21 अगस्त 2026 · 21 August 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए क्रीमी लेयर विरोध
Centre's Opposition to Creamy Layer for SC/STs
क्रीमी लेयर सिद्धांत अनुसूचित जाति/जनजाति पर लागू नहीं होना चाहिए क्योंकि उनका पिछड़ापन संरचनात्मक और ऐतिहासिक है।
मुख्य तथ्य
- •क्रीमी लेयर 1992 के इंद्र साहनी फैसले में ओबीसी के लिए स्थापित किया गया था।
- •दाविंदर सिंह 2024 न्यायपीठ ने अनुसूचित जाति/जनजाति में उप-वर्गीकरण की अनुमति दी।
- •अनुच्छेद 341(2) और 342(2) के तहत संसद को ही अनुसूचित जाति/जनजाति सूचियों में परिवर्तन का अधिकार है।
- •सामाजिक पूंजी की कमी आर्थिक गतिशीलता से दूर नहीं हो पाती।
केंद्र सरकार का तर्क है कि अनुसूचित जाति और जनजाति का पिछड़ापन शताब्दियों के ऐतिहासिक उत्पीड़न, अस्पृश्यता और सामाजिक कलंक से उत्पन्न है, न कि केवल आर्थिक पिछड़ापन से। यह मुद्दा 2024 के दाविंदर सिंह फैसले के बाद उठा, जिसमें अनुसूचित जाति/जनजाति कोटा के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी गई। सरकार का दावा है कि क्रीमी लेयर लागू करने से अनुच्छेद 341(2) और 342(2) का उल्लंघन होगा जो संसद को ही सूचियों में परिवर्तन का अधिकार देता है। उप-वर्गीकरण दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त हो सकता है जो सबसे हाशिये पर स्थित समूहों को लाभ सुनिश्चित करे।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर विरोध की संवैधानिक वजहें और उप-वर्गीकरण विकल्प।
📚 संबंधित स्थायी GK
अनुच्छेद 17 असंवैधानिकता को समाप्त करता है, जबकि अनुच्छेद 16(4A) अनुसूचित जाति/जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करता है।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert