RBI के बैड लोन पर मास्टर निर्देश
28 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
NPA — 90 दिन से अधिक बकाया; नया उधारकर्ता-स्तरीय NPA वर्गीकरण; ECL ढांचे की ओर बदलाव।
क्या हुआ
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने फंसे हुए ऋणों (bad loans/NPA) पर मास्टर निर्देश जारी किए। गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) वह ऋण है जिसका मूलधन/ब्याज 90 दिनों से अधिक बकाया हो। मास्टर निर्देश बैंकों के लिए NPA की पहचान, वर्गीकरण, प्रावधानीकरण (provisioning) व समाधान के नियमों को एकीकृत व सुसंगत बनाते हैं। उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता व ऋण अनुशासन बढ़ाना है। NPA समाधान IBC, SARFAESI अधिनियम व ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के माध्यम से होता है।
मुख्य तथ्य
- 1RBI के फंसे ऋणों (NPA) पर मास्टर निर्देश।
- 2NPA — 90 दिन से अधिक बकाया ऋण।
- 3नियम — पहचान, वर्गीकरण, प्रावधानीकरण, समाधान।
- 4समाधान — IBC, SARFAESI 2002, DRT।
- 5उद्देश्य — पारदर्शिता व वित्तीय स्थिरता।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
NPA, अपेक्षित ऋण हानि (ECL) ढांचा व बैड बैंक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: NPA — 90 दिन से अधिक बकाया ऋण। प्रावधानीकरण — संभावित हानि हेतु धन अलग रखना। समाधान — IBC, SARFAESI अधिनियम 2002, DRT। RBI — बैंकिंग नियामक।