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CET · पैटर्न

CET परीक्षा पैटर्न — प्रश्न-पत्र, ऋणात्मक अंकन और विकल्प 'E' का नियम

CET का प्रश्न-पत्र समझना कठिन नहीं है — कठिन वह नियम है जो प्रश्न-पत्र के बाहर बैठा है। पाँचवाँ विकल्प 'E' और उससे जुड़ी 10% की सीमा हर वर्ष ऐसे अभ्यर्थियों को बाहर कर देती है जिनका पेपर अच्छा गया था। यह पृष्ठ पहले पैटर्न रखता है, फिर वह नियम पूरा खोलकर।

  • स्नातक: 150 प्रश्न · 300 अंक · 3 घंटे
  • 12वीं: 120 प्रश्न · 240 अंक · 2 घंटे 30 मिनट
  • ऋणात्मक अंकन −1/3 (दोनों स्तर)
  • अनिवार्य पाँचवाँ विकल्प 'E' (दोनों स्तर)

प्रश्न-पत्र का ढाँचा — स्नातक स्तर

प्रश्नअंकसमय
1503003 घंटे

विज्ञापन में यह एक ही पंक्ति है। सभी विषय इसी एक पंक्ति के सामने एक साथ दर्ज हैं — प्रत्येक विषय के लिए अलग पंक्ति, अलग समय या अलग प्रश्न-संख्या कहीं नहीं दी गई।[स्रोत 1]

प्रश्न-पत्र का ढाँचा — वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर

प्रश्नअंकसमय
1202402 घंटे 30 मिनट

वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के विज्ञापन (संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026) में भी यह एक ही पंक्ति है — बारहों विषय इसी एक पंक्ति के सामने एक साथ दर्ज हैं। कई तैयारी-वेबसाइटों पर इस स्तर के लिए छपा 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे वाला आँकड़ा गलत है।[स्रोत 2]

विषयवार विभाजन क्यों नहीं दिया गया

यह प्रश्न-पत्र का सबसे अधिक गलत समझा जाने वाला हिस्सा है। तैयारी-वेबसाइटों पर आपको CET का विषयवार विभाजन तालिका के रूप में मिल जाएगा — इतिहास के इतने प्रश्न, भूगोल के इतने, भाषा के 22 प्रश्न और 44 अंक। आधिकारिक विज्ञापन में ऐसी कोई तालिका है ही नहीं। वहाँ चौदहों विषय एक ही कोष्ठक में, एक के बाद एक, उसी एक पंक्ति के सामने लिखे हैं जिसमें 150 प्रश्न और 300 अंक दर्ज हैं।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि कोई भी विषय पहले से 'छोटा' मानकर छोड़ा नहीं जा सकता। जब बोर्ड स्वयं यह नहीं बताता कि किस विषय से कितने प्रश्न आएँगे, तब किसी विषय को कम आँकना अनुमान पर टिकी रणनीति है। जिन आँकड़ों को वेबसाइटें विभाजन बताकर छापती हैं, वे प्रायः पुराने प्रश्न-पत्रों की गिनती हैं — वह जानकारी बेकार नहीं है, पर वह बोर्ड का वादा नहीं है, और उसे विज्ञापन के आँकड़े की तरह प्रस्तुत करना गलत है।

हमारे पृष्ठों पर इसीलिए आपको विषयवार प्रश्न-संख्या कहीं नहीं मिलेगी। जहाँ विभाजन की बात आती है, वहाँ यही लिखा है — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं।

ऋणात्मक अंकन

नियम
प्रत्येक गलत उत्तर पर उस प्रश्न के अंकों का एक-तिहाई (1/3) काटा जाएगा[स्रोत 1]
किन पर लागू
गलत उत्तर पर, और खाली छोड़े गए गोले पर भी[स्रोत 1]
'E' भरने पर
कोई कटौती नहीं — 'E' भरा हुआ प्रश्न विधिवत अनुत्तरित माना जाता है[स्रोत 1]
किन स्तरों पर
स्नातक और वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) — दोनों स्तरों पर एक-तिहाई की वही कटौती[स्रोत 2]

अनुमान लगाएँ या नहीं — गणित क्या कहता है

ऋणात्मक अंकन एक-तिहाई है, यानी तीन गलत उत्तर एक सही उत्तर का मूल्य मिटा देते हैं। इससे एक सीधा नियम निकलता है: यदि आप चार में से दो विकल्प पक्के तौर पर हटा चुके हैं, तो बचे दो में से चुनना घाटे का सौदा नहीं है। पर यदि चारों विकल्प एक जैसे लग रहे हैं, तो अनुमान औसतन नुकसान ही देता है।

भाषा और शब्दावली के प्रश्नों में यह बात और सख्त हो जाती है, क्योंकि वहाँ अर्थ या तो याद होता है या नहीं — बीच का रास्ता कम मिलता है। इतिहास और भूगोल के प्रश्नों में विकल्प हटाना ज़्यादा काम करता है, इसलिए वहाँ सोच-समझकर लगाया गया अनुमान उचित है।

सबसे बड़ी भूल यह मान लेना है कि प्रश्न छोड़ देना सुरक्षित है। CET में प्रश्न छोड़ना अपने आप में सुरक्षित नहीं — उसे 'E' भरकर छोड़ना सुरक्षित है। यही अगला भाग है, और यही इस परीक्षा का सबसे महँगा नियम है।

अनिवार्य पाँचवाँ विकल्प 'E' — नियम

विकल्प
प्रत्येक प्रश्न में पाँच विकल्प — A, B, C, D और E[स्रोत 1]
अनुत्तरित प्रश्न
जिस प्रश्न का उत्तर न देना हो, उसमें 'E' गोला भरना अनिवार्य है[स्रोत 1]
गोला खाली छोड़ने पर
उस प्रश्न पर भी −1/3 अंक की कटौती[स्रोत 1]
10% से अधिक गोले खाली
अभ्यर्थी अयोग्य घोषित (disqualified)[स्रोत 1]
अतिरिक्त समय
परीक्षा के अंत में 10 मिनट, केवल 'E' भरने के लिए[स्रोत 1]
किन स्तरों पर
स्नातक और वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) — दोनों विज्ञापनों में यह नियम शब्दशः समान है[स्रोत 2]
12वीं स्तर पर 10% की सीमा
120 प्रश्नों के पेपर में 12 प्रश्न — इससे अधिक गोले खाली रहने पर अयोग्यता[स्रोत 2]

10% वाली सीमा — जहाँ अच्छा पेपर भी बेकार हो जाता है

यह नियम ऋणात्मक अंकन का विकल्प नहीं है, उसके साथ चलता है। हर प्रश्न में पाँच में से ठीक एक गोला भरा होना चाहिए — उत्तर आता हो तो A से D में से एक, न आता हो तो 'E'। यदि किसी प्रश्न में कोई गोला नहीं भरा, तो उस पर भी एक-तिहाई की कटौती लगेगी। और यदि ऐसे खाली प्रश्नों की संख्या कुल प्रश्नों के 10 प्रतिशत से अधिक हो गई — यानी 150 प्रश्नों के पेपर में 15 से अधिक — तो अभ्यर्थी को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। तब अंक कितने भी हों, कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसीलिए बोर्ड परीक्षा के अंत में 10 मिनट अतिरिक्त देता है, जिनका एकमात्र उपयोग बचे हुए प्रश्नों में 'E' भरना है।

परीक्षा कक्ष में इसे कैसे निभाएँ

गोला खाली रखने की आदत छोड़ दीजिए

अन्य परीक्षाओं में जो प्रश्न नहीं आता उसे छोड़ देना सही रणनीति है। CET में वही आदत सबसे भारी पड़ती है, क्योंकि यहाँ छोड़ना और खाली रखना दो अलग चीजें हैं। छोड़ना है तो 'E' भरकर छोड़िए।

पहली बार में ही निपटा दीजिए

जिस प्रश्न पर आप रुककर आगे बढ़े, वहीं 'E' भर दीजिए। बाद में लौटकर उत्तर मिल जाए तो निर्देशानुसार सुधार की प्रक्रिया अपनाइए — पर पेपर में कोई गोला किसी भी क्षण खाली न रहे, यह आदत सबसे सुरक्षित है।

अंतिम 10 मिनट को जाँच का समय मत बनाइए

बोर्ड ने वे 10 मिनट उत्तर बदलने के लिए नहीं, 'E' भरने के लिए दिए हैं। उन्हें दोबारा हल करने में लगाना उस सुरक्षा को खर्च करना है जो आपको दी गई है।

गिनती दो बार कीजिए

अंत में यह देखिए कि कुल कितने प्रश्नों में कोई गोला नहीं भरा। यह संख्या शून्य होनी चाहिए। 15 इस परीक्षा में कोई सुरक्षित संख्या नहीं है, वह वह सीमा है जिसके पार अयोग्यता है।

वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर के बारे में

वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर की CET का प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न, 240 अंक और 2 घंटे 30 मिनट का है — विज्ञापन संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026 में यह एक ही संयुक्त पंक्ति के रूप में दर्ज है। ऋणात्मक अंकन −1/3 और अनिवार्य पाँचवाँ विकल्प 'E' का पूरा नियम — पाँच विकल्प A से E, अनुत्तरित प्रश्न में 'E' भरना अनिवार्य, गोला खाली छोड़ने पर भी −1/3, कुल प्रश्नों के 10 प्रतिशत से अधिक गोले खाली रहने पर अयोग्यता, और अंत में 10 मिनट अतिरिक्त — दोनों स्तरों पर शब्दशः समान है। 120 प्रश्नों के पेपर में वह 10% की सीमा 12 प्रश्नों की बनती है। स्नातक स्तर की तरह यहाँ भी विषयवार प्रश्न-संख्या प्रकाशित नहीं की गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CET में निगेटिव मार्किंग है या नहीं?+

है। विज्ञापन में स्पष्ट लिखा है कि प्रत्येक गलत उत्तर पर उस प्रश्न के कुल अंकों का एक-तिहाई काटा जाएगा। जो वेबसाइटें CET को बिना ऋणात्मक अंकन वाली परीक्षा बताती हैं, वे इस चक्र के लिए गलत हैं।

विकल्प 'E' क्यों भरना पड़ता है?+

ताकि हर प्रश्न का उत्तर-गोला भरा हुआ रहे। 'E' का अर्थ है — मैंने यह प्रश्न जानबूझकर नहीं किया। इससे कोई अंक नहीं कटता, जबकि गोला खाली छोड़ने पर एक-तिहाई अंक कटता है।

अगर 15 से अधिक प्रश्नों में कोई गोला न भरा जाए तो क्या होगा?+

विज्ञापन के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में कोई भी गोला न भरने पर अभ्यर्थी अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। 150 प्रश्नों के पेपर में यह सीमा 15 प्रश्नों की बनती है।

क्या 'E' भरने पर भी ऋणात्मक अंकन लगता है?+

नहीं। 'E' भरा हुआ प्रश्न विधिवत अनुत्तरित माना जाता है और उस पर कोई कटौती नहीं होती। कटौती तब होती है जब उत्तर गलत हो, या जब कोई गोला भरा ही न गया हो।

विषयवार कितने प्रश्न आएँगे?+

यह विज्ञापन में प्रकाशित नहीं है। सभी विषय एक ही 150 प्रश्न / 300 अंक वाली पंक्ति के सामने एक साथ दर्ज हैं, इसलिए विषयवार प्रश्न-संख्या का कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं है।

वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर की CET का पैटर्न क्या है?+

120 प्रश्न, 240 अंक और 2 घंटे 30 मिनट — विज्ञापन संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026 के अनुसार। ऋणात्मक अंकन −1/3 और विकल्प 'E' का पूरा नियम इस स्तर पर भी वैसा ही लागू है। जो वेबसाइटें 12वीं स्तर के लिए 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे बताती हैं, वे गलत हैं।

क्या 2024 में CET में ऋणात्मक अंकन नहीं थी?+

सही बात। 2024 के विज्ञापन में यह नियम जोड़ा गया था, पर बोर्ड ने उसे 16 दिन के भीतर हटा दिया, इसलिए 2024 की परीक्षा बिना ऋणात्मक अंकन के हुई। 2026 के चक्र के लिए यह नियम वापस आ गया है, जैसा ऊपर इस पृष्ठ पर दर्ज है। पूरी तारीखवार कहानी अलग पृष्ठ पर है।

आधिकारिक स्रोत

  1. RSSB — CET (स्नातक स्तर) 2026 का आधिकारिक विज्ञापन, दिनांक 01-07-2026 · 1 जुलाई 2026
  2. RSSB — CET (वरिष्ठ माध्यमिक स्तर) 2026 का आधिकारिक विज्ञापन संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026 · 23 जून 2026