भाषायी कौशल (LSRW): सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना — REET हिंदी शिक्षणशास्त्र
इस पेज पर चारों भाषायी कौशल — सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना — उनका वर्गीकरण, क्रम, वाचन के प्रकार और कक्षा में इन्हें विकसित करने के तरीके दिए गए हैं। REET 2024 में हिंदी शिक्षणशास्त्र से इस टॉपिक के 12 प्रश्न आए, इसलिए यह भाषा खंड का सबसे ज़रूरी टॉपिक है।
- REET 2024 में 12 प्रश्न
- शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में भाषा I और भाषा II (हिंदी) के शिक्षणशास्त्र भाग से इस टॉपिक के 12 प्रश्न आए — भाषा के किसी भी दूसरे शिक्षण टॉपिक से अधिक। सबसे ज़्यादा प्रश्न पठन पर थे: मौन वाचन के प्रकार व उद्देश्य (3 प्रश्न, जिनमें एक BONUS हुआ)। इसके अलावा ग्रहणात्मक-अभिव्यक्तात्मक कौशल, अनुलेख-श्रुतलेख जैसी लेखन गतिविधियाँ, बोलने में टोका-टाकी न करना, पाठ्य सहगामी क्रियाएँ और कौशलों से जुड़ी परिभाषाएँ/शिक्षाशास्त्री पूछे गए। स्तर: कक्षा में व्यावहारिक समझ + कुछ तथ्य।
चार भाषायी कौशल — वर्गीकरण
| कौशल | प्रकृति | माध्यम | मुख्य गतिविधियाँ |
|---|---|---|---|
| सुनना (श्रवण) | ग्रहणात्मक (Receptive) | मौखिक | कहानी/कविता सुनना, श्रुतलेख, निर्देश पालन, रेडियो-वार्ता |
| बोलना (वाक्/भाषण) | अभिव्यक्तात्मक (Productive) | मौखिक | वार्तालाप, कहानी सुनाना, वाद-विवाद, भाषण, नाट्याभिनय, कवि-सम्मेलन |
| पढ़ना (पठन) | ग्रहणात्मक (Receptive) | लिखित | सस्वर व मौन वाचन, पुस्तकालय, बाल-पत्रिकाएँ |
| लिखना (लेखन) | अभिव्यक्तात्मक (Productive) | लिखित | सुलेख, अनुलेख, प्रतिलेख, श्रुतलेख, निबंध, पत्र, डायरी |
ग्रहण = सुनना + पढ़ना; अभिव्यक्ति = बोलना + लिखना। मौखिक = सुनना + बोलना; लिखित = पढ़ना + लिखना।
कौशलों का क्रम और आपसी संबंध
मातृभाषा सीखने का स्वाभाविक क्रम है — सुनना → बोलना → पढ़ना → लिखना (LSRW)। बच्चा विद्यालय आने से पहले ही घर में सुनकर-बोलकर भाषा सीख चुका होता है; पढ़ना और लिखना उसे विद्यालय में व्यवस्थित रूप से सिखाए जाते हैं। मातृभाषा से भिन्न (मात्रेतर) भाषा में बोलना प्रायः सबसे कठिन होता है और सप्रयत्न सीखा जाता है — REET 2024 के प्रश्न में आधिकारिक कुंजी ने इसी आधार पर 'बोलना' को सही माना।
चारों कौशल अलग-अलग खानों में नहीं, एक-दूसरे से जुड़कर विकसित होते हैं। उदाहरण के लिए मौखिक और लिखित प्रश्नोत्तर में बच्चा प्रश्न सुनता या पढ़ता है और उत्तर बोलता या लिखता है — इसलिए इनसे चारों कौशलों का विकास होता है। NCF 2005 का भारतीय भाषाओं का आधार-पत्र भी भाषा को समग्र रूप में, सार्थक संदर्भों में सिखाने पर बल देता है।
आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार 'भाषा शिक्षण का संबंध … सीखने वाले को सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना — इन चारों कौशलों में दक्ष बनाना है' परिभाषा एस. के. देशपांडे की है। इसी प्रकार आधिकारिक कुंजी ने मॉण्टेसरी को वह शिक्षाशास्त्री माना जिन्होंने लिखना पढ़ने से पहले सिखाने को उचित बताया — मॉण्टेसरी पद्धति में बच्चे ध्वनियों और अक्षरों की आकृति से परिचित होकर पहले शब्द लिखना और फिर पढ़ना सीखते हैं।
सुनना और बोलना
श्रवण कौशल के उद्देश्य: ध्यानपूर्वक सुनना, शुद्ध उच्चारण पहचानना, बात का केंद्रीय भाव समझना और सुनी बात पर प्रतिक्रिया देना। गतिविधियाँ: कहानी सुनाकर प्रश्न पूछना, श्रुतलेख, 'जो कहूँ वह करो' खेल, कविता-पाठ सुनना।
बोलने के कौशल के उद्देश्य: शुद्ध उच्चारण, उचित गति व लय, आत्मविश्वास के साथ भाव प्रकट करना और श्रोता के अनुसार भाषा का प्रयोग। शुद्ध उच्चारण और वर्तनी की आधारभूत शिक्षा प्रारंभिक कक्षाओं में दी जाती है — REET 2024 की आधिकारिक कुंजी ने इसके लिए 6 से 9 वर्ष का आयु-वर्ग माना।
शिक्षक का व्यवहार निर्णायक है: बोलते समय बच्चे को बीच में न टोकें, सुझाव अंत में दें। बार-बार टोकने से झिझक बढ़ती है, जबकि धैर्य से सुनने पर बोलने का कौशल और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। वाद-विवाद, कवि-सम्मेलन, नाट्याभिनय, अंत्याक्षरी और बाल-सभा भाषायी दक्षता बढ़ाने वाली पाठ्य सहगामी क्रियाएँ हैं; 'ध्यान' (meditation) जैसी क्रिया का भाषायी दक्षता से सीधा संबंध नहीं है।
पठन (वाचन) के प्रकार
| प्रकार | उप-प्रकार | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| सस्वर वाचन (Loud reading) | आदर्श वाचन | शिक्षक द्वारा शुद्ध उच्चारण, उचित गति और भाव के साथ; बच्चों के लिए नमूना |
| अनुकरण वाचन | आदर्श वाचन के बाद विद्यार्थी शिक्षक का अनुकरण करते हुए पढ़ते हैं | |
| व्यक्तिगत वाचन | एक-एक विद्यार्थी बारी से पढ़ता है; त्रुटियाँ पहचानने में सहायक | |
| सामूहिक / समवेत वाचन | पूरी कक्षा या समूह एक साथ; छोटी कक्षाओं और कविता के लिए उपयोगी; झिझक दूर होती है | |
| मौन वाचन (Silent reading) | गंभीर / गहन वाचन | सूक्ष्म अध्ययन; गहराई से अर्थ, भाव व तथ्य ग्रहण करना; उच्च कक्षाओं में |
| सरसरी / विस्तृत / त्वरित वाचन | स्थूल अध्ययन; कम समय में अधिक सामग्री का सार जानना — समाचार-पत्र, कहानी, उपन्यास |
मौन वाचन बिना स्वर के और व्यक्तिगत रूप से होता है; सामूहिक, समवेत और अनुकरण वाचन सस्वर वाचन के प्रकार हैं।
मौन वाचन के उद्देश्य और लेखन कौशल
मौन वाचन के उद्देश्य: पढ़ने की गति बढ़ाना, एकाग्रता, अर्थ-ग्रहण और शब्द-भंडार में वृद्धि। इसका भावात्मक उद्देश्य है — अध्ययन में रुचि उत्पन्न करना और स्वाध्याय की आदत डालना। मौन वाचन से गला नहीं थकता, दूसरों को बाधा नहीं होती और कम समय में अधिक पढ़ा जा सकता है; छोटी कक्षाओं में पहले सस्वर वाचन, बाद में मौन वाचन पर ज़ोर दिया जाता है।
लेखन कौशल की गतिविधियाँ: सुलेख (सुंदर, स्पष्ट लिखावट), अनुलेख (लिखे अक्षरों पर या उनके ऊपर लिखना), प्रतिलेख/प्रतिलिपि (देखकर नकल करना), श्रुतलेख (सुनकर लिखना)। अनुलिपि, प्रतिलिपि, श्रुतलिपि जैसे कार्य लेखन दक्षता के विकास में सहायक हैं। अच्छे लेखन की विशेषताएँ: शुद्ध वर्तनी, सुडौल अक्षर, उचित विराम-चिह्न, अनुच्छेद विभाजन और विचारों का क्रम।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
श्रवण गतिविधि (कक्षा 1–3)
'सुनो और बताओ': शिक्षक छोटी कहानी सुनाए, फिर पूछे — 'कहानी में कौन-कौन था? अंत में क्या हुआ?' इससे ध्यानपूर्वक सुनना और स्मरण दोनों विकसित होते हैं।
बोलने की गतिविधि (कक्षा 4–8)
'मेरा गाँव/मेरा मोहल्ला' पर 1 मिनट बोलना, कक्षा में बाल-सभा, रोल-प्ले। बच्चे को बीच में न टोकें, सुधार के सुझाव अंत में सकारात्मक ढंग से दें। बच्चे की घर की भाषा (जैसे राजस्थानी बोली) को स्वीकार करते हुए मानक हिंदी तक ले जाएँ।
पठन-लेखन सामग्री
चित्र-कहानी कार्ड, बाल-पत्रिकाएँ, कक्षा पुस्तकालय, शब्द-दीवार, अनुलेख पुस्तिका और श्रुतलेख के लिए परिचित शब्दों की सूची।
आम भ्रांति
'बच्चा अक्षर पहचानकर ज़ोर से पढ़ ले, तो वह पढ़ना जान गया।' वास्तव में पढ़ना = अर्थ ग्रहण। उपाय: पढ़ने के बाद 'क्या, क्यों, कैसे' वाले प्रश्न पूछें और अपने शब्दों में सुनाने को कहें।
आकलन विचार
चारों कौशलों के लिए अलग संकेतक रखें — सुनकर उत्तर देना, 1 मिनट बोलना, अपठित अनुच्छेद पढ़कर प्रश्न, और श्रुतलेख/अनुच्छेद लेखन; निरंतर अवलोकन से प्रगति दर्ज करें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
'सु-प ग्रहण, बो-लि बाहर': सुनना-पढ़ना अंदर लेना (ग्रहणात्मक), बोलना-लिखना बाहर देना (अभिव्यक्तात्मक)। और मौन वाचन के प्रश्न में जिस विकल्प में 'स्वर', 'सामूहिक', 'समवेत' या 'अनुकरण' लिखा हो, उसे तुरंत काट दें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 37बोनस — अंतिम कुंजी में निरस्त
मौन-वाचन के लिए उचित कथन है
- Aस्वर में रागात्मकता आती है ।
- Bमौन-वाचन स्थूल व सूक्ष्म दोनों प्रकार के अध्ययन में सहायक होता है ।
- Cमौन-वाचन सामूहिक वाचन के रूप में किया जा सकता है ।
- Dमौन-वाचन प्रवाहमय तथा गति पर नियन्त्रण के साथ होना चाहिए ।
व्याख्या
BSER ने अंतिम उत्तर-कुंजी में इस प्रश्न को निरस्त (BONUS) कर दिया, अर्थात् सभी अभ्यर्थियों को इसके अंक दिए गए। बोर्ड ने प्रश्न हटाने का कारण नहीं बताया। सामान्य रूप से पढ़ाया जाता है कि मौन-वाचन बिना स्वर के, व्यक्तिगत रूप से किया जाता है, इसलिए (A) और (C) इससे मेल नहीं खाते।
प्रश्न 46
“भाषा शिक्षण का संबंध केवल ज्ञान प्रदान करना है सूचनाएँ प्रदान करना मात्र नहीं, बल्कि भाषा सीखने वाले को इन चारों विविध कौशलों में दक्ष बनाना है; जैसे सुनना, बोलना; पढ़ना और लिखना ।” उपर्युक्त परिभाषा दी गई है
- Aरॉबर्ट लाडो द्वारा
- Bपामर द्वारा
- Cएस. के. देशपांडे द्वारा
- Dभोलानाथ तिवारी द्वारा
व्याख्या
आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार भाषा-शिक्षण की यह परिभाषा एस. के. देशपांडे की मानी गई है। परिभाषा का मूल भाव यह है कि भाषा-शिक्षण केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना — इन चारों भाषायी कौशलों में दक्षता विकसित करना है। अतः उत्तर (C) है।
प्रश्न 68
भाषायी दक्षता के विकास हेतु संगत पाठ्य सहगामी क्रिया नहीं है -
- Aकवि-सम्मेलन
- Bवाद-विवाद
- Cनाट्याभिनय
- Dध्यान
व्याख्या
कवि-सम्मेलन, वाद-विवाद और नाट्याभिनय में विद्यार्थी बोलने, सुनने और अभिव्यक्ति का अभ्यास करते हैं, इसलिए ये भाषायी दक्षता बढ़ाने वाली पाठ्य सहगामी क्रियाएँ हैं। ‘ध्यान’ (meditation) मानसिक एकाग्रता की क्रिया है, भाषायी दक्षता के विकास से इसका सीधा संबंध नहीं है।
प्रश्न 69
अभिव्यक्ति में कौन-कौन-से भाषाई कौशल सम्मिलित होते हैं ?
- Aसुनना और बोलना
- Bपढ़ना और सुनना
- Cबोलना और लिखना
- Dलिखना और पढ़ना
व्याख्या
भाषायी कौशलों में सुनना और पढ़ना ग्रहणात्मक (receptive) कौशल हैं, जबकि बोलना और लिखना अभिव्यक्तात्मक (productive) कौशल हैं। अभिव्यक्ति में व्यक्ति अपने विचार बोलकर या लिखकर प्रकट करता है, इसलिए उत्तर (C) है।
प्रश्न 73
इनमें से मौन वाचन का प्रकार है -
- Aसामूहिक वाचन
- Bअनुकरण वाचन
- Cगंभीर वाचन
- Dसमवेत वाचन
व्याख्या
मौन वाचन के दो प्रमुख प्रकार माने जाते हैं — गंभीर वाचन और द्रुत (गति) वाचन। गंभीर वाचन में विषय-वस्तु को गहराई से समझने के लिए मौन रूप से पढ़ा जाता है। सामूहिक वाचन, अनुकरण वाचन और समवेत वाचन सस्वर (मुखर) वाचन के प्रकार हैं।
प्रश्न 48
हिन्दी भाषा शिक्षण में वर्ण एवं शब्दों का शुद्ध उच्चारण और शब्दों की शुद्ध वर्तनी की शिक्षा किस आयु-वर्ग के बच्चों को दी जाती है ?
- A3 से 5 वर्ष
- B6 से 9 वर्ष
- C1 से 3 वर्ष
- D9 से 15 वर्ष
व्याख्या
भाषा शिक्षण की पुस्तकों के अनुसार वर्ण एवं शब्दों के शुद्ध उच्चारण और शुद्ध वर्तनी की व्यवस्थित शिक्षा प्राथमिक स्तर पर, अर्थात् 6 से 9 वर्ष के बच्चों को दी जाती है। 3 से 5 वर्ष पूर्व-प्राथमिक अवस्था है जहाँ मुख्यतः सुनने-बोलने पर बल रहता है।
प्रश्न 66
वह कौन-सा कौशल है जो मातृभाषा में तो सर्वप्रथम स्वाभाविक रूप से सीख लिया जाता है पर मात्रेतर भाषा में सीखने के अंतिम चरण में सप्रयत्न सीखा जाता है ?
- Aलिखना
- Bमनन करना
- Cबोलना
- Dपढ़ना
व्याख्या
मातृभाषा में बच्चा सुनकर सबसे पहले स्वाभाविक रूप से बोलना सीख लेता है। किन्तु मात्रेतर (दूसरी) भाषा में बोलने की सहज दक्षता सबसे कठिन होती है और वह सीखने के अंतिम चरण में सप्रयत्न विकसित होती है, क्योंकि उसके लिए भाषिक परिवेश उपलब्ध नहीं होता। अतः उत्तर ‘बोलना’ है।
प्रश्न 67
अनुलिपि, प्रतिलिपि, श्रुतिलिपि आदि कार्य किस भाषिक दक्षता की प्राप्ति में सहायक हैं ?
- Aश्रवण
- Bवाचन
- Cपठन
- Dलेखन
व्याख्या
अनुलिपि (देखकर लिखना), प्रतिलिपि (नकल करना) और श्रुतिलिपि (सुनकर लिखना) — ये सभी लेखन के अभ्यास हैं। इनसे सुलेख, शुद्ध वर्तनी और लेखन-गति जैसी लेखन दक्षता का विकास होता है।
प्रश्न 71
किस शिक्षा शास्त्री ने लिखने की शिक्षा को पढ़ने से पूर्व सही माना है ?
- Aजान डीवी ने
- Bमैक्डूगल ने
- Cड्रेवर ने
- Dमॉण्टेसरी ने
व्याख्या
मॉण्टेसरी पद्धति में बच्चे की ज्ञानेन्द्रियों और माँसपेशियों के प्रशिक्षण पर बल दिया जाता है, और मारिया मॉण्टेसरी ने लिखना सिखाने को पढ़ना सिखाने से पहले उचित माना। उनके अनुसार बच्चा अक्षरों की आकृतियाँ बनाना सीखकर फिर पढ़ना सरलता से सीखता है।
प्रश्न 72
मौखिक एवं लिखित प्रश्नोत्तर द्वारा कितने भाषायी-कौशलों का विकास किया जा सकता है ?
- Aतीन
- Bचार
- Cएक
- Dदो
व्याख्या
मौखिक प्रश्नोत्तर में सुनना और बोलना, तथा लिखित प्रश्नोत्तर में पढ़ना और लिखना कौशल सक्रिय होते हैं। इस प्रकार प्रश्नोत्तर द्वारा चारों भाषायी कौशलों — श्रवण, भाषण, पठन और लेखन — का विकास किया जा सकता है।
प्रश्न 58
‘उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चे जब बोलें तो उन्हें टोका न जाए । सुझाव अंत में दिए जाएँ ।’ इससे उनमें कौन-से ‘कौशल’ का विकास होगा ?
- Aश्रवण कौशल का
- Bपठन कौशल का
- Cबोलना कौशल का
- Dलेखन कौशल का
व्याख्या
बोलते समय बच्चों को बीच में टोकने से उनका आत्मविश्वास घटता है और वे झिझकने लगते हैं। उन्हें बिना टोके बोलने देना और सुझाव अंत में देना मौखिक अभिव्यक्ति अर्थात बोलना (वाचन/भाषण) कौशल का विकास करता है।
प्रश्न 73
मौन पठन का भावात्मक उद्देश्य है
- Aअध्ययन में रुचि उत्पन्न करना
- Bतीव्र गति से पठन का अभ्यास करना
- Cशब्द भण्डार में अभिवृद्धि करना
- Dपाठ्यक्रम शीघ्रता से पूर्ण करना
व्याख्या
मौन पठन के भावात्मक (affective) उद्देश्य रुचि, अभिरुचि और आनंद से जुड़े होते हैं, जैसे अध्ययन में रुचि उत्पन्न करना। तीव्र गति से पढ़ना और शब्द भंडार बढ़ाना कौशल/ज्ञान संबंधी उद्देश्य हैं, भावात्मक नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म ग्रहणात्मक भाषायी कौशलों का है?
- Aबोलना और लिखना
- Bसुनना और पढ़ना
- Cसुनना और बोलना
- Dपढ़ना और लिखना
व्याख्या
सुनने और पढ़ने में बच्चा भाषा को ग्रहण करता है, इसलिए ये ग्रहणात्मक कौशल हैं। बोलना और लिखना अभिव्यक्तात्मक कौशल हैं।
प्रश्न 2
मातृभाषा सीखने में भाषायी कौशलों का स्वाभाविक क्रम क्या है?
- Aपढ़ना – लिखना – सुनना – बोलना
- Bबोलना – सुनना – लिखना – पढ़ना
- Cसुनना – बोलना – पढ़ना – लिखना
- Dलिखना – पढ़ना – बोलना – सुनना
व्याख्या
बच्चा पहले सुनता है, फिर बोलने लगता है; पढ़ना और लिखना बाद में विद्यालय में व्यवस्थित रूप से सीखे जाते हैं। इसे LSRW क्रम कहते हैं।
प्रश्न 3
शिक्षक द्वारा शुद्ध उच्चारण, उचित गति और भाव के साथ किया गया वह वाचन, जिसे विद्यार्थी नमूने के रूप में सुनते हैं, कहलाता है
- Aआदर्श वाचन
- Bमौन वाचन
- Cसरसरी वाचन
- Dगंभीर वाचन
व्याख्या
आदर्श वाचन शिक्षक करता है ताकि विद्यार्थी उसका अनुकरण कर सकें। मौन, सरसरी और गंभीर वाचन में स्वर का प्रयोग नहीं होता।
प्रश्न 4
समाचार-पत्र पढ़कर कम समय में मुख्य खबरों का सार जान लेना किस प्रकार के वाचन का उदाहरण है?
- Aअनुकरण वाचन
- Bसरसरी (त्वरित) मौन वाचन
- Cसमवेत वाचन
- Dआदर्श वाचन
व्याख्या
कम समय में अधिक सामग्री का सार जानने के लिए सरसरी या त्वरित मौन वाचन किया जाता है। अनुकरण, समवेत और आदर्श वाचन सस्वर वाचन के प्रकार हैं।
प्रश्न 5
श्रुतलेख से मुख्य रूप से किन दो कौशलों का एक साथ विकास होता है?
- Aपढ़ना और बोलना
- Bबोलना और लिखना
- Cसुनना और लिखना
- Dपढ़ना और लिखना
व्याख्या
श्रुतलेख में शिक्षक बोलता है, विद्यार्थी ध्यान से सुनकर लिखता है। अतः सुनने और लिखने दोनों कौशलों का अभ्यास होता है।
प्रश्न 6
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन मौन वाचन के बारे में सही नहीं है?
- Aइससे पढ़ने की गति बढ़ती है
- Bयह व्यक्तिगत रूप से किया जाता है
- Cयह शुद्ध उच्चारण के अभ्यास का सबसे अच्छा साधन है
- Dइससे स्वाध्याय की आदत बनती है
व्याख्या
मौन वाचन में स्वर नहीं होता, इसलिए इससे उच्चारण का अभ्यास नहीं हो सकता; उच्चारण के लिए सस्वर वाचन उपयुक्त है। शेष तीनों कथन मौन वाचन के लिए सही हैं।
प्रश्न 7
कक्षा 2 में लिखना सिखाने की शुरुआत में बच्चों से बिंदुओं या हल्के लिखे अक्षरों के ऊपर लिखवाना क्या कहलाता है?
- Aश्रुतलेख
- Bअनुलेख
- Cनिबंध लेखन
- Dसुलेख प्रतियोगिता
व्याख्या
लिखे हुए अक्षरों पर या उन्हें देखकर लिखना अनुलेख है, जो लेखन का प्रारंभिक चरण है। श्रुतलेख सुनकर लिखना है और निबंध स्वतंत्र अभिव्यक्ति है।
प्रश्न 8
कक्षा 6 का एक विद्यार्थी कक्षा में बोलते समय अपनी घरेलू बोली के शब्दों का प्रयोग करता है। शिक्षक को क्या करना चाहिए?
- Aउसे तुरंत रोककर मानक शब्द बोलने को कहना
- Bघरेलू बोली के प्रयोग पर दंड देना
- Cउसे केवल लिखित कार्य देना
- Dउसकी बात पूरी सुनना, अभिव्यक्ति की सराहना करना और बाद में मानक हिंदी के शब्दों से परिचित कराना
व्याख्या
बच्चे की घर की भाषा को स्वीकार करने से उसका आत्मविश्वास बना रहता है और बोलने का कौशल विकसित होता है। बीच में टोकना या दंड देना झिझक बढ़ाता है; मानक रूप बाद में सहज ढंग से सिखाया जाए।
प्रश्न 9
पठन कौशल की जाँच के लिए सबसे उपयुक्त आकलन गतिविधि कौन-सी है?
- Aअपठित गद्यांश पढ़वाकर उस पर आधारित प्रश्न पूछना
- Bपाठ के प्रश्नोत्तर रटकर लिखवाना
- Cबच्चों से वर्णमाला बुलवाना
- Dपाठ की नकल (प्रतिलेख) करवाना
व्याख्या
पढ़ने का अर्थ है अर्थ ग्रहण करना; अपठित गद्यांश पर प्रश्न इसी समझ को जाँचते हैं। रटे उत्तर, वर्णमाला बोलना या नकल करना पढ़ने की समझ नहीं दिखाते।
प्रश्न 10
एक शिक्षिका कक्षा में 'बाल-सभा' आयोजित करती है जिसमें बच्चे कविता सुनाते हैं, दूसरे ध्यान से सुनकर प्रतिक्रिया देते हैं और अंत में सभा की रिपोर्ट लिखते हैं। इस गतिविधि के बारे में सबसे उचित कथन है
- Aइससे केवल बोलने का कौशल विकसित होता है
- Bइसका भाषायी दक्षता से कोई संबंध नहीं है
- Cयह पाठ्य सहगामी क्रिया है जो एकाधिक भाषायी कौशलों को एक साथ विकसित करती है
- Dइससे केवल लेखन कौशल विकसित होता है
व्याख्या
कविता सुनाने में बोलना, प्रतिक्रिया देने से पहले सुनना और रिपोर्ट में लिखना — एक ही गतिविधि में कई कौशल जुड़ते हैं। बाल-सभा भाषायी दक्षता बढ़ाने वाली पाठ्य सहगामी क्रिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में भाषायी कौशल से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में भाषा I और भाषा II (हिंदी) के शिक्षणशास्त्र भाग से इस टॉपिक के कुल 12 प्रश्न आए, जिनमें पठन और मौन वाचन पर सबसे अधिक प्रश्न थे।
चार भाषायी कौशल कौन-से हैं?+
सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना। इनमें सुनना-पढ़ना ग्रहणात्मक और बोलना-लिखना अभिव्यक्तात्मक कौशल हैं।
मौन वाचन के कितने प्रकार हैं?+
मौन वाचन के दो प्रमुख प्रकार हैं — गंभीर (गहन) वाचन, जो सूक्ष्म अध्ययन के लिए है, और सरसरी (विस्तृत/त्वरित) वाचन, जो कम समय में सार जानने के लिए है।
अनुलेख और श्रुतलेख में क्या अंतर है?+
अनुलेख में बच्चा लिखे हुए अक्षरों पर या उन्हें देखकर लिखता है, जबकि श्रुतलेख में शिक्षक बोलता है और बच्चा सुनकर लिखता है। श्रुतलेख से सुनना और लिखना दोनों कौशल विकसित होते हैं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए