संज्ञा (Sangya): परिभाषा, भेद एवं भाववाचक संज्ञा बनाना — Patwari हिंदी व्याकरण नोट्स
इस पेज पर संज्ञा की परिभाषा, उसके पाँचों भेद, भाववाचक संज्ञा बनाने के नियम और एक भेद का दूसरे भेद के रूप में प्रयोग उदाहरणों सहित दिया गया है।
- कक्षा 1–8 स्तर
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संज्ञा क्या है?
किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे — मीरा, गाय, पुस्तक, जयपुर, प्रेम, बचपन। संज्ञा विकारी शब्द है, यानी लिंग, वचन और कारक के कारण उसका रूप बदलता है: लड़का → लड़की (लिंग), लड़का → लड़के (वचन), लड़का → लड़के ने (कारक)।
हिंदी में शब्दों के आठ भेद प्रचलित हैं — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया (विकारी) तथा क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक (अविकारी/अव्यय)। 'शब्द कौन-सा है' वाले प्रश्न में पहला प्रश्न स्वयं से पूछें: क्या यह किसी चीज़ या भाव का नाम है? 'कृपा', 'प्रकृति', 'सैंधव' — तीनों नाम हैं, इसलिए संज्ञा।
ध्यान रहे, शब्द-भेद वाक्य में प्रयोग से तय होता है। 'मीठा' सामान्यतः विशेषण है (मीठा आम), पर 'मुझे मीठा पसंद है' में यह संज्ञा की तरह प्रयुक्त है। इसी तरह 'सैंधव' का अर्थ सेंधा नमक या सिंध प्रदेश का निवासी है — दोनों अर्थों में यह नाम ही है।
संज्ञा के भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक (Proper) | किसी एक विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु या प्राणी का नाम | मीराबाई, जयपुर, चंबल, गीता, अरावली, चेतक |
| जातिवाचक (Common) | पूरी जाति या वर्ग के सभी सदस्यों का बोध | कृषक, लड़का, नदी, पर्वत, शहर, पुस्तक, भाषा |
| भाववाचक (Abstract) | गुण, दशा, भाव या क्रिया-व्यापार का नाम, जिसे छू या देख नहीं सकते | कृपा, उदारता, अभिमान, दुःख, बचपन, मिठास, दौड़ |
| समूहवाचक (Collective) | व्यक्तियों/वस्तुओं के समूह का एक इकाई के रूप में नाम | सेना, कक्षा, सभा, भीड़, गुच्छा, दल |
| द्रव्यवाचक (Material) | ऐसे पदार्थ जिन्हें गिना नहीं, नापा-तौला जाता है | सोना, पानी, दूध, घी, गेहूँ, लोहा |
परंपरागत रूप से संज्ञा के तीन मुख्य भेद (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक) माने जाते हैं; समूहवाचक और द्रव्यवाचक को जातिवाचक के उपभेद के रूप में भी पढ़ाया जाता है। इसीलिए 'पाँच भेद' और 'तीन भेद' दोनों सही माने जाते हैं।
पहचान की कसौटियाँ
व्यक्तिवाचक बनाम जातिवाचक: यदि शब्द किसी एक को ही बताता है तो व्यक्तिवाचक (गंगा), और यदि उस पूरे वर्ग के किसी भी सदस्य पर लागू होता है तो जातिवाचक (नदी)। 'कृषक' हर किसान पर लागू होता है, इसलिए जातिवाचक है। 'भाषा' भी हिंदी, राजस्थानी, अंग्रेज़ी — सभी भाषाओं के वर्ग का बोध कराती है, इसलिए इसे भी जातिवाचक माना जाता है।
भाववाचक की पहचान: जिसे इंद्रियों से छुआ या देखा न जा सके, केवल अनुभव किया जाए — प्रेम, क्रोध, कृपा, उदारता, थकान। ऐसे शब्द प्रायः ता, त्व, पन, पा, आस, आहट, आई जैसे प्रत्ययों से बनते हैं। 'दुःख' और 'अभिमान' बिना प्रत्यय के भी भाववाचक हैं, क्योंकि ये मन की दशा के नाम हैं।
प्रयोग से भेद का बदलना: व्यक्तिवाचक संज्ञा जब किसी गुण के कारण पूरे वर्ग के लिए आए, तो जातिवाचक बन जाती है — 'इस गाँव में कई हरिश्चंद्र हैं' (सत्यवादी लोग)। जातिवाचक संज्ञा जब किसी एक विशेष के लिए रूढ़ हो जाए, तो व्यक्तिवाचक बन जाती है — 'पंडित जी ने बच्चों को गुलाब भेंट किए' (जवाहरलाल नेहरू), 'गोस्वामी जी ने रामचरितमानस लिखा' (तुलसीदास)। भाववाचक संज्ञा बहुवचन में आकर जातिवाचक हो जाती है — 'बुराइयों से बचो'।
समूहवाचक और द्रव्यवाचक की पहचान: समूहवाचक संज्ञा अनेक सदस्यों को एक इकाई के रूप में बताती है, इसलिए 'सेना आई' एकवचन में बोला जाता है, भले सैनिक हज़ारों हों। द्रव्यवाचक संज्ञा गिनी नहीं जाती — 'दो पानी' नहीं, 'दो गिलास पानी' कहते हैं। यही इनकी सबसे सरल परीक्षा-कसौटी है: गिन सकते हैं तो जातिवाचक, समूह का एक नाम है तो समूहवाचक, और केवल नाप-तौल हो सकती है तो द्रव्यवाचक।
भाववाचक संज्ञा बनाना
| किस शब्द से | उदाहरण |
|---|---|
| जातिवाचक संज्ञा से | बच्चा → बचपन, मित्र → मित्रता, मनुष्य → मनुष्यता, पशु → पशुता, दास → दासता |
| सर्वनाम से | अपना → अपनापन, मम → ममता/ममत्व, निज → निजता, सर्व → सर्वस्व |
| विशेषण से | मीठा → मिठास, बूढ़ा → बुढ़ापा, सुंदर → सुंदरता, चतुर → चतुराई, लाल → लालिमा, गर्म → गर्मी |
| क्रिया से | लिखना → लिखावट, हँसना → हँसी, पढ़ना → पढ़ाई, घबराना → घबराहट, चढ़ना → चढ़ाई |
| अव्यय से | दूर → दूरी, निकट → निकटता, शीघ्र → शीघ्रता, धिक् → धिक्कार |
विशेषण से भाववाचक बनाते समय पहला दीर्घ स्वर प्रायः ह्रस्व हो जाता है: मीठा → मिठास, बूढ़ा → बुढ़ापा, मोटा → मुटापा।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
'एक — सब — महसूस': एक विशेष का नाम = व्यक्तिवाचक; पूरे वर्ग का नाम = जातिवाचक; जो केवल महसूस हो = भाववाचक। 'ता, त्व, पन, पा, आस, आहट' से अंत होने वाला शब्द दिखे तो पहले भाववाचक पर विचार करें — पर 'कृषक' जैसे 'अक' वाले कर्तृवाचक शब्द जातिवाचक होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संज्ञा के कितने भेद होते हैं?+
मुख्य रूप से तीन — व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक। समूहवाचक और द्रव्यवाचक को जोड़कर पाँच भेद भी पढ़ाए जाते हैं।
'कृपा' कौन-सी संज्ञा है?+
'कृपा' एक भाव का नाम है, इसलिए भाववाचक संज्ञा है।
व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक कब बन जाती है?+
जब किसी व्यक्ति का नाम उसके गुण के कारण पूरे वर्ग के लिए प्रयुक्त हो — जैसे 'देश को आज भी भगतसिंहों की ज़रूरत है'।
'सेना' कौन-सी संज्ञा है?+
'सेना' सैनिकों के समूह का नाम है, इसलिए समूहवाचक संज्ञा है (जिसे जातिवाचक का उपभेद भी माना जाता है)।