मुहावरे — क से झ तक
क-वर्ग से झ तक के 68 मुहावरे। मुहावरों की संख्या के हिसाब से यह चारों हिस्सों में दूसरा सबसे बड़ा समूह है, इसलिए इसे दो बैठकों में बाँटकर पढ़ना ज़्यादा आसान रहता है।
'क' से आरंभ होने वाले मुहावरे
ककठपुतली बनना
दूसरे के इशारे पर चलना
सरपंच अब ठेकेदार की कठपुतली बन चुका है।
कमर कसना
तैयार हो जाना
तिथि घोषित होते ही उसने कमर कस ली।
कमर टूटना
हिम्मत जाती रहना
ओलावृष्टि ने पूरी फसल चौपट कर दी और किसानों की कमर टूट गई।
कलेजा मुँह को आना
अत्यधिक घबरा जाना
ट्रक को सामने आते देखकर कलेजा मुँह को आ गया।
कलेजे पर पत्थर रखना
दुख को भीतर दबा लेना
बेटी को विदा करते समय माँ ने कलेजे पर पत्थर रख लिया।
काँटा निकलना
बाधा दूर होना
मुकदमा समाप्त हुआ तो पूरे परिवार का काँटा निकल गया।
कान उमेठना
चेतावनी देना, दंड देकर सुधारना
नकल करते पकड़े जाने पर अध्यापक ने कान उमेठ दिए।
कान काटना
किसी से बढ़ जाना, मात दे देना
गणित में यह बालक बड़े-बड़ों के कान काटता है।
कान खड़े होना
सचेत हो जाना
पेपर लीक की खबर सुनते ही सबके कान खड़े हो गए।
कान पर जूँ न रेंगना
कहने पर भी ध्यान न देना
तीन बार समझाया, पर उसके कान पर जूँ न रेंगी।
कान भरना
किसी के विरुद्ध चुगली करना
किसी ने पिताजी के कान भर दिए और उसकी छुट्टी बंद हो गई।
काम तमाम करना
मार डालना या समाप्त कर देना
एक ही वार में शिकारी ने तेंदुए का काम तमाम कर दिया।
किताबी कीड़ा होना
केवल पुस्तकों में डूबा रहना
वह किताबी कीड़ा है, पर व्यवहार में कच्चा रह गया।
किरकिरा होना
आनंद में बाधा पड़ना
वर्षा से पूरा आयोजन किरकिरा हो गया।
किस्मत का धनी होना
बड़भागी होना
पहले ही प्रयास में चयन हो गया, वह सचमुच किस्मत का धनी है।
कीचड़ उछालना
बदनाम करना
हार के बाद वे जीतने वाले पर कीचड़ उछालने लगे।
कुआँ खोदना
किसी का अहित करने का यत्न करना
पड़ोसी की शिकायत करवाकर वह महीनों उसके लिए कुआँ खोदता रहा।
कुत्ते की मौत मरना
बहुत बुरी तरह मरना
अपराध के रास्ते चलकर वह अंत में कुत्ते की मौत मरा।
कोल्हू का बैल
लगातार परिश्रम करने वाला
पिताजी सुबह से रात तक कोल्हू के बैल की तरह जुटे रहते हैं।
कौड़ी-कौड़ी जोड़ना
बड़ी कठिनाई से थोड़ा-थोड़ा बचाना
माँ ने कौड़ी-कौड़ी जोड़कर फीस का इंतजाम किया।
'ख' से आरंभ होने वाले मुहावरे
खखटाई में पड़ना
काम अटक जाना
स्वीकृति न मिलने से सड़क का काम खटाई में पड़ गया।
खरी-खरी सुनाना
स्पष्ट और कड़वी बात कह देना
बहाने सुनकर प्रधानाध्यापक ने खरी-खरी सुना दी।
खाक छानना
भटकते हुए खोजना
नौकरी के लिए उसने दो साल शहरों की खाक छानी।
खाट पकड़ना
बीमार पड़कर लेट जाना
लू लगने से बाबा ने आठ दिन खाट पकड़ ली।
खाल खींचना
कठोर दंड देना
चोरी पकड़ में आने पर मालिक ने खाल खींच ली।
खिचड़ी पकाना
छिपकर सलाह-मशविरा करना
दोनों कोने में बैठे कोई खिचड़ी पका रहे थे।
खून का घूँट पीना
क्रोध को दबा लेना
अपमान सुनकर भी उसने खून का घूँट पी लिया।
खून-पसीना एक करना
कठोर परिश्रम करना
रेत में खेत तैयार करने में उसने खून-पसीना एक कर दिया।
खेत आना
युद्ध में मारा जाना
सीमा पर वह जवान लड़ते हुए खेत आया।
'ग' से आरंभ होने वाले मुहावरे
गगड़े मुर्दे उखाड़ना
बीती बातें फिर छेड़ना
समझौता हो चुका, अब गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या लाभ।
गर्दन पर छुरी फेरना
बहुत अन्याय करना
फसल के समय ऐसा भाव देना किसान की गर्दन पर छुरी फेरना है।
गले का हार होना
अत्यंत प्रिय होना
यह पोता दादी के गले का हार है।
गले पड़ना
जबरन पीछे लग जाना
बिना मतलब वह हर बात में गले पड़ जाता है।
गागर में सागर भरना
थोड़े शब्दों में बहुत कह देना
उत्तर छोटा था, पर उसने गागर में सागर भर दिया।
गाल बजाना
डींग हाँकना
काम कुछ नहीं, दिन भर गाल बजाता रहता है।
गिरगिट की तरह रंग बदलना
बार-बार बात या पक्ष बदलना
नेता जी बयान में गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
गुड़ गोबर करना
बना काम बिगाड़ देना
अंतिम क्षण की जल्दबाजी ने सारी तैयारी का गुड़ गोबर कर दिया।
गुदड़ी का लाल
निर्धन घर में जन्मा गुणी व्यक्ति
ढाणी के उस विद्यालय से निकला वह बालक सचमुच गुदड़ी का लाल है।
गोटी लाल होना
स्वार्थ सिद्ध होना
ठेका मिलते ही उसकी गोटी लाल हो गई।
'घ' से आरंभ होने वाले मुहावरे
घघर का भेदी
भीतर की बात खोलने वाला अपना व्यक्ति
योजना विफल हुई, लगता है कोई घर का भेदी था।
घाट-घाट का पानी पीना
बहुत अनुभव प्राप्त करना
वे घाट-घाट का पानी पिए हुए हैं, उन्हें बहकाना कठिन है।
घाव पर नमक छिड़कना
दुखी को और दुखी करना
असफलता पर ताना देना घाव पर नमक छिड़कना है।
घी के दिए जलाना
बहुत खुशी मनाना
बेटे के चयन पर पूरे मोहल्ले ने घी के दिए जलाए।
घुटने टेक देना
हार मान लेना
लगातार दबाव के बाद उसने घुटने टेक दिए।
घोड़े बेचकर सोना
निश्चिंत होकर सोना
परिणाम आने के बाद वह घोड़े बेचकर सोया।
'च' से आरंभ होने वाले मुहावरे
चचंपत होना
चुपचाप भाग जाना
हिसाब माँगते ही मुनीम चंपत हो गया।
चकमा देना
धोखा देकर निकल जाना
भीड़ का लाभ उठाकर जेबकतरा चकमा दे गया।
चार चाँद लगाना
शोभा बढ़ा देना
लोकगीतों ने आयोजन में चार चाँद लगा दिए।
चिकना घड़ा होना
कहने-सुनने का कोई असर न होना
जितना समझाओ, वह चिकना घड़ा है।
चींटी के पर निकलना
विनाश के लक्षण प्रकट होना
छोटी-सी हैसियत पर ऐसी अकड़ — चींटी के पर निकल आए हैं।
चुल्लू भर पानी में डूब मरना
लज्जा से गड़ जाना
ऐसी नकल पकड़े जाने पर तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
चेहरा उतर जाना
निराशा से मुरझा जाना
सूची में नाम न देखकर उसका चेहरा उतर गया।
'छ' से आरंभ होने वाले मुहावरे
छछक्के छुड़ाना
बुरी तरह हरा देना
स्थानीय टीम ने शहर की टीम के छक्के छुड़ा दिए।
छठी का दूध याद आना
अत्यंत कष्ट में पड़ जाना
पहली बार खेत में कुँए से पानी खींचा तो छठी का दूध याद आ गया।
छाती पर मूँग दलना
सामने रहकर दुख देना
विरोधी पड़ोसी बनकर रोज़ छाती पर मूँग दलता है।
छू-मंतर होना
अचानक गायब हो जाना
बरसात होते ही मैदान की भीड़ छू-मंतर हो गई।
'ज' से आरंभ होने वाले मुहावरे
जजड़ काटना
मूल रूप से नष्ट करना
बेईमानी भरोसे की जड़ काट देती है।
जबान देना
वचन देना
जबान दे दी तो निभाना ही पड़ेगा।
ज़मीन-आसमान का अंतर
बहुत बड़ा भेद
कहने और करने में ज़मीन-आसमान का अंतर है।
जले पर नमक छिड़कना
दुखी को और सताना
नुकसान के बाद ब्याज बढ़ाना जले पर नमक छिड़कना है।
जहर उगलना
कटु और द्वेषपूर्ण बातें करना
मंच से वह विरोधियों के विरुद्ध जहर उगलता रहा।
जान पर खेलना
प्राण संकट में डालकर काम करना
बाढ़ में जान पर खेलकर उसने दो बच्चों को निकाला।
जी चुराना
काम से बचना
गणित के प्रश्नों से वह हमेशा जी चुराता है।
जूते चटकाना
बेकार घूमते रहना
तैयारी छोड़कर वह दिन भर बाज़ार में जूते चटकाता है।
जौहर दिखाना
अपनी योग्यता प्रकट करना
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उसने अपना जौहर दिखाया।
'झ' से आरंभ होने वाले मुहावरे
झझंडा गाड़ना
अपनी धाक जमा देना
पहले ही वर्ष उसने कुश्ती में झंडा गाड़ दिया।
झख मारना
विवश होकर व्यर्थ काम करना
मना करने पर भी अड़ा रहा, अब झख मार रहा है।
झाँसे में आना
बहकावे में आ जाना
ऊँचे ब्याज के झाँसे में आकर उसने बचत गँवा दी।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'गागर में सागर भरना' का अर्थ है —
- Aअसंभव कार्य करना
- Bबड़ा पात्र भर देना
- Cबहुत परिश्रम करना
- Dथोड़े शब्दों में बहुत कह देना
व्याख्या
यह प्रायः प्रशंसा के भाव में आता है, विशेषकर लेखन और भाषण के संदर्भ में। इसे 'ऊँट के मुँह में जीरा' से अलग रखिए, जो कमी बताती है और लोकोक्ति है।
प्रश्न 2
'कान पर जूँ न रेंगना' का अर्थ है —
- Aरोग लग जाना
- Bगुप्त बात सुन लेना
- Cकहने पर भी ध्यान न देना
- Dबहुत सतर्क रहना
व्याख्या
इसे 'कान खड़े होना' का उलटा समझिए — वहाँ व्यक्ति सचेत होता है, यहाँ बिलकुल उपेक्षा करता है। 'कान' वाले मुहावरों का समूह बनाकर याद करना लाभदायक है।
प्रश्न 3
'घोड़े बेचकर सोना' का अर्थ है —
- Aव्यापार करना
- Bसंपत्ति बेच देना
- Cसब कुछ छोड़ देना
- Dनिश्चिंत होकर गहरी नींद सोना
व्याख्या
यहाँ घोड़े चिंता के प्रतीक हैं — चिंता बिक गई तो नींद पूरी। मुहावरों में वस्तु प्रायः भाव का प्रतीक होती है, वस्तु नहीं।