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27 अगस्त 2026 · 27 August 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

न्यायिक नियुक्तियों में कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता संबंधी चिंताएँ

Transparency Concerns in Collegium System of Judicial Appointments

कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है लेकिन पारदर्शिता की कीमत पर।

मुख्य तथ्य

  • तीन न्यायाधीशों के मामले (1981, 1993, 1998) ने कॉलेजियम प्रणाली का विकास किया।
  • राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) 2015 में 'मौलिक ढांचे' के मामले में संवैधानिक रूप से अमान्य घोषित किया गया।
  • कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • पूर्व नोटिफिकेशन, उद्देश्य मानदंड और तर्कसंगत निर्णय पारदर्शिता में सुधार कर सकते हैं।
कॉलेजियम प्रणाली—भारतीय संविधान में वर्णित नहीं—तीन न्यायाधीशों के मामलों के माध्यम से विकसित हुई है और न्यायिक नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार है। हालांकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप से न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है, लेकिन इसे अपारदर्शिता, उद्देश्य मानदंडों की कमी, निर्णय कारणों का सीमित प्रकटीकरण और पारिवारिकता के आरोपों के लिए आलोचना की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अधिक खुलेपन से जनता का विश्वास बढ़ेगा और योग्यता को नियंत्रित करने वाला सिद्धांत बना रहेगा।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

RAS/CSE के लिए: भारतीय न्यायपालिका में जवाबदेही, पारदर्शिता और स्वतंत्रता के बीच संतुलन।

📚 संबंधित स्थायी GK

भारतीय संविधान अनुच्छेद 124: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

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