डिजिटल युग में न्यायिक मर्यादा
25 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
न्यायिक आचार — पुनर्कथन (1997), बैंगलोर सिद्धांत (2002)।
क्या हुआ
डिजिटल युग में न्यायिक मर्यादा (judicial decorum) की चर्चा हुई। सोशल मीडिया, अदालती कार्यवाही के लाइव-स्ट्रीमिंग व ऑनलाइन टिप्पणियों के युग में न्यायाधीशों, वकीलों व पक्षकारों के आचरण, गरिमा व संयम के प्रश्न महत्वपूर्ण हो गए हैं। न्यायिक मर्यादा का अर्थ है न्यायालय की गरिमा, निष्पक्षता व सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना — सोशल मीडिया पर अनुचित टिप्पणियाँ, कार्यवाही का विकृत प्रसार या न्यायालय की अवमानना इसे चुनौती देते हैं। साथ ही पारदर्शिता (खुली अदालत, लाइव-स्ट्रीमिंग — अनुच्छेद 21/19) व निजता/मर्यादा के बीच संतुलन आवश्यक है। SC ने इस पर दिशानिर्देश दिए हैं। यह न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व पारदर्शिता से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1डिजिटल युग में न्यायिक मर्यादा।
- 2सोशल मीडिया/लाइव-स्ट्रीमिंग के बीच आचरण के प्रश्न।
- 3न्यायालय की गरिमा, निष्पक्षता, सार्वजनिक विश्वास।
- 4पारदर्शिता बनाम निजता/मर्यादा का संतुलन।
- 5न्यायालय की अवमानना; SC दिशानिर्देश।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
न्यायपालिका, न्यायिक आचार-संहिता व प्रमुख सिद्धांत राजव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: न्यायिक मर्यादा — न्यायालय की गरिमा/निष्पक्षता। लाइव-स्ट्रीमिंग (खुली अदालत); सोशल मीडिया। न्यायालय की अवमानना। अनुच्छेद 19/21।