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📚 राजस्थान की अर्थव्यवस्था

राजस्थान बजट प्रक्रिया, GSDP व आर्थिक समीक्षा (RAS Notes)

Rajasthan Budget Process, GSDP & Economic Review

⏱ 11 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Economy of Rajasthan

परिचय

राज्य के बजट और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की अवधारणा RPSC RAS प्रारंभिक परीक्षा में "राजस्थान की अर्थव्यवस्था" खंड की रीढ़ हैं। जहाँ आर्थिक समीक्षा पीछे मुड़कर देखती है कि बीते वर्ष में अर्थव्यवस्था ने कैसा प्रदर्शन किया, वहीं बजट आगे की ओर देखते हुए तय करता है कि आने वाले वर्ष में सरकार धन कैसे जुटाएगी और कहाँ खर्च करेगी। दोनों ही प्रक्रियाएँ संवैधानिक प्रावधानों और संस्थागत भूमिकाओं पर आधारित हैं, जो वर्षों और सरकारों के बदलने पर भी संरचनात्मक रूप से लगभग एक जैसी बनी रहती हैं — इसलिए पहले इसी संरचनात्मक-वैचारिक परत को पक्का करें; पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों में राजस्थान की अर्थव्यवस्था से नियमित रूप से प्रश्न आए हैं, और परिभाषाओं के साथ मुख्य आँकड़े भी पढ़ने चाहिए। यह गाइड वह आधारभूत शब्दावली और प्रक्रिया-प्रवाह प्रस्तुत करती है जो अभ्यर्थियों को चाहिए: GSDP क्या मापता है, क्षेत्रीय संघटन (sectoral composition) को कैसे समझा जाता है, राज्य का बजट कैसे तैयार होकर पारित होता है, बजट और आर्थिक समीक्षा में क्या अंतर है, और राजस्थान में विकास व्यय की योजना व निगरानी कौन-सी संस्थाएँ करती हैं।

मुख्य अवधारणाएं

1. GSDP — राष्ट्रीय GDP का राज्य-स्तरीय समकक्ष

सकल राज्य घरेलू उत्पाद (Gross State Domestic Product, GSDP) राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का राज्य-स्तरीय समकक्ष है: यह किसी निश्चित लेखा अवधि — प्रायः एक वित्तीय वर्ष — में राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को मापता है। GSDP का आकलन "चालू कीमतों" (current prices) पर किया जा सकता है, जिसमें उस वर्ष की प्रचलित कीमतें शामिल होने से वास्तविक उत्पादन वृद्धि और मुद्रास्फीति दोनों झलकते हैं, या "स्थिर कीमतों" (constant prices) पर, जिसमें किसी निश्चित आधार-वर्ष की कीमतों का उपयोग होने से मुद्रास्फीति का प्रभाव हट जाता है और उत्पादन में वास्तविक परिवर्तन दिखता है। प्रति व्यक्ति GSDP — GSDP को राज्य की जनसंख्या से विभाजित करने पर प्राप्त — राज्यों के बीच और समय के साथ निवासियों की औसत आय के स्तर की तुलना के लिए प्रयुक्त होता है। राजस्थान में GSDP के अनुमान राज्य के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (Directorate of Economics and Statistics) द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के साथ समन्वय में एक साझा राष्ट्रीय पद्धति के अनुसार तैयार किए जाते हैं, जिससे आँकड़े राज्यों के बीच तुलनीय बने रहते हैं।

2. क्षेत्रीय संघटन — प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक हिस्सेदारी

राजस्थान सहित किसी भी अर्थव्यवस्था को तीन व्यापक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। प्राथमिक क्षेत्र (Primary sector) में कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन और खनन/उत्खनन जैसी गतिविधियाँ आती हैं, जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होती हैं। द्वितीयक क्षेत्र (Secondary sector) में विनिर्माण, निर्माण कार्य (construction) और बिजली, गैस, जल आपूर्ति जैसी उपयोगिताएँ (utilities) आती हैं, जो कच्चे माल को तैयार या अर्ध-तैयार वस्तुओं में बदलती हैं। तृतीयक क्षेत्र (Tertiary/services sector) में व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन जैसी सेवाएँ शामिल हैं। GSDP में इन तीनों क्षेत्रों की सापेक्ष हिस्सेदारी किसी राज्य के आर्थिक विकास की अवस्था का एक मानक संकेतक मानी जाती है: प्राथमिक क्षेत्र के प्रभुत्व वाली अर्थव्यवस्था को संरचनात्मक रूप से कम विकसित माना जाता है, द्वितीयक क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी औद्योगीकरण का संकेत देती है, और तृतीयक क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी — जो आज राजस्थान सहित अधिकांश बड़े भारतीय राज्यों में सामान्य है — सेवा-प्रधान, अधिक विविधीकृत अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव दर्शाती है। इसलिए किसी दी गई गतिविधि (जैसे खनन या बैंकिंग) को सही क्षेत्र में वर्गीकृत करना आना चाहिए; साथ ही राजस्थान के क्षेत्रीय हिस्सेदारी आँकड़े नवीनतम राजस्थान आर्थिक समीक्षा से देखें।

3. राज्य बजट का निर्माण और प्रस्तुतीकरण

राज्य का बजट — औपचारिक रूप से "वार्षिक वित्तीय विवरण" (Annual Financial Statement) — आगामी वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च तक) के लिए सरकार की प्राप्तियों और व्यय का अनुमान है। इसे राजस्थान सरकार का वित्त विभाग तैयार करता है, जो वित्त मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्येक प्रशासनिक विभाग से व्यय प्रस्ताव और राजस्व अनुमान एकत्र कर समेकित करता है। राजस्थान में, अन्य राज्यों की भाँति, वित्त मंत्री विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हैं; यदि मुख्यमंत्री स्वयं वित्त विभाग भी संभालते हैं, तो वे बजट प्रस्तुत करते हैं। प्रस्तुतीकरण के बाद सामान्य चर्चा, विभागवार अनुदान मांगों (demands for grants) पर मतदान, और अंततः विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) तथा वित्त विधेयक (Finance Bill, जो किसी नई कराधान प्रस्ताव को कानूनी प्रभाव देता है) का पारित होना होता है।

राज्य बजट — तैयारी से पारित होने तक
  1. विभागों से अनुमानव्यय प्रस्ताव व राजस्व अनुमान
  2. वित्त विभाग द्वारा समेकनबजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) तैयार
  3. विधानसभा में प्रस्तुतिवित्त मंत्री (या वित्त विभाग संभालने पर मुख्यमंत्री)
  4. सामान्य चर्चा
  5. अनुदान मांगों पर मतदानविभागवार
  6. विनियोग विधेयकसंचित निधि से धन निकासी का अधिकार
  7. वित्त विधेयककराधान प्रस्तावों को कानूनी प्रभाव

4. राजस्व बजट, पूंजीगत बजट, और संवैधानिक प्रक्रिया

वार्षिक वित्तीय विवरण को राजस्व बजट (Revenue Budget — आवर्ती प्राप्तियाँ जैसे कर व गैर-कर राजस्व, तथा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, अनुदान जैसा व्यय, जो स्थायी परिसंपत्ति का न तो सृजन करता है न ही घटाता है) और पूंजीगत बजट (Capital Budget — ऋण प्राप्तियाँ व ऋण वसूली जैसी प्राप्तियाँ, तथा अवसंरचना परियोजनाओं जैसा परिसंपत्ति-सृजक व्यय या ऋण चुकौती जैसा देयता-घटाने वाला व्यय) में बाँटा जाता है।

राज्य स्तर पर पूरी प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 द्वारा नियंत्रित होती है: अनुच्छेद 202 राज्यपाल को सदन/सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना अनिवार्य करता है; अनुच्छेद 203 के अनुसार राज्य की संचित निधि पर "भारित" (charged) व्यय — जैसे राज्यपाल की परिलब्धियाँ या ऋण भार — पर मतदान नहीं होता, जबकि शेष व्यय अनुदान मांगों के रूप में प्रस्तुत होता है जिसे विधानसभा स्वीकार, अस्वीकार या घटा सकती है; अनुच्छेद 204-206 विनियोग विधेयक, अनुपूरक/अतिरिक्त अनुदान, तथा लेखानुदान (vote on account)/असाधारण अनुदान से संबंधित हैं; और अनुच्छेद 207 धन विधेयक जैसे वित्तीय विधेयकों (अनुच्छेद 199(1) में उल्लिखित विषयों वाले) को प्रस्तुत करने के लिए राज्यपाल की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य करता है। राज्य की संचित निधि से धन केवल विनियोग अधिनियम (Appropriation Act) के अंतर्गत ही निकाला जा सकता है।

अनुच्छेदविषयकीवर्ड
202वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) सदन के समक्ष रखनाविवरण
203भारित व्यय पर मतदान नहीं; शेष व्यय अनुदान मांगों के रूप मेंभारित/अनुदान
204विनियोग विधेयकविनियोग
205अनुपूरक/अतिरिक्त अनुदानअनुपूरक
206लेखानुदान/असाधारण अनुदानलेखानुदान
207वित्तीय विधेयकों हेतु राज्यपाल की अनुशंसाअनुशंसा

5. आर्थिक समीक्षा और नियोजन संस्थाएँ

बजट के साथ-साथ राज्य सरकार राजस्थान आर्थिक समीक्षा (Rajasthan Economic Review) प्रस्तुत करती है, जो सामान्यतः बजट के साथ या उससे ठीक पहले रखी जाती है। राजस्थान में इस दस्तावेज़ का नाम "आर्थिक समीक्षा" है; "आर्थिक सर्वेक्षण" (Economic Survey) केंद्र सरकार के दस्तावेज़ का नाम है। आर्थिक समीक्षा एक वर्णनात्मक, पश्चदर्शी (backward-looking) दस्तावेज़ है: यह बताता है कि पिछले वर्ष राज्य की अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों ने कैसा प्रदर्शन किया, GSDP व क्षेत्रीय आँकड़े प्रस्तुत करता है, और वह संदर्भ देता है जिसकी सहायता से विधायक व जनता बजट प्रस्तावों को समझ सकें।

नियोजन के मोर्चे पर, पुरानी योजना आयोग-शैली की पंचवर्षीय योजना पद्धति को 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर नीति आयोग (NITI Aayog) ने प्रतिस्थापित किया; नीति आयोग-पश्चात युग में राजस्थान भी, अन्य राज्यों की भाँति, अपना स्वयं का राज्य नियोजन विभाग (कहीं-कहीं राज्य नियोजन बोर्ड/संस्थान के रूप में) संचालित करता है, जो योजनाओं के डिज़ाइन, प्रमुख कार्यक्रमों की निगरानी, जिला व ब्लॉक-स्तरीय नियोजन के समन्वय, तथा नीति-निर्माण हेतु आँकड़ा सहयोग के लिए उत्तरदायी है, और यह वित्त विभाग के साथ मिलकर काम करता है, न कि किसी केंद्र-निर्धारित पंचवर्षीय योजना के माध्यम से।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • GSDP राष्ट्रीय GDP का राज्य-स्तरीय समकक्ष है और इसे चालू कीमतों या स्थिर कीमतों पर मापा जा सकता है; प्रति व्यक्ति GSDP, GSDP को जनसंख्या से विभाजित कर प्राप्त होता है।
  • किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के तीन व्यापक क्षेत्र हैं — प्राथमिक (कृषि, खनन), द्वितीयक (विनिर्माण, निर्माण, उपयोगिताएँ), और तृतीयक (व्यापार, परिवहन, बैंकिंग जैसी सेवाएँ)।
  • राजस्थान के GSDP अनुमान राज्य के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) की साझा राष्ट्रीय पद्धति के अनुसार तैयार किए जाते हैं।
  • राज्य का बजट औपचारिक रूप से वार्षिक वित्तीय विवरण कहलाता है और 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष को कवर करता है।
  • राजस्थान सरकार का वित्त विभाग बजट तैयार करता है; वित्त मंत्री (या मुख्यमंत्री, यदि वित्त विभाग स्वयं संभालते हों) इसे विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं।
  • बजट के दो व्यापक घटक हैं — राजस्व बजट (आवर्ती प्राप्तियाँ/व्यय) और पूंजीगत बजट (परिसंपत्ति-सृजक व्यय व ऋण-संबंधी प्राप्तियाँ)।
  • संविधान के अनुच्छेद 202-207 राज्य बजट प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं — वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 202), भारित व्यय व अनुदान मांगें (अनुच्छेद 203), विनियोग विधेयक (अनुच्छेद 204), अनुपूरक/अतिरिक्त अनुदान (अनुच्छेद 205), लेखानुदान (अनुच्छेद 206), और धन विधेयक जैसे वित्तीय विधेयकों हेतु राज्यपाल की अनुशंसा (अनुच्छेद 207)।
  • राज्य की संचित निधि से धन विधानसभा द्वारा पारित विनियोग अधिनियम के अंतर्गत ही निकाला जा सकता है।
  • राजस्थान आर्थिक समीक्षा बजट के साथ या उससे ठीक पहले प्रस्तुत की जाती है और यह बीते वर्ष के आर्थिक प्रदर्शन का वर्णनात्मक पुनरावलोकन है, जो बजट के भविष्योन्मुखी आवंटन से भिन्न है।
  • 2015 में नीति आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर योजना आयोग का स्थान लिया; राजस्थान सहित राज्य अब योजना-पश्चात युग में योजनाओं के डिज़ाइन व निगरानी हेतु अपना स्वयं का नियोजन विभाग/बोर्ड बनाए रखते हैं।

परीक्षा के टिप्स

1. पहले GSDP की परिभाषा पक्की करें: कोई आँकड़ा याद करने से पहले यह पूरी तरह स्पष्ट कर लें कि GSDP "राज्य का GDP" है — एक वर्ष में राज्य के भीतर उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं का कुल मूल्य। इसी परिभाषा पर सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

2. गतिविधियों को क्षेत्र में वर्गीकृत करना सीखें, केवल नाम नहीं: अपरिचित गतिविधियों (डेयरी फार्मिंग, सीमेंट विनिर्माण, वेयरहाउसिंग, IT सेवाएँ) को प्राथमिक/द्वितीयक/तृतीयक में वर्गीकृत करने का अभ्यास करें — यह "गतिविधि वर्गीकृत करने" वाला कौशल क्षेत्रीय प्रतिशत आँकड़ों के साथ-साथ ज़रूरी है।

3. बजट की भूमिकाओं को बजट के दस्तावेज़ों से अलग रखें: "कौन तैयार करता है" (वित्त विभाग) को "कौन प्रस्तुत करता है" (वित्त मंत्री/मुख्यमंत्री) से और फिर "बजट में क्या होता है" (राजस्व + पूंजीगत बजट) से अलग-अलग रखें — प्रश्नों में इन्हें आपस में मिलाकर भ्रामक विकल्प (distractor) बनाए जा सकते हैं।

4. अनुच्छेद संख्याओं को उनके कार्य से जोड़ें: "अनुच्छेद 202-207" रटने के बजाय हर संख्या को एक कीवर्ड से जोड़ें: 202-विवरण, 203-भारित/अनुदान, 204-विनियोग, 205-अनुपूरक, 206-लेखानुदान, 207-वित्तीय विधेयक अनुशंसा।

5. बजट और आर्थिक समीक्षा को कभी न मिलाएँ: आर्थिक समीक्षा बीते समय का मूल्यांकन करती है (वर्णनात्मक); बजट भविष्य के लिए धन आवंटित करता है (निर्देशात्मक)। यदि किसी प्रश्न में "पिछले वर्ष के प्रदर्शन की समीक्षा" का उल्लेख हो, तो उसका आशय आर्थिक समीक्षा से है, बजट से नहीं।

🧠 स्मरण ट्रिक — तीन मंज़िल, तीन कदम

राज्य की अर्थव्यवस्था को तीन मंज़िला इमारत समझें — भूतल पर प्राथमिक क्षेत्र (मिट्टी और खान), बीच की मंज़िल पर द्वितीयक क्षेत्र (कारखाने), और सबसे ऊपर तृतीयक क्षेत्र (सेवाएँ); पूरी इमारत का कुल मूल्य ही GSDP है। बजट प्रक्रिया याद रखने के लिए कहें "विभाग तैयार करे, मंत्री प्रस्तुत करे, सदन पारित करे" — वित्त विभाग तैयार करता है, वित्त मंत्री विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं, और सदन विनियोग अधिनियम से पारित करता है। अनुच्छेद 202 से 207 के लिए क्रम से एक-एक कीवर्ड याद रखें — "विवरण, अनुदान, विनियोग, अनुपूरक, लेखा, अनुशंसा" — 202 से शुरू होकर।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — आर्थिक समीक्षा बनाम बजट

आर्थिक समीक्षा और बजट प्रायः आसपास के समय पर विधानसभा में प्रस्तुत होते हैं, इसलिए अभ्यर्थी इन्हें एक ही दस्तावेज़ समझने की भूल कर बैठते हैं — जबकि दोनों की भूमिका बिल्कुल विपरीत है। आर्थिक समीक्षा वर्णनात्मक (descriptive) और पश्चदर्शी है: यह बताता है कि बीते वर्ष अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों ने कैसा प्रदर्शन किया, बिना कोई भावी आवंटन तय किए। बजट निर्देशात्मक (prescriptive) और भविष्योन्मुखी है: यह तय करता है कि आने वाले वर्ष में सरकार कितना धन जुटाएगी और कहाँ खर्च करेगी। याद रखें — समीक्षा निदान करती है, बजट आवंटन करता है।

Primary sector block of the state economy Primary sector labelPrimary Secondary sector block of the state economy Secondary sector labelSecondary Tertiary sector block of the state economy Tertiary sector labelTertiary Caption explaining that all three sectors sum to GSDPSum of all three = GSDP Step one: Finance Department prepares the budget Step 1 labelFinance Dept prepares Flow arrow from preparation to presentation Arrow head pointing to presentation step Step two: Finance Minister presents budget in Vidhan Sabha Step 2 labelFM presents in Sabha Flow arrow from presentation to approval Arrow head pointing to approval step Step three: Vidhan Sabha passes the Appropriation Act Step 3 labelSabha passes Appropriation Act
📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. GSDP क्या मापता है और यह GDP से किस प्रकार संबंधित है?

✅ GSDP किसी निश्चित अवधि में राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं व सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है; यह राष्ट्रीय GDP का राज्य-स्तरीय समकक्ष है।

Q2. राज्य की अर्थव्यवस्था को परंपरागत रूप से किन तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है? हर एक का एक उदाहरण दें।

✅ प्राथमिक (जैसे कृषि या खनन), द्वितीयक (जैसे विनिर्माण या निर्माण कार्य), और तृतीयक (जैसे बैंकिंग या परिवहन सेवाएँ)।

Q3. राजस्थान का राज्य बजट कौन-सा विभाग तैयार करता है, और इसे विधानसभा में कौन प्रस्तुत करता है?

✅ वित्त विभाग बजट तैयार करता है; वित्त मंत्री (या मुख्यमंत्री, यदि वित्त विभाग स्वयं संभालते हों) इसे विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं।

Q4. संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य विधानमंडल में धन विधेयक जैसे वित्तीय विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राज्यपाल की अनुशंसा अनिवार्य करता है?

✅ अनुच्छेद 207।

Q5. राजस्थान आर्थिक समीक्षा अपने उद्देश्य में राज्य बजट से किस प्रकार भिन्न है?

✅ आर्थिक समीक्षा पिछले वर्ष अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का वर्णनात्मक पुनरावलोकन है, जबकि बजट आने वाले वर्ष में धन जुटाने और खर्च करने का निर्देशात्मक विवरण है।

सारांश

GSDP राजस्थान का राज्य-स्तरीय GDP है — एक वर्ष में राज्य की सीमाओं के भीतर उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं का कुल मूल्य — और इसका प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक क्षेत्रों में विभाजन अर्थव्यवस्था की संरचना व विकास की अवस्था को दर्शाता है। राज्य का बजट, अर्थात् वार्षिक वित्तीय विवरण, वित्त विभाग द्वारा तैयार किया जाता है और वित्त मंत्री (या मुख्यमंत्री) द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें राजस्व बजट व पूंजीगत बजट शामिल होते हैं, और यह संविधान के अनुच्छेद 202-207 में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित होता है। बजट के आसपास प्रस्तुत होने वाली आर्थिक समीक्षा भावी व्यय आवंटित करने के बजाय पिछले प्रदर्शन की समीक्षा करती है, और नीति आयोग-पश्चात युग में राजस्थान का अपना नियोजन विभाग/बोर्ड वित्त विभाग के साथ मिलकर विकास योजनाओं का डिज़ाइन व निगरानी करता है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए इन परिभाषाओं, भूमिकाओं और प्रक्रियात्मक क्रम में महारत हासिल करें और मुख्य आँकड़े नवीनतम राजस्थान आर्थिक समीक्षा से पढ़ें।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
  • •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
  • •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
  • •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
  • •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।
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  1. RAS 2024

    मुख्यमंत्री राजस्थान आर्थिक परिवर्तन सलाहकार परिषद (CMRETAC) के स्थान पर निम्नलिखित में से किसका गठन किया गया है ?

    1. (A) राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC)
    2. (B) राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (RITI)
    3. (C) राजस्थान सेंटर ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (R-CAT)
    4. (D) राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका)

    उत्तर: (B) राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (RITI)

  2. RAS 2023

    राजस्थान सरकार ने राजस्थान राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम किस वर्ष लागू किया?

    1. (A) 2008
    2. (B) 2005
    3. (C) 2003
    4. (D) 2001

    उत्तर: (B) 2005

  3. RAS 2021

    राजस्थान के बजट 2021-22 में विद्युत पर कुल व्यय के प्रतिशत में प्रस्तावित योजना व्यय कितना है?

    1. (A) 52.19%
    2. (B) 14.32%
    3. (C) 7.42%
    4. (D) 12.05%

    उत्तर: (B) 14.32%

  4. RAS 2021

    राजस्थान बजट 2021-22 के अनुसार, किस जिले में फिनटेक डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा?

    1. (A) जयपुर
    2. (B) सीकर
    3. (C) जोधपुर
    4. (D) अजमेर

    उत्तर: (C) जोधपुर

  5. RAS 2018

    हाल के वर्षों में राजस्थान बजट की राजस्व प्राप्तियों में निम्नलिखित में से कौन-सी मद अधिकतम राजस्व प्रदान करती है?

    1. (A) केन्द्रीय करों में हिस्सा
    2. (B) राज्य का कर राजस्व
    3. (C) गैर-कर राजस्व
    4. (D) संघ अनुदान

    उत्तर: (B) राज्य का कर राजस्व

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