क्रिया
‘क्या?’ और ‘किसे?’ — दोनों पूछकर देखिए; किसी एक का भी उत्तर मिल जाए तो क्रिया सकर्मक है, दोनों का न मिले तो अकर्मक। केवल ‘क्या’ पूछना पर्याप्त नहीं, और यहीं सबसे अधिक भूल होती है। बाक़ी सारे भेद रचना के हैं, और वे क्रिया के रूप से पहचाने जाते हैं।
क्रिया और धातु
जिस शब्द से किसी कार्य का होना या करना समझा जाए, उसे क्रिया कहते हैं — पढ़ना, जाना, होना, सोना। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। ‘पढ़ना’ से ‘ना’ हटा दीजिए तो ‘पढ़’ बचता है — यही धातु है। धातु निकालना ‘ना’ हटाने भर का काम है।
क्रिया विकारी शब्द है और सबसे अधिक बदलने वाला भी — लिंग, वचन, पुरुष, काल और वाच्य, पाँचों उसका रूप बदलते हैं। ‘जाता है / जाती है / जाते हैं / गया / जाएगा’ — एक ही धातु के रूप हैं।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया विशेषण, कारक, अव्यय’ एक ही बिंदु में — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 (2024 के पाठ्यक्रम में इसी बिंदु में ‘उपसर्ग’ भी था; 2026 में उपसर्ग अलग बिंदु ‘उपसर्ग एवं प्रत्यय’ में है) · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय, क्रिया’ — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 23-06-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
कर्म के आधार पर दो भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक | क्रिया का फल कर्म पर पड़े — ‘क्या?’ या ‘किसे/किसको?’ पूछने पर उत्तर मिले | राम ने पुस्तक पढ़ी। (क्या पढ़ी? पुस्तक) · माँ ने बच्चे को बुलाया। (किसे बुलाया? बच्चे को) |
| अकर्मक | क्रिया का फल कर्ता पर ही रहे — ‘क्या?’ और ‘किसे?’ दोनों का उत्तर न मिले | राम सोया। (क्या सोया? किसे सोया? — दोनों का कोई उत्तर नहीं) |
रचना के आधार पर पाँच भेद
| भेद | बनावट | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य (मूल) क्रिया | धातु से सीधे बनी | पढ़ना, जाना, लिखना |
| संयुक्त क्रिया | दो या अधिक क्रियाएँ मिलकर एक अर्थ दें | पढ़ लिया, जा चुका, कर डाला |
| नामधातु क्रिया | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी | हाथ → हथियाना, बात → बतियाना, गरम → गरमाना, अपना → अपनाना |
| प्रेरणार्थक क्रिया | कर्ता किसी और से काम करवाए | करना → कराना/करवाना, पढ़ना → पढ़ाना/पढ़वाना |
| पूर्वकालिक क्रिया | एक काम पूरा होने पर दूसरा — प्रायः ‘कर’ जुड़ता है | वह नहाकर गया। पढ़कर सो गया। |
काल और वाच्य — एक पंक्ति का परिचय
क्रिया के दो और वर्गीकरण हैं जिन पर अलग से प्रश्न आते हैं। काल बताता है कि कार्य कब हुआ — भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यत्काल, और इनके आगे उपभेद हैं। वाच्य बताता है कि वाक्य में प्रधानता किसकी है — कर्तृवाच्य में कर्ता की (राम पुस्तक पढ़ता है), कर्मवाच्य में कर्म की (राम से पुस्तक पढ़ी जाती है), और भाववाच्य में केवल भाव की, जहाँ क्रिया सदा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष में रहती है (राम से चला नहीं जाता)। ध्यान रहे कि भाववाच्य केवल अकर्मक क्रियाओं से बनता है।