भारत-मर्कोसुर ने इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाण पत्र हेतु प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए
15 सितंबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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भारत-मर्कोसुर व्यापार संधि अब इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाण पत्रों को मान्यता देती है।
क्या हुआ
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उरुग्वे और पराग्वे के राजदूतों के साथ एक पहले अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जो 2009 से लागू भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार संधि के अनुच्छेद 16 और अनुबंध III (मूल नियम) में संशोधन करता है। यह प्रोटोकॉल इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाण पत्रों को कागजी प्रमाण पत्रों के समान कानूनी दर्जा देता है, जो भारत की ओर से लगभग 450 और मर्कोसुर की ओर से 452 टैरिफ लाइनों को कवर करता है। मर्कोसुर अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे से मिलकर बना दक्षिण अमेरिकी व्यापार गुट है, जिसमें कई सहयोगी सदस्य भी शामिल हैं। व्यापार दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण से सीमा शुल्क निकासी तेज़ होने और निर्यातकों की अनुपालन लागत घटने की उम्मीद है।
मुख्य तथ्य
- 12009 की भारत-मर्कोसुर पीटीए के अनुच्छेद 16 और अनुबंध III में संशोधन
- 2लगभग 450 (भारत) और 452 (मर्कोसुर) टैरिफ लाइनें शामिल
- 3मर्कोसुर में अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे, उरुग्वे शामिल
- 4वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षरित
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
भारत की व्यापार संधियां और क्षेत्रीय गुट (मर्कोसुर, आसियान आदि) अर्थव्यवस्था केंद्रित आरएएस प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार संधि 2009 से लागू है।