हरियाणा न्यूनतम वेतन वृद्धि: विरोध के बीच श्रमिकों की और बढ़ोतरी की मांग
14 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
हरियाणा सरकार ने हाल ही में विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन संशोधित किया, लेकिन यह वृद्धि श्रम संघों को संतुष्ट करने में विफल रही। भारत में न्यूनतम वेतन 'न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948' द्वारा शासित है, जो राज्य सरकारों को समय-समय पर वेतन निर्धारित और संशोधित करने का आदेश देता है।
विवाद का केंद्र गणना का आधार है। 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (1957) ने सिफारिश की थी कि न्यूनतम वेतन में प्रति श्रमिक 2,700 किलो कैलोरी प्रतिदिन, परिवार के लिए 72 गज कपड़ा प्रतिवर्ष, सरकारी मानकों के अनुसार आवास किराया और शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए 20% अतिरिक्त राशि शामिल होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने 'रैप्टाकोस ब्रेट केस (1991)' में पांचवां घटक — बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा व्यय और वृद्धावस्था प्रावधान — जोड़ा।
श्रमिकों का तर्क है कि हरियाणा का संशोधित वेतन इन दशकों पुराने मानकों को भी पूरा नहीं करता। ट्रेड यूनियनें 7वें वेतन आयोग के मानकों के अनुरूप वेतन की मांग कर रही हैं। 'वेतन संहिता, 2019' — चार नई श्रम संहिताओं में से एक — न्यूनतम वेतन कवरेज को सार्वभौमिक बनाने और राष्ट्रीय फ्लोर वेज लागू करने का प्रयास करती है, लेकिन राज्यों द्वारा नियम अधिसूचित न होने के कारण इसका क्रियान्वयन लंबित है।