नेपाल में भोटेकोशी–त्रिशूली घाटी की अचानक बाढ़, हिमालयी आपदा जोखिम उजागर
27 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
26 अगस्त 2026 नेपाल बाढ़: भोटेकोशी–त्रिशूली घाटी; 27 अगस्त शाम तक 359 मौतों की पुष्टि।
क्या हुआ
26 अगस्त 2026 को तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा ज़िले में पानी, कीचड़ और मलबे की तेज़ लहर भोटेकोशी से होकर त्रिशूली नदी में उतरी। 27 अगस्त शाम 5 बजे तक नेपाल पुलिस ने आठ ज़िलों से 359 शव बरामद होने की जानकारी दी, जिनमें सबसे अधिक चितवन (132) और पूर्वी नवलपरासी (82) में मिले। रसुवा के स्याब्रुबेसी और तिमुरे में बाज़ार और जलविद्युत परियोजनाएँ क्षतिग्रस्त हुईं तथा सीमा पार चीन में भी तबाही हुई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार ऊँचे हिमालय में हिमनद टूटने को संभावित कारण के रूप में देखा जा रहा था और सैकड़ों लोग लापता थे।
मुख्य तथ्य
- 1शुरुआत: नेपाल–तिब्बत सीमा पर रसुवा ज़िला; बाढ़ भोटेकोशी से त्रिशूली में पहुँची
- 227 अगस्त शाम 5 बजे तक 8 ज़िलों में 359 मौतें (नेपाल पुलिस)
- 3सबसे अधिक शव निचले इलाकों चितवन (132) और पूर्वी नवलपरासी (82) में मिले
- 4संभावित कारण: ऊँचे हिमालय में हिमनद टूटना, जिसकी जाँच जारी थी (UN)
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रश्न त्रिशूली–नारायणी–गंडक नदी तंत्र या हिमालयी अचानक बाढ़ की सीमा-पार प्रकृति पर पूछा जा सकता है।
स्थायी GK: त्रिशूली नदी तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी से निकलती है और देवघाट में नारायणी से मिलती है; नारायणी भारत में गंडक कहलाती है, जो गंगा की बाएँ तट की सहायक नदी है और जिस पर वाल्मीकिनगर (बिहार) में गंडक बैराज बना है।