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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

अंतर्देशीय जलमार्गों से आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण

4 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

IWT लागत ~₹0.25-0.30/टन-किमी (रेल ₹1, सड़क ₹1.5); लक्ष्य 2030 तक 5% मॉडल हिस्सा।

क्या हुआ

अंतर्देशीय जलमार्गों (inland waterways) के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने की चर्चा हुई। जल परिवहन सड़क व रेल की तुलना में सस्ता, ईंधन-कुशल व पर्यावरण-अनुकूल है। भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं (जैसे NW-1 गंगा, NW-2 ब्रह्मपुत्र), जिनका विकास भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) करता है। जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP) NW-1 को आधुनिक बनाती है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटती है, बंदरगाह जुड़ते हैं व पूर्वोत्तर/पड़ोसी देशों से व्यापार बढ़ता है।

मुख्य तथ्य

  1. 1अंतर्देशीय जलमार्गों से आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण।
  2. 2जल परिवहन — सस्ता, ईंधन-कुशल, पर्यावरण-अनुकूल।
  3. 3NW-1 गंगा; NW-2 ब्रह्मपुत्र; विकास IWAI द्वारा।
  4. 4जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP)।
  5. 5लॉजिस्टिक्स लागत में कमी; पूर्वोत्तर व्यापार।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

IWAI, राष्ट्रीय जलमार्ग व जल मार्ग विकास परियोजना अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: IWAI — अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (1986)। NW-1 — गंगा (प्रयागराज-हल्दिया); NW-2 — ब्रह्मपुत्र। जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP)। नोडल — पत्तन, पोत परिवहन व जलमार्ग मंत्रालय।

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