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वस्तु, बात और स्थिति से जुड़े एक शब्द

व्यक्ति के बाद दूसरी बड़ी श्रेणी — वे वाक्यांश जो किसी वस्तु, बात या स्थिति की ओर इशारा करते हैं। कुल 55 शब्द।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

जो वस्तु या जो बात — अव्यक्ति से जुड़े शब्द

दूसरा बड़ा वर्ग वस्तुओं, बातों और स्थितियों का है। यहाँ ‘अ’, ‘अन्’, ‘नि’, ‘दुर्’ जैसे उपसर्ग सबसे ज़्यादा काम आते हैं — जो न हो सके वह ‘असंभव’, जिसकी आशा न हो वह ‘अप्रत्याशित’, जो कहा न जा सके वह ‘अकथनीय’। ध्यान रखिए कि ‘-नीय’ और ‘-य’ वाले शब्द प्रायः ‘करने योग्य’ का भाव देते हैं — पठनीय यानी पढ़ने योग्य, दर्शनीय यानी देखने योग्य। इस एक सूत्र से दर्जनों शब्द अपने आप बन जाते हैं, इसलिए इस वर्ग में रटने की ज़रूरत सबसे कम है और समझने का लाभ सबसे ज़्यादा।

वस्तु, बात और स्थिति से जुड़े वाक्यांश

  • जो कभी न मरेअमर
  • जो कभी बूढ़ा न होअजर
  • जो हो न सकेअसंभव
  • जो हो सकेसंभव
  • जिसकी आशा न रही होअप्रत्याशित
  • जो कहा न जा सकेअकथनीय
  • जो देखने योग्य होदर्शनीय
  • जो पढ़ने योग्य होपठनीय
  • जो प्रशंसा के योग्य होप्रशंसनीय
  • जो त्यागने योग्य होत्याज्य
  • जो ग्रहण करने योग्य होग्राह्य
  • जो पीने योग्य होपेय
  • जो खाने योग्य होखाद्य
  • जो खाने योग्य न होअखाद्य
  • जो सुनने योग्य होश्रव्य
  • जो आँखों से देखा जा सकेदृश्य
  • जो आँखों से न दिखाई देअदृश्य
  • जिसका अनुभव किया जा सकेअनुभवगम्य
  • जो कठिनाई से मिलेदुर्लभ
  • जो सहज ही मिल जाएसुलभ
  • जिसे जीता न जा सकेअजेय
  • जिसे काटा न जा सकेअकाट्य
  • जिसे तोड़ा न जा सकेअटूट
  • जिसे नापा न जा सकेअपरिमेय
  • जिसका कोई अंत न होअनंत
  • जिसकी कोई सीमा न होअसीम
  • जिसकी गहराई नापी न जा सकेअथाह
  • जो बहुत गहरा होअगाध
  • जिसका कोई आदि न होअनादि
  • जिसका जन्म न होअजन्मा
  • जिसका कोई आकार न होनिराकार
  • जिसका आकार होसाकार
  • जो हाथ से लिखा गया होहस्तलिखित
  • जो छापा गया होमुद्रित
  • जो पहले कभी न हुआ होअभूतपूर्व
  • जो बिना सोचे-समझे किया गया होअविवेकपूर्ण
  • जिसका कोई उत्तर न होनिरुत्तर
  • जिसका कोई उपाय न होनिरुपाय
  • जिसका कोई मुकाबला न होअद्वितीय
  • जिसकी तुलना न हो सकेअतुलनीय
  • जो सबमें व्याप्त होसर्वव्यापी
  • जो सब कुछ कर सकने में समर्थ होसर्वशक्तिमान
  • जो बहुत थोड़ा होअल्प
  • जो आवश्यकता से अधिक होअतिरिक्त
  • जो अपने आप, बिना प्रयत्न के होस्वाभाविक
  • जो बनावटी होकृत्रिम
  • जो जल में उत्पन्न होजलज
  • जो पर्वत से निकलेपर्वतीय
  • जो नया-नया बना होनवनिर्मित
  • जो कभी न भूलेअविस्मरणीय
  • जो चारों ओर फैला होविस्तृत
  • जिसमें रस होसरस
  • जिसमें रस न होनीरस
  • जिसमें कोई दोष न होनिर्दोष
  • जिसमें दोष होसदोष

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘जिसे जीता न जा सके’ के लिए एक शब्द है —

  1. Aअजेय
  2. Bअजर
  3. Cअक्षय
  4. Dअटल

व्याख्या

‘जि’ धातु जीतने से जुड़ी है और ‘अ’ उपसर्ग निषेध करता है, इसलिए जो जीता न जा सके वह अजेय है। ‘अजर’ का अर्थ है जो बूढ़ा न हो, ‘अक्षय’ यानी जिसका क्षय न हो और ‘अटल’ यानी जो टले नहीं — तीनों का जीतने से कोई संबंध नहीं।

प्रश्न 2

‘जो देखने योग्य हो’ के लिए एक शब्द है —

  1. Aपठनीय
  2. Bश्रव्य
  3. Cदर्शनीय
  4. Dग्राह्य

व्याख्या

‘-नीय’ और ‘-य’ प्रत्यय ‘योग्य’ का भाव देते हैं, इसलिए देखने योग्य दर्शनीय, पढ़ने योग्य पठनीय, सुनने योग्य श्रव्य और ग्रहण करने योग्य ग्राह्य। प्रश्न में क्रिया देखने की है, इसलिए दर्शनीय ही सही है।

प्रश्न 3

‘जिसमें रस न हो’ के लिए एक शब्द है —

  1. Aसरस
  2. Bनिर्दोष
  3. Cनीरस
  4. Dविरक्त

व्याख्या

‘निर्’ उपसर्ग अभाव बताता है और ‘निर् + रस’ की संधि से नीरस बनता है। ‘सरस’ इसका उलटा है, ‘निर्दोष’ का अर्थ दोषरहित और ‘विरक्त’ का अर्थ मोह से हटा हुआ।