परिसीमन प्रक्रिया: लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व में कैसे होगा बदलाव
16 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
परिसीमन का अर्थ है लोकसभा और राज्य विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित करना, जो परिसीमन आयोग अधिनियम के तहत परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है। भारत में 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन हो चुका है। 42वें संविधान संशोधन (1976) ने लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 पर स्थिर कर दी और सीट आवंटन का आधार 2001 तक फ्रीज किया, जिसे बाद में 84वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा 2026 तक बढ़ाया गया। यह फ्रीज परिवार नियोजन में सफल राज्यों को दंडित होने से बचाने के लिए था। 2026 के बाद संवैधानिक रूप से नया परिसीमन अपेक्षित है, जो संभवतः आगामी जनगणना (2021 से विलंबित) पर आधारित होगा। मुख्य चिंता: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों ने प्रजनन दर नियंत्रित की है और उन्हें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों की तुलना में सीटें घटने का डर है। नई संसद भवन की 888 सांसदों की क्षमता से संकेत मिलता है कि सीटें 543 से अधिक हो सकती हैं। अनुच्छेद 82 प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों के पुनर्समायोजन का आदेश देता है।