ASI ने काकतीय-कालीन गोल्लाला गुडी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया
6 सितंबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम · सरकारी स्रोत से तथ्य मिलाए गए
याद रखें · एक पंक्ति में
पालमपेट (मुलुगु, तेलंगाना) का काकतीय त्रिकूटालय मंदिर गोल्लाला गुडी 31 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक बना।
क्या हुआ
काकतीय काल का यह मंदिर पालमपेट गाँव में यूनेस्को सूचीबद्ध रामप्पा मंदिर के पास स्थित है। यह त्रिकूटालय शैली का है, जिसमें पूर्वमुखी मंडप तीन गर्भगृहों से घिरा है। दीवारों के आलों में विष्णु, लक्ष्मी, गणेश और महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमाएँ हैं, जबकि शिखर-पट्टी और द्वारों पर जाली सहित हंसों की नक्काशीदार पंक्तियाँ इसकी खास पहचान हैं। सामने के दो अलग मंदिरों पर द्वारपालों की आकृतियाँ उकेरी गई हैं। अब यह स्मारक AMASR अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित होगा।
मुख्य तथ्य
- 1ASI अधिसूचना की तिथि: 31 अगस्त 2026
- 2स्थान: पालमपेट गाँव, मुलुगु ज़िला, तेलंगाना
- 3त्रिकूटालय: पूर्वमुखी मंडप और तीन गर्भगृह
- 4विशेषता: जाली सहित हंसों की नक्काशी, द्वारपाल आकृतियाँ
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रश्न गोल्लाला गुडी के ज़िले (मुलुगु), उसकी त्रिकूटालय शैली या उससे जुड़े राजवंश (काकतीय) पर आ सकता है।
स्थायी GK: पास का काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर, जिसका निर्माण 1213 ई. में राजा गणपति देव के सेनापति रेचर्ला रुद्र के समय शुरू हुआ, 25 जुलाई 2021 को भारत का 39वाँ विश्व धरोहर स्थल बना। AMASR अधिनियम की धारा 4 के तहत केंद्र किसी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने से पहले आपत्तियों के लिए दो माह का नोटिस देता है।
स्रोत: newsonair.gov.in (आधिकारिक)