19 फरवरी 2026 · 19 February 2026अर्थव्यवस्था⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
बैंक-केंद्रित से कॉर्पोरेट बॉन्ड-आधारित वित्त की ओर
Bank-centric to corporate bond-based finance
भारत में बैंक-केंद्रित से कॉर्पोरेट बॉन्ड-आधारित वित्त की ओर बदलाव की चर्चा हुई। पारंपरिक रूप से भारतीय कंपनियाँ दीर्घकालिक पूँजी हेतु मुख्यतः बैंक ऋण पर निर्भर रही हैं, जिससे बैंकों पर जोखिम केंद्रित होता है (NPA)। एक विकसित कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार कंपनियों को सीधे निवेशकों से दीर्घकालिक धन जुटाने देता है, जिससे बैंकों पर निर्भरता घटती है, जोखिम वितरित होता है व अवसंरचना/उद्योग वित्त-पोषण सुगम होता है। भारत में बॉन्ड बाज़ार अभी भी अपेक्षाकृत उथला है। SEBI व RBI इसके विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। यह वित्तीय बाज़ार सुधार, अवसंरचना वित्त व पूँजी निर्माण से जुड़ा है।
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