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REET L1+L2 · हिंदी (भाषा I/II)

हिंदी में मूल्यांकन: परिभाषाएँ, परीक्षाओं के प्रकार, उपलब्धि परीक्षण और CCE — REET नोट्स

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इस पेज में भाषा-शिक्षण में मूल्यांकन का अर्थ, प्रमुख परिभाषाएँ, अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ, परीक्षाओं और प्रश्नों के प्रकार, उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को संक्षेप में समझाया गया है। REET 2024 में इसी टॉपिक से 15 प्रश्न आए, इसलिए हिंदी शिक्षणशास्त्र में यह सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले टॉपिकों में है।

  • REET 2024 में 15 प्रश्न
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के 15 प्रश्नों में चार पैटर्न साफ़ दिखे। (1) परिभाषा-किसकी: ‘व्यवहार-परिवर्तन संबंधी प्रदत्तों का संकलन और व्याख्या’ (क्विलन और हन्ना), ‘उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय’ (माइकेलिस)। (2) वर्गीकरण और गिनती: परीक्षाओं के स्वरूप के आधार पर 3 प्रकार, वर्गीकरण के 2 आधार, स्टेनले तथा रॉस के अनुसार वस्तुनिष्ठ परीक्षा-निर्माण के 4 सोपान। (3) गुण-दोष: अच्छे मूल्यांकन की विशेषता (विभेदीकरण), वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का सत्य कथन, निबंधात्मक प्रश्नों का ‘गुण नहीं’, CCE का ‘गुण नहीं’ (पक्षपात की संभावना)। (4) अनुप्रयोग: चिंतन-अभिव्यक्ति के लिए निबंधात्मक परीक्षा, वर्तनी के लिए लिखित परीक्षा, उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा से क्या पता चलता है। ‘नहीं है/असत्य है’ वाले नकारात्मक प्रश्न आधे से अधिक थे।

मूल्यांकन क्या है: मापन से आगे

मापन (Measurement) किसी गुण को अंकों में व्यक्त करना है — जैसे बच्चे को श्रुतलेख में 20 में से 15 अंक मिले। मूल्यांकन (Evaluation) इससे व्यापक है: इसमें मात्रात्मक (अंक) और गुणात्मक (अवलोकन, रुचि, व्यवहार) दोनों प्रमाण जोड़कर यह निर्णय किया जाता है कि शिक्षण के उद्देश्य कितने प्राप्त हुए। इसलिए कहा जाता है — मूल्यांकन = मापन + मूल्य-निर्णय।

मूल्यांकन शिक्षण प्रक्रिया का अंतिम नहीं, अभिन्न और सतत अंग है। शिक्षण-उद्देश्य, अधिगम-अनुभव और मूल्यांकन — ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं: उद्देश्य तय करते हैं कि क्या पढ़ाया जाए, और मूल्यांकन बताता है कि उद्देश्य कहाँ तक पूरे हुए। मूल्यांकन के निष्कर्ष केवल विद्यार्थी के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षक (विधि की उपयोगिता और कमज़ोरी), अभिभावक और पाठ्यक्रम-निर्माताओं के लिए भी प्रतिपुष्टि का काम करते हैं। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर निदानात्मक परीक्षण और उपचारात्मक शिक्षण कराया जाता है।

मूल्यांकन की प्रमुख परिभाषाएँ

विद्वान / संस्थापरिभाषा का मुख्य भाव
क्विलन (क्वालेन) एवं हन्नाविद्यालय में हुए छात्रों के व्यवहार-परिवर्तन के संबंध में प्रदत्तों (साक्ष्यों) के संकलन तथा उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया मूल्यांकन है
माइकेलिसमूल्यांकन उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय करने की प्रक्रिया है
कोठारी आयोग (1964–66)मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है और शिक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है

पहचान का सूत्र: ‘प्रदत्त/व्यवहार-परिवर्तन’ = क्विलन-हन्ना; ‘उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा’ = माइकेलिस; ‘सतत प्रक्रिया’ = कोठारी आयोग।

अच्छे मूल्यांकन (परीक्षण) की विशेषताएँ

विशेषताअर्थविपरीत (दोष)
वैधता (Validity)जो मापना है, वही मापे — वर्तनी की जाँच के लिए लिखित श्रुतलेखअवैधता
विश्वसनीयता (Reliability)बार-बार प्रयोग पर लगभग समान परिणामअविश्वसनीयता
वस्तुनिष्ठता (Objectivity)जाँचने वाला बदलने पर भी अंक न बदलेंआत्मनिष्ठता, पक्षपात
व्यापकता (Comprehensiveness)पूरी विषयवस्तु और सभी उद्देश्य/कौशल समाहितसंकीर्णता
विभेदीकरण (Discrimination)योग्य और कम योग्य विद्यार्थियों में अंतर कर सकेसबको समान अंक
व्यावहारिकता (Usability)समय, खर्च और प्रशासन की दृष्टि से सुविधाजनकअव्यावहारिक

परीक्षाओं और प्रश्नों के प्रकार

आधारप्रकारभाषा-शिक्षण में उपयोग
परीक्षा का स्वरूपमौखिक परीक्षाउच्चारण, सस्वर वाचन, श्रवण और वार्तालाप कौशल
परीक्षा का स्वरूपलिखित परीक्षावर्तनी, सुलेख, रचना, व्याकरण, बोध
परीक्षा का स्वरूपप्रायोगिक परीक्षाकौशल का प्रत्यक्ष प्रदर्शन (जैसे अभिनय, भाषण, परियोजना)
प्रश्नों का स्वरूपनिबंधात्मक (वर्णनात्मक)चिंतन, कल्पना, संगठन, भाषा-शैली और भावाभिव्यक्ति; दोष — कम विषयवस्तु समाहित, जाँच में आत्मनिष्ठता
प्रश्नों का स्वरूपलघूत्तरात्मक / अतिलघूत्तरात्मकअवधारणा की संक्षिप्त समझ; निबंधात्मक और वस्तुनिष्ठ के बीच संतुलन
प्रश्नों का स्वरूपवस्तुनिष्ठ (सत्य-असत्य, बहुविकल्पी, मिलान, रिक्त स्थान)कम समय में अधिक प्रश्न, पूरी विषयवस्तु का समावेश, निश्चित उत्तर-कुंजी; दोष — अनुमान से उत्तर, अभिव्यक्ति की जाँच नहीं

परीक्षाओं के वर्गीकरण के दो प्रमुख आधार हैं — परीक्षा का स्वरूप और प्रश्नों का स्वरूप।

उपलब्धि परीक्षण, ब्लूप्रिंट और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन

उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test) यह जाँचता है कि पढ़ाई गई विषयवस्तु में विद्यार्थी ने क्या सीखा। इसके निर्माण के मुख्य चरण हैं: योजना बनाना (उद्देश्य, विषयवस्तु, प्रश्नों के प्रकार, अंक-भार तय करना), परीक्षण के प्रारंभिक रूप की रचना, प्रयोग (ट्रायल) और पुनर्निरीक्षण, तथा अंतिम रूप और उत्तर-कुंजी/अंक-योजना तैयार करना। REET 2024 की आधिकारिक कुंजी के अनुसार स्टेनले तथा रॉस वस्तुनिष्ठ परीक्षा-निर्माण के चार सोपान मानते हैं।

योजना चरण का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण रूपरेखा या ब्लूप्रिंट है — एक त्रि-आयामी तालिका जिसमें उद्देश्य (ज्ञान, अवबोध, अनुप्रयोग, कौशल), विषयवस्तु (इकाइयाँ) और प्रश्नों के प्रकार (निबंधात्मक, लघूत्तरात्मक, वस्तुनिष्ठ) के अनुसार अंक बाँटे जाते हैं। ब्लूप्रिंट देखते ही विषयवस्तु का अंक-विभाजन, उद्देश्यों का मापन और हर उद्देश्य का प्रतिशत भार पता चल जाता है।

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) का प्रावधान निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE) में है। ‘सतत’ का अर्थ है पूरे सत्र में लगातार (रचनात्मक/Formative) और सत्र के अंत में योगात्मक (Summative) मूल्यांकन; ‘व्यापक’ का अर्थ है शैक्षिक (हिंदी, गणित आदि) और सह-शैक्षिक (रुचि, व्यवहार, सहयोग) दोनों क्षेत्र। गुण — छात्र वर्ष भर अध्ययनशील रहते हैं, शिक्षक निरंतर निर्देशन देते हैं, अभिभावकों को प्रगति की लगातार जानकारी मिलती है और रटने पर निर्भरता घटती है। सीमा — शिक्षक का कार्यभार बढ़ता है और आत्मनिष्ठ आकलन में पक्षपात की संभावना रहती है।

कक्षा में इसका उपयोग

भाषा कौशल / उद्देश्यउपयुक्त मूल्यांकन तकनीककक्षा का उदाहरण
सुनना (श्रवण)मौखिक प्रश्न, सुनकर निर्देश पालनकहानी सुनाकर पूछें — ‘खरगोश क्यों हारा?’; कक्षा 1–5
बोलना (उच्चारण, अभिव्यक्ति)मौखिक परीक्षा, अवलोकन, रेटिंग स्केल‘मेरा प्रिय त्योहार’ पर एक मिनट बोलना; उच्चारण, प्रवाह, आत्मविश्वास पर जाँच-सूची
पढ़ना (वाचन, बोध)सस्वर वाचन जाँच, मौन पठन के बाद बोध-प्रश्नअपठित अनुच्छेद देकर शीर्षक और तीन प्रश्न; कक्षा 4–8
लिखना (वर्तनी, रचना)श्रुतलेख, लिखित परीक्षा, निबंधात्मक प्रश्न10 शब्दों का श्रुतलेख; कक्षा 6–8 में पत्र या अनुच्छेद लेखन
सतत प्रगतिपोर्टफोलियो, उपाख्यान अभिलेख (anecdotal record)हर माह बच्चे का एक लेखन-नमूना फ़ाइल में जोड़ना और सुधार देखना
कमज़ोरी की पहचाननिदानात्मक परीक्षण → उपचारात्मक शिक्षण‘ि/ी’ की मात्रा में बार-बार गलती मिलने पर जोड़ी-शब्दों से अभ्यास

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

‘नहीं है/असत्य है’ वाले प्रश्नों में दो ट्रिक काम आती हैं: (1) ‘केवल’, ‘कभी नहीं’, ‘सभी’ जैसे निरपेक्ष शब्दों वाला विकल्प प्रायः गलत होता है (जैसे ‘मूल्यांकन केवल विद्यार्थी के लिए पुनर्बलन है’); (2) ‘गुण नहीं है’ पूछे तो वह विकल्प खोजें जो सीमा/दोष बता रहा हो (पक्षपात, धन-समय का खर्च, अभिव्यक्ति का अवसर न मिलना)।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 35

वस्तुनिष्ठ परीक्षा हेतु ‘स्टेनले तथा रॉस’ के अनुसार परीक्षा के निर्माण में कितने सोपानों का अनुसरण किया जाता है ?

  1. Aपाँच सोपानों का
  2. Bचार सोपानों का
  3. Cतीन सोपानों का
  4. Dदो सोपानों का

व्याख्या

आधिकारिक उत्तर-कुंजी के अनुसार स्टेनले तथा रॉस के मत में वस्तुनिष्ठ परीक्षा के निर्माण में चार सोपानों का अनुसरण किया जाता है। मूल्यांकन की पाठ्य-सामग्री में परीक्षा-निर्माण को सामान्यतः चार चरणों — योजना बनाना, परीक्षा तैयार करना, परीक्षण (ट्रायल) और मूल्यांकन — में बाँटकर पढ़ाया जाता है। अतः उत्तर ‘चार सोपानों का’ है।

प्रश्न 44

‘उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा’ से तुरंत क्या पता लगा सकते हैं ?

  1. Aविषय-वस्तु का अंक विभाजन
  2. Bलक्ष्य-निर्धारण का मापन
  3. Cलक्ष्यों के महत्त्व का प्रतिशत
  4. Dउपर्युक्त सभी

व्याख्या

उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा (blueprint) एक त्रि-आयामी तालिका होती है, जिसमें उद्देश्यों, विषय-वस्तु और प्रश्नों के प्रकार के अनुसार अंकों का विभाजन दिखाया जाता है। इससे विषय-वस्तु का अंक विभाजन, उद्देश्यों/लक्ष्यों का मापन और प्रत्येक लक्ष्य को दिया गया प्रतिशत भार तुरंत ज्ञात हो जाता है। इसलिए ‘उपर्युक्त सभी’ सही है।

प्रश्न 66

अच्छे मूल्यांकन की विशेषता है -

  1. Aअविश्वसनीयता
  2. Bअवैधता
  3. Cसंकीर्णता
  4. Dविभेदीकरण

व्याख्या

अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ हैं — विश्वसनीयता, वैधता, व्यापकता और विभेदीकरण (discrimination) की क्षमता, अर्थात् वह योग्य और कम योग्य विद्यार्थियों में अंतर कर सके। अविश्वसनीयता, अवैधता और संकीर्णता अच्छे मूल्यांकन के दोष हैं। अतः ‘विभेदीकरण’ सही उत्तर है।

प्रश्न 88

निम्नलिखित में से मूल्यांकन के संबंध में असत्य कथन है -

  1. Aमूल्यांकन अधिगम उद्देश्यों की प्राप्ति का पता लगाने की प्रक्रिया है ।
  2. Bमूल्यांकन निष्कर्षों के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण करवाया जाता है ।
  3. Cमूल्यांकन प्रक्रिया केवल विद्यार्थी के लिए पुनर्बलन का काम करती है ।
  4. Dमूल्यांकन शिक्षण विधियों की उपादेयता और कमजोरी का भी परिचायक होता है ।

व्याख्या

मूल्यांकन केवल विद्यार्थी के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षक, अभिभावक और पाठ्यक्रम-निर्माताओं के लिए भी प्रतिपुष्टि और पुनर्बलन का काम करता है। इसलिए ‘मूल्यांकन प्रक्रिया केवल विद्यार्थी के लिए पुनर्बलन का काम करती है’ असत्य कथन है। शेष तीनों कथन मूल्यांकन के सही कार्य बताते हैं।

प्रश्न 49

परीक्षाओं के स्वरूप के आधार पर परीक्षाएँ कितने प्रकार की होती हैं ?

  1. Aएक
  2. Bदो
  3. Cतीन
  4. Dचार

व्याख्या

स्वरूप के आधार पर परीक्षाएँ तीन प्रकार की मानी जाती हैं — मौखिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और प्रायोगिक परीक्षा। इसलिए सही उत्तर ‘तीन’ है।

प्रश्न 52

“विद्यालय में हुए छात्रों के व्यवहार-परिवर्तन के सम्बन्ध में प्रदत्तों के संकलन तथा उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया को मूल्यांकन कहते हैं ।” यह परिभाषा किसके द्वारा दी गई है ?

  1. Aक्वालेन तथा हन्ना
  2. Bली. जे. क्रॉनबैक
  3. Cस्टेलने तथा रॉस
  4. Dरवीन्द्र नाथ टैगोर

व्याख्या

मूल्यांकन की यह परिभाषा — ‘विद्यालय में हुए छात्रों के व्यवहार-परिवर्तन के सम्बन्ध में प्रदत्तों के संकलन तथा उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया को मूल्यांकन कहते हैं’ — क्वालेन (क्विलन) तथा हन्ना द्वारा दी गई है। इसमें मूल्यांकन को छात्रों के व्यवहार-परिवर्तन से जुड़े आँकड़ों के संग्रह और व्याख्या की प्रक्रिया माना गया है।

प्रश्न 58

परीक्षाओं के वर्गीकरण के प्रमुख आधार कौन-से हैं ?

  1. Aपरीक्षाओं का स्वरूप
  2. Bप्रश्नों का स्वरूप
  3. C(A) और (B) दोनों
  4. Dदोनों में से कोई नहीं

व्याख्या

परीक्षाओं का वर्गीकरण मुख्यतः दो आधारों पर किया जाता है — परीक्षाओं का स्वरूप (मौखिक, लिखित, प्रायोगिक) और प्रश्नों का स्वरूप (निबंधात्मक, लघूत्तरात्मक, वस्तुनिष्ठ)। इसलिए (A) और (B) दोनों सही है।

प्रश्न 73

निम्नलिखित में से उपलब्धि परीक्षण के निर्माण का पद नहीं है-

  1. Aयोजना बनाना ।
  2. Bपरीक्षण के प्रारंभिक रूप की रचना करना ।
  3. Cपरीक्षण का पुनर्निरीक्षण करना ।
  4. Dसंप्रत्ययविस्थापित करना ।

व्याख्या

उपलब्धि परीक्षण के निर्माण के मुख्य चरण हैं — योजना बनाना, परीक्षण के प्रारंभिक रूप की रचना करना, परीक्षण का प्रशासन/पुनर्निरीक्षण करना और अंतिम रूप देना। ‘संप्रत्यय विस्थापित करना’ परीक्षण निर्माण का कोई चरण नहीं है।

प्रश्न 76

“मूल्यांकन, उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय करने की प्रक्रिया है ।” उक्त कथन है-

  1. Aकोठारी आयोग का
  2. Bमाइकेलिस का
  3. Cसी. सी. रॉस का
  4. Dक्विलन एवं हैना का

व्याख्या

‘मूल्यांकन, उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय करने की प्रक्रिया है’ — यह परिभाषा माइकेलिस की मानी जाती है। इसमें मूल्यांकन को शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति से जोड़ा गया है। प्रदत्तों के संकलन व व्याख्या वाली परिभाषा क्विलन एवं हैना की है।

प्रश्न 88

विद्यार्थियों के चिंतन एवं अभिव्यक्ति के प्रभावी मूल्यांकन हेतु उपयुक्त लिखित परीक्षा है-

  1. Aवस्तुनिष्ठ परीक्षा
  2. Bरिक्त-स्थान पूर्ति परीक्षा
  3. Cप्रायोगिक परीक्षा
  4. Dनिबंधात्मक परीक्षा

व्याख्या

निबंधात्मक परीक्षा में विद्यार्थी को विचारों को संगठित करके अपने शब्दों में विस्तार से लिखना होता है, इसलिए इससे चिंतन और अभिव्यक्ति का प्रभावी मूल्यांकन होता है। वस्तुनिष्ठ और रिक्त-स्थान पूर्ति परीक्षाएँ मुख्यतः तथ्यात्मक ज्ञान जाँचती हैं।

प्रश्न 41

‘वस्तुनिष्ठ प्रश्नों’ के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है ?

  1. Aइन्हें वर्णनात्मक प्रश्न कहा जाता है ।
  2. Bये प्रश्न पाठ्यविषय को अधिक से अधिक समावृत्त कर सकते हैं ।
  3. Cइन प्रश्नों के मूल्यांकन में शिक्षक को स्वतन्त्रता रहती है ।
  4. Dइन प्रश्नों के द्वारा कम समय में अधिक प्रश्नों के उत्तर नहीं दे सकते हैं ।

व्याख्या

वस्तुनिष्ठ प्रश्न छोटे होते हैं, इसलिए कम समय में अधिक संख्या में पूछे जा सकते हैं और पूरे पाठ्यविषय को अधिक से अधिक समावृत्त (cover) करते हैं। इनका मूल्यांकन निश्चित उत्तर-कुंजी से होता है, जिसमें शिक्षक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं रहती। ‘वर्णनात्मक प्रश्न’ निबंधात्मक प्रश्नों को कहा जाता है।

प्रश्न 55

परीक्षा के समय ही अध्ययन करने वाले छात्रों के संदर्भ में सत्य-कथन है

  1. Aउन्हें पाठ्यसामग्री का पूरा ज्ञान होता है ।
  2. Bउन्हें अपनी कमियों का निरंतर ज्ञान होता रहता है ।
  3. Cवे समझने की अपेक्षा रटने पर अधिक निर्भर रहते है ।
  4. Dमाता-पिता व अभिभावकों को उनकी प्रगति की निरंतर जानकारी रहती है ।

व्याख्या

जो छात्र केवल परीक्षा के समय पढ़ते हैं, उनके पास समय कम होता है, इसलिए वे विषय को समझने की बजाय रटने पर अधिक निर्भर रहते हैं। उन्हें न पाठ्यसामग्री का पूरा ज्ञान होता है, न अपनी कमियों का निरंतर पता चलता है। यही कारण है कि सतत मूल्यांकन पर बल दिया जाता है।

प्रश्न 68

निबंधात्मक प्रश्नों का गुण नहीं है

  1. Aछात्रों को भाषा-शैली एवं लेखन कला का ज्ञान होता है ।
  2. Bबालकों की कल्पना शक्ति, स्मरण शक्ति, विश्लेषण एवं विचार-शक्ति का विकास होता है ।
  3. Cये प्रश्न रचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहन देते है ।
  4. Dइनसे छात्रों को भावाभिव्यक्ति का अवसर नहीं मिलता है ।

व्याख्या

निबंधात्मक प्रश्नों में छात्र अपने शब्दों में विस्तार से उत्तर लिखते हैं, इसलिए उन्हें भावाभिव्यक्ति का पूरा अवसर मिलता है। भाषा-शैली, कल्पना, विश्लेषण और रचनात्मक चिंतन का विकास इनके गुण हैं। अतः ‘भावाभिव्यक्ति का अवसर नहीं मिलता’ कथन गुण नहीं है (और गलत भी है)।

प्रश्न 70

लिखित परीक्षा उपयोगी है

  1. Aउच्चारण कौशल मापन में
  2. Bभाषायी व्यवहार मापन में
  3. Cश्रवण-कौशल मापन में
  4. Dवर्तनी की शुद्धता मापन में

व्याख्या

वर्तनी (spelling) की शुद्धता लिखकर ही जाँची जा सकती है, इसलिए इसके मापन में लिखित परीक्षा उपयोगी है। उच्चारण और श्रवण कौशल तथा भाषायी व्यवहार का मापन मौखिक परीक्षा या अवलोकन से बेहतर होता है।

प्रश्न 74

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन का गुण नहीं है

  1. Aछात्र वर्ष भर अध्ययनशील रहते हैं ।
  2. Bशिक्षक छात्रों को आवश्यक निर्देशन निरन्तर देते रहते हैं ।
  3. Cइस प्रणाली में पक्षपात की संभावना रहती है ।
  4. Dअभिभावक को बच्चों की प्रगति की निरन्तर जानकारी होती रहती है ।

व्याख्या

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) में छात्र वर्ष भर अध्ययनशील रहते हैं, शिक्षक निरंतर मार्गदर्शन देते हैं और अभिभावकों को प्रगति की लगातार जानकारी मिलती है— ये इसके गुण हैं। ‘पक्षपात की संभावना रहना’ इसकी एक सीमा/दोष है, गुण नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘मूल्यांकन = मापन + ?’ — रिक्त स्थान के लिए सबसे उपयुक्त है —

  1. Aअंक
  2. Bमूल्य-निर्णय
  3. Cपरीक्षा
  4. Dप्रश्न-पत्र

व्याख्या

मापन केवल अंकों में व्यक्त करता है, जबकि मूल्यांकन उन अंकों और अन्य प्रमाणों के आधार पर मूल्य-निर्णय भी देता है।

प्रश्न 2

जो परीक्षण बार-बार प्रयोग करने पर लगभग समान परिणाम दे, उसमें कौन-सा गुण है?

  1. Aविश्वसनीयता
  2. Bवैधता
  3. Cव्यापकता
  4. Dविभेदीकरण

व्याख्या

परिणामों की संगति (स्थिरता) को विश्वसनीयता कहते हैं। वैधता का अर्थ है कि परीक्षण वही मापे जिसके लिए बना है।

प्रश्न 3

सुलेख की जाँच के लिए बनाए गए परीक्षण में यदि केवल व्याकरण के प्रश्न हों, तो उसमें किस गुण का अभाव है?

  1. Aविश्वसनीयता
  2. Bवस्तुनिष्ठता
  3. Cव्यावहारिकता
  4. Dवैधता

व्याख्या

जो परीक्षण वह नहीं मापता जिसके लिए बना है, वह अवैध है। सुलेख मापने के लिए व्याकरण के प्रश्न देना वैधता का अभाव है।

प्रश्न 4

‘मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है और शिक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है’ — यह विचार किससे जुड़ा है?

  1. Aमुदालियर आयोग
  2. Bहंटर आयोग
  3. Cकोठारी आयोग
  4. Dसैडलर आयोग

व्याख्या

कोठारी आयोग (1964–66) ने मूल्यांकन को सतत प्रक्रिया और शिक्षा का अभिन्न अंग माना। अन्य आयोग इस परिभाषा से नहीं जुड़े हैं।

प्रश्न 5

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की एक सीमा है —

  1. Aइनसे विद्यार्थी की भावाभिव्यक्ति और लेखन-शैली की जाँच नहीं हो पाती
  2. Bपूरी विषयवस्तु समाहित हो सकती है
  3. Cकम समय में अधिक प्रश्न पूछे जा सकते हैं
  4. Dइनकी जाँच में वस्तुनिष्ठता रहती है

व्याख्या

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में केवल सही विकल्प चुनना होता है, इसलिए अभिव्यक्ति और लेखन-शैली नहीं जाँची जा सकती। शेष तीनों इनके गुण हैं।

प्रश्न 6

उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) के तीन आयाम हैं —

  1. Aसमय, स्थान, कक्षा
  2. Bशिक्षक, छात्र, अभिभावक
  3. Cउद्देश्य, विषयवस्तु, प्रश्नों के प्रकार
  4. Dपाठ्यपुस्तक, श्यामपट, चार्ट

व्याख्या

ब्लूप्रिंट एक त्रि-आयामी तालिका है जिसमें उद्देश्यों, विषयवस्तु और प्रश्नों के प्रकार के अनुसार अंकों का विभाजन किया जाता है।

प्रश्न 7

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में ‘व्यापक’ शब्द का अर्थ है —

  1. Aकेवल वर्ष के अंत में परीक्षा
  2. Bशैक्षिक और सह-शैक्षिक दोनों क्षेत्रों का मूल्यांकन
  3. Cकेवल लिखित परीक्षा
  4. Dकेवल हिंदी और गणित का मूल्यांकन

व्याख्या

‘व्यापक’ का अर्थ है विद्यार्थी के शैक्षिक (विषय) और सह-शैक्षिक (व्यवहार, रुचि, सहयोग आदि) — दोनों पक्षों का आकलन। ‘सतत’ निरंतरता को दर्शाता है।

प्रश्न 8

कक्षा 3 के बच्चों के उच्चारण और सस्वर वाचन कौशल का आकलन करने के लिए सबसे उपयुक्त है —

  1. Aमौखिक परीक्षा व अवलोकन जाँच-सूची
  2. Bबहुविकल्पी प्रश्न
  3. Cनिबंधात्मक परीक्षा
  4. Dश्रुतलेख

व्याख्या

उच्चारण और सस्वर वाचन बोलकर ही प्रदर्शित होते हैं, इसलिए मौखिक परीक्षा और अवलोकन जाँच-सूची उपयुक्त हैं। श्रुतलेख वर्तनी जाँचता है।

प्रश्न 9

शिक्षिका ने इकाई परीक्षा में देखा कि अधिकांश बच्चे ‘र’ के विभिन्न रूपों (प्र, र्म) में गलती कर रहे हैं। मूल्यांकन के बाद उनका अगला सबसे उचित कदम है —

  1. Aअगली इकाई शुरू कर देना
  2. Bनिदान के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण और अभ्यास कराना
  3. Cगलती करने वाले बच्चों को कम अंक देकर आगे बढ़ना
  4. Dपरीक्षा दोबारा वैसी ही लेना

व्याख्या

मूल्यांकन का उद्देश्य कमज़ोरियाँ पहचानकर उन्हें दूर करना है। निदान के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण ही मूल्यांकन के निष्कर्षों का सही उपयोग है।

प्रश्न 10

निम्न में से किस स्थिति में निबंधात्मक प्रश्न सबसे उपयुक्त रहेंगे?

  1. Aकम समय में पूरी पुस्तक के तथ्यों की जाँच
  2. Bसमानार्थी शब्दों का मिलान
  3. Cवर्तनी की त्वरित जाँच
  4. Dविद्यार्थी की विचार-संगठन और भावाभिव्यक्ति क्षमता की जाँच

व्याख्या

निबंधात्मक प्रश्नों में विद्यार्थी को विचारों को संगठित करके अपने शब्दों में लिखना होता है, इसलिए ये चिंतन और अभिव्यक्ति जाँचने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मापन और मूल्यांकन में क्या अंतर है?+

मापन किसी गुण को अंकों में व्यक्त करता है और यह मात्रात्मक होता है। मूल्यांकन मापन के साथ गुणात्मक प्रमाण जोड़कर उद्देश्यों की प्राप्ति पर मूल्य-निर्णय देता है, इसलिए यह अधिक व्यापक है।

REET में मूल्यांकन टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+

संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में भाषा के शिक्षणशास्त्र में मूल्यांकन से 15 प्रश्न आए, जिनमें परिभाषाएँ, परीक्षाओं के प्रकार और CCE प्रमुख थे।

स्वरूप के आधार पर परीक्षाएँ कितने प्रकार की होती हैं?+

तीन — मौखिक, लिखित और प्रायोगिक। प्रश्नों के स्वरूप के आधार पर निबंधात्मक, लघूत्तरात्मक और वस्तुनिष्ठ प्रश्न होते हैं।

भाषा में वर्तनी और उच्चारण का मूल्यांकन कैसे करें?+

वर्तनी की शुद्धता लिखकर ही जाँची जा सकती है, इसलिए श्रुतलेख या लिखित परीक्षा उपयुक्त है। उच्चारण और श्रवण कौशल के लिए मौखिक परीक्षा और अवलोकन बेहतर हैं।

CCE का गुण क्या नहीं है?+

पक्षपात की संभावना CCE का गुण नहीं, बल्कि उसकी सीमा है। वर्ष भर अध्ययनशीलता, निरंतर निर्देशन और अभिभावकों को नियमित जानकारी इसके गुण हैं।

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आधिकारिक स्रोत

  1. BSER — REET 2024 आधिकारिक प्रश्न-पत्र व अंतिम उत्तर-कुंजी (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)
  2. निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — India Code
  3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 — NCERT

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए