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12 अगस्त 2026 · 12 August 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

2027 जनगणना और लोकसभा परिसीमन का राजनीतिक संकट

2027 Census and Lok Sabha Delimitation: Federal Balance at Stake

2027 जनगणना परिसीमन के माध्यम से उत्तर-दक्षिण शक्ति संतुलन को बदल सकती है।

मुख्य तथ्य

  • 42वां संशोधन (1976) ने 1971 जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को फ्रीज किया
  • 84वां संशोधन (2001) ने यह फ्रीज 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया
  • परिसीमन आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अध्यक्ष), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं
  • 2002 के आयोग के बाद 2008 में सीमाओं को लागू किया गया था
परिसीमन भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 द्वारा शासित है। 2027 की जनगणना के बाद, नई परिसीमन के लिए दबाव बढ़ेगा क्योंकि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का आवंटन फ्रीज है। 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मान' के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने से दक्षिणी राज्य (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक) को नुकसान होगा, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे उत्तरी राज्यों को लाभ होगा। यह संघवाद, क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय नीति निर्माण में शक्ति के वितरण को प्रभावित करेगा। महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को परिसीमन से जोड़ा जाना भी विवाद का कारण है।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

संविधान के अनुच्छेद 81, 82 और परिसीमन आयोग की संरचना तथा संघवाद बनाम जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व का द्वंद्व।

📚 संबंधित स्थायी GK

भारत में अब तक चार परिसीमन आयोग स्थापित किए गए हैं: 1952, 1963, 1973, और 2002।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

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