मुख्य सामग्री पर जाएं

गुण-स्वभाव और धर्म-दर्शन से जुड़े एक शब्द

गुण और स्वभाव बताने वाले शब्द विशेषण की तरह काम करते हैं, और धार्मिक-दार्शनिक शब्द अकसर तत्सम होते हैं। दोनों श्रेणियाँ यहाँ हैं, कुल 60 शब्द।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

गुण और स्वभाव से संबंधित शब्द

यह वर्ग व्यक्ति के भीतर की बात कहता है — उसका मन कैसा है, वह दूसरों से कैसे पेश आता है। इन शब्दों में ‘प्रिय’, ‘शील’, ‘परायण’ और ‘लोलुप’ जैसे अंश बार-बार आते हैं। ‘शील’ स्वभाव बताता है — सुशील यानी अच्छे स्वभाव वाला। ‘परायण’ का अर्थ है जिसमें पूरी तरह लगा हुआ — कर्तव्यपरायण यानी अपने कर्तव्य में डूबा हुआ। और ‘लोलुप’ का अर्थ है जिसकी लालसा न मिटे। यहाँ परीक्षा की चाल यह है कि गुण और अवगुण को एक ही शब्द-रूप में पास-पास रख दिया जाता है, जैसे ‘सदाशय’ और ‘दुराशय’। इसलिए हर अच्छे गुण के साथ उसका उल्टा भी उसी समय याद कीजिए — दोनों एक ही प्रश्न में साथ आते हैं।

गुण-स्वभाव से जुड़े वाक्यांश

  • जिसका स्वभाव अच्छा होसुशील
  • जिसका मन साफ़ होसदाशय
  • जिसका मन मैला होदुराशय
  • जो अपने कर्तव्य में लगा रहेकर्तव्यपरायण
  • जो अपने स्वार्थ में ही लगा रहेस्वार्थी
  • जो दूसरों के लिए जिएपरमार्थी
  • जो अपनी प्रशंसा आप करेआत्मश्लाघी
  • जिसे किसी से जलन होईर्ष्यालु
  • जो सबको समान भाव से देखेसमदर्शी
  • जिसे सब प्रिय लगेसर्वप्रिय
  • जिसे कुछ भी प्रिय न लगेविरक्त
  • जो संसार से मोह रखता होआसक्त
  • जो किसी वस्तु की तीव्र लालसा रखेलोलुप
  • जो दूसरों का दुःख देखकर द्रवित होकरुणामय
  • जो दूसरों का दुःख देखकर भी न पसीजेनिर्मम
  • जो दया करता होदयालु
  • जिसमें दया न होनिर्दय
  • जो लज्जा से युक्त होलज्जाशील
  • जिसे लज्जा न आती होनिर्लज्ज
  • जो विनय से भरा होविनम्र
  • जिसमें विनय न होउद्दंड
  • जो बहुत परिश्रम करता होपरिश्रमी
  • जो काम से जी चुराएआलसी
  • जो जल्दी विश्वास कर लेभोला
  • जो किसी पर विश्वास न करेअविश्वासी
  • जो धैर्य रखता होधैर्यवान
  • जिसमें धैर्य न होअधीर
  • जो एक जगह टिककर न रहेचंचल
  • जिसका मन स्थिर होस्थिरचित्त
  • जो सदा संतुष्ट रहेसंतोषी
  • जिसे कभी संतोष न होअसंतोषी
  • जो भोजन बहुत करता होपेटू
  • जो थोड़ा खाकर रह जाएमिताहारी
  • जो बात-बात पर संदेह करेसंदेहशील
  • जो सदा सच्चा व्यवहार करेसच्चरित्र
  • जो मन में कपट रखेकपटी
  • जिसमें छल-कपट न होनिष्कपट
  • जो साहस से भरा होसाहसी
  • जो डरपोक होकायर

धार्मिक और दार्शनिक शब्द

धर्म और दर्शन से जुड़े शब्द तत्सम रूप में आते हैं, इसलिए इनकी वर्तनी पर विशेष ध्यान चाहिए। यहाँ ‘आस्तिक-नास्तिक’, ‘सगुण-निर्गुण’, ‘साकार-निराकार’ जैसी जोड़ियाँ सामने-सामने रखकर पढ़ना सबसे उपयोगी रहता है, क्योंकि प्रश्न प्रायः जोड़ी के एक सिरे से पूछकर दूसरे सिरे को विकल्प में रख देता है। साथ ही ‘तीर्थ’, ‘यज्ञ’, ‘व्रत’ और ‘मोक्ष’ से बने शब्दों का अर्थ भी साफ़ रखिए — ये आम बोलचाल में ढीले अर्थ में चलते हैं, पर परीक्षा में इनका ठीक-ठीक अर्थ ही सही उत्तर तय करता है।

धर्म और दर्शन से जुड़े वाक्यांश

  • जो ईश्वर को गुणों सहित मानेसगुणवादी
  • जो ईश्वर को गुणों से रहित मानेनिर्गुणवादी
  • जो हर बंधन से छूट चुका होमुक्त
  • जन्म-मरण से छुटकारामोक्ष
  • जो तीर्थ की यात्रा करता होतीर्थयात्री
  • जो यज्ञ करता होयजमान
  • जो व्रत रखता होव्रती
  • जो संसार से विरक्त होकर वन में रहेवानप्रस्थी
  • जो तपस्या करता होतपस्वी
  • जो ईश्वर की भक्ति करता होभक्त
  • जो गुरु के पास रहकर विद्या पाएशिष्य
  • जो वेदों को जानता होवेदज्ञ
  • जो पाप करता होपापी
  • जो पुण्य करता होपुण्यात्मा
  • जो पाप से मुक्त होनिष्पाप
  • जो स्वर्ग से संबंध रखता होस्वर्गीय
  • जो नरक से संबंध रखता होनारकीय
  • जो अपने धर्म पर दृढ़ रहेधर्मनिष्ठ
  • जो धर्म के विरुद्ध आचरण करेअधर्मी
  • जो इस लोक से संबंध रखेलौकिक
  • जो इस लोक से परे होअलौकिक

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘जो ईश्वर के होने में विश्वास न रखता हो’ के लिए एक शब्द है —

  1. Aआस्तिक
  2. Bधर्मनिष्ठ
  3. Cसंन्यासी
  4. Dनास्तिक

व्याख्या

‘अस्ति’ यानी है; जो मानता है कि ईश्वर है वह आस्तिक, और ‘न’ के भाव से बना नास्तिक वह जो नहीं मानता। ‘धर्मनिष्ठ’ अपने धर्म पर दृढ़ रहने वाला है और ‘संन्यासी’ संसार त्यागने वाला — दोनों विश्वास के अभाव से जुड़े नहीं।