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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

अमेरिकी शुल्क के कारण भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात पाँच वर्ष के निम्नतम स्तर पर

16 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

क्या हुआ

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के आंकड़ों के अनुसार भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र पाँच वर्षों में सबसे कम निर्यात दर्ज कर रहा है। भारतीय आभूषणों के सबसे बड़े बाजार अमेरिका को निर्यात 45% घटकर 5.09 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट अमेरिका द्वारा पारस्परिक शुल्क लगाने और बाद में भारतीय वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने के कारण आई। इन संचयी शुल्कों ने कई महीनों तक निर्यात को बाधित किया, जिससे सूरत (गुजरात) और मुंबई जैसे प्रमुख केंद्रों के निर्यातक बुरी तरह प्रभावित हुए। रत्न एवं आभूषण क्षेत्र भारत के कुल माल निर्यात में लगभग 7-8% का योगदान देता है और 40 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा हीरा कटाई एवं पॉलिशिंग केंद्र है, जो विश्व के लगभग 90% कच्चे हीरों की प्रक्रिया करता है। GJEPC भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ताओं में शुल्क राहत के लिए प्रयासरत है। यह मुद्दा भारत की निर्यात नीति, व्यापार कूटनीति और वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत निर्यात संवर्धन परिषदों की भूमिका से संबंधित है।

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