कृत् प्रत्यय
कृत् प्रत्यय धातु यानी क्रिया के मूल रूप के पीछे लगते हैं, और उससे संज्ञा या विशेषण बना देते हैं। पाँच उपभेद हैं और पाँचों की पहचान अलग है। यहाँ तालिका के साथ 117 शब्द दिए गए हैं, हर शब्द मूल और प्रत्यय में अलग करके।
कृत् प्रत्यय — धातु के पीछे लगने वाले प्रत्यय
कृत् प्रत्यय धातु के पीछे लगते हैं और क्रिया से संज्ञा या विशेषण बना देते हैं। ‘कृत्’ शब्द स्वयं ‘कृ’ धातु से बना है, जिसका अर्थ करना है — यानी जो करने से जुड़े शब्द बनाए। इनसे बने शब्द कभी काम करने वाले को बताते हैं, कभी उस चीज को जिस पर काम हुआ, कभी उस साधन को जिससे काम हुआ, कभी काम के भाव को, और कभी खुद काम के नाम को। इसी आधार पर कृत् प्रत्यय के पाँच उपभेद किए जाते हैं।
कृत् प्रत्यय के पाँच उपभेद
| उपभेद | क्या बताता है | प्रमुख प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कर्तृवाचक कृत् | काम करने वाला | अक, ता, वाला, हार, आकू, इयल, ऊ | लेखक, दाता, होनहार |
| कर्मवाचक कृत् | जिस पर काम किया जाए | औना, नीय, य | खिलौना, पठनीय, पूज्य |
| करणवाचक कृत् | जिससे काम किया जाए | नी, अन, आ, ऊ | कतरनी, बेलन, झाड़ू |
| भाववाचक कृत् | काम का भाव या क्रिया-संज्ञा | आई, आवट, आहट, अन, ति, आव, आवा | पढ़ाई, सजावट, घबराहट |
| क्रियार्थक कृत् | क्रिया का नाम, यानी क्रियार्थक संज्ञा | ना | पढ़ना, लिखना, दौड़ना |
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय
जब प्रत्यय जुड़ने के बाद शब्द यह बताए कि काम कौन कर रहा है, तब वह कर्तृवाचक कृत् कहलाता है। ‘पढ़’ धातु से ‘पाठक’ बना — यानी पढ़ने वाला। ‘गा’ से ‘गायक’ — यानी गाने वाला। हिंदी में ‘वाला’ और ‘हार’ भी इसी काम के लिए लगते हैं — लिखनेवाला, होनहार, राखनहार। ध्यान दीजिए कि ये सब व्यक्ति या कर्ता की ओर इशारा करते हैं, काम की ओर नहीं।
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय से बने शब्द
- लेखकलिख + अक
- पाठकपठ + अक
- गायकगै + अक
- नायकनी + अक
- दर्शकदृश् + अक
- सेवकसेव + अक
- शासकशास् + अक
- चालकचल + अक
- पालकपाल + अक
- दातादा + ता
- ज्ञाताज्ञा + ता
- कर्ताकृ + ता
- नेतानी + ता
- वक्तावच् + ता
- श्रोताश्रु + ता
- विजेतावि + जि + ता
- लिखनेवालालिखने + वाला
- पढ़नेवालापढ़ने + वाला
- गानेवालागाने + वाला
- होनहारहो + नहार
- राखनहारराख + नहार
- सृजनहारसृजन + हार
- लड़ाकूलड़ + आकू
- पढ़ाकूपढ़ + आकू
- तैराकतैर + आक
- अड़ियलअड़ + इयल
- मरियलमर + इयल
- सड़ियलसड़ + इयल
- कमाऊकमा + ऊ
- बिकाऊबिक + आऊ
- टिकाऊटिक + आऊ
- गवैयागा + ऐया
कर्मवाचक कृत् प्रत्यय
जब प्रत्यय लगने पर शब्द उस वस्तु को बताए जिस पर काम किया जाता है, तब वह कर्मवाचक कृत् होता है। ‘खेल’ धातु से ‘खिलौना’ बना — वह चीज जिससे खेला जाता है। ‘पठ’ से ‘पठनीय’ बना — वह जिसे पढ़ा जाना चाहिए। ‘पूज’ से ‘पूज्य’ बना — वह जिसकी पूजा की जानी चाहिए। इन शब्दों में हमेशा एक भाव छिपा रहता है — ‘जिसे किया जाए’।
कर्मवाचक कृत् प्रत्यय से बने शब्द
- खिलौनाखेल + औना
- बिछौनाबिछ + औना
- पठनीयपठ + अनीय
- पूजनीयपूज + अनीय
- दर्शनीयदृश् + अनीय
- श्रवणीयश्रु + अनीय
- वंदनीयवंद + अनीय
- स्मरणीयस्मृ + अनीय
- आदरणीयआदर + अनीय
- पूज्यपूज + य
- गेयगै + य
- देयदा + य
- श्रव्यश्रु + य
- कार्यकृ + य
- पेयपा + य
करणवाचक कृत् प्रत्यय
करण का अर्थ है साधन। जब प्रत्यय लगने पर शब्द वह औजार या साधन बताए जिससे काम किया जाता है, तब वह करणवाचक कृत् होता है। ‘कतर’ से ‘कतरनी’ — जिससे कतरा जाए। ‘छल’ से ‘छलनी’ — जिससे छाना जाए। ‘झाड़’ से ‘झाड़ू’ — जिससे झाड़ा जाए। घर के रोज़ काम आने वाले ज़्यादातर औजारों के नाम इसी तरह बने हैं, इसलिए ये याद रखने में आसान भी हैं।
करणवाचक कृत् प्रत्यय से बने शब्द
- कतरनीकतर + नी
- छलनीछल + नी
- बेलनीबेल + नी
- धौंकनीधौंक + नी
- ओढ़नीओढ़ + नी
- मथनीमथ + नी
- फुँकनीफुँक + नी
- लेखनीलिख + अनी
- झाड़ूझाड़ + ऊ
- बेलनबेल + अन
- झाड़नझाड़ + अन
- ढक्कनढक + अन
- झूलाझूल + आ
- ठेलाठेल + आ
- रेतीरेत + ई
भाववाचक कृत् प्रत्यय
यह कृत् प्रत्यय का सबसे बड़ा और सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला उपभेद है। जब प्रत्यय लगने पर शब्द काम करने वाले को नहीं, बल्कि काम के भाव को बताए — यानी क्रिया खुद एक संज्ञा बन जाए — तब वह भाववाचक कृत् होता है। ‘पढ़’ से ‘पढ़ाई’, ‘सज’ से ‘सजावट’, ‘घबरा’ से ‘घबराहट’, ‘बह’ से ‘बहाव’, ‘चढ़’ से ‘चढ़ावा’। इन शब्दों में कोई व्यक्ति नहीं है, कोई औजार नहीं है — सिर्फ़ काम है और उसका भाव है।
भाववाचक कृत् — आई, आवट और आहट से बने शब्द
- पढ़ाईपढ़ + आई
- लिखाईलिख + आई
- कमाईकमा + आई
- चढ़ाईचढ़ + आई
- सिलाईसिल + आई
- कटाईकट + आई
- बुनाईबुन + आई
- दिखाईदिख + आई
- सजावटसज + आवट
- बनावटबन + आवट
- लिखावटलिख + आवट
- थकावटथक + आवट
- मिलावटमिल + आवट
- रुकावटरुक + आवट
- घबराहटघबरा + आहट
- चिल्लाहटचिल्ला + आहट
- मुस्कराहटमुस्करा + आहट
- झनझनाहटझनझना + आहट
- गुर्राहटगुर्रा + आहट
भाववाचक कृत् — अन, ति, अ, आव और आवा से बने शब्द
- लेखनलिख + अन
- पठनपठ + अन
- गमनगम् + अन
- दर्शनदृश् + अन
- मिलनमिल + अन
- चलनचल + अन
- हवनहु + अन
- गतिगम् + ति
- मतिमन् + ति
- शक्तिशक् + ति
- भक्तिभज् + ति
- लेखलिख + अ
- खेलखेल + अ
- मारमार + अ
- बहावबह + आव
- चढ़ावचढ़ + आव
- घुमावघुम + आव
- बचावबच + आव
- फैलावफैल + आव
- खिंचावखिंच + आव
- चढ़ावाचढ़ + आवा
- बुलावाबुल + आवा
- दिखावादिख + आवा
- छलावाछल + आवा
- हँसीहँस + ई
- बोलीबोल + ई
क्रियार्थक कृत् प्रत्यय
जब धातु के पीछे ‘ना’ लगकर क्रिया का नाम बन जाए, तब वह क्रियार्थक कृत् कहलाता है। ‘पढ़’ से ‘पढ़ना’, ‘लिख’ से ‘लिखना’, ‘दौड़’ से ‘दौड़ना’। ऐसे शब्द वाक्य में संज्ञा की तरह काम करते हैं — ‘पढ़ना अच्छी आदत है’ में ‘पढ़ना’ कर्ता है, क्रिया नहीं। इसीलिए इन्हें क्रियार्थक संज्ञा भी कहा जाता है। यह उपभेद छोटा है, इसमें मुख्य रूप से एक ही प्रत्यय ‘ना’ आता है, इसलिए इसे याद रखना सबसे आसान है।
क्रियार्थक कृत् प्रत्यय से बने शब्द
- पढ़नापढ़ + ना
- लिखनालिख + ना
- चलनाचल + ना
- दौड़नादौड़ + ना
- खेलनाखेल + ना
- सोनासो + ना
- गानागा + ना
- हँसनाहँस + ना
- उठनाउठ + ना
- बैठनाबैठ + ना
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'लेखक' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
- Aक
- Bआक
- Cइक
- Dअक
व्याख्या
‘लिख’ धातु के पीछे ‘अक’ प्रत्यय लगकर काम करने वाले का बोध हुआ, इसलिए यह कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय है। जुड़ते समय ‘इ’ का ‘ए’ हो गया, जिससे ‘लेखक’ रूप बना।
प्रश्न 2
कृत् प्रत्यय किसके पीछे लगता है?
- Aधातु के
- Bसंज्ञा के
- Cविशेषण के
- Dसर्वनाम के
व्याख्या
कृत् प्रत्यय की परिभाषा ही यही है कि वह क्रिया के मूल रूप यानी धातु के पीछे लगता है और उससे बने शब्द को कृदंत कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के पीछे लगने वाला प्रत्यय तद्धित कहलाता है।
प्रश्न 3
'खिलौना' शब्द में प्रयुक्त कृत् प्रत्यय का उपभेद कौन सा है?
- Aकर्तृवाचक कृत्
- Bकर्मवाचक कृत्
- Cकरणवाचक कृत्
- Dभाववाचक कृत्
व्याख्या
‘खेल’ धातु से बना यह शब्द उस वस्तु को बताता है जिसे खेला जाता है, यानी जो काम का कर्म बने। जो प्रत्यय कर्म का बोध कराए वह कर्मवाचक कृत् कहलाता है।
प्रश्न 4
'कतरनी' शब्द किस उपभेद का उदाहरण है?
- Aकर्मवाचक कृत्
- Bभाववाचक कृत्
- Cकर्तृवाचक तद्धित
- Dकरणवाचक कृत्
व्याख्या
यह शब्द उस साधन को बताता है जिससे कतरने का काम किया जाता है। करण का अर्थ साधन है, इसलिए साधन बताने वाला प्रत्यय करणवाचक कृत् कहलाता है।
प्रश्न 5
'सजावट' शब्द किस वर्ग का उदाहरण है?
- Aभाववाचक तद्धित
- Bकरणवाचक कृत्
- Cकर्तृवाचक कृत्
- Dभाववाचक कृत्
व्याख्या
‘सज’ के आगे ‘ना’ लगाने पर ‘सजना’ क्रिया बनती है, इसलिए यह धातु है और प्रत्यय कृत् है। शब्द काम करने वाले को नहीं बल्कि काम के भाव को बता रहा है, इसलिए भाववाचक कृत्।
प्रश्न 6
'पढ़ना' शब्द किस उपभेद का उदाहरण है?
- Aभाववाचक कृत्
- Bक्रियार्थक कृत्
- Cकर्मवाचक कृत्
- Dकर्तृवाचक कृत्
व्याख्या
‘पढ़’ धातु के पीछे ‘ना’ लगकर क्रिया का नाम बना है, जो वाक्य में संज्ञा की तरह काम करता है। ऐसे रूप को क्रियार्थक संज्ञा और उसके प्रत्यय को क्रियार्थक कृत् कहते हैं।
प्रश्न 7
'माननीय' शब्द के बारे में कौन सा कथन सही है?
- Aइसमें 'मान' प्रत्यय लगा है
- Bइसमें 'नीय' उपसर्ग लगा है
- Cइसमें 'अनीय' प्रत्यय लगा है
- Dइसमें कोई प्रत्यय नहीं है
व्याख्या
‘मान’ धातु के पीछे ‘अनीय’ प्रत्यय लगा है, जो बताता है कि वह मान के योग्य है। शब्द के अंत में लगने के कारण यह प्रत्यय है, उपसर्ग नहीं — उपसर्ग हमेशा आगे लगता है।