सरकार ने ऑरेंज इकॉनमी हेतु 3 पहल शुरू कीं
25 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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ऑरेंज इकॉनमी (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) — बौद्धिक संपदा, रचनात्मकता व सांस्कृतिक पूंजी से मूल्य।
क्या हुआ
'ऑरेंज इकोनॉमी' (Orange Economy) हेतु 3 पहलों की चर्चा हुई। 'ऑरेंज इकोनॉमी' (रचनात्मक अर्थव्यवस्था / creative economy) में वे उद्योग आते हैं जो रचनात्मकता, संस्कृति, कला व बौद्धिक संपदा पर आधारित हैं — फ़िल्म, संगीत, डिज़ाइन, गेमिंग, एनिमेशन, फैशन, हस्तशिल्प, विज्ञापन, डिजिटल कंटेंट। यह रोज़गार-सृजन, सॉफ्ट पावर व निर्यात की बड़ी संभावना रखती है (विशेषकर युवाओं के लिए)। सरकार द्वारा 3 पहलें (आमतौर पर — रचनात्मक उद्योगों को कौशल, वित्तपोषण, मंच, IP-संरक्षण व बाज़ार-पहुँच देना) इस क्षेत्र को संस्थागत बढ़ावा देती हैं। यह 'WAVES' (वर्ल्ड ऑडियो विज़ुअल समिट) व भारत के सांस्कृतिक-रचनात्मक निर्यात से जुड़ता है। यह अर्थव्यवस्था व रचनात्मक उद्योग से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1ऑरेंज इकोनॉमी हेतु 3 सरकारी पहलें।
- 2ऑरेंज इकोनॉमी — रचनात्मक/सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था।
- 3फ़िल्म, संगीत, डिज़ाइन, गेमिंग, एनिमेशन।
- 4रोज़गार-सृजन, सॉफ्ट पावर, निर्यात।
- 5WAVES समिट; सांस्कृतिक-रचनात्मक निर्यात।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
ऑरेंज इकॉनमी, AVGC-XR व रचनात्मक अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: ऑरेंज इकोनॉमी — रचनात्मक अर्थव्यवस्था; फ़िल्म, संगीत, डिज़ाइन, गेमिंग, एनिमेशन। रोज़गार + सॉफ्ट पावर। WAVES समिट।