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अंतर्राष्ट्रीय

क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय ध्वजवाहक जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना फिर शुरू किया

18 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

क्या हुआ

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है और विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। प्रतिदिन वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% और विश्व की 30% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी जलडमरूमध्य से गुजरती है। ईरान-इजरायल संघर्ष और हूती हमलों के कारण उत्पन्न क्षेत्रीय तनाव के बाद भारतीय ध्वजवाहक जहाजों ने कच्चा तेल लेकर इस मार्ग से पुनः यात्रा शुरू की है। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% आवश्यकता आयात से पूरी करता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत प्रमुख स्रोत हैं — ये सभी देश निर्यात के लिए होर्मुज पर निर्भर हैं। इस जलडमरूमध्य की दीर्घकालिक नाकेबंदी भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है और घरेलू मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है। भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। RAS परीक्षा की दृष्टि से यह समाचार भारत की ऊर्जा नीति, समुद्री सुरक्षा, भारत-खाड़ी संबंध और भू-राजनीतिक प्रभावों से संबंधित है।

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