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REET लेवल 1 व 2 · हिंदी

विशेषण

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विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, परिमाण) बताते हैं। REET में गद्यांश से रेखांकित शब्द देकर उसका शब्द-भेद पूछा जाता है, जहाँ सार्वनामिक विशेषण को सर्वनाम से अलग पहचानना सबसे जरूरी कौशल है।

  • REET 2024 में 2 प्रश्न
  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 7 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के दोनों प्रश्न गद्यांश से रेखांकित शब्द (‘यह’, ‘प्राचीन’) देकर उसका शब्द-भेद पूछने वाले थे। ‘यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है’ में ‘यह’ को सार्वनामिक विशेषण बताया गया (क्योंकि यह संज्ञा ‘भूमि’ से पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है), जबकि ‘प्राचीन’ शब्द को सीधे गुणवाचक विशेषण माना गया। यानी विशेषण के प्रकार पहचानने के साथ-साथ सर्वनाम बनाम सार्वनामिक विशेषण का भेद भी परखा जाता है।

विशेषण क्या है?

जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, रंग, आकार, संख्या, परिमाण) बताकर उसके अर्थ को सीमित या स्पष्ट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं — जैसे ‘सुंदर लड़की’ में ‘सुंदर’ विशेषण है। जिस संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताई जाए, उसे विशेष्य कहा जाता है।

हिंदी व्याकरण में विशेषण के चार प्रमुख भेद माने जाते हैं: गुणवाचक (गुण/दोष/रंग/आकार बताने वाले — अच्छा, लाल, मीठा), संख्यावाचक (संख्या बताने वाले — एक, दो, कुछ), परिमाणवाचक (मात्रा/नाप बताने वाले — दो किलो, थोड़ा) और सार्वनामिक (सर्वनाम जो संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताए — यह, वह, कौन-सा)।

विशेषण और विशेष्य का क्रम हिंदी में सामान्यतः विशेषण पहले और विशेष्य बाद में होता है (जैसे ‘सुंदर लड़की’), जो अंग्रेज़ी के समान क्रम है, पर कविता व साहित्यिक भाषा में यह क्रम कभी-कभी पलट भी जाता है (जैसे ‘लड़की सुंदर है’ में विशेषण उद्देश्य-पूरक के रूप में बाद में आता है)। इसके अलावा एक ही वाक्य में एक से अधिक विशेषण भी आ सकते हैं, जैसे ‘वह एक लंबा, दुबला, ईमानदार युवक है’ — यहाँ लंबा और दुबला गुणवाचक हैं तथा ‘एक’ संख्यावाचक विशेषण है। परीक्षा में ऐसे मिश्रित वाक्यों में हर विशेषण का भेद अलग-अलग पहचानना आना चाहिए।

विशेषण के भेद और उदाहरण

भेदउपभेदउदाहरण
गुणवाचक विशेषणगुण, दोष, रंग, आकार, स्वाद, अवस्थाअच्छा लड़का, लाल फूल, मीठा फल, प्राचीन काल
संख्यावाचक विशेषणनिश्चित (गणनावाचक: एक, दो; क्रमवाचक: पहला, दूसरा) और अनिश्चित (कुछ, कई, अनेक)दो किताबें (निश्चित), कई लोग (अनिश्चित)
परिमाणवाचक विशेषणनिश्चित (नाप-तौल से मापी गई मात्रा) और अनिश्चित (अंदाज़न मात्रा)दो लीटर दूध (निश्चित), थोड़ा दूध (अनिश्चित)
सार्वनामिक विशेषणसर्वनाम शब्द जो संज्ञा से पहले आकर उसकी ओर संकेत करेयह भूमि, वह लड़का, कौन-सा छात्र

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ

गुणवाचक विशेषणों की तुलना करने के लिए हिंदी में तीन अवस्थाएँ मानी जाती हैं — मूलावस्था (सामान्य गुण बताना, जैसे ‘लघु’), उत्तरावस्था या तुलनात्मक अवस्था (दो वस्तुओं की तुलना करना, जैसे ‘लघुतर’ यानी दूसरे से छोटा) और उत्तमावस्था (सबसे अधिक/श्रेष्ठ बताना, जैसे ‘लघुतम’ यानी सबसे छोटा)। ये रूप संस्कृत के ‘तर’ और ‘तम’ प्रत्यय जोड़कर बनते हैं — जैसे उच्च-उच्चतर-उच्चतम, अधिक-अधिकतर-अधिकतम।

इस अवधारणा को गुणवाचक विशेषण के साथ जोड़कर पढ़ना REET में फायदेमंद है, क्योंकि कई बार प्रश्न में सीधे विशेषण का भेद नहीं बल्कि उसकी तुलनात्मक अवस्था पहचानने को कहा जाता है — जैसे ‘सुंदरतम’ शब्द में यह पूछा जा सकता है कि यह किस अवस्था का उदाहरण है (उत्तर: उत्तमावस्था)।

ध्यान रहे कि सभी गुणवाचक विशेषणों में ‘तर’-‘तम’ प्रत्यय स्वाभाविक ढंग से नहीं जुड़ते — कुछ मूल हिंदी (तद्भव) विशेषणों में तुलना ‘से अधिक’, ‘से ज्यादा’ या ‘सबसे’ जैसे शब्द जोड़कर की जाती है (जैसे ‘अच्छा’ से ‘सबसे अच्छा’), जबकि तत्सम (संस्कृत-मूल) विशेषणों में सीधे प्रत्यय जुड़ जाते हैं (उच्च-उच्चतम)। परीक्षा में यह भेद पहचानना भी उपयोगी है कि कौन-सा विशेषण किस तरीके से अपनी तुलनात्मक अवस्था बनाता है।

विशेष्य उस संज्ञा/सर्वनाम को कहते हैं जिसकी विशेषता विशेषण द्वारा बताई जाती है — जैसे ‘सुंदर लड़की’ में ‘लड़की’ विशेष्य है। गुणवाचक विशेषण पहचानने का सबसे आसान तरीका है संज्ञा से पहले ‘कैसा/कैसी/कैसे’ प्रश्न पूछना — जो उत्तर मिले वही गुणवाचक विशेषण होगा। सामान्यतः कक्षा 1-5 में सरल गुणवाचक व संख्यावाचक विशेषण पढ़ाए जाते हैं, जबकि तुलनात्मक अवस्था (तर/तम) पर विशेष ध्यान कक्षा 6-8 (Level 2 गहराई) में दिया जाता है।

एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि विशेषण भी लिंग-वचन के अनुसार अपना रूप बदल सकता है, विशेषकर जब वह विशेष्य के ठीक पहले आए — जैसे ‘अच्छा लड़का’ (पुल्लिंग एकवचन), ‘अच्छी लड़की’ (स्त्रीलिंग एकवचन) और ‘अच्छे लड़के’ (पुल्लिंग बहुवचन)। ध्यान दें कि सभी विशेषण इस तरह नहीं बदलते — ‘सुंदर’, ‘ईमानदार’ जैसे कुछ विशेषण हर लिंग-वचन में एक जैसे ही रहते हैं (सुंदर लड़का, सुंदर लड़की)। REET में वाक्य-शुद्धि के प्रश्नों में विशेषण-विशेष्य के गलत लिंग-वचन मेल को पहचानना भी पूछा जा सकता है, इसलिए इस नियम को उदाहरणों के साथ ठीक से समझ लेना चाहिए।

सार्वनामिक विशेषण की पहचान

जब ‘यह’, ‘वह’, ‘कोई’, ‘कौन-सा’ जैसे सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता या पहचान बताते हैं (न कि स्वयं संज्ञा का स्थान लेते हैं), तो उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है। जैसे ‘यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है’ में ‘यह’ अकेला संज्ञा के स्थान पर नहीं आया, बल्कि ‘भूमि’ के साथ जुड़कर उसकी ओर इशारा कर रहा है — इसलिए यह सार्वनामिक विशेषण है, शुद्ध सर्वनाम नहीं। यह भेद ‘सर्वनाम’ टॉपिक से सीधे जुड़ा है, इसलिए दोनों को साथ पढ़ना फायदेमंद है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

कक्षा में वस्तुओं (फल, फूल, खिलौने) को दिखाकर बच्चों से उनकी विशेषता बतवाएँ (रंग, आकार, स्वाद) — इससे गुणवाचक विशेषण स्वाभाविक रूप से समझ आता है।

शिक्षण सामग्री

चार भेदों के अलग-अलग रंग के कार्ड (गुण-लाल, संख्या-नीला, परिमाण-हरा, सार्वनामिक-पीला) से वर्गीकरण खेल कक्षा 6-8 में उपयोगी है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे सार्वनामिक विशेषण को हमेशा सर्वनाम समझ लेते हैं क्योंकि शब्द वही (यह, वह, कोई) होते हैं — वाक्य में स्थिति (अकेले बनाम संज्ञा के साथ) देखकर भेद कराना जरूरी है।

आकलन

5 वाक्य देकर रेखांकित विशेषण का भेद पहचानने को कहें, विशेषकर सार्वनामिक विशेषण बनाम सर्वनाम की जोड़ी बार-बार शामिल करें।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

अगर ‘यह/वह/कौन-सा’ के ठीक बाद कोई संज्ञा आए, तो सार्वनामिक विशेषण समझें; अगर वे अकेले खड़े हों (आगे कोई संज्ञा न हो), तो सर्वनाम समझें। यह एक ही नियम सर्वनाम और विशेषण — दोनों टॉपिक में काम आता है।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 34

‘यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है ।’ वाक्य में प्रयुक्त ‘यह’ शब्द है –

  1. Aसार्वनामिक विशेषण
  2. Bपरिमाण बोधक विशेषण
  3. Cनिजवाचक सर्वनाम
  4. Dसंबंध वाचक सर्वनाम

व्याख्या

जब सर्वनाम शब्द (यह, वह आदि) संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताता है तो वह सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। ‘यह भूमि’ में ‘यह’ संज्ञा ‘भूमि’ की ओर संकेत कर उसकी विशेषता बता रहा है, इसलिए यह सार्वनामिक (संकेतवाचक) विशेषण है। यहाँ ‘यह’ स्वतंत्र सर्वनाम के रूप में प्रयुक्त नहीं हुआ।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न संख्या 77 से 86 तक के उत्तर दीजिए । भारतीय मन संपूर्ण प्रकृति और नदियों का भी मातृ स्वरूप में दर्शन करता है । गंगा को हम माता कहते हैं, तुलसी को हमने माता माना, अश्वत्थ वृक्ष की हमने पूजा की और इन सबके माध्यम से समाज के मन में प्रकृति के प्रति एक पूज्य भाव उत्पन्न किया । हम तो कबूतरों, चिड़ियों को दाना चुगाते हैं, हम तो चींटियों तक को आटा डालते हैं क्योंकि इन सबके अस्तित्व का कोई प्रयोजन है । इस विश्व के प्रत्येक पेड़-पौधे, जीव-जंतु का अपना प्रयोजन है । इस प्रयोजन को जानकर सारे विश्व की रचना में उसका क्या स्थान है, इसको पहचानकर उसको बनाए रखें, तभी समन्वय ठीक से बैठेगा । इसी को हमारे यहाँ धर्म कहा है । उसको पहचानकर, उसके नियमों को जानकर तदनुसार यदि हम अपनी सारी रचना और विकास-पथ का उपयोग करेंगे तो प्रकृति के साथ शायद हमारा सुसंगत विकास हो सकेगा । हमारी प्राचीन काल से ही यह अवधारणा रही है कि प्रकृति के साथ मिलकर चलो और इसलिए प्रकृति के प्रति पूज्यभाव हमने उत्पन्न किया । पृथ्वी को हमने माता कहा है । धरती धारण करती है इसीलिए उसे माता कहा । वास्तव में जिस धरा और प्रकृति के सहारे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व निर्भर है, वही आज संकटग्रस्त हो गई है । पश्चिम की उपभोगवादी दृष्टि से प्रकृति के अमर्यादित उपभोग का विचार विकसित हुआ है । हमारी प्रथा संयमित उपभोग की है । हमारे वर्तमान के लिए भी यही विकास-पथ श्रेष्ठ है और यही शेष संसार को नष्ट होने के मार्ग से बचाने वाला मार्गदर्शक विकास-पथ हो सकता है ।

प्रश्न 86

‘प्राचीन’ शब्द है-

  1. Aसंज्ञा
  2. Bसर्वनाम
  3. Cविशेषण
  4. Dकारक

व्याख्या

‘प्राचीन’ शब्द काल/समय संबंधी गुण बताता है, जैसे ‘प्राचीन काल’ में यह संज्ञा ‘काल’ की विशेषता बता रहा है। अतः यह गुणवाचक विशेषण है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘मीठा आम’ में ‘मीठा’ किस प्रकार का विशेषण है?

  1. Aसंख्यावाचक विशेषण
  2. Bगुणवाचक विशेषण
  3. Cपरिमाणवाचक विशेषण
  4. Dसार्वनामिक विशेषण

व्याख्या

‘मीठा’ आम के स्वाद (गुण) को बताता है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है। गुणवाचक विशेषण गुण, दोष, रंग, आकार, स्वाद आदि बताते हैं।

प्रश्न 2

‘कुछ छात्र अनुपस्थित थे’ वाक्य में ‘कुछ’ किस प्रकार का विशेषण है?

  1. Aनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
  2. Bअनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
  3. Cगुणवाचक विशेषण
  4. Dसार्वनामिक विशेषण

व्याख्या

‘कुछ’ छात्रों की ठीक-ठीक संख्या नहीं बताता, केवल अनुमानित/अनिश्चित संख्या का बोध कराता है, इसलिए यह अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है।

प्रश्न 3

‘दो किलो चावल लाओ’ वाक्य में ‘दो किलो’ किस प्रकार का विशेषण है?

  1. Aनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  2. Bअनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  3. Cनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
  4. Dगुणवाचक विशेषण

व्याख्या

‘दो किलो’ नाप-तौल की एक निश्चित, मापी गई मात्रा बता रहा है (गिनती की वस्तु नहीं, तौल की वस्तु), इसलिए यह निश्चित परिमाणवाचक विशेषण है।

प्रश्न 4

‘वह किताब मेज़ पर है’ वाक्य में ‘वह’ शब्द है

  1. Aसर्वनाम
  2. Bसार्वनामिक विशेषण
  3. Cक्रिया-विशेषण
  4. Dसंज्ञा

व्याख्या

‘वह’ यहाँ अकेले नहीं आया बल्कि संज्ञा ‘किताब’ से पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है, इसलिए यह सार्वनामिक विशेषण है, शुद्ध सर्वनाम नहीं।

प्रश्न 5

‘पहला विद्यार्थी कक्षा में आया’ वाक्य में ‘पहला’ किस प्रकार का विशेषण है?

  1. Aगणनावाचक संख्यावाचक विशेषण
  2. Bक्रमवाचक संख्यावाचक विशेषण
  3. Cआवृत्तिवाचक संख्यावाचक विशेषण
  4. Dसमुदायवाचक संख्यावाचक विशेषण

व्याख्या

‘पहला’ क्रम (सीरियल ऑर्डर) बता रहा है, गिनती नहीं — इसलिए यह क्रमवाचक (ऑर्डिनल) संख्यावाचक विशेषण है। गणनावाचक में सीधे गिनती आती है (एक, दो), क्रमवाचक में क्रम (पहला, दूसरा)।

प्रश्न 6

‘दोनों भाई साथ पढ़ते हैं’ वाक्य में ‘दोनों’ किस प्रकार का संख्यावाचक विशेषण है?

  1. Aगणनावाचक
  2. Bक्रमवाचक
  3. Cसमुदायवाचक
  4. Dआवृत्तिवाचक

व्याख्या

‘दोनों’ समूह के रूप में संख्या बताता है (व्यक्तिगत गिनती नहीं, समूह का बोध), इसलिए यह समुदायवाचक संख्यावाचक विशेषण है — जैसे ‘तीनों’, ‘चारों’ भी इसी श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 7

‘कौन-सी किताब तुम्हें चाहिए?’ वाक्य में ‘कौन-सी’ शब्द है

  1. Aप्रश्नवाचक सर्वनाम
  2. Bसार्वनामिक विशेषण
  3. Cगुणवाचक विशेषण
  4. Dक्रिया-विशेषण

व्याख्या

‘कौन-सी’ संज्ञा ‘किताब’ से पहले आकर उसके बारे में प्रश्न पूछ रहा है, अकेले संज्ञा का स्थान नहीं ले रहा — इसलिए यह सार्वनामिक (प्रश्नवाचक) विशेषण है।

प्रश्न 8

विशेषण पढ़ाते समय कक्षा में सबसे प्रभावी गतिविधि है

  1. Aकेवल परिभाषा रटवाना
  2. Bवास्तविक वस्तुएँ दिखाकर उनकी विशेषता (रंग, आकार, संख्या) बतवाना
  3. Cबिना उदाहरण के भेद समझाना
  4. Dविशेषण को पाठ्यक्रम से हटा देना

व्याख्या

विशेषण जैसा ठोस विषय बच्चों को तभी अच्छे से समझ आता है जब वे वास्तविक वस्तुओं को देखकर, छूकर उनकी विशेषताएँ स्वयं बताएँ — इससे गुण, संख्या और परिमाण तीनों प्रकार सहज ढंग से स्पष्ट होते हैं।

प्रश्न 9

‘बहुत पानी बह गया’ वाक्य में ‘बहुत’ किस प्रकार का विशेषण है?

  1. Aनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  2. Bअनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  3. Cनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
  4. Dगुणवाचक विशेषण

व्याख्या

‘बहुत’ पानी की ठीक-ठीक मापी गई मात्रा नहीं बताता, केवल अंदाज़न अधिक मात्रा का बोध कराता है, इसलिए यह अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण है।

प्रश्न 10

विशेषण और विशेष्य में संबंध है

  1. Aविशेषण संज्ञा/सर्वनाम (विशेष्य) की विशेषता बताता है
  2. Bविशेष्य विशेषण की विशेषता बताता है
  3. Cदोनों एक ही शब्द-भेद हैं
  4. Dविशेषण हमेशा क्रिया की विशेषता बताता है

व्याख्या

जिस शब्द (विशेषण) से किसी संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताई जाए, उस संज्ञा/सर्वनाम को विशेष्य कहते हैं — यानी विशेषण हमेशा विशेष्य की विशेषता बताने के लिए प्रयुक्त होता है, उलटा नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेषण किसे कहते हैं?+

जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, परिमाण) बताकर उसके अर्थ को सीमित या स्पष्ट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।

विशेषण के कितने भेद होते हैं?+

हिंदी व्याकरण में विशेषण के चार प्रमुख भेद माने जाते हैं — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक और सार्वनामिक विशेषण।

विशेषण से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न आए थे, दोनों गद्यांश से रेखांकित शब्द का भेद पहचानने पर आधारित।

सार्वनामिक विशेषण और सर्वनाम में क्या अंतर है?+

जब सर्वनाम शब्द अकेले संज्ञा के स्थान पर आए तो वह सर्वनाम है; जब वही शब्द संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताए, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ कितनी होती हैं?+

तीन — मूलावस्था (सामान्य गुण, जैसे लघु), उत्तरावस्था/तुलनात्मक अवस्था (दो की तुलना, जैसे लघुतर) और उत्तमावस्था (सबसे अधिक, जैसे लघुतम), जो ‘तर’ और ‘तम’ प्रत्यय जोड़कर बनती हैं।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए