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राष्ट्रीय · पर्यावरण

माधव गाडगिल व WGEEP

10 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

WGEEP (2011) — माधव गाडगिल की अध्यक्षता; पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश।

क्या हुआ

माधव गाडगिल व पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) की चर्चा हुई (माधव गाडगिल का हाल ही में निधन हुआ)। प्रसिद्ध पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल की अध्यक्षता में WGEEP (2011) ने पश्चिमी घाटों — एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट व UNESCO धरोहर स्थल — के संरक्षण की सिफारिश की। रिपोर्ट ने पूरे पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित कर खनन, बड़े बांधों व प्रदूषणकारी उद्योगों पर अंकुश का सुझाव दिया। इसे 'बहुत कठोर' मानकर बाद में कस्तूरीरंगन समिति ने कम क्षेत्र (~37%) को ESA सुझाया। बहस — संरक्षण बनाम विकास/आजीविका। यह जैव विविधता, पर्यावरण शासन व सतत विकास से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1माधव गाडगिल व पश्चिमी घाट पैनल (WGEEP)।
  2. 2WGEEP (2011) — पश्चिमी घाट संरक्षण की सिफारिश।
  3. 3पश्चिमी घाट — जैव विविधता हॉटस्पॉट; UNESCO।
  4. 4पूरे घाट को ESA घोषित करने का सुझाव।
  5. 5कस्तूरीरंगन समिति — कम क्षेत्र (~37%) ESA।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

WGEEP, पश्चिमी घाट व पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र पर्यावरण में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: WGEEP (2011) — माधव गाडगिल। पश्चिमी घाट — जैव विविधता हॉटस्पॉट; UNESCO धरोहर। ESA। कस्तूरीरंगन समिति (~37%)।

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