तद्धित प्रत्यय — पहले तीन उपभेद
तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगते हैं — धातु के नहीं, यही कृत् से इसका मूल अंतर है। इसके आठ उपभेद हैं। यह पेज पहले तीन लेता है: कर्तृवाचक, भाववाचक और संबंधवाचक, कुल 100 शब्द।
तद्धित प्रत्यय — संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगने वाले प्रत्यय
तद्धित प्रत्यय वे हैं जो धातु से नहीं, बल्कि पहले से बने हुए नाम-शब्दों से जुड़ते हैं — यानी संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से। ‘मनुष्य’ संज्ञा है, उसके पीछे ‘ता’ लगाकर ‘मनुष्यता’ बनाया। ‘सुंदर’ विशेषण है, उसके पीछे ‘ता’ लगाकर ‘सुंदरता’ बनाया। ‘भारत’ नाम है, उसके पीछे ‘ईय’ लगाकर ‘भारतीय’ बनाया। इन तीनों में कहीं भी कोई क्रिया नहीं है, इसीलिए ये सब तद्धित हैं।
तद्धित का दायरा कृत् से बड़ा है, क्योंकि नाम-शब्द क्रिया से कहीं ज़्यादा हैं। परीक्षा की दृष्टि से इसके आठ उपभेद पढ़े जाते हैं, और हर उपभेद यह बताता है कि नया बना शब्द किस बात की ओर इशारा कर रहा है — करने वाले की, भाव की, संबंध की, छोटेपन की, स्त्रीलिंग की, संतान की, गुण की, या स्थान की। नीचे हर उपभेद अलग-अलग समझाया गया है।
तद्धित प्रत्यय के आठ उपभेद
| उपभेद | क्या बताता है | प्रमुख प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कर्तृवाचक तद्धित | काम या पेशा करने वाला | आर, कार, वाला, हारा, एरा, दार, गर, ची | सुनार, चित्रकार, लकड़हारा |
| भाववाचक तद्धित | भाव, गुण या अवस्था | ता, त्व, पन, पा, ई, आई, इमा, य, आस | सुंदरता, बचपन, लालिमा |
| संबंधवाचक तद्धित | किससे संबंध है | इक, ईय, एरा, आल, हाल, ओई | सामाजिक, भारतीय, चचेरा |
| ऊनवाचक तद्धित | छोटापन या लघुता | इया, ई, ओला, ड़ा | डिबिया, घंटी, खटोला |
| स्त्रीबोधक तद्धित | स्त्रीलिंग रूप | ई, आ, इका, आनी, इन, नी, त्री | देवी, बालिका, शेरनी |
| अपत्यवाचक तद्धित | संतान या वंशज | अ, इ, य, ई, एय | पांडव, राघव, कौंतेय |
| गुणवाचक तद्धित | गुण या विशेषता | वान, मान, ई, इत, ईला, आलु, हीन | धनवान, रसीला, दयालु |
| स्थानवाचक तद्धित | स्थान से संबंध | ई, ईण, इया | जयपुरी, ग्रामीण, देहाती |
कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
जब किसी नाम-शब्द के पीछे प्रत्यय लगकर वह काम या पेशा करने वाले व्यक्ति को बताए, तब वह कर्तृवाचक तद्धित होता है। ‘सोना’ से ‘सुनार’, ‘लोहा’ से ‘लुहार’, ‘चित्र’ से ‘चित्रकार’, ‘दुकान’ से ‘दुकानदार’। ध्यान दीजिए, यहाँ मूल शब्द कोई क्रिया नहीं है बल्कि कोई वस्तु या काम का नाम है — इसीलिए यह कृत् नहीं, तद्धित है। ‘लेखक’ और ‘चित्रकार’ दोनों करने वाले को बताते हैं, पर पहला कृत् है क्योंकि ‘लिख’ धातु है, और दूसरा तद्धित है क्योंकि ‘चित्र’ संज्ञा है।
कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द
- सुनारसोना + आर
- लुहारलोहा + आर
- कुम्हारकुंभ + आर
- चित्रकारचित्र + कार
- कलाकारकला + कार
- पत्रकारपत्र + कार
- नाटककारनाटक + कार
- ग्रंथकारग्रंथ + कार
- शिल्पकारशिल्प + कार
- दूधवालादूध + वाला
- गाड़ीवालागाड़ी + वाला
- फलवालाफल + वाला
- टोपीवालाटोपी + वाला
- लकड़हारालकड़ी + हारा
- पनिहारापानी + हारा
- सपेरासाँप + एरा
- लुटेरालूट + एरा
- ठठेराठठ + एरा
- कसेराकाँसा + एरा
- दुकानदारदुकान + दार
- थानेदारथाना + दार
- चौकीदारचौकी + दार
- हिस्सेदारहिस्सा + दार
- ज़मींदारज़मीन + दार
- जादूगरजादू + गर
- कारीगरकारी + गर
- सौदागरसौदा + गर
- तोपचीतोप + ची
- मशालचीमशाल + ची
- तेलीतेल + ई
भाववाचक तद्धित प्रत्यय
यह तद्धित का सबसे बड़ा उपभेद है और परीक्षा में सबसे ज़्यादा यहीं से पूछा जाता है। जब किसी संज्ञा या विशेषण के पीछे प्रत्यय लगकर वह भाव, गुण या अवस्था बताए, तब वह भाववाचक तद्धित होता है। ‘सुंदर’ से ‘सुंदरता’, ‘बच्चा’ से ‘बचपन’, ‘बूढ़ा’ से ‘बुढ़ापा’, ‘लाल’ से ‘लालिमा’, ‘मीठा’ से ‘मिठास’। इन सब में एक गुण को पकड़कर उसे संज्ञा बना दिया गया है।
इस उपभेद में एक बात खास ध्यान देने लायक है। ‘आई’ और ‘आहट’ जैसे प्रत्यय कृत् में भी आते हैं और तद्धित में भी। ‘लिखाई’ कृत् है क्योंकि ‘लिख’ धातु है, पर ‘भलाई’ तद्धित है क्योंकि ‘भला’ विशेषण है। इसी तरह ‘घबराहट’ कृत् है पर ‘कड़वाहट’ तद्धित, क्योंकि ‘कड़वा’ विशेषण है। यही अंतर आगे के भाग में विस्तार से समझाया गया है।
भाववाचक तद्धित — ता, त्व, पन और पा से बने शब्द
- सुंदरतासुंदर + ता
- मनुष्यतामनुष्य + ता
- मित्रतामित्र + ता
- वीरतावीर + ता
- नम्रतानम्र + ता
- मूर्खतामूर्ख + ता
- लघुतालघु + ता
- प्रभुताप्रभु + ता
- महत्वमहत् + त्व
- गुरुत्वगुरु + त्व
- लघुत्वलघु + त्व
- मनुष्यत्वमनुष्य + त्व
- पुरुषत्वपुरुष + त्व
- देवत्वदेव + त्व
- बचपनबच्चा + पन
- लड़कपनलड़का + पन
- अपनापनअपना + पन
- पागलपनपागल + पन
- बड़प्पनबड़ा + पनजुड़ते समय ‘प’ दोहरा हो गया
- बुढ़ापाबूढ़ा + पा
- मोटापामोटा + पा
भाववाचक तद्धित — ई, आई, इमा, य और आस से बने शब्द
- गरीबीगरीब + ई
- गर्मीगर्म + ई
- सर्दीसर्द + ई
- खुशीखुश + ई
- दोस्तीदोस्त + ई
- बेईमानीबेईमान + ई
- भलाईभला + आई
- बुराईबुरा + आई
- चतुराईचतुर + आई
- ऊँचाईऊँचा + आई
- लंबाईलंबा + आई
- मोटाईमोटा + आई
- गहराईगहरा + आई
- चौड़ाईचौड़ा + आई
- लालिमालाल + इमा
- गरिमागुरु + इमा
- महिमामहत् + इमा
- नीलिमानील + इमा
- अरुणिमाअरुण + इमा
- कालिमाकाल + इमा
- सौंदर्यसुंदर + य
- माधुर्यमधुर + य
- धैर्यधीर + य
- चातुर्यचतुर + य
- मिठासमीठा + आस
- खटासखट्टा + आस
- कड़वाहटकड़वा + आहट
संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय
जब प्रत्यय लगकर यह बताए कि शब्द किससे संबंधित है, तब वह संबंधवाचक तद्धित होता है। ‘समाज’ से ‘सामाजिक’ — समाज से संबंध रखने वाला। ‘भारत’ से ‘भारतीय’ — भारत से संबंध रखने वाला। ‘चाचा’ से ‘चचेरा’ — चाचा के रिश्ते का। ‘ससुर’ से ‘ससुराल’ — ससुर का घर। रिश्तों के नाम और औपचारिक-सरकारी भाषा के बहुत-से शब्द इसी वर्ग से आते हैं, इसलिए यह उपभेद परीक्षा में बार-बार दिखता है।
संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय से बने शब्द
- सामाजिकसमाज + इक
- धार्मिकधर्म + इक
- ऐतिहासिकइतिहास + इक
- दैनिकदिन + इक
- मासिकमास + इक
- वार्षिकवर्ष + इक
- शारीरिकशरीर + इक
- राजनीतिकराजनीति + इक
- मानसिकमन + इक
- प्रारंभिकप्रारंभ + इक
- भारतीयभारत + ईय
- राष्ट्रीयराष्ट्र + ईय
- नाटकीयनाटक + ईय
- पर्वतीयपर्वत + ईय
- जातीयजाति + ईय
- चचेराचाचा + एरा
- ममेरामामा + एरा
- फुफेराफूफा + एरा
- मौसेरामौसा + एरा
- ससुरालससुर + आल
- ननिहालनाना + हाल
- ननदोईननद + ओई
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'भलाई' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय किस वर्ग का है?
- Aकृत्
- Bतद्धित
- Cउपसर्ग
- Dविदेशी
व्याख्या
प्रत्यय ‘आई’ हटाने पर ‘भला’ बचता है जो विशेषण है, धातु नहीं। ‘भलाना’ कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए यह तद्धित प्रत्यय है। यही ‘आई’ ‘लिखाई’ में कृत् होता है क्योंकि वहाँ ‘लिख’ धातु है।
प्रश्न 2
'मिठास' शब्द का सही विग्रह क्या है?
- Aमीठा + आस
- Bमिठ + आस
- Cमीठ + आस
- Dमिठा + स
व्याख्या
विग्रह में मूल शब्द का पूरा रूप लिखा जाता है, घिसा हुआ रूप नहीं। ‘मीठा’ विशेषण के पीछे भाववाचक तद्धित प्रत्यय ‘आस’ लगा है और जुड़ते समय ‘ई’ छोटी होकर ‘इ’ हो गई।
प्रश्न 3
'बुढ़ापा' में कौन सा प्रत्यय है और वह किस वर्ग का है?
- Aआपा — कृत्
- Bपा — कृत्
- Cपा — तद्धित
- Dड़ा — तद्धित
व्याख्या
मूल शब्द ‘बूढ़ा’ विशेषण है और उसके पीछे भाववाचक तद्धित प्रत्यय ‘पा’ लगा है। ‘बूढ़ाना’ कोई क्रिया नहीं बनती, इसलिए यह कृत् नहीं हो सकता।
प्रश्न 4
'लालिमा' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
- Aइमा
- Bमा
- Cलिमा
- Dइम
व्याख्या
‘लाल’ विशेषण के पीछे ‘इमा’ प्रत्यय लगकर भाववाचक संज्ञा बनी है। यही प्रत्यय नीलिमा, कालिमा और अरुणिमा में भी उसी तरह लगा है।
प्रश्न 5
'चचेरा' शब्द में लगा प्रत्यय किस उपभेद का है?
- Aअपत्यवाचक तद्धित
- Bसंबंधवाचक तद्धित
- Cगुणवाचक तद्धित
- Dऊनवाचक तद्धित
व्याख्या
‘चाचा’ संज्ञा के पीछे ‘एरा’ लगकर यह बताया गया है कि रिश्ता चाचा से है। जो प्रत्यय संबंध का बोध कराए वह संबंधवाचक तद्धित होता है। अपत्यवाचक प्रत्यय संतान बताता है, संबंध नहीं।
प्रश्न 6
'सामाजिक' शब्द का सही विग्रह क्या है?
- Aसामाज + इक
- Bसमाजि + क
- Cसमाज + इक
- Dसामा + जिक
व्याख्या
विग्रह में मूल संज्ञा ‘समाज’ लिखी जाती है। ‘इक’ प्रत्यय जुड़ते समय पहला स्वर वृद्धि पाकर ‘आ’ हो जाता है, जिससे ‘सामाजिक’ रूप बनता है। यह संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय है।
प्रश्न 7
तद्धित प्रत्यय से बने शब्द को क्या कहते हैं?
- Aकृदंत
- Bतद्धितांत
- Cसमस्त पद
- Dसन्धियुक्त पद
व्याख्या
कृत् प्रत्यय से बने शब्द को कृदंत और तद्धित प्रत्यय से बने शब्द को तद्धितांत कहा जाता है। यह केवल नाम का भेद है, नियम वही रहता है।