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18 अगस्त 2026 · 18 August 2026

निर्वाचन में काले धन को रोकने के सुझाए गए सुधार

Proposed Reforms to Curb Electoral Black Money

डिजिटल निधियन, दल व्यय सीमा, ECI को वित्तीय शक्तियां, और आंशिक राजकीय निधियन काले धन को नियंत्रित करने की कुंजी हैं।

मुख्य तथ्य

  • दिनेश गोस्वामी समिति (1990) - दलों को वस्तु के रूप में राजकीय सहायता की सिफारिश
  • इंद्रजीत गुप्ता समिति (1998) - निर्वाचनों का आंशिक राजकीय निधियन
  • विधि आयोग 170वीं रिपोर्ट (1999) - निर्वाचन कानून में व्यापक सुधार
  • विधि आयोग 255वीं रिपोर्ट (2015) - नकद-धुलाई की श्रृंखला पर ध्यान
निर्वाचन में काले धन को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता है। सबसे पहले, कानूनी ढांचे में दलों के कुल व्यय पर परिमेय सीमा लागू की जानी चाहिए। दूसरा, राजनीतिक दलों को दिया जाने वाला सभी दान (किसी भी राशि का) डिजिटल बैंकिंग माध्यम से अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि पूर्ण लेखापरीक्षा संभव हो। तीसरा, निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र वित्तीय प्रवर्तन विभाग के साथ सशक्त किया जाए और Financial Intelligence Unit (FIU-IND) तथा Central Board of Direct Taxes (CBDT) के डेटा को जोड़ा जाए। चौथा, Indrajit Gupta Committee (1998) की सिफारिश के अनुसार आंशिक राजकीय निधियन (लॉजिस्टिक सहायता, डिजिटल बुनियादी ढांचा) अपनाया जाए। अंत में, विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित किए जाएं।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

निर्वाचन सुधार समितियों (दिनेश गोस्वामी, इंद्रजीत गुप्ता, विधि आयोग) की सिफारिशें और उनका कार्यान्वयन।

📚 संबंधित स्थायी GK

भारत में निर्वाचन सुधार समितियां - दिनेश गोस्वामी (1990), वोहरा (1993), इंद्रजीत गुप्ता (1998)।

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