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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

2027 जनगणना और लोकसभा परिसीमन का राजनीतिक संकट

12 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

2027 जनगणना परिसीमन के माध्यम से उत्तर-दक्षिण शक्ति संतुलन को बदल सकती है।

क्या हुआ

परिसीमन भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 द्वारा शासित है। 2027 की जनगणना के बाद, नई परिसीमन के लिए दबाव बढ़ेगा क्योंकि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का आवंटन फ्रीज है। 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मान' के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने से दक्षिणी राज्य (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक) को नुकसान होगा, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे उत्तरी राज्यों को लाभ होगा। यह संघवाद, क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय नीति निर्माण में शक्ति के वितरण को प्रभावित करेगा। महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को परिसीमन से जोड़ा जाना भी विवाद का कारण है।

मुख्य तथ्य

  1. 142वां संशोधन (1976) ने 1971 जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को फ्रीज किया
  2. 284वां संशोधन (2001) ने यह फ्रीज 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया
  3. 3परिसीमन आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अध्यक्ष), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं
  4. 42002 के आयोग के बाद 2008 में सीमाओं को लागू किया गया था

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

संविधान के अनुच्छेद 81, 82 और परिसीमन आयोग की संरचना तथा संघवाद बनाम जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व का द्वंद्व।

स्थायी GK: भारत में अब तक चार परिसीमन आयोग स्थापित किए गए हैं: 1952, 1963, 1973, और 2002।

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