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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

वेतन संहिता, 2019: चार पुराने वेतन कानूनों की जगह लागू नया ढांचा

4 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

वेतन संहिता 2019 ने चार वेतन कानूनों को समाहित किया और 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई।

क्या हुआ

मज़दूरी संहिता (Code of Wages), 2019 की चर्चा हुई। यह चार श्रम संहिताओं में से एक है, जो चार पुराने कानूनों — न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम 1948, मज़दूरी भुगतान अधिनियम 1936, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 व समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 — को समेकित करती है। इसका मुख्य प्रावधान — सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक न्यूनतम मज़दूरी, 'फ्लोर वेज' (राष्ट्रीय न्यूनतम), समय पर मज़दूरी भुगतान, व लिंग आधारित भेदभाव पर रोक (समान काम-समान वेतन)। यह श्रमिक कल्याण, औपचारिकीकरण व व्यापार सुगमता को संतुलित करती है। श्रम समवर्ती सूची का विषय है। नोडल — श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय।

मुख्य तथ्य

  1. 1मज़दूरी संहिता, 2019।
  2. 24 पुराने मज़दूरी कानूनों का समेकन।
  3. 3सार्वभौमिक न्यूनतम मज़दूरी; राष्ट्रीय फ्लोर वेज।
  4. 4समान काम-समान वेतन; समय पर भुगतान।
  5. 5चार श्रम संहिताओं में से एक।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

श्रम संहिताएं, न्यूनतम वेतन व वेतन संहिता राजव्यवस्था/अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: मज़दूरी संहिता 2019 — 4 कानूनों का समेकन। सार्वभौमिक न्यूनतम मज़दूरी; फ्लोर वेज। समान पारिश्रमिक। चार श्रम संहिताओं में से एक।

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