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संज्ञा

‘बचपन’, ‘मिठास’, ‘लिखावट’, ‘अपनापन’ — चारों भाववाचक संज्ञाएँ हैं, और चारों अलग-अलग शब्द-भेदों से बनी हैं। यही इस अध्याय का सबसे उलझाने वाला हिस्सा है, और सबसे कम पढ़ा जाने वाला भी।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

संज्ञा किसे कहते हैं

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं। ध्यान रहे कि परिभाषा में ‘भाव’ भी है — इसलिए ‘मेज़’ जितनी संज्ञा है, ‘क्रोध’ भी उतनी ही। जो दिखाई नहीं देता, वह भी नाम रखता है, और नाम रखते ही संज्ञा बन जाता है।

संज्ञा विकारी शब्द है, यानी उसका रूप बदलता है — लिंग से (लड़का/लड़की), वचन से (लड़का/लड़के) और कारक से (लड़का/लड़के ने)। यही विकार उसे अव्यय से अलग करता है।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया विशेषण, कारक, अव्यय’ एक ही बिंदु में — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 (2024 के पाठ्यक्रम में इसी बिंदु में ‘उपसर्ग’ भी था; 2026 में उपसर्ग अलग बिंदु ‘उपसर्ग एवं प्रत्यय’ में है) · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय, क्रिया’ — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 23-06-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं

संज्ञा के पाँच भेद

भेदक्या बताता हैउदाहरणपहचान
व्यक्तिवाचककिसी एक विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नामराम, गंगा, जयपुर, रामायणअपने वर्ग में अकेला — दूसरा वैसा नहीं
जातिवाचकपूरी जाति या वर्ग का साझा नामलड़का, नदी, नगर, पुस्तकउस वर्ग की हर इकाई पर लागू
भाववाचकभाव, गुण, दशा या क्रिया का नाममिठास, बचपन, क्रोध, थकानछू नहीं सकते, गिन नहीं सकते
समूहवाचकव्यक्तियों या वस्तुओं के समूह का नामसभा, सेना, भीड़, गुच्छाएक शब्द, पर भीतर अनेक
द्रव्यवाचककिसी पदार्थ या सामग्री का नामसोना, पानी, तेल, गेहूँनापा-तौला जाता है, गिना नहीं जाता

भाववाचक संज्ञा — जहाँ पहचान सबसे कठिन पड़ती है

भाववाचक संज्ञा किसी भी शब्द-भेद से बनाई जा सकती है, और असली काम यही पहचानना है कि दिया गया शब्द किससे बना है। नियम याद करने की ज़रूरत नहीं — मूल शब्द पहचानिए, भेद अपने आप मिल जाएगा।

जातिवाचक से: बच्चा → बचपन, मित्र → मित्रता, दास → दासता। विशेषण से: मीठा → मिठास, सुंदर → सुंदरता, बूढ़ा → बुढ़ापा, चतुर → चातुर्य। क्रिया से: लिखना → लिखावट, घबराना → घबराहट, थकना → थकान, चढ़ना → चढ़ाई। सर्वनाम से: अपना → अपनापन, निज → निजत्व। अव्यय से: दूर → दूरी, निकट → निकटता, शीघ्र → शीघ्रता।

एक कसौटी पूरे अध्याय के लिए — पर पूरी कसौटी, आधी नहीं। भाववाचक संज्ञा न गिनी जा सकती है और न छुई या नापी जा सकती है। केवल ‘गिनी नहीं जा सकती’ कहना भूल होगी, क्योंकि द्रव्यवाचक संज्ञा भी नहीं गिनी जाती — ‘दो सोने’ नहीं कहते — फिर भी सोना छुआ और तौला जा सकता है, इसलिए वह भाववाचक नहीं है। दोनों शर्तें एक साथ लगाइए: न गिनती में आए, न पकड़ में।

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