हिंदी शिक्षण सामग्री: श्रव्य-दृश्य साधन, भाषा प्रयोगशाला, अभिक्रमित अनुदेशन और पाठ्यपुस्तक — REET नोट्स
इस पेज में हिंदी शिक्षण में प्रयुक्त सहायक सामग्री का वर्गीकरण, भाषा प्रयोगशाला, एपिडायस्कोप जैसे प्रक्षेपी साधन, अभिक्रमित और वैयक्तिक अनुदेशन तथा अच्छी पाठ्यपुस्तक की विशेषताएँ परीक्षा की दृष्टि से दी गई हैं। REET 2024 में इस टॉपिक से 10 प्रश्न आए और लगभग सभी सीधे तथ्य या गुण-दोष पर आधारित थे, इसलिए यह जल्दी पक्का होने वाला स्कोरिंग टॉपिक है।
- REET 2024 में 10 प्रश्न
- शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 7 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 के 10 प्रश्नों में सबसे अधिक ज़ोर भाषा प्रयोगशाला पर था — तीन प्रश्न: इसमें किसका अभाव रहता है (सामूहिक क्रियाएँ), व्यष्टि और सामूहिक शिक्षण में समन्वय का साधन कौन-सा है (भाषा प्रयोगशाला), और उचित कथन (4×4 = 16 छात्रों की व्यवस्था)। बाकी प्रश्न थे: इंद्रियों के आधार पर सामग्री के कितने भाग (तीन), सबसे प्रभावी सामग्री (दृश्य-श्रव्य), ‘स्वगति का सिद्धांत’ किन प्रणालियों का है (तीनों), एपिडायस्कोप की विशेषता (ध्वनि की आवश्यकता नहीं), भारत में ‘किंडरगार्टन बॉक्स’ किसने बनाया (पंडित देवीदत्त, आधिकारिक कुंजी के अनुसार), दृश्य-श्रव्य साधनों का ‘गुण नहीं’ और पाठ्यपुस्तक का दोष। स्तर तथ्यात्मक है, पर ‘गुण नहीं/दोष है’ जैसे नकारात्मक प्रश्न सावधानी माँगते हैं।
शिक्षण सामग्री क्यों ज़रूरी है
शिक्षण सामग्री (Teaching-Learning Material, TLM) वे साधन हैं जो शिक्षक की बात को इंद्रियों के माध्यम से मूर्त और रोचक बनाते हैं। भाषा शिक्षण में इनका काम है — ध्यान आकर्षित करना, शब्द और अर्थ को चित्र या ध्वनि से जोड़ना, शुद्ध उच्चारण का आदर्श देना और अमूर्त व्याकरणिक बातों को ठोस उदाहरणों से समझाना। ‘मूर्त से अमूर्त की ओर’ सूत्र को कक्षा में लागू करने का सबसे सीधा साधन यही सामग्री है।
दृश्य-श्रव्य साधनों के गुण: सीखना स्थायी होता है, अनुभव की सीमा बढ़ती है (जो वस्तु कक्षा में नहीं लाई जा सकती, वह चित्र या वीडियो से दिखती है), शिक्षण प्रभावी और रोचक बनता है, और मंद गति वाले बच्चों को भी समझने में मदद मिलती है। सीमाएँ: कुछ साधनों के निर्माण और रख-रखाव में धन और समय लगता है, बिजली या उपकरण न होने पर उपयोग कठिन होता है, और अति-प्रयोग से सामग्री साधन न रहकर मनोरंजन भर बन जाती है। सामग्री हमेशा शिक्षण-उद्देश्य की पूर्ति के लिए हो, स्वयं में साध्य न बने।
इंद्रियों के आधार पर शिक्षण सामग्री के तीन भाग
| प्रकार | इंद्रिय | उदाहरण | भाषा शिक्षण में उपयोग |
|---|---|---|---|
| श्रव्य सामग्री | कान | रेडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, टेप-रिकॉर्डर, ग्रामोफोन | आदर्श उच्चारण, कविता-पाठ, कहानी सुनना |
| दृश्य सामग्री | आँख | श्यामपट, चार्ट, चित्र, मानचित्र, फ्लैश कार्ड, फलालैन (खादी) बोर्ड, मॉडल, स्लाइड, एपिडायस्कोप | वर्ण-पहचान, शब्द-चित्र मिलान, व्याकरण तालिकाएँ |
| दृश्य-श्रव्य सामग्री | आँख और कान दोनों | टेलीविज़न, चलचित्र (फ़िल्म), वीडियो, कंप्यूटर/मल्टीमीडिया | नाटक, संवाद, कहानी का दृश्य रूप; दो इंद्रियों के कारण सबसे प्रभावी |
सामग्री को प्रक्षेपी (Projected: स्लाइड, एपिडायस्कोप, ओवरहेड प्रोजेक्टर, फ़िल्म) और अप्रक्षेपी (Non-projected: चार्ट, मॉडल, श्यामपट) में भी बाँटा जाता है।
महत्वपूर्ण साधन: एक पंक्ति में
- एपिडायस्कोप (चित्र-विस्तारक यंत्र)
- अपारदर्शी (पुस्तक के पृष्ठ, चित्र) और पारदर्शी (स्लाइड) सामग्री को बड़ा करके पर्दे पर दिखाने वाला प्रक्षेपी दृश्य साधन; ध्वनि की आवश्यकता नहीं
- फलालैन/खादी बोर्ड
- खुरदरे कपड़े से ढका बोर्ड, जिस पर कटे हुए चित्र/शब्द-पट्टियाँ चिपकाकर हटाई जा सकती हैं — वाक्य-निर्माण के लिए उपयोगी
- फ्लैश कार्ड
- कुछ क्षण दिखाए जाने वाले शब्द/चित्र कार्ड — शब्द-पहचान और पठन-गति के लिए
- एडगर डेल का अनुभव शंकु (Cone of Experience)
- प्रत्यक्ष उद्देश्यपूर्ण अनुभव शंकु के आधार पर (सबसे मूर्त) और मौखिक प्रतीक शिखर पर (सबसे अमूर्त)
- किंडरगार्टन बॉक्स (भारत में)
- REET 2024 की आधिकारिक कुंजी के अनुसार पंडित देवीदत्त द्वारा निर्मित; किंडरगार्टन पद्धति मूलतः फ्रोबेल की
- पाठ्यपुस्तक
- सबसे सुलभ और आधारभूत शिक्षण सामग्री
भाषा प्रयोगशाला, अभिक्रमित अनुदेशन और स्वगति का सिद्धांत
भाषा प्रयोगशाला (Language Laboratory) में हर छात्र अलग ध्वनि-रोधी केबिन (booth) में हेडफ़ोन-माइक्रोफ़ोन के साथ बैठता है और शिक्षक एक नियंत्रण-मेज़ (console) से सबको एक साथ या किसी एक छात्र को अलग से निर्देश दे सकता है। सामान्यतः 4×4 = 16 छात्रों की व्यवस्था मानी जाती है। इसकी विशेषताएँ: छात्र बाहरी शोर से प्रभावित नहीं होते, हर छात्र अपनी गति से सुनकर-बोलकर अभ्यास करता है, और शिक्षक व्यष्टि व सामूहिक शिक्षण में समन्वय कर पाता है। सीमाएँ: छात्र आपस में संपर्क नहीं कर पाते, इसलिए सामूहिक क्रियाओं और स्वाभाविक संवाद का अभाव रहता है; उपकरण महँगे हैं।
अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction) में विषयवस्तु को छोटे-छोटे क्रमबद्ध पदों (frames) में बाँटा जाता है; छात्र हर पद पर उत्तर देता है और तुरंत पता चलता है कि उत्तर सही है या नहीं (तत्काल प्रतिपुष्टि/पुनर्बलन)। रेखीय अभिक्रमण बी. एफ. स्किनर से और शाखीय अभिक्रमण नॉर्मन क्राउडर से जुड़ा है। इसके मूल सिद्धांत हैं — छोटे पद, सक्रिय अनुक्रिया, तत्काल पुष्टि, स्वगति और स्व-मूल्यांकन।
स्वगति का सिद्धांत (Self-pacing) — छात्र अपनी क्षमता और गति से सीखे। यह अभिक्रमित अनुदेशन, वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली और कंप्यूटर आधारित अनुदेशन — तीनों की साझा विशेषता है; डाल्टन प्रणाली में भी यही भाव है।
अच्छी पाठ्यपुस्तक: गुण और दोष
| पक्ष | गुण (होना चाहिए) | दोष (नहीं होना चाहिए) |
|---|---|---|
| विषयवस्तु | बच्चों की रुचि और परिवेश पर आधारित, उद्देश्यपूर्ण, विविध विधाएँ (कविता, कहानी, निबंध, पत्र) | प्रयोजनहीनता, नीरस या स्तर से ऊँची विषयवस्तु |
| भाषा | कक्षा-स्तर के अनुकूल, शुद्ध और सरल-से-कठिन क्रम में | कठिन, अशुद्ध या असंगत भाषा |
| अभ्यास | बोध, भाषा-कौशल और रचनात्मकता वाले विविध अभ्यास | केवल रटने वाले प्रश्न |
| बाह्य रूप | स्पष्ट छपाई, उपयुक्त चित्र, अच्छा आवरण, टिकाऊ | धुंधली छपाई, चित्रों का अभाव |
| मूल्य | राष्ट्रीय एकता, समानता और मानवीय मूल्यों का पोषण | पूर्वाग्रह या भेदभाव वाली सामग्री |
कक्षा में इसका उपयोग
| सामग्री | कक्षा | कैसे उपयोग करें |
|---|---|---|
| वर्ण-चित्र चार्ट और फ्लैश कार्ड | कक्षा 1–2 | ‘क’ के साथ कबूतर का चित्र; कार्ड झलकाकर बच्चों से वर्ण और शब्द बुलवाना |
| खादी बोर्ड और शब्द-पट्टियाँ | कक्षा 2–4 | ‘राम’, ‘आम’, ‘खाता है’ पट्टियों को जोड़कर वाक्य बनवाना; क्रम बदलकर दिखाना कि पदक्रम से अर्थ कैसे बिगड़ता है |
| ऑडियो रिकॉर्डिंग | कक्षा 3–8 | कवि की आवाज़ या आदर्श वाचन सुनाकर बच्चों से अनुकरण वाचन; अपनी आवाज़ रिकॉर्ड कर तुलना |
| वीडियो/मल्टीमीडिया | कक्षा 5–8 | पाठ से जुड़ी लघु फ़िल्म दिखाकर संवाद-लेखन या दृश्य-वर्णन करवाना |
| स्वनिर्मित कम लागत सामग्री | सभी कक्षाएँ | पुराने कैलेंडर, अख़बार की कतरनें, डिब्बों से शब्द-पहिया — बच्चों को भी निर्माण में शामिल करें |
| पाठ्यपुस्तक | सभी कक्षाएँ | पाठ्यपुस्तक को आधार बनाएँ, पर उसी तक सीमित न रहें — बाल-पत्रिकाएँ और पुस्तकालय की किताबें जोड़ें |
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
भाषा प्रयोगशाला के प्रश्न में याद रखें — ‘अकेले केबिन, एक कंसोल, 16 छात्र’: अकेले केबिन = सामूहिक क्रिया/आपसी संपर्क का अभाव; एक कंसोल = शिक्षक किसी को भी निर्देश दे सकता है; 16 = 4×4। और ‘गुण नहीं है’ पूछे तो धन-समय-खर्च वाला विकल्प प्रायः उत्तर होता है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 89
भाषा प्रयोगशाला शिक्षण में अभाव रहता है -
- Aतकनीकी का
- Bसामूहिक क्रियाओं का
- Cविषय-वस्तु का
- Dसंचार-साधनों का
व्याख्या
भाषा प्रयोगशाला में प्रत्येक विद्यार्थी हेडफ़ोन आदि उपकरणों के साथ अलग-अलग बैठकर व्यक्तिगत अभ्यास करता है। इसमें तकनीक और संचार-साधन भरपूर होते हैं, पर सामूहिक क्रियाओं और आपसी संवाद का अभाव रहता है। अतः उत्तर (B) है।
प्रश्न 50
व्यष्टि शिक्षण और सामूहिक शिक्षण में समन्वय करने और भाषा सीखने में बच्चों की क्रियाशीलता बढ़ाने का सफल प्रयास है –
- Aभाषा प्रयोगशाला
- Bकम्प्यूटर द्वारा अनुदेशन
- Cअभिक्रमित अनुदेशन
- Dडाल्टन प्रणाली
व्याख्या
भाषा प्रयोगशाला में प्रत्येक छात्र अलग-अलग (व्यष्टि रूप में) सुनकर-बोलकर अभ्यास कर सकता है और शिक्षक पूरे समूह को एक साथ निर्देश भी दे सकता है। इस प्रकार यह व्यष्टि और सामूहिक शिक्षण में समन्वय करती है तथा बच्चों की क्रियाशीलता बढ़ाती है। अभिक्रमित अनुदेशन और डाल्टन प्रणाली मुख्यतः व्यक्तिगत अध्ययन पर केंद्रित हैं।
प्रश्न 56
इंद्रियों के प्रयोग के आधार पर श्रव्य-दृश्य सामग्री को मोटे तौर पर किन भागों में विभक्त किया जा सकता है ?
- Aएक
- Bदो
- Cतीन
- Dचार
व्याख्या
इंद्रियों के प्रयोग के आधार पर शिक्षण सामग्री को मोटे तौर पर तीन भागों में बाँटा जाता है — श्रव्य सामग्री (कान), दृश्य सामग्री (आँख) और श्रव्य-दृश्य सामग्री (कान और आँख दोनों)।
प्रश्न 75
कौन-सी उद्योतन सामग्री शिक्षण में अधिक प्रभावी सिद्ध होगी ?
- Aश्रव्य सामग्री
- Bदृश्य सामग्री
- Cदृश्य-श्रव्य सामग्री
- Dफ्लैश कार्ड
व्याख्या
दृश्य-श्रव्य सामग्री में आँख और कान दोनों इंद्रियों का एक साथ प्रयोग होता है, इसलिए यह केवल श्रव्य या केवल दृश्य सामग्री की तुलना में अधिक प्रभावी होती है। फ्लैश कार्ड केवल एक प्रकार की दृश्य सामग्री है।
प्रश्न 44
‘भाषा प्रयोगशाला’ के संदर्भ में उचित कथन है
- Aसभी छात्र एक दूसरे से संपर्क कर सकते हैं ।
- Bसभी छात्र बाहरी वातावरण से प्रभावित रहते हैं ।
- C4×4=16 छात्रों के बैठने व सीखने की व्यवस्था रहती है ।
- Dशिक्षक अपनी सीट से किसी भी छात्र को निर्देश नहीं दे सकता हैं ।
व्याख्या
भाषा प्रयोगशाला में छात्र अलग-अलग ध्वनि-रोधी केबिन (booth) में हेडफ़ोन के साथ बैठते हैं और आम तौर पर 4×4 = 16 छात्रों के बैठने व सीखने की व्यवस्था मानी जाती है। इसमें छात्र न तो एक-दूसरे से संपर्क कर पाते हैं और न बाहरी वातावरण से प्रभावित होते हैं। शिक्षक अपनी नियंत्रण-मेज़ (console) से किसी भी छात्र को निर्देश दे सकता है, इसलिए (A), (B), (D) गलत हैं।
प्रश्न 51
‘स्वगति का सिद्धान्त’ है
- Aअभिक्रमित अनुदेशन प्रणाली का
- Bवैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली का
- Cकम्प्यूटर आधारित अनुदेशन प्रणाली का
- Dउपर्युक्त तीनों प्रणालियों का
व्याख्या
‘स्वगति का सिद्धांत’ (self-pacing) का अर्थ है कि छात्र अपनी क्षमता और गति के अनुसार सीखता है। यह अभिक्रमित अनुदेशन (programmed instruction), वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली तथा कम्प्यूटर आधारित अनुदेशन— तीनों की मूल विशेषता है। इसलिए ‘उपर्युक्त तीनों’ सही है।
प्रश्न 53
‘चित्र-विस्तारक यन्त्र (एपिडायस्कोप)’ की विशेषता है
- Aइसमें ध्वनि की आवश्यकता नहीं होती है ।
- Bयह खादी बोर्ड का ही एक रूप है ।
- Cइसमें शिक्षक स्वयं रेखाचित्र एवं डायग्राम खींच सकता है ।
- Dयह भाषा प्रयोगशाला का ही एक रूप है ।
व्याख्या
एपिडायस्कोप (चित्र-विस्तारक यंत्र) एक प्रक्षेपी (projected) दृश्य साधन है, जो चित्रों, पुस्तक के पृष्ठों और पारदर्शी स्लाइडों को बड़ा करके पर्दे पर दिखाता है। यह केवल दृश्य साधन है, इसलिए इसमें ध्वनि की आवश्यकता नहीं होती। यह न खादी बोर्ड का रूप है, न भाषा प्रयोगशाला का।
प्रश्न 60
भारतवर्ष में ‘किंडर गार्टन बॉक्स’ का निर्माण किया
- Aभोलानाथ तिवारी ने
- Bएस. के. देशपांडे ने
- Cमहात्मा गांधी ने
- Dपंडित देवीदत्त ने
व्याख्या
बोर्ड की अंतिम कुंजी के अनुसार भारत में ‘किंडर गार्टन बॉक्स’ का निर्माण पंडित देवीदत्त ने किया। किंडरगार्टन पद्धति फ्रोबेल की देन है, जिसमें बच्चों को खेल-सामग्री के माध्यम से सिखाया जाता है। अतः उत्तर (D) है।
प्रश्न 61
दृश्य-श्रव्य साधनों का गुण नहीं है
- Aइनके प्रयोग से सीखना स्थायी हो जाता है ।
- Bइनके निर्माण में धन व समय खर्च होता है ।
- Cइनके प्रयोग से अनुभव की सीमा का विस्तार होता है ।
- Dइनके उपयोग से शिक्षण में प्रभाविता आ जाती है ।
व्याख्या
प्रश्न ‘गुण नहीं है’ पूछ रहा है। दृश्य-श्रव्य साधनों से सीखना स्थायी होता है, अनुभव की सीमा बढ़ती है और शिक्षण प्रभावी बनता है— ये सब गुण हैं। ‘इनके निर्माण में धन व समय खर्च होता है’ एक सीमा (दोष) है, गुण नहीं; अतः (B) सही है।
प्रश्न 71
पाठ्य पुस्तकों के विषय में दोष कहलाता है
- Aरुचि के विषयों पर आधारित होना
- Bनिर्धारित उद्देश्य को पूर्ण करने की प्रेरणा विद्यमान होना ।
- Cभाषा का स्तरानुकूल होना ।
- Dउसमें प्रयोजनहीनता का होना ।
व्याख्या
अच्छी पाठ्यपुस्तक रुचि पर आधारित, उद्देश्यपूर्ण और छात्रों के स्तर के अनुकूल भाषा वाली होती है— ये गुण हैं। पाठ्यपुस्तक में प्रयोजनहीनता (कोई स्पष्ट उद्देश्य न होना) उसका दोष है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
टेलीविज़न किस प्रकार की शिक्षण सामग्री है?
- Aदृश्य-श्रव्य
- Bदृश्य
- Cश्रव्य
- Dअप्रक्षेपी दृश्य
व्याख्या
टेलीविज़न में चित्र देखे और ध्वनि सुनी जाती है, इसलिए यह आँख और कान दोनों का प्रयोग करने वाली दृश्य-श्रव्य सामग्री है।
प्रश्न 2
निम्न में से कौन-सा श्रव्य साधन है?
- Aचार्ट
- Bरेडियो
- Cमॉडल
- Dफ्लैश कार्ड
व्याख्या
रेडियो केवल सुनने की इंद्रिय (कान) का प्रयोग करता है, इसलिए श्रव्य साधन है। चार्ट, मॉडल और फ्लैश कार्ड दृश्य साधन हैं।
प्रश्न 3
एडगर डेल के ‘अनुभव शंकु’ के आधार (सबसे नीचे) पर कौन-सा अनुभव है?
- Aमौखिक प्रतीक
- Bदृश्य प्रतीक
- Cप्रत्यक्ष उद्देश्यपूर्ण अनुभव
- Dचलचित्र
व्याख्या
अनुभव शंकु में सबसे मूर्त अनुभव — प्रत्यक्ष उद्देश्यपूर्ण अनुभव — आधार पर है और सबसे अमूर्त मौखिक प्रतीक शिखर पर हैं।
प्रश्न 4
अभिक्रमित अनुदेशन की विशेषता नहीं है —
- Aविषयवस्तु छोटे-छोटे पदों में
- Bछात्र की सक्रिय अनुक्रिया
- Cसभी छात्रों का एक ही गति से आगे बढ़ना अनिवार्य
- Dउत्तर की तत्काल पुष्टि
व्याख्या
अभिक्रमित अनुदेशन स्वगति के सिद्धांत पर आधारित है, इसलिए हर छात्र अपनी गति से आगे बढ़ता है। सबका एक ही गति से चलना इसकी विशेषता नहीं है।
प्रश्न 5
‘रेखीय अभिक्रमण’ (Linear Programming) का संबंध किससे है?
- Aबी. एफ. स्किनर
- Bनॉर्मन क्राउडर
- Cएडगर डेल
- Dहेलेन पार्कहर्स्ट
व्याख्या
रेखीय अभिक्रमण बी. एफ. स्किनर से जुड़ा है, जबकि शाखीय अभिक्रमण नॉर्मन क्राउडर से। एडगर डेल अनुभव शंकु और पार्कहर्स्ट डाल्टन प्रणाली से जुड़े हैं।
प्रश्न 6
भाषा प्रयोगशाला के संदर्भ में असंगत कथन है —
- Aछात्र अलग-अलग केबिन में हेडफ़ोन के साथ बैठते हैं
- Bशिक्षक नियंत्रण-मेज़ से किसी भी छात्र को निर्देश दे सकता है
- Cछात्र अपनी गति से सुनने-बोलने का अभ्यास कर सकते हैं
- Dइसमें छात्रों के बीच स्वाभाविक सामूहिक संवाद भरपूर होता है
व्याख्या
भाषा प्रयोगशाला में छात्र अलग केबिनों में होते हैं, इसलिए सामूहिक संवाद का अभाव रहता है। शेष तीनों कथन इसकी वास्तविक विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 7
पुस्तक के किसी चित्र वाले पृष्ठ को बिना स्लाइड बनाए पूरी कक्षा को बड़ा करके दिखाने के लिए उपयुक्त साधन है —
- Aटेप-रिकॉर्डर
- Bएपिडायस्कोप
- Cफ्लैश कार्ड
- Dरेडियो
व्याख्या
एपिडायस्कोप अपारदर्शी सामग्री, जैसे पुस्तक के पृष्ठ और चित्र, को भी पर्दे पर बड़ा करके दिखा सकता है।
प्रश्न 8
कक्षा 2 में वाक्य-रचना सिखाने के लिए शिक्षक शब्द-पट्टियों को जोड़-तोड़कर वाक्य बनवाना चाहते हैं। सबसे उपयुक्त साधन है —
- Aरेडियो
- Bखादी (फलालैन) बोर्ड
- Cएपिडायस्कोप
- Dमानचित्र
व्याख्या
खादी बोर्ड पर शब्द-पट्टियाँ चिपकाकर आसानी से हटाई और पुनर्व्यवस्थित की जा सकती हैं, जिससे बच्चे पदक्रम बदलकर वाक्य बना सकते हैं।
प्रश्न 9
एक सरकारी विद्यालय में बिजली और प्रोजेक्टर नहीं है। हिंदी शिक्षक के लिए सबसे व्यावहारिक निर्णय है —
- Aबच्चों के साथ मिलकर चार्ट, चित्र-कार्ड और शब्द-पहिया जैसी कम लागत सामग्री बनाना
- Bशिक्षण सामग्री का प्रयोग बिलकुल छोड़ देना
- Cकेवल पाठ्यपुस्तक का शब्दशः वाचन
- Dउपकरण आने तक पाठ स्थगित करना
व्याख्या
स्थानीय और कम लागत वाली स्वनिर्मित सामग्री हर परिस्थिति में उपयोगी है और निर्माण में भागीदारी से बच्चों का अधिगम भी गहरा होता है।
प्रश्न 10
शिक्षण सामग्री के प्रयोग के संबंध में उचित कथन है —
- Aसामग्री जितनी अधिक हो, शिक्षण उतना अच्छा
- Bपाठ्यपुस्तक शिक्षण सामग्री नहीं है
- Cसामग्री केवल कमज़ोर छात्रों के लिए होती है
- Dसामग्री शिक्षण-उद्देश्य की पूर्ति का साधन है, स्वयं साध्य नहीं
व्याख्या
सामग्री का चयन और प्रयोग उद्देश्य के अनुसार होना चाहिए; अति-प्रयोग ध्यान भटकाता है। पाठ्यपुस्तक भी शिक्षण सामग्री है और सामग्री सभी छात्रों के लिए उपयोगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंद्रियों के आधार पर शिक्षण सामग्री कितने प्रकार की होती है?+
तीन प्रकार की — श्रव्य (कान), दृश्य (आँख) और दृश्य-श्रव्य (आँख और कान दोनों)। दो इंद्रियों के प्रयोग के कारण दृश्य-श्रव्य सामग्री सबसे प्रभावी मानी जाती है।
भाषा प्रयोगशाला की सबसे बड़ी सीमा क्या है?+
इसमें छात्र अलग-अलग केबिन में बैठते हैं, इसलिए आपसी संपर्क और सामूहिक क्रियाओं का अभाव रहता है। उपकरणों का महँगा होना भी एक सीमा है।
एपिडायस्कोप क्या है?+
एपिडायस्कोप (चित्र-विस्तारक यंत्र) एक प्रक्षेपी दृश्य साधन है जो पुस्तक के पृष्ठ, चित्र और स्लाइड को बड़ा करके पर्दे पर दिखाता है। इसमें ध्वनि नहीं होती।
REET में शिक्षण सामग्री से कितने प्रश्न आते हैं?+
संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में इस टॉपिक से 10 प्रश्न आए, जिनमें भाषा प्रयोगशाला पर तीन प्रश्न थे।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए