अपठित पद्यांश: भाव, रस, अलंकार और भाषा-शैली के प्रश्न कैसे हल करें — REET नोट्स
इस पेज में अपठित पद्यांश (कविता-अंश) को पढ़कर उसके भाव, संदेश, रस, अलंकार, काव्य गुण और भाषा-शैली पहचानने की पूरी विधि दी गई है। REET 2024 में इस टॉपिक से 15 प्रश्न आए — यह हिंदी खंड के सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिकों में है — इसलिए यहाँ की तैयारी सीधे अंकों में बदलती है।
- REET 2024 में 15 प्रश्न
- कक्षा 9–12 काव्य-बोध स्तर
- 7 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में तीन प्रसिद्ध कविता-अंशों पर 15 प्रश्न आए: जयशंकर प्रसाद का ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’, प्रसाद का ही ‘बीती विभावरी जाग री’ और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ‘राम की शक्ति पूजा’ का अंश। प्रश्नों के चार प्रकार थे — (1) भाव/संदेश/जीवन-मूल्य (राष्ट्र प्रेम, जागरण की प्रेरणा, राम का मानव रूप), (2) पंक्ति का भाव या तथ्य (पश्चात्ताप, मायावरण का भेद किसने किया, वाडवाग्नि = समुद्र की आग), (3) अलंकार (‘सैन्य-सिंधु’ में रूपक, ‘खग-कुल कुल-कुल-सा’ में अनुप्रास) और (4) भाषा-शैली (तत्सम शब्दावली, नाद-सौंदर्य का कारण)। ‘असंगत कथन/व्याख्या’ वाले प्रश्न भी तीन बार आए। अर्थात कविता को ध्यान से पढ़ना और काव्यशास्त्र की बुनियादी शब्दावली जानना — दोनों ज़रूरी हैं।
पद्यांश को कैसे पढ़ें: भाव पक्ष और कला पक्ष
अपठित पद्यांश में गद्यांश की तुलना में शब्द कम और अर्थ अधिक होता है। कवि प्रतीक, बिंब और अलंकार से बात कहता है, इसलिए पहले पठन में केवल ‘कविता किसके बारे में है और किस मनोदशा में है’ — इतना पकड़ें। दूसरे पठन में कठिन शब्दों का अर्थ संदर्भ से निकालें और तीसरी बार प्रश्नों के अनुसार पंक्तियाँ खोजें।
किसी भी कविता के दो पक्ष होते हैं। भाव पक्ष — कविता का विषय, भाव, संदेश, रस और जीवन-मूल्य (जैसे राष्ट्र प्रेम, प्रकृति प्रेम, जागरण)। कला पक्ष — भाषा (तत्सम/तद्भव/देशज), शब्द-शक्ति, अलंकार, छंद, लय, तुक, नाद-सौंदर्य और काव्य गुण। REET के प्रश्न इन्हीं दो पक्षों में से पूछे जाते हैं; ‘भाव-सौंदर्य’ शब्द आए तो भाव पक्ष, ‘शिल्प-सौंदर्य’ या ‘भाषा की विशेषता’ आए तो कला पक्ष देखें।
एक सावधानी: प्रतीकात्मक शब्दों को शब्दशः न लें। ‘अराति सैन्य-सिंधु में सुवाडवाग्नि से जलो’ में कवि किसी वास्तविक समुद्र की बात नहीं कर रहा — शत्रु की सेना को समुद्र मानकर वीरों से उसमें बड़वानल (समुद्र के भीतर की आग) की तरह जलने का आह्वान कर रहा है। इसी तरह ‘आँखों में भरे विहाग’ (विहाग रात्रि का राग है) नींद भरी आँखों का संकेत है, आधी रात के गीत का वर्णन नहीं।
REET 2024 के तीन पद्यांश: एक नज़र में
| कविता-अंश | कवि | मुख्य भाव | भाषा/शिल्प की विशेषता |
|---|---|---|---|
| हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती | जयशंकर प्रसाद (नाटक ‘चंद्रगुप्त’ का गीत) | राष्ट्र प्रेम, स्वतंत्रता के लिए बढ़ते रहने का आह्वान (वीर रस) | संस्कृतनिष्ठ शब्दावली, ओज गुण, ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ की आवृत्ति से प्रभावी नाद |
| बीती विभावरी जाग री | जयशंकर प्रसाद (‘लहर’ संग्रह) | प्रभात का वर्णन और सखी को जागने की प्रेरणा | तत्सम शब्द (विभावरी, खग-कुल, किसलय, मलयज), माधुर्य गुण, समान तुक (नागरी–गागरी, जाग री–विहाग री) |
| राम की शक्ति पूजा (अंश) | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | साधना में बाधा पर राम का आत्म-धिक्कार और पश्चात्ताप; राम का मानवीय रूप | तत्सम प्रधान, दीर्घ सामासिक पदावली, गंभीर शैली |
प्रसिद्ध कविताओं के कवि और भाव याद हों तो पद्यांश पढ़ने में आधा समय बचता है।
रस और स्थायी भाव
| रस | स्थायी भाव | पहचान |
|---|---|---|
| शृंगार | रति | प्रेम; संयोग और वियोग दो भेद |
| हास्य | हास | विचित्र वेशभूषा, वचन या चेष्टा पर हँसी |
| करुण | शोक | प्रिय के नाश या वियोग का दुःख |
| रौद्र | क्रोध | अपमान या अन्याय पर क्रोध |
| वीर | उत्साह | युद्ध, दान, दया या धर्म के लिए उत्साह |
| भयानक | भय | डरावनी वस्तु या स्थिति |
| वीभत्स | जुगुप्सा | घृणित दृश्य से उत्पन्न घृणा |
| अद्भुत | विस्मय | आश्चर्यजनक वस्तु या घटना |
| शांत | निर्वेद | संसार से विरक्ति |
| वात्सल्य | वत्सलता (संतान-विषयक रति) | माता-पिता का संतान के प्रति स्नेह |
| भक्ति | भगवद्विषयक रति | ईश्वर के प्रति अनुराग |
काव्यशास्त्र में मूल रूप से 9 रस माने गए; बाद में वात्सल्य और भक्ति को जोड़कर 11 रस गिने जाते हैं।
प्रमुख अलंकार: पहचान के संकेत के साथ
| अलंकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति | खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा; चारु चंद्र की चंचल किरणें |
| यमक | एक ही शब्द बार-बार, हर बार अलग अर्थ | कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय (सोना/धतूरा) |
| श्लेष | शब्द एक बार, पर अर्थ अनेक | रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून (चमक, इज़्ज़त, जल) |
| उपमा | उपमेय-उपमान में समानता; सा, सी, सम, सरिस जैसे वाचक शब्द | पीपर पात सरिस मन डोला |
| रूपक | उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप; प्रायः योजक-चिह्न | सैन्य-सिंधु, चरण-कमल, मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों |
| उत्प्रेक्षा | उपमेय में उपमान की संभावना; मानो, मनु, जनु, जानो | सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप परयो प्रभात॥ |
| अतिशयोक्ति | बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन | हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई |
| मानवीकरण | जड़ प्रकृति पर मानवीय क्रियाओं का आरोप | मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के (बादलों को सजे-धजे मेहमान की तरह दिखाना) |
| वक्रोक्ति | कहने वाले के आशय से भिन्न अर्थ निकालना (श्लेष या काकु से) | प्रश्न के उत्तर में शब्द का दूसरा अर्थ लेना |
रूपक और उत्प्रेक्षा में भ्रम सबसे आम है: ‘मानो/जनु’ दिखे तो उत्प्रेक्षा, ‘रूपी’ या सीधा अभेद (सेना ही समुद्र) हो तो रूपक।
काव्य गुण और भाषा पहचान: झट से दोहराएँ
- माधुर्य गुण
- कोमल वर्ण, समास कम, शृंगार/करुण/शांत रस में — ‘बीती विभावरी जाग री’
- ओज गुण
- ट, ठ, ड जैसे कठोर वर्ण, संयुक्ताक्षर, लंबे समास; वीर/रौद्र रस में
- प्रसाद गुण
- सरल, सुबोध भाषा; सुनते ही अर्थ स्पष्ट
- तत्सम शब्दावली की पहचान
- संस्कृत के ज्यों-के-त्यों शब्द — विभावरी, अंबर, नयनद्वय, उद्धार, दैन्य; ऐसी भाषा ‘संस्कृतनिष्ठ’ कहलाती है
- नाद-सौंदर्य के स्रोत
- वर्णों की आवृत्ति (अनुप्रास), समान तुक, पदों की आवृत्ति और लय
- भाव शब्दों के संकेत
- ‘धिक्’, ‘हाय’ = आत्मग्लानि/पश्चात्ताप; ‘बढ़े चलो’ = उत्साह; ‘जाग री’ = जागरण
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि (कक्षा 3–5)
छोटी तुकबंदी वाली बाल-कविता हाव-भाव के साथ गवाएँ, फिर पूछें — ‘कविता पढ़कर मन कैसा हुआ?’ और ‘कौन-से शब्दों की ध्वनि मीठी लगी?’ इससे भाव और नाद की समझ बिना परिभाषा के बनती है।
गतिविधि (कक्षा 6–8)
कविता की पंक्तियाँ कार्ड पर लिखकर समूहों को दें; समूह पहचानें कि पंक्ति में वर्णों की आवृत्ति है, तुलना है या ‘मानो’ वाली संभावना। फिर अपनी एक पंक्ति उसी अलंकार में बनाएँ।
शिक्षण सामग्री
कविता का ऑडियो/सस्वर वाचन, चित्र-कार्ड (उषा, पक्षी, पर्वत), अलंकार-पहचान चार्ट और शब्दकोश।
आम भ्रांतियाँ
रूपक और उपमा में भेद न कर पाना; हर शब्द-आवृत्ति को यमक मानना; प्रतीक को शब्दशः समझना (सैन्य-सिंधु = असली समुद्र)। उदाहरणों की तुलना कराकर इन्हें दूर करें।
आकलन का विचार
अपरिचित छोटी कविता देकर तीन प्रश्न पूछें: मुख्य भाव क्या है, कौन-सी पंक्ति सबसे सुंदर लगी और क्यों, कविता को एक शीर्षक दो।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
अलंकार का प्रश्न आए तो क्रम से जाँचें: वाचक शब्द (सा/सी/सम) → उपमा; ‘मानो/जनु’ → उत्प्रेक्षा; योजक-चिह्न से जुड़ा अभेद (चरण-कमल) → रूपक; वर्ण की आवृत्ति → अनुप्रास; शब्द दोबारा अलग अर्थ में → यमक; शब्द एक बार, अर्थ अनेक → श्लेष। REET में ‘असंगत’ प्रश्न में सबसे पहले वह विकल्प जाँचें जिसमें ‘अप्रभावी’, ‘पलायन’ जैसा नकारात्मक शब्द हो — प्रसिद्ध कविताओं के लिए ऐसे विकल्प प्रायः असंगत होते हैं।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 61
पद्यांश के संबंध में असंगत व्याख्या है
- Aसंस्कृतनिष्ठ शब्दावली
- Bउदात्त राष्ट्रप्रेम
- Cअप्रभावी नाद सौंदर्य
- Dअनुप्रास अलंकार का प्रभावी प्रयोग
व्याख्या
पद्यांश में ‘हिमाद्रि तुंग शृंग’, ‘प्रबुद्ध शुद्ध’ जैसी संस्कृतनिष्ठ शब्दावली, उदात्त राष्ट्रप्रेम और अनुप्रास (जैसे ‘प्रबुद्ध शुद्ध’, ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’) का प्रभावी प्रयोग है। इसकी लय और नाद सौंदर्य अत्यंत प्रभावी है, इसलिए ‘अप्रभावी नाद सौंदर्य’ असंगत व्याख्या है।
प्रश्न 62
सैन्य-सिंधु में कौन-सा अलंकार है ?
- Aवक्रोक्ति अलंकार
- Bउत्प्रेक्षा अलंकार
- Cरूपक अलंकार
- Dश्लेष अलंकार
व्याख्या
जहाँ उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप किया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। ‘सैन्य-सिंधु’ में शत्रु की सेना (उपमेय) को ही समुद्र (उपमान) मान लिया गया है — सेना रूपी सिंधु, इसलिए यहाँ रूपक अलंकार है। उत्प्रेक्षा में ‘मानो, जनु’ जैसे संभावना-सूचक शब्द होते हैं।
प्रश्न 63
पद्यांश में मातृभूमि के सपूत की विशेषता व्यक्त करने वाला शब्द नहीं है -
- Aशूर
- Bअमर्त्य
- Cप्रवीर
- Dभारती
व्याख्या
‘शूर’, ‘अमर्त्य’ और ‘प्रवीर’ शब्द मातृभूमि के सपूतों (वीरों) की विशेषता बताते हैं। ‘भारती’ शब्द भारत माता/भारतभूमि के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो स्वतंत्रता की पुकार कर रही है, न कि सपूत की विशेषता। अतः उत्तर (D) है।
प्रश्न 64
स्वतंत्रता हेतु किस प्रकार की आग के समान जलने का आह्वान कवि ने इस कविता में किया है ?
- Aजंगल की आग के समान
- Bईर्ष्या की आग के समान
- Cअंतरिक्ष की आग के समान
- Dसमुद्र की आग के समान
व्याख्या
पद्यांश में ‘अराति सैन्य-सिंधु में सुवाडवाग्नि से जलो’ कहा गया है। ‘वाडवाग्नि’ (बड़वानल) समुद्र के भीतर जलने वाली आग को कहते हैं। कवि शत्रु-सेना रूपी समुद्र में बड़वानल की तरह जलने का आह्वान करता है, इसलिए उत्तर ‘समुद्र की आग के समान’ है।
प्रश्न 65
पद्यांश में वर्णित प्रमुख जीवन-मूल्य है -
- Aप्रकृति प्रेम
- Bराष्ट्र प्रेम
- Cसंघर्षों से पलायन
- Dमानवीय सौहार्द
व्याख्या
पूरी कविता में स्वतंत्रता की पुकार, मातृभूमि के सपूतों को बढ़ते रहने और शत्रु से लड़ने का आह्वान है, इसलिए प्रमुख जीवन-मूल्य राष्ट्र प्रेम है। ‘संघर्षों से पलायन’ तो कविता के भाव के विपरीत है।
प्रश्न 61
पद्यांश में व्यक्त मुख्य संदेश है-
- Aपत्नी के प्रति समर्पित एकनिष्ठ प्रेम
- Bवसंत ऋतु की मादकता का चित्रण
- Cजागरण की प्रेरणा
- Dगोधूलि वेला का मनोरम वर्णन
व्याख्या
इस पद्यांश में कवि (जयशंकर प्रसाद) सखी को संबोधित करते हुए कहते हैं कि रात बीत गई है, उषा आ गई है, पक्षी बोल रहे हैं, इसलिए अब जाग जाओ। ‘बीती विभावरी जाग री’ पंक्ति से स्पष्ट है कि मुख्य संदेश जागरण की प्रेरणा है।
प्रश्न 62
पद्यांश में प्रभावी नाद-सौंदर्य का कारण है-
- Aद्वित्व व्यंजन प्रधान शब्द
- Bओजगुण का प्रभाव
- Cमूर्धन्य वर्णों की आवृत्ति
- Dसमान तुक वाले शब्दों का बाहुल्य
व्याख्या
पद्यांश में ‘नागरी-गागरी’, ‘बोल रहा-डोल रहा’, ‘पिए-किए’, ‘जाग री-विहाग री’ जैसे समान तुक वाले शब्दों का बाहुल्य है, जिससे लय और नाद-सौंदर्य उत्पन्न होता है। इसमें ओज गुण नहीं बल्कि माधुर्य गुण है, और द्वित्व व्यंजन या मूर्धन्य वर्णों की विशेष आवृत्ति नहीं है।
प्रश्न 63
भाव-सौंदर्य की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प है-
- Aप्रकृति के सौंदर्य का चित्रण
- Bप्रेयसी की मादकता का चित्रण
- Cउषा के आगमन का चित्रण
- Dमध्य रात्रि में गाये जाने वाले गीत का चित्रण
व्याख्या
पद्यांश में प्रकृति का सौंदर्य (खग-कुल, किसलय, लतिका), उषा का आगमन (‘तारा-घट उषा नागरी’) तथा सोई हुई सखी/प्रेयसी की मादकता (‘अधरों में राग अमंद पिए, अलकों में मलयज बंद किए’) का चित्रण है। ‘आँखों में भरे विहाग’ में विहाग (रात्रि का राग) केवल नींद भरी आँखों का प्रतीक है; कविता मध्य रात्रि के गीत का चित्रण नहीं करती, बल्कि प्रभात का वर्णन करती है। अतः अनुपयुक्त विकल्प (D) है।
प्रश्न 64
“खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा ।” पंक्ति में निम्नलिखित में से अलंकार है-
- Aश्लेष
- Bवक्रोक्ति
- Cअनुप्रास
- Dरूपक
व्याख्या
‘खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा’ में ‘क’ और ‘ल’ वर्णों की बार-बार आवृत्ति हुई है, इसलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है। (यहाँ ‘कुल’ शब्द अलग-अलग अर्थों — समूह और ध्वनि — में भी आया है, पर दिए गए विकल्पों में अनुप्रास ही उपयुक्त है।) श्लेष में एक शब्द के एक ही बार आने पर अनेक अर्थ होते हैं, जो यहाँ नहीं है।
प्रश्न 65
पद्यांश में प्रयुक्त भाषा के संदर्भ में उपयुक्त कथन है-
- Aतद्भव एवं देशज शब्द प्रधान भाषा
- Bआमबोल चाल युक्त सामासिक पदावली
- Cविदेशी शब्द प्रधान भाषा
- Dतत्सम शब्दावली युक्त भाषा
व्याख्या
पद्यांश में विभावरी, अंबर, उषा, खग-कुल, किसलय, लतिका, मधु-मुकुल, मलयज जैसे संस्कृत के तत्सम शब्दों का प्रयोग हुआ है। अतः इसकी भाषा तत्सम शब्दावली युक्त है; इसमें विदेशी या देशज शब्दों की प्रधानता नहीं है।
प्रश्न 76
निम्नलिखित में से मायावरण का भेद किसने किया ?
- Aराम के तीर ने
- Bराम के आँसू ने
- Cराम के विनय ने
- Dराम के मन ने
व्याख्या
पद्यांश की अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि राम का एक मन जो नहीं थका, जो दैन्य और विनय नहीं जानता, ‘कर गया भेद वह मायावरण प्राप्त कर जय’। अर्थात मायावरण का भेद राम के मन ने किया। ‘विनय’ को तो वह मन जानता ही नहीं था।
प्रश्न 77
‘जानकी ! हाय उद्धार प्रिया का हो न सका’ पंक्ति में भाव है
- Aघृणा का
- Bभय का
- Cपश्चात्ताप का
- Dक्रोध का
व्याख्या
‘जानकी! हाय उद्धार प्रिया का हो न सका’ में राम अपनी असफलता पर दुःखी होकर सोचते हैं कि वे प्रिया सीता का उद्धार नहीं कर सके। इसके ठीक पहले ‘धिक् जीवन’, ‘धिक् साधन’ जैसे आत्म-धिक्कार वाले शब्द हैं, इसलिए यहाँ पश्चात्ताप का भाव है; घृणा, भय या क्रोध का नहीं।
प्रश्न 78
पद्यांश के आधार पर असंगत कथन का चयन कीजिए
- Aध्यानमग्न राम दो चरण देख रहे हैं ।
- Bराम का चंचल मन स्थिर हो गया ।
- Cराम के दोनों नेत्र अश्रुपूर्ण हो गये ।
- Dराम की चेतना के भीतर एक ओर अचेतन मन था जो अभी तक निराश नहीं हुआ था ।
व्याख्या
पद्यांश में ‘हुआ सहसा स्थिर मन चंचल’ का अर्थ है— जो मन स्थिर था, वह सहसा चंचल हो गया (हाथ में नीलकमल न मिलने पर)। इसलिए ‘राम का चंचल मन स्थिर हो गया’ कथन उलटा और असंगत है। ध्यान में चरण-युगल देखना, नेत्रों का भर आना और न थकने वाला एक मन— ये बातें पद्यांश में हैं।
प्रश्न 79
पद्यांश में प्रयुक्त भाषा की विशेषता है
- Aतद्भव शब्दों का बाहुल्य
- Bतत्सम शब्दों का प्रयोग
- Cआम बोलचाल की भाषा
- Dदीर्घ सामासिक भाषा
व्याख्या
पद्यांश में नीलकमल, विमल, असिद्धि, नयनद्वय, उद्धार, दैन्य, मायावरण जैसे संस्कृतनिष्ठ (तत्सम) शब्दों का प्रयोग हुआ है। यह आम बोलचाल या तद्भव-प्रधान भाषा नहीं है। अतः भाषा की विशेषता तत्सम शब्दों का प्रयोग है।
प्रश्न 80
पद्यांश में राम का कौन-सा रूप उभर कर सामने आया है ?
- Aमानव
- Bईश्वर
- Cदानव
- Dमायावी
व्याख्या
पद्यांश में राम साधना में असफल होने पर रोते हैं, अपने जीवन को धिक्कारते हैं और प्रिया के उद्धार न कर पाने पर दुःखी होते हैं। ये सब मानवीय भावनाएँ हैं, इसलिए यहाँ राम का मानव रूप उभरकर आया है, ईश्वर या मायावी रूप नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
जिस पंक्ति में ‘मानो’, ‘जनु’ या ‘मनहुँ’ जैसे शब्दों से उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त हो, वहाँ अलंकार होता है —
- Aउत्प्रेक्षा
- Bरूपक
- Cउपमा
- Dश्लेष
व्याख्या
उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना को उत्प्रेक्षा कहते हैं और इसके वाचक शब्द मानो, मनु, जनु, मनहुँ हैं। उपमा में सा, सी, सम जैसे समानता-वाचक शब्द होते हैं।
प्रश्न 2
‘चरण-कमल बंदौं हरि राई’ में अलंकार है —
- Aउपमा
- Bयमक
- Cअनुप्रास
- Dरूपक
व्याख्या
यहाँ चरण (उपमेय) को ही कमल (उपमान) मान लिया गया है और कोई वाचक शब्द नहीं है, इसलिए अभेद आरोप होने से रूपक अलंकार है।
प्रश्न 3
‘वीर रस’ का स्थायी भाव है —
- Aक्रोध
- Bउत्साह
- Cविस्मय
- Dनिर्वेद
व्याख्या
वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है। क्रोध रौद्र रस का, विस्मय अद्भुत रस का और निर्वेद शांत रस का स्थायी भाव है।
प्रश्न 4
‘कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय’ में ‘कनक’ शब्द दो बार अलग-अलग अर्थों (सोना, धतूरा) में आया है। यहाँ अलंकार है —
- Aयमक
- Bश्लेष
- Cअनुप्रास
- Dउपमा
व्याख्या
जब एक ही शब्द बार-बार आए और हर बार उसका अर्थ अलग हो, तो यमक अलंकार होता है। श्लेष में शब्द एक ही बार आता है पर उसके अनेक अर्थ निकलते हैं।
प्रश्न 5
कोमल वर्णों, कम समास और मधुर लय वाली शृंगार या करुण रस की कविता में प्रायः कौन-सा काव्य गुण होता है?
- Aओज
- Bप्रसाद
- Cकोई नहीं
- Dमाधुर्य
व्याख्या
माधुर्य गुण में कोमल वर्ण, छोटे समास और मधुर ध्वनि होती है और यह शृंगार, करुण व शांत रस में प्रायः मिलता है। ओज गुण कठोर वर्णों और लंबे समासों वाला होता है।
प्रश्न 6
कविता में ‘धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध’ जैसी पंक्ति से मुख्य रूप से कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
- Aआत्मग्लानि
- Bउल्लास
- Cवात्सल्य
- Dविस्मय
व्याख्या
‘धिक्’ शब्द धिक्कार का सूचक है; अपने ही जीवन को धिक्कारना आत्मग्लानि (और पश्चात्ताप) का भाव है। उल्लास, वात्सल्य या विस्मय का यहाँ कोई संकेत नहीं है।
प्रश्न 7
‘विभावरी, अंबर, किसलय, मलयज’ जैसे शब्दों वाली कविता की भाषा के बारे में सही कथन है —
- Aदेशज शब्द प्रधान
- Bतत्सम शब्द प्रधान
- Cविदेशी शब्द प्रधान
- Dतद्भव शब्द प्रधान
व्याख्या
ये सभी शब्द संस्कृत के मूल रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, इसलिए तत्सम हैं और ऐसी भाषा तत्सम प्रधान (संस्कृतनिष्ठ) कहलाती है।
प्रश्न 8
‘सैन्य-सिंधु में वाडवाग्नि-सा जलो’ जैसी पंक्ति का आशय है —
- Aसमुद्र में वास्तव में आग लगाओ
- Bसेना को समुद्र पार ले जाओ
- Cशत्रु-सेना के बीच समुद्र की आग की तरह प्रचंड होकर लड़ो
- Dयुद्ध से दूर रहो
व्याख्या
सैन्य-सिंधु रूपक है — शत्रु-सेना को समुद्र माना गया है और वाडवाग्नि समुद्र के भीतर की आग है। अतः आशय है कि शत्रु-सेना में बड़वानल की तरह प्रचंड होकर संघर्ष करो।
प्रश्न 9
कक्षा 7 के बच्चे रूपक और उपमा में भ्रमित होते हैं। शिक्षक के लिए सबसे प्रभावी उपाय है —
- Aदोनों की परिभाषाएँ दस बार लिखवाना
- Bकेवल परीक्षा से पहले अलंकार पढ़ाना
- Cएक ही वस्तु पर दोनों तरह के वाक्य (‘मुख चंद्र-सा है’, ‘मुख-चंद्र’) की तुलना करवाकर अंतर खोजने देना
- Dअलंकार पढ़ाना छोड़ देना
व्याख्या
एक ही उदाहरण के दो रूपों की तुलना से बच्चे स्वयं समझते हैं कि उपमा में ‘सा’ जैसा वाचक शब्द है और रूपक में सीधा अभेद। यह आगमन आधारित, सक्रिय अधिगम है।
प्रश्न 10
अपरिचित कविता पर प्रश्न देते समय भाव-बोध का सबसे अच्छा आकलन किस प्रश्न से होगा?
- Aकवि का जन्म वर्ष लिखो
- Bकविता का मुख्य भाव अपने शब्दों में लिखो और एक उपयुक्त शीर्षक दो
- Cकविता की पहली पंक्ति याद करके लिखो
- Dकविता में कितने शब्द हैं
व्याख्या
अपने शब्दों में भाव लिखना और शीर्षक देना समझ की गहराई दिखाता है। जन्म वर्ष, रटी पंक्ति या शब्द-गणना से भाव-बोध का आकलन नहीं होता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में अपठित पद्यांश से कितने प्रश्न आते हैं?+
संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में तीन कविता-अंशों पर कुल 15 प्रश्न आए, जो इस टॉपिक को हिंदी भाषा खंड का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।
रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकार में क्या अंतर है?+
रूपक में उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है (सैन्य-सिंधु — सेना ही समुद्र)। उत्प्रेक्षा में उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाती है और ‘मानो, मनु, जनु’ जैसे शब्द आते हैं।
कविता की भाषा ‘तत्सम प्रधान’ है, यह कैसे पहचानें?+
यदि विभावरी, अंबर, नयन, उद्धार, दैन्य जैसे संस्कृत के मूल रूप वाले शब्द अधिक हों और आम बोलचाल के तद्भव शब्द (आँख, रात, आग) कम हों, तो भाषा तत्सम प्रधान या संस्कृतनिष्ठ है।
‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ किसकी रचना है?+
यह जयशंकर प्रसाद की रचना है, जो उनके नाटक ‘चंद्रगुप्त’ में आई है। इसमें राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता के लिए आगे बढ़ने का आह्वान है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए