हिंदी शिक्षण की विधियाँ: प्रणालियाँ, प्रवर्तक, शिक्षण-सूत्र और व्याकरण शिक्षण — REET नोट्स
इस पेज में हिंदी (मातृभाषा और द्वितीय भाषा) शिक्षण की सभी प्रमुख विधियाँ और प्रणालियाँ, उनके प्रवर्तक, शिक्षण-सूत्र, हरबर्ट की पंचपद प्रणाली और व्याकरण शिक्षण की विधियाँ परीक्षा की दृष्टि से दी गई हैं। REET 2024 में इस टॉपिक से 15 प्रश्न आए, इसलिए भाषा के शिक्षणशास्त्र वाले भाग में यह सबसे अधिक अंक देने वाले टॉपिकों में से एक है।
- REET 2024 में 15 प्रश्न
- शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 7 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 के 15 प्रश्नों को तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है। (1) प्रणाली और प्रवर्तक की जोड़ी — ‘प्ले वे’ पुस्तक (कुक), बेसिक शिक्षा (गांधीजी), मॉण्टेसरी प्रणाली की आयु (3–6 वर्ष), किंडरगार्टन का असंगत कथन, हरबर्ट के चार पद को पाँच में बदलने वाले (जिलर), पठन-शिक्षण पर कथन (राइबर्न), संज्ञानात्मक पक्ष पर बल (चोमस्की)। (2) विधि का आधार — मातृभाषा की सबसे स्वाभाविक विधि (अनुकरण), सहसंबंध विधि की मूल अवधारणा, स्वयं-शिक्षणमालाओं का आधार (व्याकरण-अनुवाद), सूक्ष्म शिक्षण के चरण। (3) व्याकरण शिक्षण — आगमन-निगमन, व्याकरण कब शुरू हो (इस प्रश्न में आधिकारिक कुंजी ने कक्षा 4 और कक्षा 6 दोनों को सही माना)। प्रश्न सीधे तथ्य और ‘कौन-सा कथन उचित/असंगत’ शैली के थे।
भाषा शिक्षण के सूत्र (Maxims of Teaching)
शिक्षण-सूत्र बताते हैं कि पाठ को किस क्रम में आगे बढ़ाया जाए। भाषा शिक्षण में सबसे अधिक उपयोगी सूत्र हैं: ज्ञात से अज्ञात की ओर, सरल से जटिल की ओर, मूर्त से अमूर्त की ओर, पूर्ण से अंश (खंड) की ओर, विशिष्ट से सामान्य की ओर, प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर, विश्लेषण से संश्लेषण की ओर और आगमन से निगमन की ओर।
REET में इन सूत्रों को अक्सर उलटकर विकल्प बनाए जाते हैं — ‘अमूर्त से मूर्त’, ‘जटिल से सरल’, ‘खंड से पूर्ण’। ये तीनों गलत हैं। भाषा के संदर्भ में ‘पूर्ण से अंश’ का अर्थ है कि बच्चा पहले पूरा वाक्य या शब्द पहचाने, फिर वर्ण; और ‘आगमन से निगमन’ का अर्थ है कि पहले उदाहरणों से नियम निकलवाया जाए, फिर उस नियम को नए उदाहरणों पर लागू करवाया जाए।
प्रमुख शिक्षण प्रणालियाँ और उनके प्रवर्तक
| प्रणाली / विधि | प्रवर्तक | मुख्य आधार | याद रखें |
|---|---|---|---|
| खेल विधि (Play Way) | हेनरी काल्डवेल कुक | खेल-खेल में सीखना | पुस्तक ‘द प्ले वे’ (1917) |
| किंडरगार्टन (बालोद्यान) | फ्रेडरिक फ्रोबेल | स्व-क्रिया, खेल, स्वतंत्रता, सामाजिक सहयोग | बालक पौधा, शिक्षक माली; ज्ञान भीतर से बाहर विकसित होता है |
| मॉण्टेसरी प्रणाली | मारिया मॉण्टेसरी | ज्ञानेन्द्रियों का प्रशिक्षण, स्वतंत्रता | मुख्यतः 3–6 वर्ष के बच्चों के लिए; विशेष शिक्षण-उपकरण |
| डाल्टन प्रणाली | हेलेन पार्कहर्स्ट | व्यक्तिगत कार्य, अनुबंध (assignment), स्वगति | कक्षा की जगह विषय-प्रयोगशालाएँ |
| बेसिक शिक्षा (नई तालीम/वर्धा योजना) | महात्मा गांधी | हस्त-उद्योग केंद्रित शिक्षा | 1937 में वर्धा में प्रस्तुत |
| प्रोजेक्ट (योजना) विधि | विलियम एच. किलपैट्रिक | उद्देश्यपूर्ण वास्तविक कार्य | जॉन ड्यूई के प्रयोजनवाद पर आधारित |
| पंचपद प्रणाली | हरबर्ट (4 पद) → जिलर (5 पद) | क्रमबद्ध पाठ-योजना | तैयारी, प्रस्तुतीकरण, तुलना/संबंध, सामान्यीकरण, प्रयोग |
| सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching) | स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (ड्वाइट एलन) | छोटे समूह, कम समय, एक कौशल | योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनः नियोजन → पुनः शिक्षण → पुनः प्रतिपुष्टि |
‘प्रवर्तक–प्रणाली’ की जोड़ी REET में हर साल पूछी जाती है; पूरी तालिका कंठस्थ रखें।[स्रोत 1]
भाषा शिक्षण की प्रमुख विधियाँ
| विधि | कैसे पढ़ाया जाता है | कहाँ उपयोगी / सीमा |
|---|---|---|
| अनुकरण विधि | शिक्षक आदर्श उच्चारण, वाचन या लेखन करता है, बच्चे नकल करते हैं | मातृभाषा सिखाने की सबसे स्वाभाविक और प्रचलित विधि; प्रारंभिक कक्षाएँ |
| प्रत्यक्ष विधि (Direct Method) | लक्ष्य-भाषा को सीधे वस्तुओं, चित्रों, क्रियाओं से जोड़ना; मातृभाषा/अनुवाद का प्रयोग नहीं | द्वितीय भाषा में बोलचाल; व्याकरण की व्यवस्थित समझ कम |
| व्याकरण-अनुवाद विधि | मातृभाषा में नियम समझाकर वाक्यों का अनुवाद कराना | द्वितीय भाषा की स्वयं-शिक्षणमालाएँ इसी पर आधारित; मौखिक कौशल कमज़ोर रहता है |
| सहसंबंध (समवाय) विधि | हिंदी को इतिहास, भूगोल, विज्ञान आदि विषयों और जीवन से जोड़कर पढ़ाना | मूल अवधारणा: सम्पूर्ण ज्ञान एक पूर्ण इकाई है |
| कथा-कथन / नाटकीकरण | कहानी सुनाना, अभिनय कराना | प्राथमिक स्तर पर श्रवण-वाचन और शब्द-भंडार |
| प्रश्नोत्तर / वार्तालाप विधि | प्रश्न पूछकर बच्चों को विचार व अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करना | सभी स्तर; सक्रिय भागीदारी |
| भाषा-संसर्ग विधि | पाठ पढ़ाते समय प्रसंगवश व्याकरण के नियम समझाना | छोटी कक्षाओं में अप्रत्यक्ष व्याकरण शिक्षण |
व्याकरण शिक्षण और प्रारंभिक पठन की विधियाँ
व्याकरण शिक्षण की दो मुख्य विधियाँ हैं। निगमन विधि (Deductive) में पहले नियम या परिभाषा दी जाती है, फिर उदाहरण — यह तेज़ है पर रटने को बढ़ावा देती है। आगमन विधि (Inductive) में पहले अनेक उदाहरण देकर बच्चों से नियम खोजवाया जाता है — यह मनोवैज्ञानिक और स्थायी अधिगम वाली है। सबसे उपयुक्त क्रम ‘आगमन-निगमन’ है: उदाहरणों से नियम निकलवाएँ और फिर नए उदाहरणों पर लागू करवाएँ। इनके अतिरिक्त पाठ्यपुस्तक विधि और भाषा-संसर्ग विधि भी प्रचलित हैं।
व्याकरण कब से पढ़ाया जाए, इस पर एक मत नहीं है। प्रारंभिक कक्षाओं में व्याकरण भाषा-प्रयोग के साथ अप्रत्यक्ष रूप से सिखाया जाता है और औपचारिक व्याकरण बाद में। REET 2024 में इस प्रश्न पर बोर्ड की अंतिम कुंजी ने कक्षा 4 और कक्षा 6, दोनों विकल्प सही माने थे।
प्रारंभिक पठन (पढ़ना सिखाने) की विधियाँ दो प्रकार की हैं। संश्लेषणात्मक — अंश से पूर्ण: वर्ण/अक्षर बोध विधि, ध्वनि-साम्य विधि। विश्लेषणात्मक — पूर्ण से अंश: शब्द विधि, वाक्य विधि, कहानी विधि। ‘पूर्ण से अंश’ सूत्र के कारण विश्लेषणात्मक विधियाँ बच्चों के लिए अधिक सार्थक मानी जाती हैं। डब्ल्यू. एम. राइबर्न का प्रसिद्ध कथन भी यही याद दिलाता है कि पाठ्यपुस्तक पढ़ा देना ही पठन-शिक्षण नहीं है; पाठ्यपुस्तक केवल उसका आधार या केंद्र है।
झट से दोहराने योग्य तथ्य
- मातृभाषा की सर्वाधिक स्वाभाविक विधि
- अनुकरण विधि
- भाषा अर्जन में संज्ञानात्मक पक्ष पर बल
- नोम चोमस्की — भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता
- हरबर्ट के 4 पद → 5 पद
- जिलर (Ziller)
- ‘द प्ले वे’ पुस्तक
- हेनरी काल्डवेल कुक, 1917
- उच्चारण त्रुटि
- अवहेलना न करें; तुरंत नहीं तो उचित अवसर पर सुधार कराएँ
- सूक्ष्म शिक्षण की मूल बात
- एक समय में एक शिक्षण-कौशल; प्रतिपुष्टि के बाद पुनः शिक्षण
कक्षा में इसका उपयोग
| विधि | कक्षा | कक्षा-कक्ष का उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुकरण | कक्षा 1–2 | शिक्षक ‘चंदा मामा दूर के’ हाव-भाव के साथ गाते हैं; बच्चे वैसा ही लय और उच्चारण दोहराते हैं |
| वाक्य/कहानी विधि | कक्षा 1–2 | छोटी कहानी सुनाकर उसके एक वाक्य को चार्ट पर लिखना, फिर शब्द और अंत में वर्ण पहचानना |
| खेल विधि | कक्षा 1–5 | शब्द-अंत्याक्षरी, वर्ण-कार्ड से शब्द बनाओ, ‘मैं कौन हूँ’ पहेली |
| आगमन-निगमन | कक्षा 6–8 | श्यामपट पर ‘सुंदर लड़की, काला घोड़ा, मीठा आम’ लिखकर पूछें — कौन-सा शब्द विशेषता बता रहा है? नियम निकलवाकर नए वाक्यों में विशेषण खोजवाएँ |
| सहसंबंध | कक्षा 4–8 | पर्यावरण पाठ ‘जल’ के साथ जल-संरक्षण पर नारे और पत्र लेखन करवाना |
| प्रोजेक्ट | कक्षा 6–8 | ‘हमारे गाँव की कहावतें’ संग्रह बनाना — साक्षात्कार, लेखन, संपादन, प्रदर्शनी |
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
प्रवर्तक याद करने का एक वाक्य: ‘कुक खेलता, फ्रोबेल बगीचे में, मॉण्टेसरी इंद्रियों से, पार्कहर्स्ट डाल्टन में, गांधी बेसिक में, किलपैट्रिक प्रोजेक्ट में’। और शिक्षण-सूत्र वाले प्रश्न में जो विकल्प ‘कठिन/अमूर्त/खंड से शुरू’ करने को कहे, उसे तुरंत काट दें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 40
‘भाषा-शिक्षण’ के लिए उचित कथन है
- A‘भाषा-शिक्षण’ के लिए ‘अमूर्त से मूर्त’ सूत्र उपयोगी है ।
- B‘भाषा-शिक्षण’ के लिए ‘जटिल से सरल’ का अनुसरण आवश्यक होता है ।
- C‘भाषा-शिक्षण’ में ‘आगमन से निगमन’ सूत्र विशेष उपयोगी होता है ।
- D‘भाषा-शिक्षण’ ‘खण्ड से पूर्ण’ सूत्र के आधार पर कराया जाता है ।
व्याख्या
शिक्षण-सूत्रों के अनुसार शिक्षण ‘मूर्त से अमूर्त’, ‘सरल से जटिल’ और ‘पूर्ण से खण्ड’ की ओर होना चाहिए, इसलिए (A), (B) और (D) उलटे होने के कारण गलत हैं। भाषा-शिक्षण, विशेषकर व्याकरण, में पहले उदाहरण देकर नियम निकलवाना (आगमन) और फिर नियम को नए उदाहरणों पर लागू करवाना (निगमन) उपयोगी होता है। अतः ‘आगमन से निगमन’ वाला कथन उचित है।
प्रश्न 42
‘मॉण्टेसरी प्रणाली’ में ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है
- A3 से 6 वर्ष के बच्चों को
- B4 से 5 वर्ष के बच्चों को
- C4 से 7 वर्ष के बच्चों को
- D5 से 7 वर्ष के बच्चों को
व्याख्या
मारिया मॉण्टेसरी की प्रणाली मुख्यतः 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए विकसित की गई थी, जिसमें विशेष शिक्षण-उपकरणों द्वारा ज्ञानेन्द्रियों के प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने पर बल दिया जाता है। अतः सही उत्तर (A) है।
प्रश्न 49
भाषा-शिक्षण के लिए अध्यापक को
- Aउच्चारण संबंधी त्रुटियों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए
- Bविद्यार्थियों द्वारा किए गए अशुद्ध प्रयोग के उचित संशोधन की आवश्यकता नहीं है
- Cस्थानीय बोली के प्रभावों को दूर नहीं करना चाहिए
- Dवाक्य-रचना पर कोई ध्यान नहीं देना चाहिए
व्याख्या
भाषा-शिक्षण में शुद्ध उच्चारण बहुत महत्त्वपूर्ण है, इसलिए अध्यापक को उच्चारण संबंधी त्रुटियों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें सुधारना चाहिए। अन्य विकल्प — अशुद्ध प्रयोग का संशोधन न करना, स्थानीय बोली के प्रभाव को दूर न करना, वाक्य-रचना पर ध्यान न देना — भाषा-शिक्षण के उद्देश्यों के विरुद्ध हैं।
प्रश्न 59
“हमें याद रखना चाहिए कि पाठ्य-पुस्तक पढ़ाना ही पठन-शिक्षण नहीं है, यद्यपि पाठ्य-पुस्तक आधार या केन्द्र अवश्य है ।” उपर्युक्त कथन है
- Aडब्ल्यू. एम. राइबर्न का
- Bमैंग्जिल का
- Cफ्रोबेल का
- Dरॉबर्ट फोस्टर का
व्याख्या
आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार यह कथन डब्ल्यू. एम. राइबर्न (W. M. Ryburn) का है। कथन का आशय यह है कि पठन-शिक्षण का उद्देश्य केवल पाठ्य-पुस्तक पढ़ा देना नहीं, बल्कि पढ़ने का कौशल विकसित करना है; पाठ्य-पुस्तक उसका आधार या केन्द्र मात्र है।
प्रश्न 60
‘हरबर्ट उपागम’ के चार पदों को ‘पंचपद प्रणाली’ में बदला गया
- Aमैंग्जिल के द्वारा
- Bजिलर के द्वारा
- Cब्लूम के द्वारा
- Dफ्रोबेल के द्वारा
व्याख्या
हरबर्ट ने शिक्षण के चार पद (स्पष्टता, सम्बद्धता, व्यवस्था, विधि) बताए थे। उनके अनुयायी जिलर (Ziller) ने ‘स्पष्टता’ को विभाजित कर इन्हें पाँच पदों में बदला, जो आगे चलकर हरबर्ट की पंचपद प्रणाली के रूप में प्रचलित हुई। अतः सही उत्तर (B) है।
प्रश्न 70
मातृभाषा शिक्षण की सर्वाधिक प्रचलित एवं संगत विधि है -
- Aप्रयोगशाला विधि
- Bअनुकरण विधि
- Cव्याकरण विधि
- Dप्रोजेक्ट विधि
व्याख्या
बच्चा मातृभाषा सबसे पहले परिवार और परिवेश के लोगों का अनुकरण करके सीखता है। इसलिए विशेषकर प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा शिक्षण की सर्वाधिक प्रचलित एवं स्वाभाविक विधि अनुकरण विधि है। व्याकरण विधि प्रारंभिक स्तर पर नीरस मानी जाती है।
प्रश्न 85
किस भाषा विशेषज्ञ ने भाषा सीखने की प्रक्रिया में ज्ञानात्मक युक्तियों, शब्दार्थ और भाषा संदर्भ पक्ष पर अधिक बल दिया है ?
- Aमैक्स वेबर
- Bजॉन पी. डिसको
- Cडेनियल डेविस
- Dचोमस्की
व्याख्या
आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार भाषा सीखने में ज्ञानात्मक (संज्ञानात्मक) पक्ष पर बल देने वाले भाषा विशेषज्ञ चोमस्की हैं। नोम चोमस्की ने भाषा को मनुष्य की मानसिक क्षमता से जोड़कर देखा और भाषा-अध्ययन में संज्ञानात्मक दृष्टिकोण को प्रमुखता दी। मैक्स वेबर समाजशास्त्री थे, भाषा विशेषज्ञ नहीं। अतः उत्तर (D) है।
प्रश्न 47
‘सहसंबंध विधि’ का विकास किस मूल अवधारणा पर हुआ है ?
- Aसम्पूर्ण ज्ञान पूर्ण इकाई है
- Bसीखने-सिखाने की क्रिया एक खेल है
- Cमातृभाषा को बच्चे स्वाभाविक रूप में सीखते हैं
- Dअनुकरण विधि का सिद्धान्त
व्याख्या
सहसंबंध (समवाय) विधि इस मूल अवधारणा पर आधारित है कि सम्पूर्ण ज्ञान एक पूर्ण इकाई है, इसलिए विभिन्न विषयों को आपस में जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए। खेल को सीखने का आधार मानना खेल विधि का, तथा स्वाभाविक रूप से सीखना प्रत्यक्ष/स्वाभाविक विधि का आधार है।
प्रश्न 54
व्याकरण शिक्षण की प्रचलित विधियाँ कौन-सी हैं ?
- Aनिगमन प्रणाली
- Bआगमन प्रणाली
- Cदोनों में से कोई नहीं
- D(A) और (B) दोनों
व्याख्या
व्याकरण शिक्षण की प्रमुख प्रचलित विधियाँ निगमन प्रणाली (नियम से उदाहरण की ओर) और आगमन प्रणाली (उदाहरण से नियम की ओर) हैं। इसलिए (A) और (B) दोनों सही हैं।
प्रश्न 69
प्रतिपुष्टि, पुन: नियोजन, पुन: शिक्षण एवं पुन: प्रतिपुष्टि ये शिक्षण के किस उपागम के चरण हैं ?
- Aरचना शिक्षण
- Bसूक्ष्म शिक्षण
- Cअनुवाद शिक्षण
- Dउच्चारण शिक्षण
व्याख्या
सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching) चक्र के चरण हैं — योजना, शिक्षण, प्रतिपुष्टि, पुनः नियोजन, पुनः शिक्षण और पुनः प्रतिपुष्टि। इसमें छोटे समूह को थोड़े समय में एक शिक्षण कौशल का अभ्यास कराया जाता है।
प्रश्न 42
‘प्ले वे’ (Play Way) पुस्तक के लेखक हैं
- Aडॉ. मॉण्टेसरी
- Bकुक महोदय
- Cप्लेटो
- Dफ्रोबेल
व्याख्या
‘द प्ले वे’ (The Play Way, 1917) पुस्तक के लेखक हेनरी काल्डवेल कुक (कुक महोदय) हैं, जिन्होंने खेल विधि को भाषा-शिक्षण में लोकप्रिय बनाया। फ्रोबेल किंडरगार्टन प्रणाली और मॉण्टेसरी मॉण्टेसरी पद्धति से जुड़े हैं।
प्रश्न 54एक से अधिक उत्तर मान्य
व्याकरण की शिक्षा प्रारम्भ करना कौन-सी कक्षा से अधिकांशत: भाषा विज्ञानियों ने उचित माना है ?
- Aकक्षा 8 से
- Bकक्षा 6 से
- Cकक्षा 4 से
- Dकक्षा 7 से
व्याख्या
बोर्ड की अंतिम उत्तर-कुंजी में (B) कक्षा 6 और (C) कक्षा 4 दोनों को सही माना गया है। अधिकांश भाषाविद् मानते हैं कि प्रारंभिक कक्षाओं में व्याकरण अप्रत्यक्ष (भाषा-प्रयोग के साथ) सिखाया जाए और औपचारिक व्याकरण-शिक्षा कक्षा 4 के आसपास से शुरू हो; कई पुस्तकों में इसे कक्षा 6 (उच्च प्राथमिक स्तर) से शुरू करना उचित बताया गया है। मतभेद के कारण दोनों विकल्प स्वीकार किए गए।
प्रश्न 62
किण्डरगार्डन प्रणाली के आधार पर कौन-सा कथन असंगत है ?
- Aयह प्रणाली स्वतंत्रता के सिद्धांत पर कार्य करती है ।
- Bयह प्रणाली ज्ञान को बाहर से अंदर देने के सिद्धांत पर कार्य करती है ।
- Cयह प्रणाली सामाजिक सहयोग के सिद्धांत पर कार्य करती है ।
- Dप्राथमिक स्तर के विध्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी है ।
व्याख्या
फ्रोबेल की किंडरगार्टन प्रणाली स्व-क्रिया, स्वतंत्रता, खेल और सामाजिक सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित है और छोटे बच्चों के लिए उपयोगी है। फ्रोबेल के अनुसार ज्ञान बालक के भीतर से विकसित (अंदर से बाहर) होता है, इसलिए ‘ज्ञान को बाहर से अंदर देने’ वाला कथन असंगत है।
प्रश्न 67
‘बेसिक शिक्षा प्रणाली’ देन है
- Aपार्कहर्स्ट की
- Bफ्रोबेल की
- Cमहात्मा गाँधी की
- Dमारिया मॉण्टेसरी की
व्याख्या
बेसिक शिक्षा प्रणाली (वर्धा योजना / नई तालीम, 1937) महात्मा गाँधी की देन है, जिसमें हस्त-उद्योग को शिक्षा का केंद्र बनाया गया। पार्कहर्स्ट डाल्टन प्रणाली, फ्रोबेल किंडरगार्टन और मारिया मॉण्टेसरी मॉण्टेसरी पद्धति से जुड़ी हैं।
प्रश्न 75
द्वितीय भाषाओं की ‘स्वयं शिक्षणमालाएँ’ आधारित होती हैं
- Aसंघटनापरक विधि पर
- Bप्रत्यक्ष विधि पर
- Cव्याकरण एवं अनुवाद विधि पर
- Dखेल विधि पर
व्याख्या
बाज़ार में मिलने वाली द्वितीय भाषाओं की ‘स्वयं शिक्षणमालाएँ’ (जैसे ‘... सीखिए’ पुस्तकें) प्रायः मातृभाषा में व्याकरण के नियम समझाकर और वाक्यों का अनुवाद देकर सिखाती हैं। इसलिए ये व्याकरण एवं अनुवाद विधि पर आधारित मानी जाती हैं। प्रत्यक्ष विधि में मातृभाषा का प्रयोग नहीं होता, जो स्व-अध्ययन पुस्तकों में संभव नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘प्रोजेक्ट विधि’ के प्रवर्तक हैं —
- Aकिलपैट्रिक
- Bफ्रोबेल
- Cपार्कहर्स्ट
- Dमॉण्टेसरी
व्याख्या
प्रोजेक्ट (योजना) विधि विलियम एच. किलपैट्रिक ने प्रतिपादित की, जो जॉन ड्यूई के प्रयोजनवादी विचारों पर आधारित है। पार्कहर्स्ट डाल्टन प्रणाली से जुड़ी हैं।
प्रश्न 2
‘डाल्टन प्रणाली’ का संबंध किससे है?
- Aहेनरी कुक
- Bमारिया मॉण्टेसरी
- Cहेलेन पार्कहर्स्ट
- Dहरबर्ट
व्याख्या
डाल्टन प्रणाली हेलेन पार्कहर्स्ट की देन है, जिसमें बच्चे अनुबंध-कार्य के आधार पर अपनी गति से व्यक्तिगत रूप से सीखते हैं।
प्रश्न 3
निम्न में से कौन-सा शिक्षण-सूत्र सही है?
- Aअज्ञात से ज्ञात की ओर
- Bमूर्त से अमूर्त की ओर
- Cअंश से पूर्ण की ओर
- Dसामान्य से विशिष्ट की ओर
व्याख्या
सही शिक्षण-सूत्र हैं — ज्ञात से अज्ञात, पूर्ण से अंश, मूर्त से अमूर्त और विशिष्ट से सामान्य। शेष तीनों विकल्प इन सूत्रों के उलटे रूप हैं।
प्रश्न 4
द्वितीय भाषा सिखाने की वह विधि जिसमें मातृभाषा और अनुवाद का बिलकुल प्रयोग नहीं किया जाता —
- Aप्रत्यक्ष विधि
- Bव्याकरण-अनुवाद विधि
- Cभाषा-संसर्ग विधि
- Dपाठ्यपुस्तक विधि
व्याख्या
प्रत्यक्ष विधि में लक्ष्य-भाषा को सीधे वस्तुओं, चित्रों और क्रियाओं से जोड़कर सिखाया जाता है और मातृभाषा का प्रयोग नहीं होता।
प्रश्न 5
हरबर्ट की पंचपद प्रणाली का सही क्रम है —
- Aतैयारी, प्रस्तुतीकरण, तुलना, सामान्यीकरण, प्रयोग
- Bप्रस्तुतीकरण, तैयारी, तुलना, प्रयोग, सामान्यीकरण
- Cतैयारी, तुलना, प्रस्तुतीकरण, प्रयोग, सामान्यीकरण
- Dसामान्यीकरण, तैयारी, प्रस्तुतीकरण, तुलना, प्रयोग
व्याख्या
पंचपद प्रणाली का क्रम है — तैयारी (प्रस्तावना), प्रस्तुतीकरण, तुलना/संबंध, सामान्यीकरण (नियमीकरण) और प्रयोग (अनुप्रयोग)।
प्रश्न 6
‘वाक्य विधि’ और ‘कहानी विधि’ से पढ़ना सिखाना किस शिक्षण-सूत्र पर आधारित है?
- Aअंश से पूर्ण की ओर
- Bनिगमन से आगमन की ओर
- Cअमूर्त से मूर्त की ओर
- Dपूर्ण से अंश की ओर
व्याख्या
इन विश्लेषणात्मक विधियों में बच्चा पहले पूरा वाक्य या कहानी देखता-सुनता है, फिर शब्द और वर्ण पहचानता है — यह ‘पूर्ण से अंश’ का सूत्र है।
प्रश्न 7
‘सूक्ष्म शिक्षण’ के संबंध में असंगत कथन है —
- Aइसमें एक समय में एक शिक्षण-कौशल का अभ्यास होता है
- Bइसमें एक साथ सभी शिक्षण-कौशलों का पूरी कक्षा में अभ्यास होता है
- Cइसमें प्रतिपुष्टि के बाद पुनः शिक्षण होता है
- Dइसमें छात्र-समूह छोटा और समय कम होता है
व्याख्या
सूक्ष्म शिक्षण की मूल विशेषता ही यह है कि छोटे समूह के साथ, कम समय में, एक-एक कौशल का अभ्यास कराया जाता है। सभी कौशल एक साथ पूरी कक्षा में अभ्यास कराना इसके विपरीत है।
प्रश्न 8
कक्षा 6 में संज्ञा पढ़ाते समय शिक्षक पहले कई वाक्य लिखकर बच्चों से व्यक्ति, स्थान और वस्तुओं के नाम छँटवाते हैं, फिर संज्ञा की परिभाषा बनवाते हैं। यह विधि है —
- Aनिगमन विधि
- Bव्याकरण-अनुवाद विधि
- Cआगमन विधि
- Dअनुकरण विधि
व्याख्या
उदाहरणों से शुरू करके बच्चों से नियम या परिभाषा निकलवाना आगमन विधि है। निगमन में पहले परिभाषा देकर फिर उदाहरण दिए जाते हैं।
प्रश्न 9
‘ज्ञान एक पूर्ण इकाई है’ — इस मान्यता पर आधारित विधि में शिक्षक क्या करेगा?
- Aहिंदी को अन्य विषयों से पूरी तरह अलग रखकर पढ़ाएगा
- Bहिंदी पाठ को पर्यावरण, इतिहास आदि विषयों और जीवन के अनुभवों से जोड़कर पढ़ाएगा
- Cकेवल व्याकरण के नियम रटवाएगा
- Dकेवल पाठ्यपुस्तक का सस्वर वाचन कराएगा
व्याख्या
यह सहसंबंध (समवाय) विधि की मूल अवधारणा है, इसलिए शिक्षक हिंदी को अन्य विषयों और जीवन से जोड़कर पढ़ाएगा। अलग-थलग शिक्षण इसके विपरीत है।
प्रश्न 10
कक्षा 2 का एक बच्चा स्थानीय बोली के प्रभाव से ‘श’ को ‘स’ बोलता है। शिक्षक के लिए सबसे उचित कदम है —
- Aपूरी कक्षा के सामने उसे टोकना और हँसी उड़ाना
- Bत्रुटि की अवहेलना करना क्योंकि यह बोली का प्रभाव है
- Cउसे बोलने के अवसर देना बंद कर देना
- Dस्नेहपूर्वक शुद्ध उच्चारण का आदर्श प्रस्तुत कर अनुकरण और अभ्यास के अवसर देना
व्याख्या
उच्चारण त्रुटि की अवहेलना नहीं करनी चाहिए, पर सुधार अपमानजनक भी नहीं होना चाहिए। शिक्षक का आदर्श उच्चारण और अनुकरण-अभ्यास बच्चे का आत्मविश्वास बनाए रखते हुए त्रुटि दूर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में हिंदी शिक्षण विधियों से कितने प्रश्न आते हैं?+
भाषा I और II में लगभग आधे प्रश्न शिक्षणशास्त्र से होते हैं। REET 2024 में इस पेज के टॉपिक — शिक्षण विधियों और प्रणालियों — से 15 प्रश्न आए।
आगमन और निगमन विधि में क्या अंतर है?+
आगमन विधि में उदाहरणों से नियम की ओर जाया जाता है, जबकि निगमन विधि में पहले नियम बताकर फिर उदाहरण दिए जाते हैं। व्याकरण शिक्षण के लिए ‘आगमन-निगमन’ का संयुक्त क्रम सबसे उपयुक्त है।
मातृभाषा शिक्षण की सबसे अच्छी विधि कौन-सी है?+
प्रारंभिक स्तर पर अनुकरण विधि सबसे स्वाभाविक और प्रचलित है, क्योंकि बच्चा मातृभाषा परिवार और परिवेश का अनुकरण करके ही सीखता है।
प्रत्यक्ष विधि और व्याकरण-अनुवाद विधि में मुख्य अंतर क्या है?+
प्रत्यक्ष विधि में मातृभाषा और अनुवाद का प्रयोग नहीं होता, लक्ष्य-भाषा सीधे वस्तुओं और परिस्थितियों से सिखाई जाती है। व्याकरण-अनुवाद विधि में मातृभाषा के माध्यम से नियम और अनुवाद सिखाया जाता है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए