भ्रम पैदा करने वाले शब्द-समूह
परीक्षा विकल्पों में कभी दूर-दूर के शब्द नहीं रखती — वह एक ही समूह के चार पास-पास के शब्द रखती है और सही वाला चुनने को कहती है। ये सात समूह वही हैं जिनसे सबसे ज़्यादा प्रश्न बनते हैं।
भ्रम पैदा करने वाले समूह — यहीं अंक बनते-बिगड़ते हैं
अब तक जो सूचियाँ आपने पढ़ीं, वे आधार हैं। असली परीक्षा नीचे है। प्रश्न-पत्र बनाने वाला कभी ‘सर्वज्ञ’ के सामने ‘पुस्तकालय’ जैसा बेमेल विकल्प नहीं रखता; वह ‘सर्वज्ञ’ के साथ ‘अभिज्ञ’, ‘बहुज्ञ’ और ‘मर्मज्ञ’ रखता है — चारों सही शब्द, चारों जानने से जुड़े, पर मात्रा-भर का अंतर। इसीलिए नीचे के समूहों को सूची की तरह नहीं, आमने-सामने की तुलना की तरह पढ़िए। हर तालिका में शब्द के साथ उसका ठीक-ठीक अर्थ दिया गया है, और वही अर्थ तय करता है कि चार में से कौन-सा विकल्प सही है।
गहराई और अंत से जुड़े शब्द — अथाह, अगाध, अनंत, असीम
| शब्द | ठीक-ठीक अर्थ | कहाँ प्रयोग होता है |
|---|---|---|
| अथाह | जिसकी थाह यानी तल न मिले | गहराई के लिए — अथाह समुद्र, अथाह दुःख |
| अगाध | जो बहुत गहरा हो | गहराई और श्रद्धा दोनों के लिए — अगाध जल, अगाध विश्वास |
| अनंत | जिसका अंत ही न हो | समय और विस्तार के लिए — अनंत काल, अनंत आकाश |
| असीम | जिसकी कोई सीमा न हो | विस्तार और भाव के लिए — असीम कृपा, असीम धैर्य |
जन्म-क्रम के शब्द — अग्रज और अनुज
| शब्द | अर्थ | संकेत |
|---|---|---|
| अग्रज | जो पहले जन्मा हो, बड़ा भाई | ‘अग्र’ यानी आगे — जो आगे जन्मा |
| अनुज | जो बाद में जन्मा हो, छोटा भाई | ‘अनु’ यानी पीछे — जो पीछे जन्मा |
| अग्रजा | बड़ी बहन | स्त्रीलिंग रूप में ‘आ’ जुड़ जाता है |
| अनुजा | छोटी बहन | स्त्रीलिंग रूप में ‘आ’ जुड़ जाता है |
इच्छा और बाध्यता — ऐच्छिक तथा अनिवार्य
| शब्द | अर्थ | वाक्य में |
|---|---|---|
| ऐच्छिक | जो अपनी इच्छा पर निर्भर हो | यह विषय ऐच्छिक है, चाहें तो छोड़ दें |
| अनिवार्य | जिसे टाला न जा सके | हिंदी का प्रश्न-पत्र सबके लिए अनिवार्य है |
| वैकल्पिक | जिसके बदले दूसरा विकल्प मौजूद हो | दो में से कोई एक चुनना वैकल्पिक व्यवस्था है |
उपकार से जुड़ी जोड़ी — कृतज्ञ और कृतघ्न
| शब्द | अर्थ | पहचानने का सूत्र |
|---|---|---|
| कृतज्ञ | जो किए हुए उपकार को मानता हो | ‘ज्ञ’ यानी जानना — उपकार को जानने वाला |
| कृतघ्न | जो किए हुए उपकार को भुला दे | ‘घ्न’ यानी नष्ट करना — उपकार को मिटा देने वाला |
| कृतकार्य | जिसका काम पूरा हो गया हो | ‘कृत’ यानी किया हुआ, ‘कार्य’ यानी काम |
जानने की मात्रा — अज्ञ से सर्वज्ञ तक
| शब्द | जानने की मात्रा |
|---|---|
| अज्ञ | जो कुछ भी न जानता हो |
| अनभिज्ञ | जिसे उस विशेष बात की जानकारी न हो |
| अल्पज्ञ | जो थोड़ा-बहुत जानता हो |
| अभिज्ञ | जिसे उस बात की जानकारी हो |
| बहुज्ञ | जो बहुत-सी बातें जानता हो |
| सर्वज्ञ | जो सब कुछ जानता हो |
भोजन और निवास — सर्वभक्षी, शाकाहारी, मांसाहारी, उभयचर
| शब्द | अर्थ | ध्यान रखिए |
|---|---|---|
| शाकाहारी | जो केवल शाक-सब्जी खाता हो | भोजन का भेद बताता है |
| मांसाहारी | जो मांस खाता हो | भोजन का भेद बताता है |
| सर्वभक्षी | जो शाक और मांस दोनों खा ले | ‘भक्षी’ यानी खाने वाला |
| उभयचर | जो जल और थल दोनों में रह सके | यह भोजन नहीं, निवास का भेद है — यही जाल है |
गहरी जानकारी के दो शब्द — मर्मज्ञ और तत्त्वज्ञ
| शब्द | अर्थ | अंतर |
|---|---|---|
| मर्मज्ञ | जो किसी विषय का भीतरी रहस्य जानता हो | बात की गहराई और बारीकी का ज्ञान |
| तत्त्वज्ञ | जो वस्तु के असली स्वरूप को जानता हो | सार और मूल तत्त्व का ज्ञान |
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘जो किए हुए उपकार को न माने’ के लिए एक शब्द है —
- Aकृतज्ञ
- Bकृतघ्न
- Cकृतकार्य
- Dकृतार्थ
व्याख्या
यहाँ पूरा भेद अंतिम अंश पर टिका है। ‘ज्ञ’ जानने का भाव देता है, इसलिए उपकार को मानने वाला कृतज्ञ; ‘घ्न’ नष्ट करने का भाव देता है, इसलिए उपकार को मिटा देने वाला कृतघ्न। ‘कृतकार्य’ और ‘कृतार्थ’ का अर्थ है जिसका काम या प्रयोजन सिद्ध हो गया हो।
प्रश्न 2
‘जो जल और थल दोनों में रह सके’ के लिए एक शब्द है —
- Aजलचर
- Bनभचर
- Cउभयचर
- Dथलचर
व्याख्या
‘उभय’ का अर्थ है दोनों और ‘चर’ का अर्थ है विचरण करने वाला, इसलिए दोनों जगह रहने वाला उभयचर कहलाता है। शेष तीनों शब्द एक-एक ही स्थान बताते हैं — जल, आकाश और थल।
प्रश्न 3
‘जिसकी गहराई नापी न जा सके’ के लिए एक शब्द है —
- Aअनंत
- Bअसीम
- Cअगाध
- Dअथाह
व्याख्या
‘थाह’ का अर्थ है तल, इसलिए जिसका तल न मिले वह अथाह। ‘अगाध’ केवल बहुत गहरे होने का भाव देता है, नापने की असंभवता का नहीं। ‘अनंत’ अंत के अभाव और ‘असीम’ सीमा के अभाव से जुड़े हैं, गहराई से नहीं।
प्रश्न 4
‘जो सब कुछ जानता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअभिज्ञ
- Bबहुज्ञ
- Cमर्मज्ञ
- Dसर्वज्ञ
व्याख्या
‘ज्ञ’ चारों में एक-सा है, भेद उसके पहले वाले अंश से बनता है। ‘सर्व’ यानी सब, इसलिए सब कुछ जानने वाला सर्वज्ञ। ‘अभिज्ञ’ किसी बात की जानकारी रखने वाला, ‘बहुज्ञ’ बहुत बातें जानने वाला और ‘मर्मज्ञ’ भीतरी रहस्य जानने वाला होता है।
प्रश्न 5
‘जो बाद में जन्मा हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअनुज
- Bअग्रज
- Cअनुजा
- Dअग्रजा
व्याख्या
‘अनु’ उपसर्ग पीछे का भाव देता है, इसलिए बाद में जन्मा हुआ अनुज। ‘अग्र’ आगे का भाव देता है, इसलिए पहले जन्मा अग्रज। ‘अनुजा’ और ‘अग्रजा’ इन्हीं के स्त्रीलिंग रूप हैं, यानी छोटी और बड़ी बहन।
प्रश्न 6
‘जिसकी कोई सीमा न हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअथाह
- Bअसीम
- Cअगाध
- Dअनादि
व्याख्या
‘सीमा’ में ‘अ’ का निषेध जुड़कर असीम बनता है। ‘अथाह’ और ‘अगाध’ गहराई की बात कहते हैं, और ‘अनादि’ का अर्थ है जिसका आरंभ ही न हो — तीनों में सीमा का भाव नहीं है।
प्रश्न 7
‘जो कुछ भी न जानता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअल्पज्ञ
- Bअज्ञ
- Cअनभिज्ञ
- Dअभिज्ञ
व्याख्या
‘ज्ञ’ के आगे केवल निषेधवाचक ‘अ’ लगने से अज्ञ बनता है, यानी जिसे कुछ भी ज्ञान न हो। ‘अल्पज्ञ’ थोड़ा जानता है, ‘अनभिज्ञ’ किसी विशेष बात से अनजान है और ‘अभिज्ञ’ तो जानकार होता है।
प्रश्न 8
‘जो शाक और मांस दोनों खा जाता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aशाकाहारी
- Bमांसाहारी
- Cउभयचर
- Dसर्वभक्षी
व्याख्या
‘भक्षी’ खाने वाले का भाव देता है और ‘सर्व’ यानी सब — इसलिए सब कुछ खा जाने वाला सर्वभक्षी। ‘उभयचर’ यहाँ सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि वह भोजन का नहीं, जल-थल दोनों में रहने का शब्द है।