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REET Level 1 व 2 · हिंदी (भाषा I/II)

अव्यय (Avyay): क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात — REET

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इस पेज पर अव्यय (अविकारी शब्द) की परिभाषा, उसके पाँचों भेद, क्रियाविशेषण और समुच्चयबोधक के उपभेद तथा क्रियाविशेषण और संबंधबोधक का सबसे भ्रमित करने वाला अंतर उदाहरणों सहित दिया गया है। REET 2024 में अव्यय के 5 प्रश्न आए, जिनमें 3 केवल समुच्चयबोधक पर थे।

  • REET 2024 में 5 प्रश्न
  • कक्षा 1–8 स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में अव्यय के 5 प्रश्न आए और सभी वाक्य में रेखांकित शब्द पर आधारित थे। तीन प्रश्न समुच्चयबोधक पर थे — 'यद्यपि…तथापि' (समुच्चयबोधक), 'परंतु' (समानाधिकरण समुच्चयबोधक) और 'और' (समानाधिकरण समुच्चयबोधक); दो प्रश्न क्रियाविशेषण पर — 'घर के भीतर जाओ' में स्थानवाचक और 'गतिपूर्वक' को क्रियाविशेषण पहचानना। यानी REET भेद के साथ उपभेद (समानाधिकरण/व्यधिकरण, स्थान/रीति) तक पूछता है।

अव्यय क्या है?

अव्यय वे शब्द हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक या काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता; इन्हें अविकारी शब्द भी कहते हैं। 'अव्यय' का अर्थ ही है — जिसका व्यय (क्षय/परिवर्तन) न हो। जैसे — 'लड़का धीरे चलता है', 'लड़की धीरे चलती है', 'लड़के धीरे चलते हैं' — क्रिया बदली, पर 'धीरे' वैसा ही रहा।

अव्यय के पाँच भेद पढ़ाए जाते हैं: (1) क्रियाविशेषण, (2) संबंधबोधक, (3) समुच्चयबोधक, (4) विस्मयादिबोधक और (5) निपात। कई पुस्तकें पहले चार को ही अव्यय मानकर निपात को अलग रखती हैं। प्रश्न में जो विकल्प दिए हों, उन्हीं के आधार पर उत्तर चुनें।

रेखांकित शब्द का भेद पहचानने का तीन-चरण तरीका: (1) देखें शब्द किससे जुड़ा है — क्रिया से (कब, कहाँ, कैसे, कितना बताता है) तो क्रियाविशेषण; (2) संज्ञा/सर्वनाम के बाद 'के, की, से' के साथ आकर संबंध जोड़ता है तो संबंधबोधक; (3) दो शब्दों या उपवाक्यों के बीच पुल बनता है तो समुच्चयबोधक। वाक्य से अलग, केवल भाव प्रकट करे और प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) के साथ आए तो विस्मयादिबोधक; और किसी शब्द पर ज़ोर डाले तो निपात। यह क्रम याद रहे तो REET के रेखांकित-शब्द वाले लगभग सभी प्रश्न हल हो जाते हैं।

क्रियाविशेषण के भेद (अर्थ के आधार पर)

भेदक्या बताता हैउदाहरण
कालवाचकक्रिया का समय (कब?)आज, कल, अभी, तुरंत, प्रतिदिन, सदा, कभी-कभी
स्थानवाचकक्रिया का स्थान या दिशा (कहाँ?)यहाँ, वहाँ, भीतर, बाहर, ऊपर, नीचे, इधर, दूर, पास
परिमाणवाचकक्रिया की मात्रा (कितना?)बहुत, थोड़ा, कम, अधिक, ख़ूब, बिल्कुल, इतना
रीतिवाचकक्रिया का ढंग (कैसे?)धीरे-धीरे, ध्यानपूर्वक, गतिपूर्वक, अचानक, सचमुच, ठीक, शायद, नहीं

'पूर्वक' से बने शब्द — ध्यानपूर्वक, सावधानीपूर्वक, गतिपूर्वक — क्रिया के होने का ढंग बताते हैं, इसलिए रीतिवाचक क्रियाविशेषण हैं।

क्रियाविशेषण बनाम संबंधबोधक

एक ही शब्द — भीतर, बाहर, ऊपर, पास, आगे, पीछे — दोनों रूपों में आ सकता है। नियम: जब वह अकेले आकर क्रिया की विशेषता बताए तो क्रियाविशेषण ('भीतर जाओ', 'बच्चे बाहर खेल रहे हैं'); जब वह संज्ञा/सर्वनाम के बाद 'के', 'की', 'से' के साथ आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्द से जोड़े तो संबंधबोधक ('घर के भीतर', 'मेज़ के ऊपर')।

REET 2024 के प्रश्न 'घर के भीतर जाओ वाक्य में कौन-सा क्रियाविशेषण प्रयुक्त हुआ है?' में प्रश्न ने स्वयं क्रियाविशेषण का प्रकार पूछा था और विकल्प चारों क्रियाविशेषण भेदों के थे; 'भीतर' स्थान बताता है, इसलिए आधिकारिक उत्तर 'स्थानवाचक' रहा। परीक्षा में यह ध्यान रखें कि प्रश्न क्या पूछ रहा है — भेद (संबंधबोधक/क्रियाविशेषण) या उपभेद (स्थान/काल/रीति)।

समुच्चयबोधक (योजक) अव्यय

भेदउपभेदशब्दउदाहरण
समानाधिकरण (समान स्तर के शब्द/उपवाक्य जोड़ें)संयोजकऔर, तथा, एवं, वराम और श्याम आए।
विभाजक / विकल्पसूचकया, अथवा, वा, कि, चाहे…चाहे, न…नचाय लोगे या दूध?
विरोधदर्शकपर, परंतु, किंतु, लेकिन, बल्किमैं आता परंतु तुमने बुलाया नहीं।
परिणामदर्शकइसलिए, अतः, अतएव, सोवर्षा हुई, इसलिए मेला रद्द हुआ।
व्यधिकरण (प्रधान उपवाक्य से आश्रित उपवाक्य जोड़ें)कारणवाचक / हेतुवाचकक्योंकि, चूँकि, इसलिए किवह नहीं आया क्योंकि बीमार था।
उद्देश्यवाचकताकि, जिससे कि, किमेहनत करो ताकि सफल हो सको।
संकेतवाचकयदि…तो, जो…तो, यद्यपि…तथापि, चाहे…परयदि वर्षा हुई तो फ़सल अच्छी होगी।
स्वरूपवाचककि, अर्थात्, यानी, मानोउसने कहा कि वह आएगा।

'इसलिए' परिणामदर्शक (समानाधिकरण) है, जबकि 'इसलिए कि' कारण बताने वाला व्यधिकरण योजक है।

संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात

भेदपहचानउदाहरण
संबंधबोधकसंज्ञा/सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्द से बताएके साथ, के बिना, के कारण, के लिए, की ओर, के समान, की अपेक्षा, के भीतर
विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, स्वीकृति आदि भाव प्रकट करे; वाक्य से व्याकरणिक संबंध नहींवाह!, शाबाश! (हर्ष), हाय!, उफ़! (शोक), अरे!, ओह! (आश्चर्य), छि!, धिक्! (घृणा), हाँ!, अच्छा! (स्वीकृति)
निपातकिसी शब्द पर बल देने या अर्थ में विशेषता लाने के लिएही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़ — 'मैं भी चलूँगा', 'राम ही आया'

संबंधबोधक के अर्थ-आधारित उपभेद भी पूछे जाते हैं: सादृश्यवाचक (के समान, की तरह), हेतुवाचक (के कारण, के मारे), विरोधवाचक (के विरुद्ध, के खिलाफ़), दिशावाचक (की ओर, की तरफ़)।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि: 'कब-कहाँ-कैसे-कितना' (कक्षा 3–5)

एक क्रिया ('दौड़ो') बोलें और बच्चे चार प्रश्नों के उत्तर जोड़ें — अभी दौड़ो, बाहर दौड़ो, तेज़ दौड़ो, बहुत दौड़ो। इससे क्रियाविशेषण के चारों भेद अनुभव से समझ आते हैं।

गतिविधि: वाक्य-जोड़ पुल (कक्षा 6–8)

दो-दो छोटे वाक्यों के कार्ड दें और बच्चों से योजक चुनवाएँ — और, परंतु, क्योंकि, इसलिए, यदि…तो। फिर चर्चा करें कि किस योजक से अर्थ कैसे बदला।

शिक्षण सामग्री

'भीतर' जैसे शब्दों के लिए दो रंग के कार्ड: अकेले आए तो नीला (क्रियाविशेषण), 'के' के साथ आए तो हरा (संबंधबोधक)। कहानी की किताब में ऐसे शब्दों की खोज कराएँ।

आम भ्रांति

बच्चे सोचते हैं कि 'और' केवल दो संज्ञाओं को जोड़ता है और 'परंतु' व्यधिकरण है। उपाय: दिखाएँ कि दोनों ऐसे उपवाक्य जोड़ते हैं जो अलग होकर भी पूरे वाक्य हैं — इसलिए दोनों समानाधिकरण हैं।

आकलन विचार

एक अनुच्छेद में 8–10 अव्यय रेखांकित करके बच्चों से भेद और उपभेद लिखवाएँ; साथ में दो वाक्य स्वयं बनाने को दें — एक में 'बाहर' क्रियाविशेषण, एक में संबंधबोधक।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'अलग करो, पूरा बचे? — समानाधिकरण': योजक हटाकर देखें, दोनों हिस्से स्वतंत्र पूरे वाक्य बनें तो समानाधिकरण (और, परंतु, या, इसलिए); एक हिस्सा दूसरे पर टिका हो तो व्यधिकरण (क्योंकि, ताकि, यदि…तो)। और '-पूर्वक' वाला शब्द क्रिया के साथ आए तो प्रायः रीतिवाचक क्रियाविशेषण होता है।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 32

“यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक व्यवहारों से भी परिचित थे ।” में रेखांकित पद हैं – (रेखांकित पद: यद्यपि, तथापि)

  1. Aक्रिया विशेषण अव्यय
  2. Bसमुच्चय बोधक अव्यय
  3. Cसंबंध बोधक अव्यय
  4. Dविस्मयादि बोधक अव्यय

व्याख्या

‘यद्यपि … तथापि’ दो उपवाक्यों को जोड़ने वाले युग्म शब्द हैं, इसलिए ये समुच्चयबोधक (योजक) अव्यय हैं। ये विरोध/संकेत का भाव प्रकट करते हुए वाक्यांशों को जोड़ते हैं। संबंधबोधक अव्यय संज्ञा/सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से बताते हैं, जो यहाँ नहीं है।

प्रश्न 87

“मैं आता परंतु तुमने बुलाया नहीं ।” वाक्य में रेखांकित शब्द है- (रेखांकित शब्द: परंतु)

  1. Aसमानाधिकरण समुच्च्यबोधक अव्यय
  2. Bनिमित्तवाचक समुच्च्यबोधक अव्यय
  3. Cसादृश्यवाचक संबंधबोधक अव्यय
  4. Dहेतुवाचक संबंधबोधक अव्यय

व्याख्या

‘परंतु’ दो स्वतंत्र उपवाक्यों — ‘मैं आता’ और ‘तुमने बुलाया नहीं’ — को जोड़ता है और विरोध प्रकट करता है। समान स्तर के उपवाक्यों को जोड़ने वाले अव्यय समानाधिकरण समुच्चयबोधक (विरोधदर्शक) कहलाते हैं। निमित्तवाचक (ताकि, इसलिए कि) व्यधिकरण समुच्चयबोधक हैं।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31-40 तक के उत्तर दीजिए : आम आदमी के लिए विज्ञान का मतलब क्या है ? विज्ञान मानव सभ्यता और संस्कृति का एक रूप है । आधुनिक विज्ञान ने इस नैसर्गिक सादगी व सौन्दर्य को हाशिए पर डाल कर विज्ञान को एक औपचारिक ढाँचे में कैद कर लिया है । विज्ञान एक औजार बन गया है जिससे प्रकृति के रहस्यों को खोलने की कोशिश की जाती हैं । इस प्रक्रिया में आम इंसान का संबंध इससे कट गया है । ‘विज्ञान पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान का भण्डार है’- ऐसा कहा जाता है । विज्ञान को विकास से जोड़ा जाता है । यह सरासर गलत है । जिन आदिवासियों ने सदियों प्रकृति के साथ सम्मानजनक रिश्ता बनाए रखा, आज हमने उन्हें ‘अविकसित’ मान लिया है । मानव का मानव से संबंध हानि-लाभ पर निर्धारित हो रहा है ।

प्रश्न 38

निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित अंश किसका उदाहरण है ? ‘विज्ञान मानव सभ्यता और संस्कृति का एक रूप है ।’ (रेखांकित अंश : ‘और’)

  1. Aव्यधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय का
  2. Bसंकेतवाचक समुच्चय बोधक अव्यय का
  3. Cसमानाधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय का
  4. Dसंबंध बोधक अव्यय का

व्याख्या

वाक्य में रेखांकित ‘और’ दो समान स्तर के शब्दों (सभ्यता और संस्कृति) को जोड़ रहा है। समान स्तर के शब्दों/उपवाक्यों को जोड़ने वाले और, तथा, एवं आदि ‘समानाधिकरण समुच्चय बोधक अव्यय’ कहलाते हैं। व्यधिकरण समुच्चय बोधक (जैसे कि, क्योंकि, यदि) प्रधान और आश्रित उपवाक्य जोड़ते हैं।

प्रश्न 72

‘घर के भीतर जाओ’ वाक्य में कौन-सा क्रिया विशेषण प्रयुक्त हुआ है ?

  1. Aकालवाचक
  2. Bस्थानवाचक
  3. Cरीतिवाचक
  4. Dपरिमाणवाचक

व्याख्या

‘भीतर’ शब्द क्रिया ‘जाओ’ के स्थान (कहाँ) का बोध कराता है। स्थान या दिशा बताने वाले शब्द (भीतर, बाहर, ऊपर, यहाँ, वहाँ) स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 90 तक उत्तर दीजिए । ‘संस्कृति’ शब्द का संबंध संस्कार से है जिसका अर्थ है संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना । अंग्रेजी शब्द ‘कल्चर’ में वही धातु है जो ‘एग्रीकल्चर’ में है । इसका भी अर्थ ‘पैदा करना, सुधारना’ है । संस्कारों से किसी व्यक्ति अथवा जाति का विकास गतिपूर्वक होता है । जातीय संस्कारों को ही संस्कृति कहते हैं । संस्कृति एक समूहवाचक शब्द है । जलवायु के अनुकूल रहन-सहन की विधियाँ और विचार-परंपराएँ जाति के लोगों में दृढ़मूल हो जाने से जाति के संस्कार बन जाते हैं । इनको प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजी प्रकृति के अनुकूल न्यूनाधिक मात्रा में पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त करता है । ये संस्कार व्यक्ति के घरेलू जीवन तथा सामाजिक जीवन में परिलक्षित होते हैं । मनुष्य अकेला रहकर भी इनसे छुटकारा नहीं पा सकता । संस्कृति का बाह्य पक्ष भी होता है और आंतरिक भी । उसका बाह्य पक्ष आंतरिक का प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य रहता है । हमारे बाह्य आचार, हमारे विचारों और मनोवृत्तियों के परिचायक होते हैं । संस्कृति एक देश-विशेष की उपज होती है, उसका संबंध देश के भौतिक वातावरण और उसके पालित, पोषित एवं परिवर्द्धित विचारों से होता है । भाषा संस्कृति का अंग है, फिर भी वह हमारी जातीय मनोवृत्ति की परिचायिका होती है ।

प्रश्न 88

‘संस्कारों से किसी व्यक्ति अथवा जाति का विकास गतिपूर्वक होता है’ वाक्य में प्रयुक्त ‘गतिपूर्वक’ शब्द है

  1. Aभाववाचक संज्ञा
  2. Bक्रिया विशेषण
  3. Cसार्वनामिक विशेषण
  4. Dसंकेतवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘गतिपूर्वक’ शब्द क्रिया ‘होता है’ की विधि/ढंग (कैसे होता है) बता रहा है। क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण होते हैं; ‘पूर्वक’ से बने शब्द (ध्यानपूर्वक, सुखपूर्वक) प्रायः रीतिवाचक क्रिया-विशेषण होते हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'बच्चे ध्यानपूर्वक सुन रहे थे।' वाक्य में 'ध्यानपूर्वक' है —

  1. Aकालवाचक क्रियाविशेषण
  2. Bरीतिवाचक क्रियाविशेषण
  3. Cपरिमाणवाचक क्रियाविशेषण
  4. Dसंबंधबोधक

व्याख्या

'ध्यानपूर्वक' सुनने की क्रिया का ढंग बताता है, इसलिए रीतिवाचक क्रियाविशेषण है।

प्रश्न 2

'वह बहुत थक गया है।' वाक्य में 'बहुत' है —

  1. Aपरिमाणवाचक क्रियाविशेषण
  2. Bस्थानवाचक क्रियाविशेषण
  3. Cनिपात
  4. Dविस्मयादिबोधक

व्याख्या

'बहुत' थकने की मात्रा बताता है, इसलिए परिमाणवाचक क्रियाविशेषण है।

प्रश्न 3

'मेहनत करो ताकि परीक्षा में सफल हो सको।' में 'ताकि' है —

  1. Aसमानाधिकरण संयोजक
  2. Bव्यधिकरण उद्देश्यवाचक समुच्चयबोधक
  3. Cविरोधदर्शक समुच्चयबोधक
  4. Dसंबंधबोधक

व्याख्या

'ताकि' आश्रित उपवाक्य जोड़कर उद्देश्य बताता है, इसलिए व्यधिकरण (उद्देश्यवाचक) समुच्चयबोधक है।

प्रश्न 4

किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक अव्यय के रूप में प्रयुक्त है?

  1. Aयहाँ पास आओ।
  2. Bविद्यालय के पास बगीचा है।
  3. Cवह पास बैठा था।
  4. Dइधर पास ही रहो।

व्याख्या

'विद्यालय के पास' में 'पास' संज्ञा 'विद्यालय' के बाद 'के' के साथ आकर संबंध बताता है, इसलिए संबंधबोधक है; शेष में यह स्थानवाचक क्रियाविशेषण है।

प्रश्न 5

'शाबाश! तुमने बहुत अच्छा किया।' में 'शाबाश' कौन-सा भाव प्रकट करता है?

  1. Aशोक
  2. Bघृणा
  3. Cहर्ष/प्रशंसा
  4. Dआश्चर्य

व्याख्या

'शाबाश' प्रशंसा व हर्ष प्रकट करने वाला विस्मयादिबोधक अव्यय है।

प्रश्न 6

'राम ही यह काम करेगा।' वाक्य में 'ही' है —

  1. Aनिपात
  2. Bक्रियाविशेषण
  3. Cसमुच्चयबोधक
  4. Dसंबंधबोधक

व्याख्या

'ही' राम पर बल देता है; बल देने वाले ऐसे अव्यय निपात कहलाते हैं।

प्रश्न 7

'चाय लोगे या कॉफ़ी?' वाक्य में 'या' है —

  1. Aसंकेतवाचक समुच्चयबोधक
  2. Bविभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  3. Cकारणवाचक समुच्चयबोधक
  4. Dपरिणामदर्शक समुच्चयबोधक

व्याख्या

'या' दो विकल्पों में से एक चुनने का भाव देता है और समान स्तर के शब्द जोड़ता है, इसलिए विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक है।

प्रश्न 8

'वह नहीं आया क्योंकि बीमार था।' में 'क्योंकि' है —

  1. Aसमानाधिकरण परिणामदर्शक
  2. Bव्यधिकरण कारणवाचक
  3. Cसमानाधिकरण संयोजक
  4. Dसंबंधबोधक हेतुवाचक

व्याख्या

'क्योंकि' आश्रित उपवाक्य जोड़कर कारण बताता है, इसलिए व्यधिकरण कारणवाचक समुच्चयबोधक है। संबंधबोधक 'के कारण' संज्ञा के बाद आता है।

प्रश्न 9

अव्यय के संबंध में सही कथन है —

  1. Aअव्यय का रूप वचन के अनुसार बदलता है
  2. Bअव्यय अविकारी शब्द हैं
  3. Cअव्यय केवल संज्ञा की विशेषता बताते हैं
  4. D'लड़का' अव्यय है

व्याख्या

अव्यय पर लिंग, वचन, कारक, काल का प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए वे अविकारी शब्द हैं।

प्रश्न 10

कक्षा 7 के बच्चे 'बाहर' को हर वाक्य में क्रियाविशेषण बता रहे हैं। शिक्षक के लिए सबसे प्रभावी उपाय है —

  1. Aनियम रटवाना
  2. B'बाहर खेलो' और 'घर के बाहर खेलो' जैसे वाक्य-जोड़ों की तुलना कराकर बच्चों से अंतर खोजवाना
  3. Cप्रश्न को कठिन बताकर छोड़ देना
  4. Dकेवल पाठ्यपुस्तक की परिभाषा पढ़ाना

व्याख्या

वाक्य-जोड़ों की तुलना से बच्चे स्वयं देखते हैं कि 'के' के साथ संज्ञा से जुड़ने पर शब्द संबंधबोधक बनता है। यह खोज-आधारित अधिगम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में अव्यय से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में हिंदी भाषा I व II से अव्यय के 5 प्रश्न आए — 3 समुच्चयबोधक पर और 2 क्रियाविशेषण पर।

अव्यय के कितने भेद होते हैं?+

पाँच — क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात। कुछ पुस्तकें निपात को अलग मानकर चार भेद बताती हैं।

समानाधिकरण और व्यधिकरण समुच्चयबोधक में क्या अंतर है?+

समानाधिकरण समान स्तर के शब्दों/स्वतंत्र उपवाक्यों को जोड़ता है (और, परंतु, या)। व्यधिकरण एक प्रधान और एक आश्रित उपवाक्य को जोड़ता है (क्योंकि, ताकि, यदि…तो)।

'परंतु' कौन-सा अव्यय है?+

'परंतु' समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय है, जिसका उपभेद विरोधदर्शक है।

निपात क्या होते हैं?+

ही, भी, तो, तक, मात्र, भर जैसे शब्द जो किसी शब्द पर बल देते हैं, निपात कहलाते हैं — जैसे 'मैं ही जाऊँगा'।

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आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT पाठ्यपुस्तकें — हिंदी (वसंत, दूर्वा आदि) एवं व्याकरण अभ्यास
  2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय — देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण
  3. BSER — REET 2024 आधिकारिक प्रश्न-पत्र व अंतिम उत्तर-कुंजी (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए