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CET · भाषा

CET के लिए सम्पूर्ण हिन्दी

CET के पाठ्यक्रम में 'सामान्य हिन्दी' चौदह नामित विषयों में से एक है — पर उसके भीतर कौन-से उप-विषय आएँगे और कितने प्रश्न, यह विज्ञापन में कहीं नहीं दिया। यह पृष्ठ वही रेखा साफ रखता है, और उसके बाद बताता है कि हिंदी में असल में तैयारी किस-किस चीज की करनी है।

  • स्नातक: 150 प्रश्न · 300 अंक · 3 घंटे
  • 12वीं: 120 प्रश्न · 240 अंक · 2 घंटे 30 मिनट
  • पाठ्यक्रम में नाम से दर्ज
  • विषयवार प्रश्न-संख्या अप्रकाशित

CET में भाषा का भार

प्रश्न-पत्र
150 प्रश्न · 300 अंक · 3 घंटे — एक ही संयुक्त पंक्ति[स्रोत 1]
पाठ्यक्रम में
सामान्य हिन्दी — चौदह नामित विषयों में से एक[स्रोत 1]
इस विषय के प्रश्नों की संख्या
आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं[स्रोत 1]
ऋणात्मक अंकन
प्रत्येक गलत उत्तर पर −1/3[स्रोत 1]
अनुत्तरित प्रश्न
विकल्प 'E' भरना अनिवार्य — खाली गोले पर भी कटौती[स्रोत 1]
वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर
120 प्रश्न · 240 अंक · 2 घंटे 30 मिनट — पाठ्यक्रम में भाषा 'सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी' की एक संयुक्त प्रविष्टि के रूप में, प्रश्न-संख्या के बिना[स्रोत 2]

CET की हिंदी — नामित विषय, अप्रकाशित विभाजन

CET के विज्ञापन में पाठ्यक्रम एक ही कोष्ठक में लिखा है, जिसमें चौदह विषय एक के बाद एक दर्ज हैं। 'सामान्य हिन्दी' उन्हीं में से एक है। इससे दो बातें तय होती हैं — हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा है, और इसे छोड़ने का कोई आधार नहीं। इससे जो बात तय नहीं होती, वह यह है कि हिंदी से कितने प्रश्न आएँगे।

यह अंतर छोटा नहीं है। तैयारी-वेबसाइटों पर आपको हिंदी और अंग्रेज़ी के लिए निश्चित प्रश्न-संख्या मिल जाएगी, और वही संख्या आगे रणनीति बनाने में इस्तेमाल होती है — 'इतने ही प्रश्न हैं तो इतना ही समय देंगे'। जब मूल संख्या ही अनौपचारिक हो, तब उस पर टिकी रणनीति भी अनुमान ही रहती है। इसलिए यहाँ उल्टा रास्ता ठीक है: संख्या का पीछा छोड़िए और उन विषयों पर काम कीजिए जिनके प्रश्न सबसे अनुमानित और सबसे कम समय लेने वाले होते हैं।

हिंदी का सबसे बड़ा लाभ यही है। पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द और मुहावरे — इन चारों में प्रश्न एक पंक्ति का होता है और उत्तर या तो याद है या नहीं। सोचने में समय नहीं जाता, इसलिए तीन घंटे के पेपर में यही वे प्रश्न हैं जो सबसे सस्ते अंक देते हैं। बशर्ते याद हो — और ऋणात्मक अंकन के रहते, याद न होने पर इन्हीं प्रश्नों में अनुमान सबसे महँगा भी पड़ता है।

व्याकरण का दूसरा हिस्सा — संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय — नियम-आधारित है। यहाँ एक बार नियम पकड़ में आ जाने पर नए शब्द भी हल होने लगते हैं, इसलिए इस पर लगाया समय स्थायी रहता है, पर शुरुआत में यह धीमा चलता है। और शुद्धि वाला हिस्सा — शब्द शुद्धि और वाक्य शुद्धि — वह पुल है जो व्याकरण को समझ से जोड़ता है; यह याद करने से ज़्यादा अभ्यास से आता है।

विषय-सूची — प्रश्न किस रूप में आता है

विषयप्रश्न किस रूप में आता है
संधि और संधि विच्छेदसंधि-विच्छेद या संधि से बना शब्द पहचानना — एक पंक्ति, चार विकल्प
समाससमास का भेद पहचानना या विग्रह चुनना
उपसर्गशब्द में लगा उपसर्ग छाँटना; विलोम-निर्माण के प्रश्नों में भी सहारा देता है
प्रत्ययकृत् या तद्धित प्रत्यय पहचानना, मूल शब्द अलग करना
पर्यायवाची शब्ददिए गए शब्द का समानार्थी चुनना — सबसे सीधा प्रश्न-प्रकार
विलोम शब्दजोड़ी के रूप में विलोम, कभी उपसर्ग से बने विलोम पर
वाक्यांश के लिए एक शब्दवाक्यांश देकर उसके लिए एक शब्द — याद हो तो पक्का अंक
मुहावरे और लोकोक्तियाँमुहावरे का अर्थ चुनना, या वाक्य में उपयुक्त मुहावरा भरना
शब्द शुद्धिशुद्ध वर्तनी वाला शब्द छाँटना; रिक्त स्थान पूर्ति में भी काम आता है
वाक्य शुद्धिचार वाक्यों में से शुद्ध वाक्य, या रेखांकित अंश की अशुद्धि
पारिभाषिक शब्दावलीप्रशासनिक-विधिक अंग्रेज़ी शब्द का हिंदी पर्याय — कार्यालयी शब्दावली के रूप में
शब्द युग्म (समश्रुत भिन्नार्थक शब्द)समान सुनाई देने वाले दो शब्दों में से वाक्य के अनुसार सही शब्द चुनना — आयोग के पाठ्यक्रम में यह बिंदु केवल वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर पर ‘शब्द – युग्म’ के नाम से है; स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में यह नहीं है
कार्यालयी पत्र एवं प्रारूपपत्र के प्रारूप और उसके अंगों पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न — आयोग का नोट है कि पत्र-लेखन के प्रश्न पत्र की संरचना पर भी पूछे जाएँगे, इसलिए यहाँ पूरा पत्र लिखवाया नहीं जाता
अनेकार्थक शब्दएक शब्द के कई अर्थों में से वाक्य के अनुसार सही अर्थ चुनना — दोनों स्तरों के पाठ्यक्रम में नाम से; स्नातक स्तर पर यह ‘विलोम शब्द, पर्यायवाची एवं अनेकार्थक शब्द’ बिंदु का हिस्सा है
विराम चिह्नदिए गए वाक्य में सही चिह्न लगाना, या चिह्न का नाम पहचानना — आयोग के स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में नाम से; वरिष्ठ माध्यमिक के पाठ्यक्रम में यह बिंदु नहीं है
ध्वनि एवं उसका वर्गीकरणकिसी वर्ण का उच्चारण-स्थान, अल्पप्राण/महाप्राण और अघोष/सघोष बताना, तथा वर्णों की गिनती — स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में नाम से; वरिष्ठ माध्यमिक के पाठ्यक्रम में यह बिंदु नहीं है
राजभाषा हिन्दी — संवैधानिक स्थितिअनुच्छेद और विषय का मिलान, आठवीं अनुसूची की भाषाएँ और संशोधन, तथा राजभाषा और राष्ट्रभाषा का अंतर — आयोग के स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में नाम से; वरिष्ठ माध्यमिक के पाठ्यक्रम में यह बिंदु नहीं है
शब्द-भेद — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय, कारककिसी शब्द का भेद या उपभेद पहचानना, कारक और विभक्ति चिह्न का मिलान, तथा भाववाचक संज्ञा किस शब्द से बनी — दोनों स्तरों के पाठ्यक्रम में; क्रियाविशेषण और कारक केवल स्नातक स्तर पर हैं

CET के पाठ्यक्रम में यह खंड विषय-स्तर पर ही नामित है — 'सामान्य हिन्दी'। उसके भीतर कौन-से उप-विषय आएँगे और किससे कितने प्रश्न, यह विज्ञापन में प्रकाशित नहीं है। ऊपर की दूसरी पंक्ति प्रश्न के स्वरूप की बात करती है, प्रश्न-संख्या की नहीं।[स्रोत 1]

हर विषय की पूरी तैयारी — उन्नीस विषय-पृष्ठ

संधि और संधि विच्छेद — नियम, भेद, उदाहरण और अभ्यास प्रश्न

स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम, भेद और विच्छेद का अभ्यास।

समास — परिभाषा, छह भेद, विग्रह और परीक्षा-स्तरीय उदाहरण

छहों समास, विग्रह की विधि और पहचान के सूत्र।

उपसर्ग — परिभाषा, भेद और परीक्षा-स्तरीय उदाहरण

तत्सम, तद्भव, उर्दू और अंग्रेज़ी उपसर्ग एक साथ।

प्रत्यय — कृत् और तद्धित, भेद एवं उदाहरण

कृत् और तद्धित प्रत्यय, शब्द-निर्माण के उदाहरण सहित।

पर्यायवाची शब्द — अर्थ-भेद सहित सूची

समानार्थी शब्दों की सूची, अर्थ-भेद के संकेत के साथ।

विलोम शब्द — उपसर्ग से विलोम निर्माण और सूची

उपसर्ग से विलोम बनाने की विधि और लंबी जोड़ी-सूची।

वाक्यांश के लिए एक शब्द — विषयवार सूची

विषयवार एक-शब्द सूची, वाक्यांश के साथ।

मुहावरे और लोकोक्तियाँ — अर्थ, वाक्य प्रयोग और परीक्षा अभ्यास

मुहावरे व लोकोक्तियाँ, अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित।

शब्द शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार, नियम और शुद्ध रूप

वर्तनी की अशुद्धियों के प्रकार और शुद्ध रूप।

वाक्य शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार, नियम और 250+ अशुद्ध-शुद्ध वाक्य

वाक्य-स्तर की अशुद्धियाँ, नियम और शुद्ध-अशुद्ध जोड़े।

पारिभाषिक शब्दावली — प्रशासनिक, विधिक और तकनीकी शब्दों के 300+ हिंदी पर्याय

प्रशासनिक, विधिक व तकनीकी शब्दों के हिंदी पर्याय।

समश्रुत भिन्नार्थक शब्द — 40+ युग्म, अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित

सुनने में एक जैसे, अर्थ में अलग — मात्रा, व्यंजन और उपसर्ग के भेद से बने युग्म। वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के पाठ्यक्रम में नामित।

पत्र-लेखन — पाँच कार्यालयी प्रारूप, अंग और आदर्श नमूने

सरकारी पत्र, कार्यालय आदेश, अर्द्धशासकीय पत्र, अनुस्मारक और प्रतिवेदन — हर प्रारूप के अंग क्रम संख्या सहित, जिन पर CET में सीधे प्रश्न बनते हैं।

प्रारूप-लेखन — अधिसूचना, परिपत्र, प्रेस विज्ञप्ति और अन्य

2026 की विज्ञप्ति के सामान्य हिन्दी पाठ्यक्रम में परिपत्र, अधिसूचना, निविदा और प्रेस विज्ञप्ति नाम से हैं — पाँचों प्रारूप पूरे नमूनों के साथ।

अनेकार्थक शब्द — 44 शब्द, सभी अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित

हरि, कर, सारंग, मान, कल — एक-एक शब्द के चार-पाँच अर्थ, और वह वाक्य जिससे कठिन अर्थ पकड़ में आता है। दोनों CET स्तरों के पाठ्यक्रम में नामित।

विराम चिह्न — चौदह चिह्न, प्रयोग और उदाहरण सहित

‘रोको, मत जाने दो।’ और ‘रोको मत, जाने दो।’ — एक अल्प विराम से आदेश उल्टा। चौदह चिह्न, उनके रूप, प्रयोग और वे पाँच भूलें जो सबसे अधिक होती हैं।

ध्वनि एवं उसका वर्गीकरण — स्वर, व्यंजन और उच्चारण-स्थान

उच्चारण-स्थान और प्रयत्न की पूरी तालिका, तथा 44 बनाम 52 वर्ण की गिनती का अंतर — दोनों संख्याएँ विकल्पों में साथ दी जाती हैं।

राजभाषा हिन्दी — संवैधानिक स्थिति, अनुच्छेद 343 से 351

हिंदी राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं — और यही सबसे अधिक पूछा जाता है। भाग 17 के सारे अनुच्छेद, राजभाषा अधिनियम 1963 और आठवीं अनुसूची की 14 से 22 तक की कहानी।

शब्द-भेद — आठ भेद, आठ पृष्ठों में

संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण, अव्यय और कारक — हर भेद का अपना पृष्ठ, पहचान के नियम और वे जगहें जहाँ दो भेद एक जैसे दिखते हैं।

पढ़ने का क्रम — CET के लिए

पहला चरण — शब्दावली

पर्यायवाची, विलोम और वाक्यांश के लिए एक शब्द। इन तीनों के प्रश्न सबसे अनुमानित हैं और सबसे कम समय लेते हैं। ये याद करने वाले विषय हैं, इसलिए पहले दिन से शुरू कीजिए और पूरे तैयारी-काल में थोड़ा-थोड़ा दोहराते रहिए — एक बैठक में पूरा करने की चीज नहीं हैं।

दूसरा चरण — मुहावरे और लोकोक्तियाँ

यहाँ अनुमान सबसे ज़्यादा धोखा देता है, क्योंकि विकल्प जानबूझकर शब्दों के सीधे अर्थ के पास रखे जाते हैं। ऋणात्मक अंकन के रहते यह और महँगा है। इसलिए इसे आधा-अधूरा याद रखने का कोई मूल्य नहीं — जो याद है उसी पर उत्तर दीजिए, बाकी में 'E' भर दीजिए।

तीसरा चरण — वाक्य शुद्धि और शब्द शुद्धि

ये दोनों साथ चलते हैं और याद करने के बजाय समझने वाले विषय हैं। नियम एक बार पकड़ में आने पर नए वाक्य भी हल होने लगते हैं, इसलिए इन पर लगाया समय स्थायी रहता है। इन्हें साथ पढ़ने पर अतिरिक्त समय भी नहीं लगता।

चौथा चरण — शब्द-रचना

संधि, उपसर्ग और प्रत्यय। उपसर्ग-प्रत्यय की समझ विलोम और पर्यायवाची दोनों को सहारा देती है, इसलिए इनका अप्रत्यक्ष लाभ असली है। पहले तीन चरण पक्के होने के बाद ही इन पर आइए।

अंत में — समास और पारिभाषिक शब्दावली

समास को पहचान के स्तर तक देखिए। पारिभाषिक शब्दावली तब ज़्यादा उपयोगी है जब आप कनिष्ठ लेखाकार या लिपिक जैसे कार्यालयी पदों की ओर देख रहे हों, क्योंकि वहाँ प्रशासनिक शब्दावली काम आती है।

हर चरण के साथ — 'E' का अभ्यास

जिस प्रश्न का उत्तर याद नहीं, उसमें 'E' भरना भी अभ्यास का हिस्सा है। घर पर हल करते समय भी अनुत्तरित प्रश्नों को चिह्नित करने की आदत डालिए — परीक्षा कक्ष में यही आदत 10 प्रतिशत वाली सीमा से बचाती है।

CET की हिंदी में सबसे बड़ी भूल

यह मान लेना कि हिंदी अपनी भाषा है इसलिए अलग से तैयारी की ज़रूरत नहीं। परीक्षा की हिंदी बोलचाल की हिंदी नहीं है — वहाँ पर्यायवाची का सूक्ष्म अर्थ-भेद, वाक्य की व्याकरणिक शुद्धता और मुहावरे का रूढ़ अर्थ पूछा जाता है, और ये तीनों अलग से याद करने पड़ते हैं। दूसरी भूल इससे जुड़ी है: भाषा के प्रश्नों में अनुमान लगाना। CET में प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई कटता है, और भाषा वही जगह है जहाँ अनुमान सबसे कम काम करता है — अर्थ या तो याद होता है या नहीं। जो याद न हो, उसमें 'E' भरिए; गोला खाली मत छोड़िए, क्योंकि खाली गोले पर भी कटौती लगती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CET में हिंदी के कितने प्रश्न आते हैं?+

यह विज्ञापन में प्रकाशित नहीं है। पाठ्यक्रम में 'सामान्य हिन्दी' नाम से दर्ज है, पर उसके लिए अलग प्रश्न-संख्या या अलग अंक कहीं नहीं दिए गए — सभी चौदह विषय 150 प्रश्न / 300 अंक वाली एक ही पंक्ति के सामने लिखे हैं।

कई वेबसाइटें 22 प्रश्न और 44 अंक बताती हैं, वह क्या है?+

वह आँकड़ा CET का नहीं है। वह पटवारी भर्ती के अपने प्रकाशित पैटर्न का आँकड़ा है, जिसे कुछ वेबसाइटों ने CET पर भी लागू कर दिया। CET के विज्ञापन में ऐसा कोई विभाजन है ही नहीं।

हिंदी की तैयारी कहाँ से शुरू करूँ?+

पर्यायवाची, विलोम और वाक्यांश के लिए एक शब्द से। इन तीनों में प्रश्न एक पंक्ति का होता है और समय सबसे कम लगता है, इसलिए यही सबसे सस्ते अंक हैं।

क्या संधि और समास CET में आते हैं?+

पाठ्यक्रम में उप-विषय अलग से नामित नहीं हैं, इसलिए कोई निश्चित उत्तर देना अनुमान होगा। ये दोनों 'सामान्य हिन्दी' के सामान्य दायरे में आते हैं और शब्द-रचना के प्रश्नों में काम आते हैं, इसलिए इन्हें पहचान के स्तर तक तैयार रखना उचित है।

12वीं स्तर की CET में हिंदी का ढाँचा क्या है?+

अब यह सत्यापित है। वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर की CET का प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न, 240 अंक और 2 घंटे 30 मिनट का है — विज्ञापन संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026। उस स्तर के पाठ्यक्रम में भाषा 'सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी' नाम की एक ही संयुक्त प्रविष्टि है, इसलिए अकेले हिंदी के लिए प्रश्न-संख्या वहाँ भी प्रकाशित नहीं है। ऋणात्मक अंकन −1/3 और विकल्प 'E' का नियम दोनों स्तरों पर समान है — इसलिए इस पृष्ठ की सामग्री दोनों स्तरों पर उसी तरह काम आती है।

क्या हिंदी छोड़कर केवल अंग्रेज़ी पर ध्यान दिया जा सकता है?+

दोनों पाठ्यक्रम में अलग-अलग नाम से दर्ज हैं और किसी का भी विभाजन प्रकाशित नहीं है, इसलिए किसी एक को छोड़ना अनुमान पर टिका निर्णय होगा।

आधिकारिक स्रोत

  1. RSSB — CET (स्नातक स्तर) 2026 का आधिकारिक विज्ञापन, दिनांक 01-07-2026 · 1 जुलाई 2026
  2. RSSB — CET (वरिष्ठ माध्यमिक स्तर) 2026 का आधिकारिक विज्ञापन संख्या 08/2026, दिनांक 23-06-2026 · 23 जून 2026