पा जाता है।

प्रश्न 2

'डिबिया' शब्द में 'इया' प्रत्यय किसका बोध कराता है?

  1. Aलघुता या छोटेपन का
  2. Bस्त्रीलिंग का
  3. Cस्थान का
  4. Dभाव का

व्याख्या

ऊन का अर्थ है कम या छोटा। ‘डिब्बा’ से ‘डिबिया’ यानी छोटा डिब्बा बना, इसलिए यह ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय है। खटिया और लुटिया भी इसी तरह बने हैं।

प्रश्न 3

'लेखक' का स्त्रीलिंग रूप बनाने में कौन सा प्रत्यय लगता है?

  1. Aई
  2. Bइन
  3. Cआनी
  4. Dइका

व्याख्या

‘अक’ में समाप्त होने वाले तत्सम शब्दों का स्त्रीलिंग ‘इका’ प्रत्यय से बनता है। इसी नियम से नायक से नायिका, सेवक से सेविका और बालक से बालिका बनते हैं।

प्रश्न 4

'धनवान' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?

  1. Aभाववाचक तद्धित
  2. Bगुणवाचक तद्धित
  3. Cकर्तृवाचक तद्धित
  4. Dस्थानवाचक तद्धित

व्याख्या

‘धन’ संज्ञा के पीछे ‘वान’ लगकर विशेषण बना है जो बताता है कि उसमें धन का गुण मौजूद है। गुण का बोध कराने वाला प्रत्यय गुणवाचक तद्धित कहलाता है।

प्रश्न 5

'ग्रामीण' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?

  1. Aगुणवाचक तद्धित
  2. Bभाववाचक तद्धित
  3. Cअपत्यवाचक तद्धित
  4. Dस्थानवाचक तद्धित

व्याख्या

‘ग्राम’ संज्ञा के पीछे ‘ईण’ लगकर यह बताया गया है कि व्यक्ति या वस्तु गाँव की है। स्थान से संबंध बताने वाला प्रत्यय स्थानवाचक तद्धित कहलाता है।

प्रश्न 6

'शेरनी' शब्द में लगा प्रत्यय किस प्रकार का है?

  1. Aऊनवाचक तद्धित
  2. Bकरणवाचक कृत्
  3. Cस्त्रीबोधक तद्धित
  4. Dगुणवाचक तद्धित

व्याख्या

‘शेर’ पुल्लिंग संज्ञा के पीछे ‘नी’ लगकर उसका स्त्रीलिंग रूप बना है। जानवरों के नामों में स्त्रीलिंग प्रायः इसी प्रत्यय से बनता है, जैसे मोरनी और ऊँटनी।