भारत ने सिंधु जल संधि पर PCA के निर्णय को अस्वीकार किया
18 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
IWT (1960) — पूर्वी नदियां भारत, पश्चिमी पाकिस्तान; किशनगंगा/रतले विवाद।
क्या हुआ
भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) से संबंधित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के निर्णय को अस्वीकार कर दिया। 1960 की सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत व पाकिस्तान के बीच हुई — पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज) भारत को व पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को आवंटित हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को 'स्थगित' (abeyance) रखा है। भारत PCA की समानांतर कार्यवाही को मान्यता नहीं देता, और संधि के विवाद-समाधान तंत्र पर अपनी स्थिति बनाए रखता है।
मुख्य तथ्य
- 1भारत ने IWT पर PCA के निर्णय को अस्वीकार किया।
- 2IWT — 1960; विश्व बैंक मध्यस्थ।
- 3पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज) — भारत।
- 4पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) — पाकिस्तान।
- 5पहलगाम हमले के बाद संधि 'स्थगित'।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
सिंधु जल संधि, नदियों का बंटवारा व PCA अंतरराष्ट्रीय/भूगोल में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: सिंधु जल संधि — 1960; विश्व बैंक मध्यस्थ। पूर्वी नदियाँ — भारत; पश्चिमी — पाकिस्तान। PCA — हेग (नीदरलैंड)। विवाद-समाधान — तटस्थ विशेषज्ञ व मध्यस्थता न्यायालय।